Tuesday, 27 March 2018

नीरव मोदी को कर्ज देने की प्रक्रिया की जानकारी देने से पंजाब नेशनल बैंक का इंकार

देश से फरार हुआ दिवालिया उद्योगपति नीरव मोदी को दिया हुआ लोन और लोन देने के लिए पंजाब नेशनल बैंक के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर की बैठक में मंजूर प्रस्ताव की जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को देने से पंजाब नेशनल बैंक ने इंकार किया हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने पंजाब नेशनल बैंक से जानकारी मांगी थी कि वनीरव मोदी  को दिया हुआ लोन और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की  बैठक में पेश किया हुआ एजेंडा, मंजूर प्रस्ताव और मिनट्स की कॉपी दे। अनिल गलगली के आवेदन पर जबाब देते हुए पंजाब नेशनल बैंक के केंद्रीय जनसंपर्क अधिकारी जॉय रॉय ने बताया कि यह मामला न्यायप्रविष्ठ और जांच प्राधिकरण के समक्ष प्रलंबित हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 8 (ज) अन्वये सूचना देने से इनकार किया गया। इस धारा के अनुसार " जिस जानकारी से अपराधियों की जांच  करना या उसे गिरफ्तार करना या उसपर मुकदमा दायर करने की प्रक्रिया में रुकावट आएगी।

अनिल गलगली ने पंजाब नेशनल बैंक के इस तर्क वाले आदेश के खिलाफ प्रथम अपील दायर की हैं। अनिल गलगली के अनुसार नीरव मोदी जैसे दिवालियों को जिन अधिकारियों ने मदद की हैं उनके नाम को सार्वजनिक करने के लिए बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की बैठक में पेश किया हुआ एजेंडा, मंजूर प्रस्ताव और मिनिट्स की जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि नीरव मोदी तो दोषी हैं लेकिन उन्हें मदद करनेवाले पंजाब नेशनल बैंक के वरिष्ठ अधिकारी भी जो जनता के पैसे सुरक्षित रखने में असफल हुए हैं और जिन्हें आजतक गिरफ्तार नहीं किया गया हैं। नीरव मोदी को मदद करनेवाले बड़े आसामियों का नाम सार्वजनिक करना जरुरी हैं ताकि भविष्य में और कोई भी बैंक इसतरह आंखे मूंदकर कर्ज देने के पहले विचार करेंगी। 

नीरव मोदीला कर्ज देण्याच्या प्रक्रियेची माहिती देण्यास पंजाब नॅशनल बँकेचा नकार

देशातून फरार झालेला दिवाळखोर उद्योगपति नीरव मोदी यांस दिलेले कर्ज आणि कर्ज देण्यासाठी अवलंबेल्या प्रक्रियेची माहिती तसेच पंजाब नॅशनल बँकेच्या बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टरच्या बैठकीत मंजूर प्रस्तावाची माहिती देण्यास पंजाब नॅशनल बँकेने आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस नकार दिला आहे.

आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी पंजाब नॅशनल बँककडे माहिती मागितली होती की नीरव मोदी यांस दिलेले एकूण कर्ज आणि बोर्ड ऑफ डायरेक्टरच्या बैठकीत सादर केलेला एजेंडा, मंजूर प्रस्ताव आणि इतिवृत्तांताची प्रत दयावी. अनिल गलगली यांच्या अर्जावर उत्तर देत केंद्रीय जनसंपर्क अधिकारी जॉय रॉय  यांनी कळविले की सदर प्रकरण न्यायप्रविष्ठ आणि चौकशी प्राधिकरणाकडे प्रलंबित आहे. माहितीचा अधिकार अधिनियम 2005 चे कलम 8 (एच ) अन्वये नाकारण्यात येत आहे. सदर कलम असे सांगते की 
" ज्या माहितीमुळे अपराध्यांचा तपास करणे किंवा त्यांना अटक करणे किंवा त्यांच्यावर खटला दाखल करणे या प्रक्रियांमध्ये अडथळा येईल, अशी माहिती "

अनिल गलगली यांनी पंजाब नॅशनल बँकेच्या या युक्तीवादाच्या आदेशाविरोधात प्रथम अपील दाखल केले आहे. नीरव मोदी सारख्या दिवाळखोरांस ज्या अधिका-यांनी मदत केली आहे त्यांची नावे उघडकीस आणण्यासाठी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर यांच्या बैठकीत सादर झालेला एजेंडा, मंजूर प्रस्ताव आणि इतिवृत्तांताची माहिती मिळणे आवश्यक आहे कारण मोदी हे तर दोषी आहेत पण त्यांस मदत करणा-या पंजाब नॅशनल बँकच्या वरिष्ठ सुद्धा तेवढेच. कारण जनतेचे पैसे सुरक्षित ठेवण्यात यांस अपयश आले आहे आणि ज्यांस आजपर्यंत अटक झाली नाही. सदर माहिती सार्वजनिक झाल्यास नीरव मोदी सारख्या दिवाळखोरांस मदत करणा-या बड्या धेंडाची नावे सार्वजनिक केल्यास भविष्यात कोणतीही बँक अश्याप्रकारे डोळे बंद करुन कर्ज देणार नाही.

