Sunday, 31 May 2015
मनपा विशेष कार्य अधिकारी/ सलाहकार की सेवा 1 जून 2015 से खत्म
मुंबई महानगरपालिका के विभिन्न विभागों में सेवानिवृत्ती के बाद कॉन्ट्रैक्ट पर विशेष कार्य अधिकारी/ सलाहकार इन पदों पर गत 5 वर्ष में 40 नियुक्ती कर मनपा ने करीब 1.70 करोड़ रुपए खर्च करने का मामला आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली द्वारा उजागर करते ही मनपा आयुक्त अजोय मेहता ने विशेष कार्य अधिकारी/ सलाहकार की सेवा 1 जून 2015 से खत्म करने का आदेश जारी किया है।
आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने दिनांक 1 जनवरी 2010 से 28 फरवरी 2015 इन 5 वर्षो में नियुक्त किए गए 40 विशेष कार्य अधिकारी/ सलाहकार का मामला उजागर किया था। मनपा ने करीब 1.70 करोड़ खर्च किए थे। अनिल गलगली की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मनपा आयुक्त अजोय मेहता के आदेश से दिनांक 27 मई 2015 को सर्कुलर जारी कर 1 जून 2015 से विशेष कार्य अधिकारी/ सलाहकार की सेवा खत्म करने की सूचना जारी हुई है। इस आदेश में स्पष्ट किया है कि आयुक्त की सीधी मंजूरी लेकर इसतरह की नियुक्तियां हुई होगी तब भी उन नियुक्तियों को खत्म करना है। आगे इसतरह की नियुक्तियों को लेकर किसी भी तरह का नया प्रस्ताव पेश न करने की ताकीद देते हुए 1 जून 2015 के बाद भी विशेष कार्य अधिकारी/ सलाहकार की नियुक्तियां रद्द न कर उसे शुरु रखनेपर उसकी जिम्मेदारी उस विभाग की मुखिया तथा सहायक आयुक्त की होगी। मनपा आयुक्त अजोय मेहता का आभार मानते हुए अनिल गलगली ने कहा कि इससे कार्यरत अधिकारियों का मनोबल बढ़ेगा क्योंकि सेवानिवृत्ती के बाद भी विशेष कार्य अधिकारी/ सलाहकार के नाम पर काम करनेवालों से वर्तमान अधिकारी और कर्मचारियों का मनोबल टूटते जा रहा था।
# टॉप 10 लखपती
मनपा की जान पर करीब 40 अधिकारियों का गत 5 वर्ष में ठीकठाक भला हुआ हैं। न.ह.कुसनुर को 29 लाख 50 हजार, शि.सं.पालव को 13 लाख 10 हजार, स्नेहा खांडेकर को 10 लाख 47 हजार, प्र.वि.कुलकर्णी को 9 लाख 87 हजार, ना.भि. आचरेकर को 9 लाख 50 हजार, एस.डी.खंदारे को 9 लाख, शशिकांत शिंदे को 7 लाख 20 हजार, गोविंद राठोड को 6 लाख, उदय माडे को 5 लाख 71 हजार और बाबासाहेब पवार को 5 लाख 37 हजार 880 रुपए दिए गए है।
# नियम को तोड़ा गया था
उसवक्त के आयुक्त ने सरकार की किसी भी तरह की अनुमति लिए बिना पुरे 40 अधिकारियों की अच्छी व्यवस्था की है। इस मामले में मनपा आयुक्त कार्यालय ने सरकार की अनुमति न लेने की बात को स्वीकारते हुए मनपा के सर्कुलर का आधार लिया है। डॉ जगन्नाथ ढोणे बनाम महाराष्ट्र सरकार इस मुंबई हायकोर्ट के एक आदेश के बाद सरकार ने दिनांक 14 जनवारी 2010 को आदेश जारी कर विशिष्ट परिस्थिती में ही इसतरह की नियुक्ती करते वक्त सरकार की अनुमति लेने की शर्त रखी हैं।गत सरकार ने मुख्य सूचना आयुक्त रत्नाकर गायकवाड को भी झटका देते हुए राज्य सूचना आयोग में कॉन्ट्रेक्ट पर नियुक्त किए गए खोब्रागडे नामक 68 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारी की घरवापसी की थी। अनिल गलगली ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मुख्य सचिव स्वाधीन क्षत्रिय और मनपा आयुक्त अजोय मेहता के पास शिकायत करते ही मनपा आयुक्त ने उक्त कारवाई की है।
पालिका विशेष कार्य अधिकारी/ सल्लागार सेवा 1 जून 2015 पासून येणार संपुष्टात
मुंबई महानगरपालिकेच्या विविध खात्यात सेवानिवृत्तीनंतर करार पद्धतीवर विशेष कार्य अधिकारी/ सल्लागार या पदावर गेल्या 5 वर्षात 40 नियुक्त्या झाल्या असून यावर पालिकेने तब्बल 1.70 कोटी रुपये खर्च केल्याची माहिती आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी उघडकीस आणताच पालिका आयुक्त अजोय मेहता यांनी विशेष कार्य अधिकारी/ सल्लागार सेवा 1 जून 2015 पासून संपुष्टात आणण्याचे आदेश जारी केले आहेत.
आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी दिनांक 1 जानेवारी 2010 ते 28 फेब्रुवारी 2015 या 5 वर्षात नियुक्त झालेल्या 40 विशेष कार्य अधिकारी/ सल्लागार प्रकरण बाहेर आणले होते. पालिकेने जवळपास 1.70 कोटी खर्च केले. अनिल गलगली यांच्या तक्रारीची गंभीर दखल घेत पालिका आयुक्त अजोय मेहता यांच्या आदेशाने दिनांक 27 मे 2015 रोजी परिपत्रक काढत विशेष कार्य अधिकारी/ सल्लागार यांच्या सेवा दिनांक 1 जून 2015 पासून संपुष्टात आणण्याबाबत सूचना जारी झाल्या आहेत. यामध्ये स्पष्ट केले आहे की जरी आयुक्तांची थेट मंजूरी प्राप्त करुन घेऊन नियुक्ती केलेली असल्यास , सदर नियुक्त्या देखील संपुष्टात आणावयाच्या आहेत. यापुढे अश्या नियुक्त्या बाबत नवीन प्रकरणे सादर न करण्याची सूचना करत दिनांक 1 जून 2015 नंतर विशेष कार्य अधिकारी/ सल्लागार यांच्या नियुक्त्या रद्द न होता चालू राहिल्यास, त्यांची जबाबदारी संबंधित खाते प्रमुख/ सहाय्यक आयुक्त यांची राहिल. आयुक्त अजोय मेहता यांचे आभार मानत अनिल गलगली यांनी यामुळे कार्यरत अधिकारी यांचे मनोबल उंचावेल, अशी आशा व्यक्त केली कारण सेवा निवृत्तिनंतर विशेष कार्य अधिकारी/ सल्लागार या नावावर काम करणा-यांमुळे सेवेतील अधिकारी-कर्मचा-यांचे खच्चीकरण होत होते.
# टॉप 10 लखपती
पालिकेच्या जीवावर जवळपास 40 अधिका-यांचे गेल्या 5 वर्षात चांगलेच भले झाले आहे. न.ह.कुसनुर यांस 29 लाख 50 हजार, शि.सं.पालव यांस 13 लाख 10 हजार, स्नेहा खांडेकर यांस 10 लाख 47 हजार, प्र.वि.कुलकर्णी यांस 9 लाख 87 हजार, ना.भि. आचरेकर यांस 9 लाख 50 हजार, एस.डी.खंदारे यांस 9 लाख, शशिकांत शिंदे यांस 7 लाख 20 हजार, गोविंद राठोड यांस 6 लाख, उदय माडे यांस 5 लाख 71 हजार आणि बाबासाहेब पवार यांस 5 लाख 37 हजार 880 रुपये देण्यात आले आहे.
# नियम धाब्यावर बसविला होता
त्यावेळेच्या पालिका आयुक्तांनी शासनाची कोणतीही परवानगी न घेता चक्क 40 अधिका-यांची चांगलीच सोय केली. याबाबत पालिका आयुक्त कार्यालयाने शासनाची परवानगी न घेण्याची बाब कबूल करत पालिकेच्या परिपत्रकांचा आधार घेतला आहे. डॉ जगन्नाथ ढोणे बनाम महाराष्ट्र सरकार या मुंबई हायकोर्टातील एका आदेशानंतर शासनाने दिनांक 14 जानेवारी 2010 रोजी आदेश जारी करत विशिष्ट परिस्थितीत अश्या नियुक्त्या करताना शासनाची पूर्व परवानगी घेण्याची अट घातली होती. मागील सरकारने मुख्य माहिती आयुक्त रत्नाकर गायकवाड यांनाही दणका देत राज्य माहिती आयोगात अश्या प्रकारे कंत्राटी पद्धतीवर नियुक्त केलेल्या खोब्रागडे नामक 68 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारांस घरी पाठविले होते. अनिल गलगली यांनी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मुख्य सचिव स्वाधीन क्षत्रिय आणि पालिका आयुक्त अजेय मेहता यांस तक्रार केल्यानंतर सदर कारवाई करण्यात आली आहे.
