Thursday, 22 October 2026

सांताक्रुज में भव्य दशहरा महोत्सव ने जीता दिल!

सांताक्रुज में भव्य दशहरा महोत्सव ने जीता दिल!

सांताक्रुज पश्चिम स्थित धर्मवीर संभाजी मैदान में 20 अक्टूबर की शाम उत्तर भारतीय विश्व महासंघ के 32वें दशहरा महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ। विशालकाय रावण के पुतले का दहन होते ही पूरा मैदान ‘जय श्रीराम’ और ‘जय सियाराम’ के जयकारों से गूंज उठा। महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मंत्री आशीष शेलार की उपस्थिति, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की सहभागिता, भोजपुरी गीतों की मधुर प्रस्तुतियों और हजारों लोगों के उत्साह ने इस आयोजन को यादगार बना दिया। महोत्सव में महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत और उत्तर भारतीय परंपराओं का सुंदर संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम में महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मंत्री आशीष शेलार ने प्रमुख रूप से शिरकत की और उपस्थित लोगों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर भाजपा के मुंबई महासचिव आचार्य पवन त्रिपाठी, भाजपा प्रवक्ता संजय ठाकुर, आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली, मुंबई भाजपा प्रवक्ता उदय प्रताप सिंह, जितेंद्र ठाकुर, आसिफ भामला, मजदूर नेता केके तिवारी, भाजपा उत्तर भारतीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रमोद मिश्रा, एडवोकेट मुकेश पांडे, सामाजिक कार्यकर्ता देवाशीष मर्क, हमारा प्रयास फाउंडेशन के रामबख्श सिंह, कॉंग्रेस नेता रत्नेश सिंह, रमाशंकर सिंह सहित कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। संस्था की ओर से अतिथियों का सम्मान किया गया।

गौरतलब है कि उत्तर भारतीय विश्व महासंघ एक गैर-राजनीतिक संगठन के रूप में कार्य करता है। ऐसे में विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि से जुड़े लोगों की उपस्थिति ने सामाजिक समरसता और आपसी सौहार्द का संदेश दिया।

दशहरा महोत्सव में धार्मिक आस्था के साथ लोक संस्कृति और मनोरंजन का भी शानदार संगम देखने को मिला। उत्तर भारतीय लोक गायक राकेश तिवारी और उनकी टीम ने भोजपुरी गीतों की प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण मराठी मूल के गायक प्रकाश तिर्लोटकर की प्रस्तुति रही। उन्होंने भोजपुरी अंदाज में काशी और बाबा विश्वनाथ की महिमा का बखान करने वाला भजन प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

उनकी प्रस्तुति ने भाषाई और सांस्कृतिक एकता की खूबसूरत मिसाल पेश की। महाराष्ट्र की मराठी संस्कृति और उत्तर भारतीय समाज की भोजपुरी परंपरा के बीच संगीत और भक्ति ने एक सेतु का काम किया। इसने संदेश दिया कि भाषा भले ही अलग हो, लेकिन आस्था, संगीत और संस्कृति लोगों को एक सूत्र में बांधने की ताकत रखते हैं।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए उत्तर भारतीय विश्व महासंघ के अध्यक्ष योगेश पांडे, महासचिव संजय मिश्रा और उनकी पूरी टीम ने करीब एक महीने पहले से तैयारियां शुरू कर दी थीं। आयोजन के लिए बीएमसी, पुलिस विभाग और दमकल विभाग से आवश्यक अनुमतियां ली गई थीं।

कार्यक्रम का संचालन महासचिव संजय मिश्रा ने किया। उन्होंने आयोजन में सहयोग के लिए बीएमसी के एच पश्चिम विभाग, सांताक्रुज पुलिस स्टेशन और मुख्य अग्निशमन अधिकारी सहित संबंधित विभागों के प्रति आभार व्यक्त किया। महोत्सव की सफलता आयोजन समिति, प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण बनी।

कार्यक्रम का सबसे प्रतीक्षित क्षण रावण दहन रहा।विशालकाय रावण के पुतले को देखने के लिए मैदान में बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। कार्यक्रम के समापन पर भाजपा नेता अनिल चंदानी और सामाजिक कार्यकर्ता देवाशीष मर्क ने रावण के पुतले का दहन किया। पुतले के आग की लपटों में समाते ही पूरा धर्मवीर संभाजी मैदान ‘जय श्रीराम’ और ‘जय सियाराम’ के जयकारों से गूंज उठा। इस दृश्य ने विजयादशमी के उस शाश्वत संदेश को दोहराया कि अहंकार, अन्याय और अधर्म चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः विजय सत्य और सदाचार की ही होती है।

उत्तर भारतीय विश्व महासंघ का 32वां दशहरा महोत्सव धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आया। एक ओर महाराष्ट्र की समृद्ध मराठी संस्कृति थी, तो दूसरी ओर उत्तर भारतीय समाज की जीवंत सांस्कृतिक परंपराएं। संगीत, भक्ति और भाईचारे ने दोनों को एक मंच पर जोड़ दिया।

इस आयोजन ने साबित किया कि किसी उत्सव की वास्तविक पहचान केवल उसकी भव्यता से नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को एक साथ लाने और आपसी सद्भाव को मजबूत करने की उसकी क्षमता से होती है।

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