PNB refuses to provide information about the loan sanction process for Nirav Modi

The PNB has refused to provide information on a RTI query filed by RTI Activist Anil Galgali, seeking information about the absconding Scamster Nirav Modi, the information related to total amount of loan, the procedure applied for sanction of the loans, the resolution in the Board of Directors of the Bank in which the loan was approved.

RTI Activist Anil Galgali had sought information from the Punjab National Bank about the total quantum of loan extended to Nirav Modi and also the details of the Board of directors meetings such as Agenda, proposal, approvals and the Minutes of the meeting in which the loan proposals were sanctioned. In a response to the query the Deputy General Manager and Central Public Relation Officer Joy Roy informed Galgali that the case is deriving exemption from disclosure under Section 8(1)(h) of Right to Information Act. Section indicated that the information which would impede the process of investigation or apprehension or prosecution of offenders, the information was refused.

Anil Galgali has filed the 1st appeal as per the procedures of RTI Act. It is important to expose the officers who failed in their duty to safeguard the public money from being siphoned off, hence the details of the Board meeting of the PNB is important, the details like the Agenda of the meeting, Resolution adopted in the meeting for sanction and the Minutes of the meeting will help in exposing such officers. The cooperating officers are equally responsible along with Nirav Modi in conducting the scam. Once such information is made public and the officers punished, the bank authorities will work with responsibility to safeguard the public deposits and will adopt proper measure while approving loan applications, said Galgali.

Sunday, 25 March 2018

सिनेट चुनाव में मतदाताओं को जानकारी देने मुंबई यूनिवर्सिटी थी उदासीन 

मुंबई यूनिवर्सिटी का सिनेट का चुनाव था। लेकिन पहली बार ऐसा हुआ कि ग्रेजुएट मतदाताओं को मुंबई यूनिवर्सिटी ने किसी भी तरह चुनाव में आने के लिए आवाज नहीं दी। मतदान कहां हैं, इसकी जानकारी वाला पत्र भेजा नहीं ना मतदाता होने का पत्र भेजा।  मुंबई यूनिवर्सिटी ने इस मामले में बरती उदासीनता पर आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने नाराजगी जताई हैं। अनिल गलगली ने घाटकोपर पश्चिम के आर जे कॉलेज में अपना मतदान किया।

मुंबई यूनिवर्सिटी के अंतर्गत ग्रेजुएट मतदाताओं को वे सिनेट के चुनाव में मतदाता होने की जानकारी वाला किसी भी तरह का पत्र मुंबई यूनिवर्सिटी ने भेजा नहीं।  25 मार्च 2018 के सिनेट चुनाव में मतदाताओं को कौनसे मतदान केंद्र पर जाना पड़ेगा, इसकी भी जानकारी नहीं भेजी। इस पर अनिल गलगली नाराजगी जताते हुए कहा कि मुंबई यूनिवर्सिटी ने सिनेट चुनाव में शत प्रतिशत मतदान के लिए किसी भी तरह का कदम नहीं उठाया । इससे मतदान पर हुए परिणाम के मद्देनजर भविष्य में इस तरह की बड़ी गलती से बचने की अपील गलगली ने की हैं।।विशेष यानी  3 मतदान केंद्र पर मुंबई यूनिवर्सिटी के एक अफसर की नियुक्ति करने से सिनेट चुनाव की प्रक्रिया में भी मुंबई यूनिवर्सिटी की उदासीनता देखने को मिली।  

सिनेट निवडणुकीत मतदारांना माहिती देण्यात मुंबई विद्यापीठ उदासीन

मुंबई विद्यापीठाच्या सिनेट निवडणूक होती पण पहिल्यांदाच असे घडले की पदवीधर मतदारांना मुंबई विद्यापीठाने साद घातली नाही.मतदान कोठे आहे याची माहितीचे पत्र पाठविले नाही ना मतदार झाले असल्याचे पत्र पाठविले. मुंबई विद्यापीठ याबाबतीत उदासीन असल्याची खंत आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी व्यक्त केली आहे. गलगली यांनी घाटकोपर पश्चिम येथील आर जे महाविद्यालयात आपला मतदानाचा हक्क बजाविला.


मुंबई विद्यापीठाच्या अंतर्गत पदवीधर मतदारांना ते सिनेट निवडणुकीत मतदार झाले असल्याचे कोणतेही पत्र मुंबई विद्यापीठाने पाठविले नाही. 25 मार्च 2018 रोजीच्या निवडणुकीत मतदारांना कोणत्या मतदान केंद्रावर जावे लागणार आहे, त्याचीही माहिती पाठविली नाही. याबाबत अनिल गलगली यांनी खंत व्यक्त करत प्रतिपादन केले की मुंबई विद्यापीठाने निवडणुकीत शत प्रतिशत मतदानासाठी कोणत्याही प्रकारची तसदी घेतली नाही. यामुळे मतदानांवर परिणाम झाला असून भविष्यात अश्या प्रकारची घोडचूक टाळण्याचे आवाहन अनिल गलगली यांनी सरतेशेवटी केले आहे. विशेष म्हणजे 3 मतदान केंद्रावर प्रत्येकी एका मुंबई विद्यापीठाच्या अधिका-यांची नियुक्ती केल्याने निवडणूक प्रक्रियेत मुंबई विद्यापीठाची उदासीनता जाणवली.

