Friday, 15 December 2017

Reliance gulps down Rs 1452 crores recovered as Electricity surcharge & sale tax from consumers but not paid to govt

In a shocking revelations through his RTI query, Activist Anil Galgali has come to know that Anil Ambani owned M/s Reliance Energy has not paid Electricity Duty and other taxes amounting to Rs 1,452 crore to the government of Maharashtra which it recovered from the customers. The electric distribution arm of the Junior Ambani recovered this amount of Rs 14,51,69,15,200 from its customers during the month of Oct 2016 to October 2017 and has not transferred this money in government's exchequer," RTI has unearthed.

RTI  Activist Anil Galgali had sought to know the status of electricity duty and electricity tax paid to the government of Maharashtra by the Reliance Energy after it recovered from the customers. The reply furnished by the Electricity Inspector of Santacruz division Minakshi Wathore stated that ever since in June this year electricity tax branch was opened, Reliance have recovered Rs 591,50,53,500 in last five months from June 2017 to October 2017 in the different heads of Electricity Duty, electricity Tax, Toss and Green Cess as per prescribed rate. But fail to transfer to Govt. While electricity Inspector at Mumbai Central division informed Galgali that from Oct 2016 to May 2017 in the different heads of Electricity Duty, electricity Tax, Toss and Green Cess, Reliance  has recovered Rs 860,18,61,700 from the customers but yet to transfer the money to the government.

Commenting over the brazen violation of not paying the duty to the government on time, Galgali said that when he filed the RTI query with the Govt, then the officials woke up and issued notice to the company to pay the duty.  According to Galgali, Minakshi Wathore issued instructions to the General Manager of Reliance to pay the duty on Novermber 3 & Mumbai Division issue show cause notice to Reliance.

However, Anil Galgali has written a letter to the Chief Minister Devendra Fadnavis and demanded stern action against not only the Reliace company, but also against the earring officials. Galgali said, "I have demanded Chief Minister to recover the money from Reliance with penalty and conduct the audit of the other activities also, besides it suspends the distribution rights of this company till the company do not follow the rule book.

Monday, 11 December 2017

महाराष्ट्रातील आरोग्य सेवा ही अनाथ झाल्याचा सूर 

मुंबईत प्रथमच सामान्य नागरिक, डॉक्टर आणि विविध क्षेत्रातील नामवंतांनी एकत्र येत जागतिक मानव अधिकार दिनी वैद्यकीय सेवा आणि सामान्य नागरिकांचे अधिकार बाबत जनजागृती केली आणि महाराष्ट्रातील आरोग्य सेवा ही अनाथ झाल्याचा सूर सर्वच मान्यवरांच्या भाषणातुन उमटला. 

जागतिक मानव अधिकार दिनाचे औचित्य साधून 'माझे आरोग्य माझे अधिकार' या विषयावर "डॉक्टर सिटीझन फोरम" यांच्या माध्यमातुन मुंबई मराठी पत्रकार संघात चर्चासत्र आयोजित केले गेले होते.गेल्या काही काळात डॉक्टरांवरील होणारे हल्ले, रुग्ण व डॉक्टर ह्यांमधील दुरावलेले संबंध आणि विश्वासहर्ता टिकवित यांस जवळीक साधण्यासाठी "डॉक्टर सिटीझन फोरम" ची स्थापना झाली. माहिती अधिकार कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी पालिका, सरकारी आणि खाजगी रुग्णालयातील परिस्थितीचे वर्णन करत सर्वत्र डॉक्टर,अधिकारी आणि कर्मचारी वृंदाची लक्षणीय कमतरता यावर प्रकाश टाकत आरोग्य क्षेत्रात निधीची कपात दुर्दैवी असल्याचे सांगितले. देशातील आरोग्य सेवा ही कुचकामी व्यवस्था आणि सरकारी अनास्थामुळे अनाथ झाल्याचे परखड मत गलगली यांनी व्यक्त केले. डॉ मुफझल लकडावाला (फाउंडर डायजेस्टीव हेल्थ इन्स्टिट्यूट) यांनी रुग्ण हक्क व जबाबदारी ह्या संदर्भात प्रकाश टाकला. 

