Wednesday, 8 July 2026

जन्मदिन नहीं मनाकर आचार्य शैलेश पांडे ने भरत भूषण तिवारी को दी श्रद्धांजलि

जन्मदिन नहीं मनाकर आचार्य शैलेश पांडे ने भरत भूषण तिवारी को दी श्रद्धांजलि

भायंदर। बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में हाल ही में पुलिस एनकाउंटर के दौरान भरत भूषण तिवारी की हुई मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हुए संकल्प राष्ट्र सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास, अयोध्या धाम के राष्ट्रीय प्रवक्ता आचार्य शैलेश पांडे ने अपना जन्मदिन सादगी से मनाने के बजाय श्रद्धांजलि सभा आयोजित की।

भायंदर पूर्व स्थित भारत माता मंदिर सेवाश्रम के जनसंपर्क कार्यालय में आयोजित इस शोक सभा में उपस्थित लोगों ने भरत भूषण तिवारी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। इस अवसर पर आचार्य शैलेश पांडे ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का शासन सर्वोपरि होना चाहिए और प्रत्येक नागरिक को न्याय मिलने का अधिकार है।

श्रद्धांजलि सभा में शिक्षण समिति सभापति स्नेहा शैलेश पांडे, परिवहन समिति सभापति एड. राजकुमार मिश्रा, भाजपा जिला महामंत्री बृजेश तिवारी, पतंजलि योग समिति ठाणे जिला प्रमुख योग गुरु संतोष खटावकर, जिला सचिव मुकेश जांगिड़, फूलकुमार झा, समाजसेवक एल. आर. पांडे, समाजसेवी मैना पांडे, जितेंद्र प्रताप सिंह, मंडल उपाध्यक्ष विश्वनाथ तिवारी, जिला सचिव बी. एस. पाठक, संदीप दुबे, संजय दुबे, देवेंद्र सिंह, संजय गुप्ता, संदीप शर्मा, नितीन ओझा, विशाल रजक सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

मनीलाइफ फाउंडेशन की स्टडी में मुंबई मेट्रो लाइन-3 की एक्सेसिबिलिटी में कमियों का खुलासा, व्यावहारिक सुधारों की सिफारिश

मनीलाइफ फाउंडेशन की स्टडी में मुंबई मेट्रो लाइन-3 की एक्सेसिबिलिटी में कमियों का खुलासा, व्यावहारिक सुधारों की सिफारिश

मनीलाइफ फाउंडेशन द्वारा किए गए एक स्वतंत्र अध्ययन में मुंबई मेट्रो एक्वा लाइन (लाइन-3) पर यात्रियों की पहुंच (Accessibility) और उपयोगकर्ता-अनुकूल सुविधाओं में मौजूद कई व्यावहारिक कमियों की पहचान की गई है। आधुनिक अवसंरचना और उत्कृष्ट इंजीनियरिंग के बावजूद, अध्ययन में पाया गया कि दैनिक यात्रियों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, छोटे बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों तथा सामान लेकर चलने वाले यात्रियों को कई स्तरों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

'मुंबई मेट्रो एक्वा लाइन (लाइन-3) की एक्सेसिबिलिटी और यूज़र-फ्रेंडलीनेस पर अध्ययन' शीर्षक से यह रिपोर्ट 8 जुलाई 2026 को जारी की गई। इसकी प्रतियां केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA), मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (MMRC), महा मुंबई मेट्रो ऑपरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MMMOCL), मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA), महाराष्ट्र सरकार, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) सहित विभिन्न मेट्रो एजेंसियों और शोध संस्थानों को भेजी गई हैं।

अध्ययन के तहत मेट्रो लाइन-3 के सभी 27 स्टेशनों का विस्तृत निरीक्षण, यात्रियों का सर्वेक्षण तथा एक्सेसिबिलिटी, ट्रांसपोर्ट प्लानिंग और अर्बन मोबिलिटी विशेषज्ञों से परामर्श किया गया।

रिपोर्ट में प्रमुख रूप से पाया गया कि अधिकांश स्टेशनों पर नीचे उतरने वाले एस्केलेटर उपलब्ध नहीं हैं। यात्रियों को बाहर निकलते समय लंबी सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं, जिससे वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और भारी सामान लेकर यात्रा करने वालों को अनावश्यक कठिनाई होती है।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि कई स्टेशनों पर अत्यधिक सीढ़ियां चढ़नी-उतरनी पड़ती हैं। यद्यपि लिफ्ट उपलब्ध हैं, लेकिन सभी यात्री उनका उपयोग नहीं कर पाते, जिससे सीढ़ियों पर निर्भरता बढ़ जाती है।

रिपोर्ट में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को भी एक बड़ी चुनौती बताया गया है। यात्रियों ने बस, ऑटो-रिक्शा और टैक्सी तक पहुंचने में कठिनाई तथा आसपास के परिवहन नेटवर्क के साथ पर्याप्त समन्वय न होने की शिकायत की। अध्ययन के अनुसार, स्टेशन के बाहर बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और कनेक्टिविटी विकसित करना आवश्यक है।

इसके अलावा, मार्गदर्शन (Wayfinding) और एक्सेसिबिलिटी संबंधी संकेतकों को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता बताई गई है, ताकि पहली बार यात्रा करने वाले यात्रियों और दिव्यांगजनों को आसानी से मार्ग मिल सके।

एयरपोर्ट स्टेशनों पर लंबी पैदल दूरी, ट्रॉली की सीमित उपलब्धता तथा एयरपोर्ट टर्मिनल और मेट्रो स्टेशन के बीच सुगम संपर्क की कमी को भी महत्वपूर्ण समस्या के रूप में चिन्हित किया गया है।

मनीलाइफ फाउंडेशन ने अपनी सिफारिशों में जहां संभव हो वहां डाउन एस्केलेटर की स्थापना, बेहतर संकेतक, बस एवं अन्य सार्वजनिक परिवहन से प्रभावी एकीकरण, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी में सुधार तथा भविष्य की मेट्रो परियोजनाओं में यूनिवर्सल एक्सेसिबिलिटी को अनिवार्य रूप से शामिल करने का सुझाव दिया है।

फाउंडेशन की सुचेता दलाल का मानना है कि यह अध्ययन मुंबई मेट्रो लाइन-3 में व्यावहारिक सुधारों का आधार बनेगा तथा भविष्य की शहरी परिवहन परियोजनाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज सिद्ध होगा।

यह अध्ययन मनीलाइफ फाउंडेशन द्वारा सार्वजनिक नीति, सुशासन और उपभोक्ता अधिकारों पर अपने निरंतर कार्य के अंतर्गत किया गया। इस परियोजना के फील्ड रिसर्च का कार्य फाउंडेशन के मार्गदर्शन में अशोका विश्वविद्यालय की इंटर्न अगम्या जैन और मिहिका ओमसीमा ने किया।

Saturday, 4 July 2026

एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई के चुनाव में 'एशियाटिक टुमॉरो' पैनल की ऐतिहासिक जीत

एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई के चुनाव में 'एशियाटिक टुमॉरो' पैनल की ऐतिहासिक जीत, कुमार केतकर पैनल पर मिली निर्णायक विजय

एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई के बहुप्रतीक्षित चुनाव में डॉ. विनय सहस्रबुद्धे के नेतृत्व वाले 'एशियाटिक टुमॉरो' पैनल ने शानदार और एकतरफा जीत दर्ज करते हुए वरिष्ठ पत्रकार कुमार केतकर के नेतृत्व वाले पैनल को निर्णायक रूप से पराजित कर दिया। कई महीनों तक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बाद संपन्न हुए इस चुनाव में कुल 517 सदस्यों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