Mumbai University failed to inform the voters about Senate Election

First time in the history of Mumbai University, MU did not inform the graduates about they being voters of the senate election. The voters also were not informed as to on which booth they will be voting on 25/03/2018. Alleged by RTI Activist Anil Galgali who cast his vote in Ghatkopar West RJ College.

RTI Activist Anil Galgali also said that University failed to inform the voters about senate election. The Mumbai University did not take any step for 100% voting and due to this it's impact on  their was low voter turnout and he also said that university was not at all serious for the election which can been assumed by the decision of allotting only One Officer of Mumbai University for 3 booths. 

Wednesday, 21 March 2018

मनपा की चतुर्थ श्रेणी के 1388 पद उत्तीर्ण परीक्षार्थी की संख्या 1,06,193  

मुंबई महानगरपालिका में चतुर्थ श्रेणी में 1388 पदों के लिए
मेसर्स महाऑनलाईन कंपनी ने ली हुई परीक्षा का परिणाम 44 प्रतिशत जाहिर कर  1,06,193 परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। ऐसी जानकारी  आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को मुंबई महानगरपालिका ने दी हैं। कुल रु 15.13 करोड इतना शुल्क जमा हुआ हैं। बायोमेट्रिक तरीके से पहली बार परीक्षा की पहल मुंबई महानगरपालिका ने की हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मुंबई महानगरपालिका से चतुर्थ श्रेणी में 1388 पद पर नियुक्ति के लिए ली गई परीक्षा को जानकारी मांगी थी।  मनपा के कामगार विभाग ने अनिल गलगली को बताया कि कामगार, कक्ष परिचर, श्रमिक, हमाल, बहुउद्देशीय कामगार, आया, श्मसान कामगार के 1388 पद के लिए 2,87,088 आवेदक थे। दिनांक 15 फरवरी से 25 फरवरी 2018  ऐसे लगातार 10  दिन आयोजित परीक्षा में 2,40,495 आवेदक असल में परीक्षा में बैठे थे।  विशेष यानी हर एक उम्मीदवार को उसकी  प्रश्नपत्रिका ( उत्तर सहित) एवं उसने चुने हुए विकल्पों सहित उस उम्मीदवार के व्यक्तिगत ईमेल पर दिनांक 28 फरवरी 2018 को भेजी गई। ऑनलाईन परीक्षा का पाठ्यक्रम उप आयुक्त ( सामान्य प्रशासन) और अतिरिक्त आयुक्त ( शहर) की मंजूरी से मेसर्स महाऑनलाईन इस संस्था को दिया गया। इसमें पाठ्यक्रम के अनुसार प्रश्नपत्रिका तैयार करने का काम मेसर्स महाऑनलाईन ने किया हैं।

महाराष्ट्र सरकार की पार्टनर ऐसी मेसर्स महाऑनलाईन लिमिटेड कंपनी को प्रति उम्मीदवार रु 521.56 ऐसा शुल्क निश्चित किया था। अबतक  रु 14,97, 80,864/-  इतना शुल्क अदा किया गया हैं और  रु 15,87,136/- इतनी रकम देना शेष हैं। यह परीक्षा बायोमेट्रिक तरीके से ली गई हैं। चयन लिस्ट तैयार होने के बाद चयनित उम्मीदवारों का चयन भी बायोमेट्रिक तरीके से किया जाएगा। परीक्षा का आवेदन स्वीकारने से लेकर चयन होने तक की सारी प्रक्रिया और जिम्मेदारी मेसर्स महाऑनलाईन कंपनी की हैं। साथ ही भविष्य में पत्र, शिकायत, सूचना का अधिकार, न्यायालयीन मामला आदि में मनपा को मेसर्स महाऑनलाईन कंपनी सहयोग करेगी।

अनिल गलगली के अनुसार लाखों आवेदकों की परीक्षा लेने के दौरान मेसर्स महाऑनलाईन कंपनी ने ली हुई सर्तकता काबिलेतारीफ हैं। मनपा ने किसी भी तरह की धांधली और पेपर लीक न होने पर ध्यान देकर जो काम किया हैं वह प्रशंसनीय हैं। समय पर परिणाम जाहीर कर आवेदकों को केईमेल पर उत्तर पत्रिका भेजी गई हैं। अब मुंबई विद्यापीठ को भी निजी कंपनी पर अतिविश्वास नहीं रखते हुए सरकारी कंपनी का चयन करना चाहिए, ऐसा मत अनिल गलगली ने व्यक्त किया हैं।