डॉ मिरजकर यांनी मेडीकल निग्लेजन्सी बद्दल मत व्यक्त करत दरवेळेस डॉक्टर मृत्युस कारणीभूत नसतो तर परिस्थितीही कारणीभूत असते हे विचार मांडले. एड  पाठक यांनी वैद्यकीय क्षेत्रात आलेले विविध अनुभवाचे कथन केले. पंढरीनाथ सावंत (कार्यकारी संपादक, मार्मिक) यांनी राजकीय अनास्था व लोकांमधे असणारा जनजागॄतीचा अभाव यावर तफावत मांडली. डॉ ठाकुर ह्यांनी कॉर्पोरेट क्षेत्रात होणारे गैरव्यवहार व बेजबाबदार व्यवस्थापन यांचे साटेलोटे कसे असते यावर परखड मत मांडले. स्वाती पाटील यांनी आरोग्य सेवांसाठी सरकारवर दबाव वाढवणे गरजेचे असल्याचे सांगितले.  डॉ अभिजीत मोरे ह्यांनी सरकारच आरोग्यसेवेच खाजगीकरण करतेय की काय? यावर शंका उपस्थित केली.डॉ पिंगळे यांनी लाईफ विन एप बद्दल माहीती करुन दिली.कार्यक्रमाची सांगता प्रा.संदीप नेमलेकर (दीप-अर्चन) यांनी केली.

विनोद साडविलकर (सिटीझन डॉक्टर फोरम अध्यक्ष) यांच्या विनंतीस मान देऊन अनेक मान्यवरांची उपस्थिती लाभली. जितेंद्र तांडेल(रुग्णकल्याण सेवा सामाजिक संस्था) संदीप तवसळकर, श्रीमती श्रेया निमोणकर(सेतु प्रतिष्ठान), मिलिंद निमोणकर, श्रीमती गमरे मॅडम, श्रीमती लखवीर कौर मॅडम व राजेंद्र ढगे (हॉस्पिटल प्रोजेक्ट मार्केटींग तज्ञ), चंद्रशेखर कुलकर्णी, अविनाश कदम, शिवराम सुकी, प्रकाश वाघ, कमल राव, पालिकेचे वरिष्ठ अधिकारी उदय शिरुरकर(ब विभाग), श्रीमती वैभवी घाणेकर(महिला शाखा संघटक शिवसेना परळ), धर्मदाय रुग्णालयातील आरोग्य सेवक व सेविका यांच्या सक्रिय योगदानामुळे कार्यक्रम चांगल्या पद्धतीने पार पडला.एड विल्सन गायकवाड यांनी आलेल्या प्रमुख वक्त्यांचा परिचय करुन दिला व डॉ अभिजीत मोरे (जन आरोग्य अभियान) ह्यांनी कार्यक्रमाचे सुत्रसंचालन केले. कुर्ला येथील गरीबांचा फोटोग्राफर म्हणुन नावाजलेले समाज सेवक आनंद सरतापे यांनी ह्या कार्यक्रमासाठी नि:शुल्क फोटोग्राफी केली त्याबद्दल फोरम तर्फे विनोद साडविलकर, जितेंद्र तांडेल व राजेंद्र ढगे यांनी त्यांचे विशेष आभार मानले.

महाराष्ट्र की स्वास्थ्य सेवा अनाथ 

मुंबई में पहली बार आम लोग, डॉक्टर और विभिन्न क्षेत्र से जुड़े मान्यवरों ने एकसाथ आकर विश्व मानव अधिकार दिन पर वैद्यकीय सेवा और आम नागरिकों का अधिकार पर जनजागरण किया। महाराष्ट्र की स्वाथ्य सेवा यह अनाथ होने का निष्कर्ष इस परिसंवाद से सामने आया।