BMC OSD/ Consultant appointment discontinued from 1 June 2015
After a shocking revelation made by RTI Activist Anil Galgali, In the various offices and departments of the Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC), as many as 40 Officers on Special Duty (OSD) as well as Consultants have been appointed n Contractual Basis in the last 5 years, and a whopping sum of Rs. 1.70 crores have been spent on them as fees for their services. Bmc Commissioner Ajoy Metha has decided to discontinued OSD /Consultant Services from 1 June 2015.
RTI Activists Anil Galgali had sought information from the BMC Commissioner office of such appointments of such consultants and OSDs. BMC provided Anil Galgali with a list of 40 officers who have been deputed and retained by the BMC from 1st January 2010 till the 28th February, 2015. . In all, BMC has spurlged a whopping 1.70 crores for taking care of these Retired Employees in these 5 years. After Anil Galgali expose this malpractice and demand to review there work, Bmc Commissioner Ajoy Mehta issue a circular Dated 27 May 2015 to discontinued all OSD/ Consultant from 1 June 2015. The circular clearly stated that if any one appointment sanction by even bmc Commissioner, also be discontinued. Circular strictly instructed that in future no new proposal should not submit and if any OSD / Consultant without discontinued found working then its was responsibility of Head of the Department and Assistant Municipal Commissioner. Anil Galgali who follow-up OSD/ Consultant issue with Govt and Bmc level, say thanks to Ajoy Mehta for his bold decision. Galgali stated that its was help to increase self confidence in other staff who was neglected promotion and other responsibility by appointment this retired staff as a OSD /Consultant
# TOP 10 Lakhpatis ...Thank you Commissioner!
Nearly 40 Officers have made merry in the last 5 years, thanks to special efforts taken by the then BMC commissioner. The Commissioner did not take the government in confidence, had it done that, it would have been a cakewalk as it is seen, claim sources. The monies earned by these OSDs cum Consultants will definitely raise some eyebrows. NH Kusoor 29.50 lakhs, SS Palav 13.10 lakhs, Sneha Khandekar 10.47 lakhs, PV Kulkarni 9.87 lakhs, SD Khandare 9 lakhs, Shashikant Shinde 7.20 lakhs, Govind Rathod 6 lakhs, Uday Mande 5.71 lakhs and Babasaheb Pawar has managed to earn 5.37 lakhs.
# All rules were flouted!!!
The BMC Commissioner has not sought any permission from the Government, and did make sure that these 40 officers make merry. The worst is Commissioners office has agreed to not take any permission, but has taken support of various Notices and Orders to ensure these officers are on board, in the RTI. In a special order passed by the Court in the Dr jagganath Dhone v/s Government of Maharashtra, on the 14th January, 2010, the Court had directed to make such appointments but only after getting the necessary permission from the Government. The earlier Government on learning such Contractual appointments had sent home An Officer named Khobragade aged 68, who was appointment by now CIC Ratnakar Gaikwad then. After Anil Galgali follow up and Complaint to CM Devendra Fadnavis along with Chief Secretary Swadhin Kshatriya and BMC chief Ajoy Mehta, Mr Mehta quickly took decision and discontinued all type of OSD/ Consultant service from Bmc who was enjoy after retirement.