अध्यक्ष पद पर डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने 352 मत प्राप्त कर विजय हासिल की, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी वरिष्ठ पत्रकार कुमार केतकर को 147 मत मिले। उपाध्यक्ष पद की चारों सीटों पर रमेश पतंगे (329), नितीश भारद्वाज (328), चंद्रप्रकाश द्विवेदी (327) और संजय देशमुख (323) विजयी रहे। सचिव पद पर विवेक गणपुले ने 352 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की। मैनेजिंग कमेटी के लिए प्राची मोघे (341), माधव भंडारी (339), मल्हार कुलकर्णी (333), प्रमोद बापट (329), वी. एम. चक्रवर्ती (324) तथा राजेश बेहरे (321) निर्वाचित हुए। स्क्रूटिनाइजिंग कमेटी में स्नेह नगरकर (370), अभिजीत मुले (362), माधवी नरसाले (362), उमंग काले (358), अमोल जाधव (349), मल्हार गोखले (348) तथा दत्तात्रय पंचवाघ (344) ने जीत दर्ज की।

इस परिणाम के साथ 'एशियाटिक टुमॉरो' पैनल ने सभी प्रमुख पदों और समितियों में विजय प्राप्त कर एशियाटिक सोसायटी के चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल किया। यह परिणाम संस्था के प्रशासन, संरक्षण और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए सदस्यों के स्पष्ट जनादेश के रूप में देखा जा रहा है।

लोकसभा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्रियों से डॉ. चिन्मय पण्ड्या की शिष्टाचार भेंट

लोकसभा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्रियों से डॉ. चिन्मय पण्ड्या की शिष्टाचार भेंट

जन्मशताब्दी वर्ष समारोह हेतु राष्ट्रीय नेतृत्व को आमंत्रण

अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने नई दिल्ली प्रवास के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तथा केंद्रीय मंत्रियों ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, चिराग पासवान, सर्बानंद सोनोवाल, भूपेन्द्र यादव एवं सी. आर. पाटिल से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें अखिल विश्व गायत्री परिवार की संस्थापिका वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों, अखंड दीपक शताब्दी समारोह तथा अन्य विशेष आयोजनों में सहभागिता हेतु आमंत्रित किया।

बैठकों के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों, भारतीय संस्कृति, वैज्ञानिक अध्यात्म, नैतिक नेतृत्व, युवा सशक्तिकरण, मूल्यनिष्ठ शिक्षा तथा विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की रचनात्मक भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक एवं प्रेरणादायी चर्चा हुई। साथ ही देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा योग, भारतीय ज्ञान परंपरा, समग्र व्यक्तित्व विकास एवं संस्कार आधारित शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों एवं प्रयासों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने जन्मशताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों और राष्ट्र निर्माण के व्यापक जनजागरण का अभियान बताते हुए सभी जनप्रतिनिधियों से सक्रिय सहभागिता का आग्रह किया।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रियों ने अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा समाज जागरण, संस्कार संवर्धन, नैतिक मूल्यों के प्रसार, सांस्कृतिक पुनर्जागरण तथा राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में किए जा रहे रचनात्मक एवं प्रेरणादायी कार्यों की सराहना की। उन्होंने माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी वर्ष समारोह एवं अखंड दीपक शताब्दी समारोह की सफलता, गरिमा एवं व्यापक जनप्रेरणा के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ व्यक्त करते हुए इन आयोजनों में सहभागिता का आश्वासन भी दिया। 

Friday, 3 July 2026

महाराष्ट्रातील माहितीचा अधिकार नियम, २०२६ ला स्थगिती : जनदबावाचा विजय की सरकारची धोरणात्मक माघार?

महाराष्ट्रातील माहितीचा अधिकार नियम, २०२६ ला स्थगिती : जनदबावाचा विजय की सरकारची धोरणात्मक माघार?

महाराष्ट्र सरकारने लागू केलेल्या माहितीचा अधिकार (आरटीआय) नियम, २०२६ संदर्भात मोठा वाद निर्माण झाल्यानंतर अखेर सरकारने या नियमांच्या अंमलबजावणीला तात्पुरती स्थगिती देण्याचा निर्णय घेतला आहे. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांच्या निर्देशानंतर या नियमांच्या अंमलबजावणीला स्थगिती देण्याची प्रक्रिया सुरू करण्यात आली. देशभरातील आरटीआय कार्यकर्ते, सामाजिक संस्था, कायदेतज्ज्ञ तसेच ज्येष्ठ समाजसेवक अण्णा हजारे यांनी या नियमांना तीव्र विरोध केला होता. अण्णा हजारे यांनी या विरोधात उपोषणाची घोषणाही केली होती. त्यामुळे सरकारने घेतलेला हा निर्णय केवळ प्रशासकीय नसून नागरिकांच्या अधिकारांशी संबंधित महत्त्वाच्या प्रश्नावर सरकारने एक पाऊल मागे घेतल्याचे मानले जात आहे.

महाराष्ट्र सरकारने १२ जून २०२६ रोजी राजपत्रात अधिसूचना प्रसिद्ध करून माहितीचा अधिकार नियम, २०२६ तात्काळ प्रभावाने लागू केले होते. या नियमांमध्ये अनेक महत्त्वपूर्ण बदल करण्यात आले होते. यापूर्वी आरटीआय अर्जासाठी ₹१० शुल्क आकारले जात होते. नवीन नियमांनुसार ते वाढवून ₹३० करण्यात आले. प्रथम अपीलचे शुल्क ₹२० वरून ₹५० करण्यात आले, तर द्वितीय अपीलचे शुल्क ₹२० वरून ₹१०० करण्यात आले. माहितीच्या प्रती मिळविण्यासाठीही शुल्क वाढविण्यात आले. ए-४ आकाराच्या प्रत्येक पानासाठी ₹५, तसेच स्कॅन अथवा डिजिटल प्रतीसाठीही ₹५ प्रति पान शुल्क निश्चित करण्यात आले. अभिलेखांचे निरीक्षण पहिले एक तास मोफत ठेवण्यात आले होते; त्यानंतर प्रत्येक तासासाठी ₹५० शुल्क आकारण्याची तरतूद करण्यात आली. दारिद्र्यरेषेखालील (बीपीएल) अर्जदारांना अर्ज शुल्कातून सवलत देण्यात आली होती; मात्र ५० पानांपेक्षा अधिक माहिती घेतल्यास त्यांनाही निर्धारित शुल्क भरावे लागणार होते.

नवीन नियमांनुसार एका आरटीआय अर्जात सामान्यतः केवळ एकाच विषयाचा समावेश असावा आणि अर्ज १५० शब्दांपेक्षा अधिक नसावा, अशी अट घालण्यात आली होती. एका अर्जात एकापेक्षा अधिक विषय असल्यास लोक माहिती अधिकारी केवळ पहिल्या विषयावरच कार्यवाही करेल आणि उर्वरित विषयांसाठी स्वतंत्र अर्ज करण्याचा सल्ला देईल, अशी तरतूद होती. आरटीआय कार्यकर्त्यांचे म्हणणे होते की, प्रत्यक्षात अनेक वेळा एका विषयाशी संबंधित अनेक मुद्द्यांवर माहिती मागविणे आवश्यक असते. त्यामुळे ही अट नागरिकांवर अतिरिक्त आर्थिक व प्रशासकीय भार टाकणारी ठरली असती.

या नियमांमधील सर्वाधिक वादग्रस्त तरतूद म्हणजे भारतीय नागरिकत्वाचा पुरावा अनिवार्य करणे होय. प्रत्येक आरटीआय अर्जासोबत भारतीय नागरिक असल्याचा स्वप्रमाणित छायाचित्रयुक्त ओळखपत्र जोडणे बंधनकारक करण्यात आले होते. ओळखपत्र जोडले नसल्यास अर्ज परत करण्याची तरतूदही करण्यात आली होती. विरोधकांचे म्हणणे होते की, माहितीचा अधिकार अधिनियम, २००५ मध्ये अशी कोणतीही अट नाही आणि राज्य सरकारला नियमांच्या माध्यमातून मूळ कायद्यात अतिरिक्त अटी घालण्याचा अधिकार नाही.