विश्व मानव अधिकार दिन के मौके पर  'मेरा स्वास्थ्य , मेरा अधिकार' इस  विषय पर  "डॉक्टर सिटीझन फोरम" के तत्वाधान में मुंबई मराठी पत्रकार संघ में परिसंवाद आयोजित किया गया था।  गत कुछ समय से डॉक्टरों पर होनेवाले हमले, मरीज और डॉक्टर के बीच बढ़ता तनाव और लुप्त होता विश्वास को कैसे दुर कर इनमें नजदीकियां बढ़ाने के उद्देश्य से "डॉक्टर सिटीझन फोरम" का गठन हुआ हैं। सूचना का अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मनपा, सरकारी और निजी अस्पतालों की परिस्थिति का वर्णन करते हुए सभी जगहों पर डॉक्टर, अधिकारी और कर्मचारियों की कमी पर प्रकाश डालते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में फंड की कटौती करने की पहल का विरोध किया। देश की स्वास्थ्य सेवा की अप्रभावी व्यवस्था और सरकारी उदासीनता से अनाथ होने का स्पष्ट मत गलगली ने व्यक्त किया। डॉ मुफझल लकडावाला (फाउंडर डायजेस्टीव हेल्थ इन्स्टिट्यूट) ने मरीज का अधिकार और जिम्मेदारी के संबंध में प्रकाश डाला। 

डॉ मिरजकर ने मेडीकल निग्लेजन्सी पर अपना मत व्यक्त करते हुए कहा कि हर बार डॉक्टर ही मरीज की मौत के लिए जिम्मेदार नहीं होता हैं, कई बार परिस्थिती भी जिम्म्मेदार होती हैं। एड पाठक ने वैद्यकीय क्षेत्र में उनके विभिन्न अनुभव का कथन किया। वरिष्ठ पत्रकार पंढरीनाथ सावंत (कार्यकारी संपादक, मार्मिक) ने राजनीतिक उदासीनता और लोगों में जनजागरण की कमी इसपर विचार रखे। डॉ ठाकुर ने कॉर्पोरेट क्षेत्र में होनेवाली अनियमितता और गैरजिम्मेदाराना प्रबंधन की साठगांठ पर प्रहार किया। स्वाती पाटील ने स्वास्थ्य सेवा के लिए सरकार पर दबाव बढ़ाने की जरुरत बताई। डॉ अभिजीत मोरे ने सरकार ही स्वास्थ्य सेवा का निजीकरण कर रही हैं क्या? इसपर संदेह व्यक्त किया। डॉ पिंगळे ने लाईफ विन एप की जानकारी दी। 

विनोद साडविलकर (सिटीझन डॉक्टर फोरम अध्यक्ष) के अनुरोध पर कई मान्यवरों ने सहभाग लिया। जितेंद्र तांडेल(रुग्णकल्याण सेवा सामाजिक संस्था) संदीप तवसळकर, श्रीमती श्रेया निमोणकर(सेतु प्रतिष्ठान), मिलिंद निमोणकर, श्रीमती गमरे मॅडम, श्रीमती लखवीर कौर मॅडम तथा राजेंद्र ढगे (हॉस्पिटल प्रोजेक्ट मार्केटींग तज्ञ), चंद्रशेखर कुलकर्णी, अविनाश कदम, शिवराम सुकी, प्रकाश वाघ, कमल राव, मनपा के वरिष्ठ अधिकारी उदय शिरुरकर(ब विभाग), श्रीमती वैभवी घाणेकर(महिला शाखा संगठक शिवसेना परल), धर्मदाय अस्पताल से जुड़े स्वास्थ्य सेवक और सेविका इनके सक्रिय योगदान से कार्यक्रम सफल हुआ। एड विल्सन गायकवाड ने सभी मुख्य वक्त्याओं का परिचय करवाया और  डॉ अभिजीत मोरे (जन आरोग्य अभियान) ने कार्यक्रम का सुत्रसंचालन किया। आभार प्रा.संदीप नेमलेकर (दीप-अर्चन) ने माना। 