Saturday, 30 May 2015
मुंबई मेट्रो की सुरक्षा पर एमएमआरडीए सालाना करती है 28.14 करोड़ का खर्च, प्रॉफिट कमाती है अंबानी की मुंबई मेट्रो कंपनी
पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप योजना के तहत बनकर दौड़नेवाली मुंबई मेट्रो ने मनमानी तरीके से किराया बढ़ाकर मुंबईकरों की कमर तोड़ते हुए सरकार को कोर्ट में जाने के लिए विवश किया है। मनमानी तरीके से किराया बढ़ाकर प्रॉफिट कमानेवाली अनिल अंबानी की मुंबई मेट्रो वन कंपनी पर मेहरबानी कर मुंबई मेट्रो की पुरी सुरक्षा उठानेवाली एमएमआरडीए प्रशासन आज भी सालाना 28.14 करोड़ का खर्च करने की जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को प्राप्त हुई है।
आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने एमएमआरडीए प्रशासन से मुंबई मेट्रो की सुरक्षा पर किए जानेवाले खर्च की जानकारी मांगी थी। एमएमआरडीए प्रशासन ने अनिल गलगली को जानकारी दी कि कुल सालाना सुरक्षा अग्रीमेंट खर्च 21.77 करोड़ ( रु.4.27 करोड़ जमा करनेवाली सुरक्षा रकम को छोड़कर+ 1 महीने की एडवांस रकम) के अलावा स्नीफर डॉग्स का अब तक का संभावित खर्च रु. 28.80 लाख इतना हैं। ये सब रकम 28 करोड़ 13 लाख 80 हजार इतनी होती हैं। एमएमआरडीए प्रशासन ने अब तक अप्रैल 2014 से जनवरी 2015 इन 10 महीनों में महाराष्ट्र स्टेट सिक्यूरिटी कॉरपोरशन को 8 करोड़ 69 लाख 66 हजार 64 रुपए अदा किया है। मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड इस कंपनी को हर महीने रु.3.20 लाख के हिसाब से 20 महीने में 32 लाख दिया है।
मुंबई मेट्रो को सुरक्षा देने का फैसला 22 अक्टूबर 2010 को मुख्य सचिव और मुंबई पुलिस के साथ हुई बैठक में लिया गया और एमएमआरडीए प्रशासन ने उसपर मुहर लगाई है। मेट्रो कंपनी ने उनके जरिए तैनात किए गए प्राइवेट सुरक्षा व्यवस्था द्वारा स्थिती पर नियंत्रण लाने की बात रखी गई थी। मुंबई पुलिस ने मेट्रो और मोनोरेल की महत्ता और सॉफ्ट टार्गेट होने की आशंका जताते हुए सीआयएसएफ जैसे प्रशिक्षित एजेंसी पर विश्वास रखा। इसके चलते एमएमआरडीए प्रशासन को अब सालाना करोड़ों रुपए मुंबई मेट्रो की सुरक्षा पर खर्च करने की मजबूरी आन पड़ी हुई हैं। इतना पैसा खर्च करने के बाद भी मुंबई मेट्रो कंपनी एमएमआरडीए की रत्ती भर भी सुनती नही है और मेट्रो प्रोजेक्ट ये प्राइवेट संपत्ति होने की गुमान में बर्ताव कर रही हैं। ऐसी टिपण्णी कर अनिल गलगली ने ये खर्चा मुंबई मेट्रो कंपनी द्वारा करने की मांग की है। क्योंकि इस प्रोजेक्ट से एमएमआरडीए प्रशासन को एक छद्दम दमडी की कमाई नही हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मुख्य सचिव स्वाधीन क्षत्रिय और एमएमआरडीए आयुक्त यूपीएस मदान को लिखे हुए पत्र में मांग की है कि सुरक्षा खर्च मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट कंपनी से वसूल करे और भविष्य में सुरक्षा की जिम्मेदारी एमएमआरडीए प्रशासन के बजाय प्रॉफिट कमानेवाली मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट कंपनी पर निश्चित करे।
मुंबई मेट्रोच्या सुरक्षेवर एमएमआरडीए करते वार्षिक 28.14 कोटीचा खर्च, नफा कमविते अंबानीची मुंबई मेट्रो कंपनी
सार्वजनिक खाजगी भागीदारी तत्वावर बांधून धावणारी मुंबई मेट्रोने अन्यायकारक भाडेवाढ करत मुंबईकरांचे कंबरडे मोडताना सरकारला कोर्टात जाण्यास बाध्य केले. मनमानी भाडे वाढवित नफा कमविणा-या अनिल अंबानीच्या मुंबई मेट्रो वन कंपनी वर मेहरबानी दाखवित संपूर्ण मुंबई मेट्रोच्या सुरक्षेवर एमएमआरडीए प्रशासन आजही वर्षाला 28.14 कोटीचा खर्च करत असल्याची धक्कादायक माहिती आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस प्राप्त झाली आहे.
आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी एमएमआरडीए प्रशासनाकडे मुंबई मेट्रोच्या सुरक्षेवर केलेल्या खर्चाची माहिती मागितली होती. एमएमआरडीए प्रशासनाने अनिल गलगली यांस कळविले की एकुण वार्षिक सुरक्षा करार खर्च 21.77 कोटी ( रु.4.27 कोटी जमा करायची सुरक्षा रक्कम वगळून+ 1महिन्याची आगाऊ रक्कम) तसेच स्नीफर डॉग्स चा आतापर्यन्तचा अंदाजित खर्च रु. 28.80 लाख इतका आहे. ही सर्व रक्कम 28 कोटी 13 लाख 80 हजार इतकी होते. एमएमआरडीए प्रशासनाने आतापर्यंत एप्रिल 2014 ते जानेवारी 2015 या 10 महिन्यात महाराष्ट्र स्टेट सिक्यूरिटी कॉरपोरशनला 8 कोटी 69 लाख 66 हजार 64 रुपये अदा केले आहे. मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड या कंपनीला दरमहा रु.3.20 लाख याप्रमाणे 32 लाख दिले आहे.
मुंबई मेट्रोस सुरक्षा देण्याचा निर्णय 22 ऑक्टोबर 2010 रोजी मुख्य सचिव आणि मुंबई पोलीस यांच्या सोबत झालेल्या बैठकीत घेण्यात आला होता आणि एमएमआरडीए प्रशासनाने त्याबाबतीत निर्णय घेतला. मेट्रो कंपनीने त्यांच्यामार्फत तैनात खाजगी सुरक्षा व्यवस्थेद्वारे स्थितीवर नियंत्रण करण्याचे सांगण्यात आले. मुंबई पोलिसांनी मेट्रो आणि मोनोरेल ची महत्ता आणि सॉफ्ट टार्गेट असण्याची भीती व्यक्त करत सीआयएसएफ सारख्या प्रशिक्षित एजेंसीवर विश्वास ठेवला. यामुळे एमएमआरडीए प्रशासनास आता वार्षिक कोटयावधी रुपये मुंबई मेट्रोच्या सुरक्षेवर खर्च करण्याची पाळी आली आहे. इतके पैसे खर्च करुनही मुंबई मेट्रो कंपनी एमएमआरडीएला जुमानत नसून मेट्रो प्रकल्प ही खाजगी संपत्ति असल्याचा
तो-यात वागत आहे, अशी टीका करत अनिल गलगली यांनी सदर खर्च मुंबई मेट्रो कंपनी मार्फत करण्याची मागणी केली आहे कारण या प्रकल्पातुन एमएमआरडीए प्रशासनास एक नवीन दमडीची कमाई नाही आहे.
आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मुख्य सचिव स्वाधीन क्षत्रिय आणि एमएमआरडीए आयुक्त यूपीएस मदान यांस लिहिलेल्या पत्रात मागणी केली आहे की सुरक्षा खर्च मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट कंपनीकडून वसूल करावा आणि भविष्यात सुरक्षेची जबाबदारी एमएमआरडीए प्रशासनाने घेण्याऐवजी ती नफा कमविणा-या मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट कंपनीची निश्चित करावी.
Mumbai Metro security cost borne by MMRDA and profit cornered by Ambani's MMOPL
Mumbai Metro One which was constructed on a PPP Platform, and has inflicted burden on the common Mumbaikars by unilateral increase in its fares, forcing the Govt to approach the Courts. Though the unprecedented and unilateral increase of the fares by Ambani controlled MMOPL may be earning its profits, the actual cost of the security for its smooth run is being paid for by the MMRDA . In a shocking revelation it has now come to knowledge through a reply to a RTI query by Activist Anil Galgali that in the past one year the MMRDA has spent almost Rs 28.14 crores on the security of the Metro.
RTI Activist Anil Galgali had filed an RTI query seeking details of expenditure incurred on the security of Mumbai Metro One. MMRDA administration, in reply to the query informed Anil Galgali that, a total annual security agreement cost was Rs 21.77 crores, also Rs 4.27 was paid as security deposit, as well as one month advance charges, also an expected cost of Rs 28.80 Lakhs was fixed for provision of Sniffer Dogs totalling Rs 28 crores 13 lakhs 80 thousand. From April 2014 to January 2015, MMRDA has made a payment of Rs 8 crores 69 lakhs 66 thousand to the Maharashtra State Security Corporation in past 10 months. MMRDA has also paid Rs 32 Lakhs @ of Rs 3.20 lakhs per month for the past 10 months on account of Sniffer Dogs to the MMOPL against its own estimated cost of Rs 28.80 Lakhs for 12 months for the dogs.