आरटीआय कार्यकर्ते आणि कायदेतज्ज्ञांच्या मते हे नियम माहिती मिळविण्याची प्रक्रिया सुलभ करण्याऐवजी अधिक कठीण करणारे होते. अर्ज शुल्कात मोठी वाढ, ओळखपत्र अनिवार्य केल्यामुळे गोपनीयता आणि सुरक्षेचे प्रश्न, एका अर्जात एकच विषय ठेवण्याची सक्ती, १५० शब्दांची मर्यादा आणि मूळ कायद्याच्या भावनेला छेद देणाऱ्या अतिरिक्त अटी या प्रमुख आक्षेप होत्या. अनेक संघटनांनी असा युक्तिवाद केला की, राज्य सरकार नियम करू शकते; मात्र त्या नियमांद्वारे नागरिकांचे मूलभूत वैधानिक अधिकार मर्यादित करू शकत नाही.

ज्येष्ठ समाजसेवक अण्णा हजारे यांनी या नियमांना लोकशाही अधिकारांवरील आघात असल्याचे सांगत आंदोलन आणि उपोषणाची घोषणा केली. त्यांच्या घोषणेनंतर सरकारवर राजकीय आणि सामाजिक दबाव वाढला. आरटीआय कार्यकर्ते, सामाजिक संस्था तसेच विरोधी पक्षांनीही हे नियम मागे घेण्याची मागणी केली. या पार्श्वभूमीवर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी नियमांच्या अंमलबजावणीला स्थगिती देण्याचा निर्णय घेतला.

सध्या सरकारने केवळ या नियमांच्या अंमलबजावणीला स्थगिती दिली आहे. म्हणजेच हे नियम सध्या लागू होणार नाहीत. भविष्यात सरकार आवश्यक सुधारणा करून नवी अधिसूचना जारी करू शकते. त्यामुळे हा अंतिम निर्णय मानता येणार नाही. सरकार लवकरच आरटीआय कार्यकर्त्यांशी चर्चा करणार असून, वादग्रस्त तरतुदींचा फेरविचार करून आवश्यक सुधारणा करण्याची किंवा पूर्वीचे नियम कायम ठेवण्याची शक्यता आहे.

माहितीचा अधिकार अधिनियम, २००५ हा भारतातील सर्वात प्रभावी पारदर्शकता कायद्यांपैकी एक मानला जातो. या कायद्यामुळे शासनाच्या कामकाजात उत्तरदायित्व आणि पारदर्शकता वाढली असून लाखो नागरिकांना त्यांच्या हक्कांचे संरक्षण करण्याचे प्रभावी साधन उपलब्ध झाले आहे. महाराष्ट्र सरकारने या नियमांना स्थगिती दिल्याने लोकशाही व्यवस्थेत जनमत, नागरी समाज आणि शांततामय आंदोलन यांची ताकद आजही प्रभावी असल्याचे पुन्हा एकदा सिद्ध झाले आहे. तसेच माहितीच्या अधिकारासारख्या महत्त्वाच्या कायद्यात कोणताही बदल करण्यापूर्वी व्यापक सार्वजनिक चर्चा आणि सर्व संबंधित घटकांशी सल्लामसलत होणे आवश्यक असल्याचेही या घटनाक्रमातून स्पष्ट झाले आहे. नागरिकांच्या अधिकारांशी संबंधित कायद्यांमध्ये बदल करताना पारदर्शकता, घटनात्मक मूल्ये आणि लोकसहभाग यांना सर्वोच्च प्राधान्य दिले गेले पाहिजे, हा संदेश या निर्णयातून अधोरेखित झाला आहे.

अनिल गलगली
माहितीचा अधिकार कार्यकर्ता

Wednesday, 1 July 2026

जौनपुर और ज़फराबाद के प्राचीन इतिहास के अध्ययन एवं संरक्षण हेतु पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान की पहल

जौनपुर और ज़फराबाद के प्राचीन इतिहास के अध्ययन एवं संरक्षण हेतु पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान की पहल

मीरा रोड पूर्व स्थित श्री लल्लन तिवारी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के सभागार में पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान द्वारा एक सभा आयोजित की गई, जिसमें जौनपुर एवं ज़फराबाद क्षेत्र के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक महत्व पर चर्चा की गई तथा उनके अध्ययन, संरक्षण और पुनर्परिभाषा से संबंधित प्रस्ताव पारित किए गए।

सभा को संबोधित करते हुए प्रतिष्ठान के सचिव एवं पत्रकार ओम प्रकाश ने सनातन परंपरा के वैश्विक सांस्कृतिक विस्तार तथा भगवती तारा एवं आदि पराशक्ति से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों पर अपने विचार रखे। वहीं श्री जयशंकर तिवारी ने जौनपुर और ज़फराबाद के ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और उनके प्राचीन स्वरूप के अध्ययन से संबंधित प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, शिक्षाविद लल्लन तिवारी, मीरा भायंदर की महापौर डिंपल मेहता, पूर्व सांसद संजय निरुपम, पूर्व मंत्री विद्या ठाकुर, विधायक नरेंद्र मेहता, पद्मश्री डॉ. सोमा घोष, भाजपा नेता आर. यू. सिंह सहित बड़ी संख्या में पूर्वांचल समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

सभा में पारित प्रस्तावों में जौनपुर जिले के ज़फराबाद स्थित मनहेच किला और मछलीशहर स्थित सगरेकोट क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कर संरक्षित करने, जमैथा एवं मादरडीह क्षेत्रों के व्यापक ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक अध्ययन, क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान पर शोध तथा अटाला मस्जिद से जुड़े विषयों पर संवाद एवं संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान खोजने की मांग शामिल रही।

सभा में यह भी निर्णय लिया गया कि भविष्य में बख्शा, राजेपुर, सिरकोनी, मल्हनी, मड़ियाहूं, केराकत एवं अन्य क्षेत्रों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के दस्तावेजीकरण और अध्ययन के लिए विस्तृत प्रस्ताव राज्य सरकार को प्रस्तुत किए जाएंगे।

दिलीप घोष को ‘डॉ. मुखर्जी स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया

दिलीप घोष को ‘डॉ. मुखर्जी स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया

पश्चिम बंगाल में सरकार गठन के बाद पहली बार मुंबई पहुंचे पश्चिम बंगाल के ग्राम्य विकास एवं पंचायत राज मंत्री दिलीप घोष ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न (मरणोपरांत) प्रदान किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता की रक्षा में डॉ. मुखर्जी का योगदान ऐतिहासिक रहा है और राष्ट्रहित में उनके योगदान को सर्वोच्च सम्मान मिलना चाहिए।

दिलीप घोष मुंबई भाजपा के उपाध्यक्ष अमरजीत मिश्रा की संस्था दीप कमल फाउंडेशन द्वारा आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। विलेपार्ले (पूर्व) स्थित दीनानाथ मंगेशकर सभागृह में भारतीय जनसंघ एवं भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिक, भाजपा कार्यकर्ता एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में दिलीप घोष ने कहा कि विभाजन के दौर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बंगाल के पश्चिमी हिस्से को भारत में बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व और संकल्प ने उस समय की परिस्थितियों में ऐतिहासिक प्रभाव छोड़ा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मुंबई भाजपा अध्यक्ष एवं विधायक अमित साटम ने की। इस अवसर पर सार्वजनिक जीवन एवं राष्ट्रसेवा में योगदान के लिए दिलीप घोष को ‘डॉ. मुखर्जी स्मृति सम्मान’ प्रदान किया गया।

समारोह में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री आशीष शेलार, राज्यसभा सांसद एवं वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम, पश्चिम बंगाल भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद राहुल सिन्हा सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।

पिछले 16 वर्षों से आयोजित किए जा रहे इस कार्यक्रम की संकल्पना एवं आयोजन के लिए भाजपा नेता अमरजीत मिश्रा की सभी वक्ताओं ने सराहना की। श्री मिश्रा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।

कार्यक्रम का भावनात्मक क्षण तब आया जब उन वीर माताओं का सम्मान किया गया, जिनके पुत्रों ने देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिया। शहीद सैनिक दिनकर नाळे की माता यशोदा नाळे तथा मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित कैप्टन आर. सुब्रमण्यम की माता सुब्बलक्ष्मी रामचंद्रन को शाल एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की हालिया चुनावी सफलता को जनसमर्थन और राजनीतिक परिवर्तन का संकेत बताया।

कार्यक्रम में बंगाली संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। बांग्ला संगीत, लोकधुनों, पारंपरिक बंगाली वेशभूषा और ढाक की प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं, “मी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी बोलतोय” नाटक के मंचन को भी सराहना मिली।

समारोह में मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों से आए बंगाली संगठनों के प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, भाजपा पदाधिकारियों तथा बड़ी संख्या में बंगाली समुदाय के नागरिकों ने सहभागिता की। राष्ट्रभक्ति और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न यह आयोजन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक सहभागिता का भी प्रतीक बना।

Wednesday, 24 June 2026

Maharashtra RTI Rules 2026: Reform or a New Question on Transparency?