Sunday, 10 December 2017

एकनाथ खडसे को बकाया रु 15 .50 लाख अदा करने के लिए सरकार ने भेजा रिमाइंडर

महाराष्ट्र के भाजपा नेता और पूर्व राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे ने मंत्री पद जाने के बाद ' रामटेक' बंगला का अधिक इस्तेमाल करने पर उनपर रु 15.50 लाख का बकाया हैं। उसे अदा न करने पर खड़से को रिमाइंडर जारी करने की जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को सार्वजनिक निर्माण विभाग ने दी हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने सार्वजनिक निर्माण विभाग से पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे को आबंटित किया सरकारी बंगला 'रामटेक' की जानकारी मांगी थी। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने अनिल गलगली को बताया कि तत्कालीन राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे ने 'रामटेक' बंगला रिक्त किया हैं। 4 जून 2016 को इस्तीफे के बाद उन्हें 19 जून 2016 को बंगला रिक्त करना जरुरी थी। पूर्व मंत्रियों को प्रथम 15 दिन सरकारी निवासस्थान मुफ्त होता हैं उसके बाद 3 महीने के लिए सरकारी अनुमति से प्रति वर्ग फुट रु 50/- और उसके बाद आगामी  3 महीने के लिए रु 100/- इतना दंड निश्चित किया हैं। अनिल गलगली की आरटीआई के बाद सरकार ने खडसे को 3 महीने की अनुमति दी थी। पूर्व राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे जिस 'रामटेक' बंगले में रहते थे उसके इस्तेमाल पर दिनांक 19 नवंबर 2016 तक का बकाया रु 15,49, 975/- हैं।   सार्वजनिक निर्माण विभाग के मलबार हिल सेवा केंद्र ने दिनांक 17 नवंबर 2016 को सूचित किया हैं कि ना.दा. मार्ग स्थित सरकारी बंगला 'रामटेक'  एकनाथ खडसे, पूर्व मंत्री ने दिनांक 19 नवंबर 2014 को अपने अधिकार में लिया हैं जिसे 19 नवंबर 2016 को रिक्त किया हैं।

अनिल गलगली के अनुसार सामान्य प्रशासन विभाग सरकारी निवासस्थान आबंटित करता हैं तो उस बंगले को रिक्त करने की सर्तकता उसी विभाग से लेने की जरुरत होते हुए वे इसे नजरअंदाज करते हैं। खडसे की बकाया राशि उनके वेतन से वसूल करने की मांग अनिल गलगली ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजे हुए पत्र में करते हुए लापरवाही बरतने वाले संबधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की हैं ताकि भविष्य में ऐसी गलती नहीं होगी।

एकनाथ खडसेंना थकबाकीची रु 15 .50 लाख अदा करण्यासाठी सरकारने पाठविले स्मरणपत्र 

महाराष्ट्रातील भाजपा नेते आणि माजी महसूल मंत्री एकनाथ खडसे यांनी अजूनही 'रामटेक'  बंगल्याच्या वापरापायी असलेली थकबाकी रु 15.50 लाखांची थकबाकी अदा न केल्यामुळे त्यांस स्मरणपत्र पाठविल्याची माहिती आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस सार्वजनिक बांधकाम खात्याने दिली आहे.

आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी सार्वजनिक बांधकाम खात्याकडे माजी मंत्री एकनाथ खडसे यांस वितरित केलेला शासकीय बंगला 'रामटेक' बाबत माहिती विचारली होती. सार्वजनिक बांधकाम खात्याने अनिल गलगली यांस कळविले की माजी महसूल मंत्री एकनाथ खडसे यांनी 4 जून 2016 रोजी राजीनामानंतर 19 जून 2016 रोजी त्यांस बंगला रिक्त करणे आवश्यक होते. माजी मंत्र्यांस पहिले 15 दिवस शासकीय निवासस्थान निःशुल्क असते त्यानंतर 3 महिन्यासाठी शासनाच्या परवानगीने प्रति वर्ग फुट  रु 50/- आणि त्यानंतर पुढील 3 महिन्यासाठी रु 100/- इतका दंडनीय आकार निश्चित केला आहे. अनिल गलगली यांच्याच आरटीआय नंतर शासनाने खडसे यांस 3 महिन्याची परवानगी दिली होती. माजी महसूल मंत्री एकनाथ खडसे हे वास्तव्य करीत असलेले शासकीय निवासस्थान 'रामटेक' बंगला वापरापोटी असलेली  दिनांक 19 नोव्हेंबर 2016 पर्यंत थकबाकी रु 15,49, 975/- आहे.  ना.दा. मार्ग येथील शासकीय बंगला 'रामटेक' येथे एकनाथ खडसे, माजी मंत्री यांनी दिनांक 19 नोव्हेंबर 2014 मध्यान्ह पूर्व पासून बंगल्याचा ताबा घेतला असून , 19 नोव्हेंबर 2016 रोजी बंगल्याचा रिक्त ताबा सार्वजनिक बांधकाम विभागाच्या ताब्यात दिलेला आहे.

