जहीर कुरेशी स्मृति व्याख्यानमाला–5 में जुटे साहित्यिक दिग्गज
प्रख्यात अभिनेता राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि जहीर कुरेशी जीवन को बारीकी से देखने वाले ग़ज़लकार थे। उन्होंने कहा कि एक अभिनेता होने के नाते उन्हें कविताएँ सुनना और उनका पाठ करना प्रिय है, और जहीर कुरेशी की ग़ज़लें उन्हें विशेष रूप से प्रभावित करती हैं। उन्होंने उनकी पंक्तियाँ उद्धृत करते हुए कहा कि
“किस्से नहीं हैं यह किसी विरहन की पीर के,
ये शेर हैं अंधेरों से लड़ते जहीर के”
और बताया कि ये पंक्तियाँ एक शायर की प्रतिबद्धता और संघर्षशीलता को उजागर करती हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षाविद ओबैद आज़म आज़मी ने की। प्रख्यात शायर नवाब आरज़ू ने कहा, “शायर कभी मरता नहीं, वह दिलों में जीवित रहता है—जहीर कुरेशी आज भी हमारे बीच हैं।”
फिल्मकार संदीप नाथ ने अपने संबोधन में कहा कि जहीर कुरेशी से मिले संस्कार उनके जीवन में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुए।
आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कथाकार व पत्रकार हरीश पाठक ने कहा कि जीवन के कठिन समय में जहीर कुरेशी ने उन्हें दिशा दिखाई। “वे मेरे जीवन का कोमल कोना हैं, उन्हें भूल पाना असंभव है।”
“कथा”, दीनदयाल मुरारका फाउंडेशन और “जलधारा” के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन विवेक अग्रवाल ने किया। स्वागत भाषण दीनदयाल मुरारका तथा आभार प्रदर्शन श्रीमती कमलेश पाठक ने किया।
दूसरे सत्र में रचना-पाठ का आयोजन हुआ, जिसकी अध्यक्षता नवाब आरज़ू ने की। इस सत्र में राजेंद्र गौतम, अशोक कुमार नीरद, संध्या यादव, अनिल गौड़ और सुभाष पाठक जिया ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं।
इस अवसर पर विष्णु शर्मा, श्रुति भट्टाचार्य मंजू श्री,अंजू शर्मा, सुरेश शर्मा, ओमप्रकाश तिवारी, धनंजय कुमार, शैलेन्द्र गौड़, बनमाली चतुर्वेदी, हेमा चंदानी, कमर हाजीपुरी, प्रमोद दुबे, संतोष ओझा सहित साहित्य, कला और संस्कृति जगत के अनेक रचनाकार उपस्थित रहे, जिससे आयोजन को गरिमामयी स्वरूप प्राप्त हुआ।
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