Maharashtra RTI Rules 2026: Reform or a New Question on Transparency?

Were these controversial changes really necessary?

The Right to Information (RTI) is not merely a law; it is one of the most significant democratic tools that enables citizens to seek accountability from the government. The Right to Information Act, 2005, introduced by the Government of India, was designed to promote transparency, improve governance and strengthen public participation.

While states were empowered to frame procedural rules within their jurisdiction, such rules were expected to remain aligned with the spirit and objectives of the parent legislation. Against this backdrop, the Government of Maharashtra announced a set of amendments to its RTI rules on 12 June 2026, triggering widespread public discussion and debate.

The revised framework reportedly introduced provisions relating to higher fees, disclosure of purpose for seeking information, proof of citizenship requirements, restrictions concerning legal representation, and additional procedural conditions. The issue, however, is not only about what was changed but also how those changes were introduced.

When laws or rules that directly affect citizens are modified, public consultation, stakeholder engagement, and publication of draft proposals are generally regarded as important elements of good governance. Therefore, questions naturally emerged: Was there adequate consultation? Were citizen groups, RTI users, or institutional stakeholders sufficiently involved before implementation?

This is not the first time RTI-related procedural changes have generated public debate in Maharashtra. In 2012, during the tenure of then Chief Minister Prithviraj Chavan, a proposal introducing a 150-word limit on RTI applications had attracted opposition from RTI activists and civil society groups. The matter subsequently entered legal scrutiny. In that context, the return of procedural restrictions after many years revived concerns among transparency advocates.

Among the recent amendments, the most debated provision was the requirement that applicants disclose the purpose for seeking information. One of the long-standing principles associated with RTI practice has been that citizens should ordinarily not be required to justify why information is being requested. Consequently, the proposal invited strong reactions from several quarters.

Significantly, on 19 June 2026, the government withdrew the requirement relating to disclosure of purpose. That reversal within seven days raised further questions. If the provision was necessary, why was it withdrawn so quickly? If it was unnecessary, why was it introduced in the first place? Was sufficient legal and administrative review undertaken before notification?

During this period, discussions also intensified following public objections and reported protest warnings from senior social activist Anna Hazare.
However, an equally important issue often receives less attention.

Under Section 4(1)(b) of the RTI Act, 2005, public authorities are expected to proactively disclose key categories of information. Effective implementation of proactive disclosure could significantly reduce the need for citizens to file RTI applications.

This leads to broader governance questions. How many public authorities have fully implemented proactive disclosure obligations? How effective is record management? Are reasons for policy decisions being consistently documented and communicated?Has accountability been fixed where disclosure obligations were ignored?

At the same time, it may also be useful to evaluate the relationship between the Maharashtra State Information Commission and the government. If institutional coordination exists, an independent review could examine. How many recommendations were made by the Commission? How many were accepted by the state government? How many resulted in actual implementation?

The long-term strength of the RTI framework will not come from increasing procedural barriers but from improving transparency, strengthening records management, and expanding proactive disclosure. In a democracy, citizens seeking information should not be viewed as an administrative burden, but as participants in better governance.

Anil Galgali 
RTI Activist

महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम 2026 : सुधार या पारदर्शिता पर नया प्रश्न?

महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम 2026 : सुधार या पारदर्शिता पर नया प्रश्न?

क्या वास्तव में इतने विवादास्पद बदलावों की आवश्यकता थी?

सूचना का अधिकार केवल एक कानून नहीं, बल्कि लोकतंत्र में नागरिकों को शासन से जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रभावी माध्यम है। शासन के कार्यों में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और नागरिक सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 लागू किया। राज्यों को अपने प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र के अनुसार नियम बनाने की स्वतंत्रता दी गई, लेकिन यह अपेक्षा भी रखी गई कि नियम कानून की मूल भावना के अनुरूप हों।

इसी पृष्ठभूमि में महाराष्ट्र सरकार ने 12 जून 2026 को सूचना अधिकार नियमों में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव घोषित किए। सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से जारी इन संशोधनों ने नागरिकों, सूचना कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों के बीच व्यापक चर्चा को जन्म दिया।

इन बदलावों में शुल्क वृद्धि, सूचना मांगने का प्रयोजन बताने की शर्त, नागरिकता का प्रमाण, वकीलों की भूमिका पर सीमाएं तथा आवेदन प्रक्रिया में अतिरिक्त औपचारिकताएं जैसे प्रावधान शामिल थे। शासन की दृष्टि से इनका उद्देश्य प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना हो सकता है, लेकिन अनेक लोगों ने इसे सूचना तक पहुंच को जटिल बनाने वाला कदम माना।

सबसे बड़ा प्रश्न बदलावों की सामग्री नहीं, बल्कि उनकी प्रक्रिया को लेकर उठाया गया। सार्वजनिक हित से जुड़े कानूनों या नियमों में परिवर्तन करते समय सामान्यतः मसौदा सार्वजनिक किया जाता है, नागरिकों और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे जाते हैं तथा व्यापक चर्चा की जाती है। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या इन बदलावों से पहले पर्याप्त सार्वजनिक परामर्श किया गया था?

यह पहली बार नहीं है जब सूचना अधिकार व्यवस्था में ऐसे प्रश्न उठे हों। इससे पहले 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के कार्यकाल में RTI आवेदन के लिए 150 शब्दों की सीमा का विषय चर्चा में आया था। उस समय सूचना कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया और मामला न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचा। ऐसे में वर्षों बाद फिर आवेदन प्रक्रिया को सीमित करने जैसे कदमों की चर्चा ने पुराने विवादों को पुनः सामने ला दिया।

नए नियमों में सबसे अधिक विवाद सूचना मांगने का प्रयोजन बताने की शर्त को लेकर हुआ। सूचना का अधिकार अधिनियम की मूल भावना यह रही है कि नागरिक को जानकारी मांगने का कारण बताने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। यही कारण है कि इस प्रावधान को लेकर व्यापक आपत्तियां सामने आईं।

विशेष रूप से ध्यान देने योग्य बात यह रही कि 19 जून 2026 को सरकार ने सूचना के प्रयोजन वाली शर्त वापस ले ली। मात्र सात दिनों में निर्णय बदलने से कई प्रश्न उठे यदि यह शर्त आवश्यक थी तो वापस क्यों ली गई? और यदि आवश्यक नहीं थी तो प्रारंभ में जोड़ी क्यों गई? इस बीच वरिष्ठ समाजसेवी अण्णा हजारे द्वारा विरोध और आंदोलन की चेतावनी के बाद इस विषय पर प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां तेज होने की चर्चा भी सामने आई।

हालांकि इस पूरे विवाद के बीच एक महत्वपूर्ण प्रश्न अक्सर पीछे छूट जाता है। सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4(1)(ख) के तहत सार्वजनिक प्राधिकरणों को अनेक प्रकार की सूचनाएं स्वयं प्रकाशित करनी होती हैं। यदि इस व्यवस्था का प्रभावी पालन किया जाए तो नागरिकों को बार-बार आवेदन करने की आवश्यकता ही कम हो सकती है।