The decision of the security was taken on 22nd October 2010 in a meeting held along with the Chief Secretary and the Mumbai Police. The Metro company had expressed its opinion of provision of security through Private companies, where as the Police dept cited that the Metro as well as Mono Rails were soft targets for anti social elements and hence the security be provided to trained govt security agencies like CISF etc. Because of this the responsibility of security came on MMRDA, which has to now spend crores of public funds on security of a private partnership venture, through which it has yet not earned a single rupee and is operated by the Reliance group as its own private venture and has not even bothered to listen to MMRDA on important public issues, alleged Anil Galgali. Galgali further stated that, this expenses should be solely borne by the MMOPL as MMRDA has not earned any thing out of this project, neighter is there any chance for it.
In a letter addressed to CM Devendra Fadnavis, Chief Secretary Swadheen Kshatriya and MMRDA Commissioner UPS Madan, RTI Activist Anil Galgali has demanded that the expenses incurred on security be recovered from MMOPL, also the responsibility of arranging and paying for the cost of security be fixed on the profit making MMOPL instead of MMRDA.
Tuesday, 26 May 2015
5 महिने में मंत्री और सचिव ने डकारा 4.66 लाख का बिसलेरी पानी
मंत्रालय के सभी मंत्री, राज्यमंत्री, सचिव और अन्य लोगों ने 5 महीने में 4.66 लाख का बिसलेरी पानी डकारने की जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को महाराष्ट्र सरकार ने दी है। मंत्री और सचिव द्वारा पीये हुए 24 हजार 648 लीटर बिसलेरी पानी के लिए सरकार ने लाखों रुपए पानी की तरह बहाए है जबकि इतने ही पानी के लिए मनपा सिर्फ 171 रुपये लेती है।
आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने महाराष्ट्र सरकार से मंत्रालय में इस्तेमाल होनेवाले बिसलेरी पानी के लिए अदा किए गए कुल शुल्क और कुल लीटर पानी की जानकारी मांगी थी। मंत्रालय कैंटीन के महा प्रबंधक और जन सूचना अधिकारी ज. म. सालवी ने अनिल गलगली को बताया कि दिसंबर 2014 से अप्रैल 2015 इन 5 महीनों में सप्लाई किए गए बिसलेरी बॉटल की संख्या 83 हजार 628 है जिसकी कुल किंमत 4 लाख 66 हजार 19 रुपये और 88 पैसे इतनी है। इसमें सर्वाधिक इस्तेमाल किए गए 250 मिली बिसलेरी बॉटल की संख्या 68 हजार 976 है जिसपर 3 लाख 67 हजार 642 रुपए और 08 पैसे खर्च किया गया है वहीँ 14 हजार 496 बिसलेरी बॉटल ये 500 मिली की थी जिसपर सरकार ने 96 हजार 688 रुपए और 32 पैसे खर्च किया है। 1 लीटर की बिसलेरी बॉटल ये सिर्फ 156 इस्तेमाल करते हुए उसकी किंमत 1 हजार 689 रुपए और 48 पैसे अदा की गई है। मंत्रालय में अक्वागार्ड की उत्तम सुविधा भी उपलब्ध है।
अनिल गलगली ने मंत्रालय में कुल इस्तेमाल होनेवाला पानी और बिल की रकम इस जानकारी के अलावा रोजाना आपूर्ति होनेवाला पानी के अलावा बिसलेरी पानी का इस्तेमाल करने के लिए सरकार ने जारी किए हुए आदेश की कॉपी मांगने पर उन्हें अब तक सरकार ने जानकारी नही दी है। आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली के अनुसार बिसलेरी पानी पर लाखों रुपए सरकार भले ही उड़ा रही है लेकिन इतना ही पानी सिर्फ 171 रुपए में मनपा प्रशासन द्वारा मुंबईकरों को मुहैय्या कराती हैं। मनपा द्वारा 1 हजार लीटर पानी पर 4.32 रुपये और सीवरेज शुल्क (4.32+ 2.592=6.912 रुपए ) ऐसा चार्ज वसूलती है।
सूखाग्रस्त और दूर दराज गांवों में जनता पानी की बूंद बूंद के लिए तरसती होते हुए मंत्रालय में जनता के लिए कामकाज़ चलानेवाले लाखों रुपए बिसलेरी पानी पर उड़ाना नैतिकता के लिहाज से योग्य न होने की टिप्पणी करते हुए अनिल गलगली ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र भेजकर मांग की है कि मनपा का पानी क्वालिटीयुक्त और साफ़ होने से उसका इस्तेमाल करने का आदेश दे। इसके बावजूद अगर किसी मंत्री या सचिव को बिसलेरी पानी का इस्तेमाल करना ही है तो वह उसे खुद ही अपनी जेब से करे।
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