अनिल गलगली यांच्या मते सामान्य प्रशासन विभाग शासकीय निवासस्थान वितरित करत असून रिक्त करण्याची खबरदारी त्याच विभागाकड़ून करणे अपेक्षित असताना त्या बाबीची दखल घेतली जात नाही. खडसे यांच्या थकबाकीची वसूली त्यांच्या वेतनातून वळते करण्याची मागणी अनिल गलगली यांनी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांस लिहिलेल्या पत्रात करत झालेला निष्काळजीपणा पहाता संबधित अधिका-यांची जबाबदारी निश्चित करण्याची मागणी केली आहे जेणेकरुन भविष्यात अश्या प्रकारची चूक होणार नाही.

Govt Reminder- Eknath Khadse yet to paid Rs 15.50 Lakhs due rent

Former Minister Eknath Khadse may have resigned from Maharashtra cabinet, but has no qualms on using facilities given to a Minister. Khadse has still to  pay Rs 15.50/- Lakhs, the rent arrears due to the Public Works department, An RTI query by RTI Activist Anil Galgali revealed.

Anil Galgali had put up an RTI application demanding to know status of occupation and rent arrears of much sought-after "Ramtek' bungalow on Narayan Dabholkar Road. Public Works department informed Galgali that Ekanath Khadse has vacated the bungalow, Since he had first occupied it on the afternoon of 19th November 2014. He has been charged rent since his resignation as Minister but has not paid up. These rent arrears due from him have mounted to 15.50/- lakhs and he has not made any payment, Malabar Hill division of PWD informed to PWD Higher Authority.

After his resignation as Revenue Minister, Anil Galgali First who had publicly raised the issue of Khadse illegal occupation of official bungalow. It was imperative for him to vacate the bungalow on 19th June 2016 as he had resigned on 4th June 2016. A minister can use his official residence free for a period of 15 days, from the date that he ceases to be a Minister. After that on obtaining Government permission he can retain the residence for three months on a payment of Rs 50 per square foot. After three months this charge is to be doubled to Rs 100 per sq foot. Following Galgali's previous intervention, Khadse had been granted permission valid for a period of 3 months. Arrears due from him as rent stood on Rs 15,49, 975/- as on 19th November 2016. Govt of Maharashtra send Reminder to Khase on 18 November 2017 to pay the due rent after Anil Galgali fresh RTI plea.

Anil Galgali has written to the Chief Minister Devendra Fadnavis seeking action against the GAD officials failing in their duty to protect prime Government property. They must be held liable for dereliction of duty and the rent arrears must be deducted from their salaries, Galgali argued. Also rent arrears must be deducted from Eknath Khase salaries, Galgali demand.

Thursday, 7 December 2017

मुंबई यूनिवर्सिटी के कालीना कैंपस की 36 बिल्डिंगों को ओसी नहीं

पहले ही परीक्षा का परिणाम की गड़बड़ी से विवादित हुई मुंबई यूनिवर्सिटी के कालीना कैंपस की 61 में से 36 बिल्डिंगों को ओसी न होने की चौकानेवाली जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को मुंबई यूनिवर्सिटी ने दी हैं। यह सारी बिल्डिंग वर्ष 1975 से वर्ष 2008 के दौरान बनाई गई हैं। 