इसलिए चर्चा केवल नए नियमों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यह भी समीक्षा का विषय होना चाहिए कि कितने विभागों ने स्वप्रेरित सूचना प्रकटीकरण लागू किया? अभिलेख प्रबंधन कितना प्रभावी है? नीति निर्णयों के कारण सार्वजनिक करने में कितनी प्रगति हुई? लापरवाही के मामलों में कितनी जवाबदेही तय की गई? इसके साथ ही यह भी मूल्यांकन होना चाहिए कि महाराष्ट्र राज्य सूचना आयोग द्वारा समय-समय पर दी गई सिफारिशों में से कितनी सरकार ने स्वीकार कीं और उनमें से कितनी वास्तव में लागू हुईं।

सूचना अधिकार व्यवस्था की मजबूती अधिक शर्तें लगाने से नहीं, बल्कि पारदर्शी प्रशासन, बेहतर अभिलेख व्यवस्था और नागरिकों को समय पर सूचना उपलब्ध कराने से आएगी। लोकतंत्र में सूचना मांगने वाला नागरिक बाधा नहीं, बल्कि सुशासन का सहभागी होता है।

अनिल गलगली 
सूचना का अधिकार कार्यकर्ता

महाराष्ट्र माहिती अधिकार नियम 2026 : बदल की पारदर्शकतेवर प्रश्न?

महाराष्ट्र माहिती अधिकार नियम 2026 : बदल की पारदर्शकतेवर प्रश्न?

माहिती अधिकार अधिक सक्षम होणार की अधिक गुंतागुंतीचा?

माहितीचा अधिकार हा लोकशाहीतील नागरिकांचा एक महत्त्वाचा हक्क मानला जातो. शासनाच्या कामकाजात पारदर्शकता, उत्तरदायित्व आणि नागरिकांचा सहभाग वाढविण्यासाठी केंद्र शासनाने माहितीचा अधिकार अधिनियम, 2005 लागू केला. या कायद्यामुळे नागरिकांना शासनाकडे माहिती मागण्याचा वैधानिक अधिकार प्राप्त झाला.

राज्य शासनांना त्यांच्या प्रशासकीय कार्यपद्धतीनुसार नियम तयार करण्याचा अधिकार असला तरी त्या नियमांचा मूळ कायद्याच्या उद्देशाशी सुसंगत असणे अपेक्षित असते. याच पार्श्वभूमीवर महाराष्ट्र शासनाने 12 जून 2026 रोजी माहिती अधिकार नियमांमध्ये काही महत्त्वपूर्ण बदल जाहीर केले आणि त्यावरून राज्यभर चर्चा सुरू झाली.

नवीन नियमांमध्ये शुल्कवाढ, माहिती मागण्याचे प्रयोजन नमूद करणे, नागरिकत्वाचा पुरावा, काही प्रक्रियात्मक निर्बंध अशा अनेक बाबींचा समावेश करण्यात आला. शासनाच्या मते यामागे प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित करणे हा उद्देश असू शकतो; मात्र अनेक माहिती कार्यकर्ते आणि नागरिकांनी या बदलांबाबत गंभीर आक्षेप नोंदविले.

मुख्य प्रश्न बदलांचा नसून ते कसे आणि कोणत्या प्रक्रियेतून करण्यात आले याचा आहे. सार्वजनिक हिताशी संबंधित नियम बदलताना सामान्यतः संबंधित घटकांची मते मागविणे, मसुदा सार्वजनिक करणे आणि व्यापक चर्चा करणे ही सुशासनाची अपेक्षित पद्धत मानली जाते. त्यामुळे प्रश्न उपस्थित झाला की या बदलांपूर्वी पुरेसा लोकसहभाग झाला होता का?

यापूर्वी 2012 मध्ये तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यांच्या कार्यकाळात माहिती अर्जासाठी 150 शब्दांची मर्यादा प्रस्तावित करण्यात आली होती. त्यावेळी माहिती कार्यकर्त्यांनी त्याला विरोध केला आणि संबंधित विषय न्यायालयीन प्रक्रियेत गेला. अशा परिस्थितीत अनेक वर्षांनंतर पुन्हा अर्ज प्रक्रियेला अतिरिक्त अटी जोडण्याचा प्रयत्न का करण्यात आला, अशी चर्चा सुरू झाली.

नवीन नियमांमधील सर्वाधिक चर्चेत राहिलेली बाब म्हणजे माहिती मागण्याचे प्रयोजन नमूद करण्याची अट. माहिती अधिकाराच्या मूलभूत तत्त्वांनुसार नागरिकाने माहिती का मागितली हे विचारले जाणार नाही, अशी भूमिका अनेकदा मांडली गेली आहे. त्यामुळे ही अट समाविष्ट झाल्यानंतर नागरिक व सामाजिक संघटनांनी प्रश्न उपस्थित केले.
विशेष म्हणजे, 19 जून 2026 रोजी शासनाने माहितीचे प्रयोजन नमूद करण्याची अट मागे घेतली. अवघ्या सात दिवसांत झालेल्या या निर्णयबदलामुळे अनेक प्रश्न निर्माण झाले. जर अट आवश्यक होती तर ती मागे का घेण्यात आली? आणि जर ती आवश्यक नव्हती, तर ती समाविष्ट करण्याची गरज काय होती?

दरम्यान, ज्येष्ठ समाजसेवक अण्णा हजारे यांनी या विषयावर आंदोलनाचा इशारा दिल्यानंतर शासनस्तरावर हालचाली वाढल्याचे दिसून आले. मात्र या चर्चेत आणखी एक मूलभूत मुद्दा अनेकदा दुर्लक्षित राहतो. माहिती अधिकार कायद्याच्या कलम 4(1)(ब) नुसार सार्वजनिक प्राधिकरणांनी अनेक प्रकारची माहिती स्वयंस्फूर्तीने प्रसिद्ध करणे अपेक्षित आहे. जर ही तरतूद प्रभावीपणे अंमलात आली असती तर नागरिकांना मोठ्या प्रमाणात स्वतंत्र माहिती अर्ज करण्याची गरजच कमी झाली असती.

म्हणूनच प्रश्न केवळ नवीन नियमांचा नाही. प्रश्न असा आहे की शासनाने आधी अस्तित्वातील जबाबदाऱ्या कितपत पूर्ण केल्या आहेत? तसेच महाराष्ट्र राज्य माहिती आयोगाने वेळोवेळी केलेल्या शिफारशींपैकी किती शासनाने स्वीकारल्या आणि किती प्रत्यक्षात अंमलात आणल्या याचे स्वतंत्र मूल्यमापन होणे आवश्यक आहे.

माहिती अधिकार व्यवस्थेचे खरे बळ हे अर्जांवरील निर्बंधांमध्ये नसून पारदर्शक प्रशासन, सक्षम अभिलेख व्यवस्थापन आणि स्वयंस्फूर्त माहिती प्रकटनात आहे. आज गरज आहे ती माहिती मिळवणे कठीण करण्याची नव्हे, तर शासन अधिक खुले आणि उत्तरदायी बनवण्याची.

अनिल गलगली 
माहिती अधिकार कार्यकर्ते

Tuesday, 23 June 2026

“एक शाम आर्थर जेल के कैदियों के नाम” नारी सम्मान संगठन की अनोखी पहल

“एक शाम आर्थर जेल के कैदियों के नाम” नारी सम्मान संगठन की अनोखी पहल

संगीत, हास्य और संवेदना के माध्यम से कैदियों तक पहुंचा मानवीय संदेश

समाज में सकारात्मक परिवर्तन और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने की दिशा में एक अनोखी पहल करते हुए नारी सम्मान संगठन की प्रमुख डॉ. सुंदरी ठाकुर द्वारा “एक शाम आर्थर जेल के कैदियों के नाम” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जेल में अपनी सजा काट रहे कैदियों तक संवेदना, सकारात्मक सोच और सामाजिक पुनर्संवाद का संदेश पहुंचाना था।

कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जीवन में परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, परिवर्तन और आत्मविश्वास के अवसर हमेशा बने रहते हैं। कला, संगीत और संवाद के जरिए कैदियों के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और आत्मचिंतन का वातावरण बनाने का प्रयास किया गया।

इस अवसर पर अनेक प्रतिष्ठित कलाकारों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े व्यक्तित्वों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। कार्यक्रम में डॉ. विनय सिंह, प्रसिद्ध कॉमेडियन संजय शर्मा, गायक मिकी नरूला, गायिका चंचल लहरी, आल्फिया सिंगर, सोनी सिंगर सहित अन्य कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को यादगार बनाया।

इसके अतिरिक्त प्रणाली शाह, पूनम छाबड़िया, रूपल जौहरी, धर्मेश सिंह एवं उनकी टीम ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने संगीत, हास्य और प्रेरणादायक संवादों के माध्यम से उपस्थित कैदियों के साथ भावनात्मक जुड़ाव स्थापित किया। आयोजन का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि समाज के हर वर्ग तक मानवीय संवेदनाओं और सकारात्मक सोच को पहुंचाना था।

नारी सम्मान संगठन की प्रमुख डॉ. सुंदरी ठाकुर ने कहा कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति परिवर्तन और नई शुरुआत का अवसर पाने का अधिकारी है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज और संवेदनाओं के बीच एक सकारात्मक सेतु का कार्य करते हैं।

यह आयोजन सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदनशीलता और पुनर्वास की भावना को समर्पित रहा।

शांतिकुंज में गायत्री जयंती महापर्व से पूर्व निकाली गई भव्य दीप रैली

शांतिकुंज में गायत्री जयंती महापर्व से पूर्व निकाली गई भव्य दीप रैली

जीवन संग्राम का नाम अध्यात्म : डॉ. चिन्मय पण्ड्या

सच्ची उपासना मानव सेवा और सदाचार में निहित : शैफाली पण्ड्या

हरिद्वार स्थित गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में गायत्री जयंती महापर्व की पूर्व संध्या पर जन-जागरण एवं आत्मिक उन्नति के विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित भव्य दीप रैली का नेतृत्व अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय पण्ड्या तथा महिला मंडल प्रमुख श्रीमती शैफाली पण्ड्या ने मशाल एवं दीप प्रज्वलित कर किया।

सभा को संबोधित करते हुए देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि “जीवन के संग्राम का नाम अध्यात्म है।” उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में अनेक चुनौतियों, परिस्थितियों और आंतरिक द्वंद्वों का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में अध्यात्म ही वह शक्ति है, जो मनुष्य को स्थिरता, धैर्य और सही दिशा प्रदान करती है।

उन्होंने कहा कि जीवन की वास्तविकताओं को समझते हुए उनके बीच संतुलन स्थापित करना आवश्यक है। बाहरी संघर्षों के साथ-साथ मन के भीतर मौजूद इच्छाओं, क्रोध, लोभ और मोह जैसे विकारों पर विजय प्राप्त करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अध्यात्म जीवन को श्रेष्ठ बनाने की कला है। आत्मसंयम, सद्विचार और सेवा भाव को अपनाकर ही व्यक्ति जीवन संग्राम में विजयी बन सकता है। उन्होंने जन्मशताब्दी वर्ष-2026 के अंतर्गत गायत्री परिवार द्वारा वैश्विक स्तर पर संचालित विभिन्न गतिविधियों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की।

इससे पूर्व शांतिकुंज महिला मंडल प्रमुख श्रीमती शैफाली पण्ड्या ने कहा कि वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा ने अपने जीवन में गायत्री माता के करुणा, सेवा और मातृत्व के आदर्शों को साकार रूप दिया। उन्होंने अपने असीम प्रेम और आत्मीयता से संपूर्ण गायत्री परिवार को एक सूत्र में पिरोकर उसे संस्कारित एवं सशक्त परिवार का स्वरूप प्रदान किया।

उन्होंने कहा कि गायत्री माता ज्ञान, सद्बुद्धि और मानव कल्याण की प्रतीक हैं। वंदनीया माताजी ने इन्हीं आदर्शों के आधार पर नारी जागरण, संस्कार निर्माण और समाजोत्थान के कार्यों को नई दिशा दी। इस अवसर पर शांतिकुंज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों सहित देश-विदेश से आए हजारों साधक उपस्थित रहे।

शांतिकुंज मीडिया विभाग के अनुसार गायत्री जयंती महापर्व का मुख्य आयोजन बुधवार को होगा। इस दौरान अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुखद्वय का विशेष उद्बोधन होगा। साथ ही विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं के लिए गुरुदीक्षा एवं अन्य संस्कार निःशुल्क संपन्न कराए जाएंगे।

Tuesday, 16 June 2026

Inauguration of Vedvyas Flavy’s Pre-School Providing Free Education in Chandivali

Inauguration of Vedvyas Flavy’s Pre-School Providing Free Education in Chandivali

A new initiative to provide free education was launched with the inauguration of Vedvyas Flavy’s Pre-School at Safed Pul, Chandivali, Mumbai, through the efforts of Panchsheel Mahila Mandal. The school was inaugurated by RTI activist Anil Galgali. This social initiative was undertaken by Manali Subhash Gaikwad, while Subhash Gaikwad welcomed all dignitaries and citizens present at the event.

Speaking on the occasion, Anil Galgali stated that free and quality education is the foundation of overall social development and that such initiatives play an important role in bringing positive change to society.

The inauguration ceremony was attended by Educationist Ravi Nair, Adv. Amol Matele, Babu Batteli, Lawrence Baba D’Souza, Sunil Jain, Surya Gowda, Adv. Kailas Agawane, Krishna Nalawade, Ajay Shukla, Uttam Pokharkar, Hirachand Suryavanshi, Raju Sonawane, Rajendra Kamble, Jagnnath Udugade, Adv. Rehman, Banshi Singh, Aziz Khan, Mohsin Shaikh, Saeed Khan, Sarjerao Kamble, Ratnakar Shetty, Pushpendra Goswami, Pankaj Sharma, Pratik Prajapati, Swapnil Chavan, Ishwar Chand, Sandeep Pasalkar, Ram Sahu, Tausif Siddiqui, Dinanath Yadav, Shivaji Londhe, Datta Shelke, Rajshri Patil, Janhavi Dongre, Janhavi D’Souza, along with several other distinguished guests.


चांदिवली में निःशुल्क शिक्षा देने वाले वेदव्यास फ्लेवीज़ प्री स्कूल का शुभारंभ

चांदिवली में निःशुल्क शिक्षा देने वाले वेदव्यास फ्लेवीज़ प्री स्कूल का शुभारंभ

मुंबई के चांदिवली स्थित सफेद पुल परिसर में पंचशील महिला मंडल के माध्यम से निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने वाले वेदव्यास फ्लेवीज़ प्री स्कूल का शुभारंभ किया गया। इस स्कूल का उद्घाटन आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली के हस्ते संपन्न हुआ। इस उपक्रम की पहल मनाली सुभाष गायकवाड द्वारा की गई। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों एवं नागरिकों का स्वागत सुभाष गायकवाड ने किया।

इस अवसर पर शिक्षाविद रवि नायर, एड अमोल मातेले, बाबू बत्तेली, लॉरेंस बाबा डिसोझा, सुनील जैन, सूर्या गौडा, एड कैलास आगवणे, कृष्णा नलावडे, अजय शुक्ला, उत्तम पोखरकर, हिराचंद सूर्यवंशी, राजू सोनवणे, राजेंद्र कांबळे, जगन्नाथ उदूगडे, एड रेहमान, बंशी सिंह, अजीज खान, मोहसिन शेख, सईद खान, सर्जेराव कांबळे, रत्नाकर शेट्टी, पुष्पेंद्र गोस्वामी, पंकज शर्मा, प्रतीक प्रजापती, स्वप्निल चव्हाण, ईश्वर चंद, संदीप पासलकर, राम साहू, तौसिफ सिद्दीकी, दीनानाथ यादव, शिवाजी लोंढे, दत्ता शेळके, राजश्री पाटील, जान्हवी डोंगरे एवं जान्हवी डिसोझा सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