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मनपा और मुंबई यूनिवर्सिटी से मुंबई यूनिवर्सिटी के कालीना कैंपस में स्थित बिल्डिंगों को दी गई सीसी, आयओडी, ओसी की जानकारी मांगी थी।  उपप्रमुख अभियंता (इमारत प्रस्ताव) विशेष कक्ष ने अनिल गलगली को बताया कि सांताकूज पूर्व, कोले-कल्याण विलेज, सीटीएस नंबर 4094 स्थित जमिन पर मुंबई यूनिवर्सिटी की अधिकांश बिल्डिंगों को ओसी नहीं हैं। 

मुंबई यूनिवर्सिटी ने अनिल गलगली को बताया कि कुल 61 में से 36 बिल्डिंगों को ओसी नहीं मिल पाई हैं। सिर्फ  24 बिल्डिंगों को ओसी दी गई हैं और 1 बिल्डिंग को पार्ट ओसी दी गई हैं। जिन बिल्डिंगों को ओसी दी गई हैं उसमें रानडे भवन, तिलक भवन, वर्क शॉप, WRIC गेस्ट हाऊस, एसपी लेडीज होस्टल,न्यू क्लास क्वार्ट्स, महात्मा फुले भवन, ज्ञानेश्वर भवन, यूरसिसन अभ्यास स्टाफ क्वार्ट्स ए, बी, सी, डी, ई, एफ, सीडी देशमुख भवन, डॉ बाबासाहेब आंबेडकर भवन, प्रेस गोडाऊन, अबुल कलाम बिल्डिंग, फिरोजशहा मेहता भवन, अण्णा भाऊ साठे भवन, पक्षी भवन, ग्लास भवन, वाईस चांसलर बंगला इन बिल्डिंगों का शुमार हैं। कल्चरल सेंटर को पार्टली ओसी हैं।

जिन बिल्डिंगों को अब तक ओसी नहीं दी गई हैं उसमें ICSSR होस्टल, रीडरर्स क्वार्ट्स 12 A, 12B, 12 C, छात्र कॅन्टीन, ओल्ड लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स, जेएन लायब्ररी, जेपी नाईक भवन, WRIC प्रशासकीय इमारत, स्वास्थ्य केंद्र, कर्मवीर भाऊराव पाटील बॉयज होस्टल, एमडीके लेडीज हॉस्टेल, गरवारे इन्स्टिट्यूट ओल्ड, न्यू गरवारे इन्स्टिट्यूट, वर्क शॉप गरवारे, स्टाफ क्वार्ट्स G, पंडिता रमाबाई लेडीज होस्टल, अलकेश दिनेश मोदी गॅलरी, मराठी भवन, आईडॉल इमारत, झंडू इन्स्टिट्यूट, अनेक्स बिल्डिंग, लाईफ सायन्स बिल्डिंग, एक्साम कॅन्टीन, शिक्षक भवन, पोस्ट ऑफिस, सर्व्हट क्वार्ट्स, न्यू लेक्चर कॉम्प्लेक्स, संस्कृत भवन, भाषा भवन, राजीव गांधी सेंटर, आयटी पार्क, शंकरराव चव्हाण टीचर्स टेर्निंग अकादमी,  UMDAE हॉस्टेल,, UMDAE फॉकलिटी बिल्डिंग , नॅनो सायन्स और नॅनो टेक्निकल सेंटर  इन बिल्डिंगों का शुमार हैं।

अनिल गलगली के अनुसार कालीना कैंपस में जिन बिल्डिंगों को ओसी नहीं हैं इसमें मुंबई यूनिवर्सिटी और आर्किटेक्ट की गलती हैं उनकी जांच कर कारवाई करने की मांग राज्यपाल विद्यासागर राव, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, शिक्षा मंत्री विनोद तावडे को भेजे हुए पत्र में की हैं। जिन बिल्डिंगों को ओसी नहीं हैं उन बिल्डिंगों में हजारों छात्र-छात्राओं के अलावा यूनिवर्सिटी के अधिकारी और कर्मचारी का आवागमन रहता हैं इसलिए मंजूर प्लान के तहत काम नहीं होने से उपलब्ध एफएसआय से संशोधित प्लान पेश करने की जरुरत होने की बात अनिल गलगली ने कहीं हैं।