इस अवसर पर अनिल गलगली ने कहा कि निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा समाज के सर्वांगीण विकास का आधार है तथा ऐसे उपक्रम समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

चांदिवली में निःशुल्क शिक्षा देने वाले वेदव्यास फ्लेवीज़ प्री स्कूल का शुभारंभ

चांदिवली में निःशुल्क शिक्षा देने वाले वेदव्यास फ्लेवीज़ प्री स्कूल का शुभारंभ

मुंबई के चांदिवली स्थित सफेद पुल परिसर में पंचशील महिला मंडल के माध्यम से निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने वाले वेदव्यास फ्लेवीज़ प्री स्कूल का शुभारंभ किया गया। इस स्कूल का उद्घाटन आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली के हस्ते संपन्न हुआ। इस उपक्रम की पहल मनाली सुभाष गायकवाड द्वारा की गई। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों एवं नागरिकों का स्वागत सुभाष गायकवाड ने किया।

इस अवसर पर शिक्षाविद रवि नायर, एड अमोल मातेले, बाबू बत्तेली, लॉरेंस बाबा डिसोझा, सुनील जैन, सूर्या गौडा, एड कैलास आगवणे, कृष्णा नलावडे, अजय शुक्ला, उत्तम पोखरकर, हिराचंद सूर्यवंशी, राजू सोनवणे, राजेंद्र कांबळे, जगन्नाथ उदूगडे, एड रेहमान, बंशी सिंह, अजीज खान, मोहसिन शेख, सईद खान, सर्जेराव कांबळे, रत्नाकर शेट्टी, पुष्पेंद्र गोस्वामी, पंकज शर्मा, प्रतीक प्रजापती, स्वप्निल चव्हाण, ईश्वर चंद, संदीप पासलकर, राम साहू, तौसिफ सिद्दीकी, दीनानाथ यादव, शिवाजी लोंढे, दत्ता शेळके, राजश्री पाटील, जान्हवी डोंगरे एवं जान्हवी डिसोझा सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

इस अवसर पर अनिल गलगली ने कहा कि निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा समाज के सर्वांगीण विकास का आधार है तथा ऐसे उपक्रम समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Monday, 15 June 2026

चांदिवली येथे मोफत शिक्षण देणाऱ्या वेदव्यास फ्लेवीज प्री स्कूलचे उद्घाटन

चांदिवली येथे मोफत शिक्षण देणाऱ्या वेदव्यास फ्लेवीज प्री स्कूलचे उद्घाटन

मुंबईतील चांदिवली येथील सफेद पूल परिसरात पंचशील महिला मंडळाच्या माध्यमातून लहान मुलांना मोफत व गुणवत्तापूर्ण शिक्षण उपलब्ध करून देण्याच्या उद्देशाने सुरू करण्यात आलेल्या वेदव्यास फ्लेवीज प्री स्कूलचे उद्घाटन करण्यात आले. या शाळेचे उद्घाटन माहिती अधिकार कार्यकर्ते अनिल गलगली यांच्या हस्ते संपन्न झाले.

या सामाजिक उपक्रमाची संकल्पना व पुढाकार मनाली सुभाष गायकवाड यांनी घेतला असून कार्यक्रमात उपस्थित मान्यवर व नागरिकांचे स्वागत सुभाष गायकवाड यांनी केले.

या प्रसंगी शिक्षण तज्ञ रवि नायर, ॲड. अमोल मातेले, बाबू बत्तेली, लॉरेन्स बाबा डिसोझा, सुनील जैन, सूर्या गौडा, ॲड. कैलास आगवणे, कृष्णा नलावडे, अजय शुक्ला, उत्तम पोखरकर, हिराचंद सूर्यवंशी, राजू सोनवणे, राजेंद्र कांबळे, जगन्नाथ उदूगडे, सुभाष गायकवाड, ॲड. रेहमान, बंशी सिंह, अजीज खान, मोहसिन शेख, सईद खान, सर्जेराव कांबळे, रत्नाकर शेट्टी, पुष्पेंद्र गोस्वामी, पंकज शर्मा, प्रतीक प्रजापती, स्वप्निल चव्हाण, ईश्वर चंद, संदीप पासलकर, राम साहू, तौसिफ सिद्दीकी, दीनानाथ यादव, शिवाजी लोंढे, दत्ता शेळके, राजश्री पाटील, जान्हवी डोंगरे आणि जान्हवी डिसोझा यांच्यासह अनेक मान्यवर उपस्थित होते.

यावेळी अनिल गलगली म्हणाले की, समाजातील प्रत्येक मुलापर्यंत शिक्षण पोहोचणे ही काळाची गरज असून मोफत शिक्षणाची संकल्पना सामाजिक समतेचा पाया मजबूत करते. आर्थिक परिस्थितीमुळे कोणतेही मूल शिक्षणापासून वंचित राहू नये, या उद्देशाने सुरू करण्यात आलेले असे उपक्रम समाजात सकारात्मक बदल घडवून आणण्यासाठी महत्त्वपूर्ण ठरतात. मोफत, सुलभ आणि गुणवत्तापूर्ण शिक्षण देण्याचा हा उपक्रम चांदिवली परिसरातील अनेक कुटुंबांसाठी आशेचा किरण ठरणार असल्याचे मत यावेळी व्यक्त करण्यात आले.



Friday, 5 June 2026

महाराष्ट्र महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष बनने पर अलका पांडेय का भव्य अभिनंदन

महाराष्ट्र महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष बनने पर अलका पांडेय का भव्य अभिनंदन

हिंदी साहित्य भारती के महाराष्ट्र महिला प्रकोष्ठ के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति के उपलक्ष्य में वरिष्ठ साहित्यकार, समाजसेवी एवं अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका पांडेय का भव्य अभिनंदन समारोह मुंबई प्रेस क्लब में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह का आयोजन प्रसिद्ध पत्रिका क्राइम पॉइंट की संपादक कमलेश गुप्ता द्वारा किया गया।

हिंदी साहित्य भारती के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रविंद्र शुक्ल, वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. दयानंद तिवारी तथा सुनीता मंडल द्वारा व्यक्त विश्वास के आधार पर अलका पांडेय को महाराष्ट्र महिला प्रकोष्ठ का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है। इसी उपलब्धि के सम्मान में आयोजित समारोह साहित्य, समाज सेवा और सांस्कृतिक जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति से विशेष रूप से गौरवान्वित हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. दयानंद तिवारी ने की, जबकि पवन तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में ममता झा, सूचना अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली तथा रामकुमार त्रिपाठी शामिल रहे। कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन पल्लवी रानी ने किया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. दयानंद तिवारी ने कहा कि अलका पांडेय की सक्रियता, संगठन क्षमता, साहित्यिक प्रतिबद्धता और सामाजिक सरोकारों को देखते हुए उन्हें इस पद के लिए सर्वाधिक उपयुक्त पाया गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में महाराष्ट्र महिला प्रकोष्ठ नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा और हिंदी साहित्य भारती को नई दिशा एवं गति मिलेगी।

मुख्य अतिथि पवन तिवारी ने अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए अलका पांडेय के साहित्यिक, सामाजिक और संगठनात्मक योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके कार्य प्रेरणादायी हैं तथा उनकी नई जिम्मेदारी संगठन को और अधिक सशक्त बनाएगी।

विशिष्ट अतिथि ममता झा ने महाराष्ट्र महिला इकाई को मजबूत एवं सक्रिय बनाने पर बल देते हुए अलका पांडेय की नेतृत्व क्षमता और समाज के प्रति समर्पण की प्रशंसा की। अनिल गलगली और रामकुमार त्रिपाठी ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके सफल एवं उज्ज्वल कार्यकाल की कामना की तथा कमलेश गुप्ता द्वारा आयोजित इस अभिनंदन समारोह की सराहना की।

सम्मान के प्रत्युत्तर में अलका पांडेय ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि उन सभी साहित्यकारों, समाजसेवियों और विशेष रूप से महिलाओं का सम्मान है जो समाज और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में निरंतर योगदान दे रही हैं। उन्होंने आयोजन के लिए कमलेश गुप्ता का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका विश्वास और स्नेह उनके लिए अमूल्य है। उन्होंने हिंदी साहित्य भारती के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रविंद्र शुक्ल, प्रो. दयानंद तिवारी और सुनीता मंडल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि यह पद केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि साहित्य, समाज और संस्कृति की सेवा का अवसर है, जिसका निर्वहन वे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ करेंगी।

समारोह में सेवा सदन प्रसाद, ओमप्रकाश पांडेय, नीरज ठाकुर, अनीता झा, सीमा त्रिवेदी, कविता झा, रोमा झा, चंद्रिका व्यास, दिव्या जैन, कलावती मोरया, डॉ. अनु, मृदुल, मनीषा सिंह, सूर्यकांत शुक्ला, रामस्वरूप साहू, नंदलाल क्षितिज, रोशनी किरण, प्रमेन्द्र सिंह, सैयद जाहिद अली, रियासत, संतोष साहू, हेरम्ब तिवारी, चंद्रकांत जाधव, निरज कुमार सहित अनेक साहित्यकार, समाजसेवी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

अंत में रामकुमार त्रिपाठी ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजकों का आभार व्यक्त किया।

यह अभिनंदन समारोह केवल एक सम्मान कार्यक्रम नहीं, बल्कि साहित्य, समाज सेवा और महिला सशक्तिकरण के प्रति समर्पित व्यक्तित्वों के सम्मान का प्रेरणादायी उत्सव बन गया, जिसकी गरिमा, आत्मीयता और सकारात्मक संदेश लंबे समय तक स्मरणीय रहेंगे।

महाराष्ट्र महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष बनने पर अलका पांडेय का भव्य अभिनंदन

महाराष्ट्र महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष बनने पर अलका पांडेय का भव्य अभिनंदन

हिंदी साहित्य भारती के महाराष्ट्र महिला प्रकोष्ठ के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति के उपलक्ष्य में वरिष्ठ साहित्यकार, समाजसेवी एवं अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका पांडेय का भव्य अभिनंदन समारोह मुंबई प्रेस क्लब में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह का आयोजन प्रसिद्ध पत्रिका क्राइम पॉइंट की संपादक कमलेश गुप्ता द्वारा किया गया।

हिंदी साहित्य भारती के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रविंद्र शुक्ल, वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. दयानंद तिवारी तथा सुनीता मंडल द्वारा व्यक्त विश्वास के आधार पर अलका पांडेय को महाराष्ट्र महिला प्रकोष्ठ का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है। इसी उपलब्धि के सम्मान में आयोजित समारोह साहित्य, समाज सेवा और सांस्कृतिक जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति से विशेष रूप से गौरवान्वित हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. दयानंद तिवारी ने की, जबकि पवन तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में ममता झा, सूचना अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली तथा रामकुमार त्रिपाठी शामिल रहे। कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन पल्लवी रानी ने किया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. दयानंद तिवारी ने कहा कि अलका पांडेय की सक्रियता, संगठन क्षमता, साहित्यिक प्रतिबद्धता और सामाजिक सरोकारों को देखते हुए उन्हें इस पद के लिए सर्वाधिक उपयुक्त पाया गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में महाराष्ट्र महिला प्रकोष्ठ नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा और हिंदी साहित्य भारती को नई दिशा एवं गति मिलेगी।

मुख्य अतिथि पवन तिवारी ने अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए अलका पांडेय के साहित्यिक, सामाजिक और संगठनात्मक योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके कार्य प्रेरणादायी हैं तथा उनकी नई जिम्मेदारी संगठन को और अधिक सशक्त बनाएगी।

विशिष्ट अतिथि ममता झा ने महाराष्ट्र महिला इकाई को मजबूत एवं सक्रिय बनाने पर बल देते हुए अलका पांडेय की नेतृत्व क्षमता और समाज के प्रति समर्पण की प्रशंसा की। अनिल गलगली और रामकुमार त्रिपाठी ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके सफल एवं उज्ज्वल कार्यकाल की कामना की तथा कमलेश गुप्ता द्वारा आयोजित इस अभिनंदन समारोह की सराहना की।

सम्मान के प्रत्युत्तर में अलका पांडेय ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि उन सभी साहित्यकारों, समाजसेवियों और विशेष रूप से महिलाओं का सम्मान है जो समाज और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में निरंतर योगदान दे रही हैं। उन्होंने आयोजन के लिए कमलेश गुप्ता का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका विश्वास और स्नेह उनके लिए अमूल्य है। उन्होंने हिंदी साहित्य भारती के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रविंद्र शुक्ल, प्रो. दयानंद तिवारी और सुनीता मंडल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि यह पद केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि साहित्य, समाज और संस्कृति की सेवा का अवसर है, जिसका निर्वहन वे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ करेंगी।

समारोह में सेवा सदन प्रसाद, ओमप्रकाश पांडेय, नीरज ठाकुर, अनीता झा, सीमा त्रिवेदी, कविता झा, रोमा झा, चंद्रिका व्यास, दिव्या जैन, कलावती मोरया, डॉ. अनु, मृदुल, मनीषा सिंह, सूर्यकांत शुक्ला, रामस्वरूप साहू, नंदलाल क्षितिज, रोशनी किरण, प्रमेन्द्र सिंह, सैयद जाहिद अली, रियासत, संतोष साहू, हेरम्ब तिवारी, चंद्रकांत जाधव, निरज कुमार सहित अनेक साहित्यकार, समाजसेवी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

अंत में रामकुमार त्रिपाठी ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजकों का आभार व्यक्त किया।

यह अभिनंदन समारोह केवल एक सम्मान कार्यक्रम नहीं, बल्कि साहित्य, समाज सेवा और महिला सशक्तिकरण के प्रति समर्पित व्यक्तित्वों के सम्मान का प्रेरणादायी उत्सव बन गया, जिसकी गरिमा, आत्मीयता और सकारात्मक संदेश लंबे समय तक स्मरणीय रहेंगे।

'पीवीएस कप 2026' जीतकर नगरसेवक बने चैंपियन

'पीवीएस कप 2026' जीतकर नगरसेवक बने चैंपियन

पत्रकार विकास संघ का क्रिकेट टूर्नामेंट बना एकता, सौहार्द और सामाजिक समरसता का प्रतीक

पत्रकार विकास संघ द्वारा आयोजित बहुप्रतीक्षित 'पीवीएस कप 2026' क्रिकेट टूर्नामेंट का भव्य आयोजन गोरेगांव पश्चिम स्थित गोरेगांव स्पोर्ट्स क्लब में उत्साह, उमंग और खेल भावना के साथ संपन्न हुआ। पत्रकारों, पुलिस अधिकारियों, वकीलों, कारोबारियों, कवियों और जनप्रतिनिधियों की टीमों के बीच हुए रोमांचक मुकाबलों ने पूरे दिन दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

आठ टीमों के बीच खेले गए मुकाबलों के बाद फाइनल मैच में नगरसेवकों की टीम ने मुंबई पुलिस जोन-12 की टीम को पराजित कर 'पीवीएस कप 2026' की चमचमाती ट्रॉफी अपने नाम की। विजेता टीम के खिलाड़ियों ने शानदार बल्लेबाजी, गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण का प्रदर्शन कर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी।

यह आयोजन केवल क्रिकेट प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाकर सामाजिक एकता, भाईचारे और सहयोग का सशक्त संदेश देने वाला आयोजन साबित हुआ। पत्रकार विकास संघ के अध्यक्ष आनंद मिश्र, महासचिव अजय सिंह तथा प्रमुख सलाहकार सुनील सिंह ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संचालन शैलेंद्र श्रीवास्तव ने किया, जबकि आशीष पांडेय, अर्जुन कांबले और यश उपाध्याय ने शानदार कमेंट्री के माध्यम से मैचों का रोमांच बनाए रखा।

इस अवसर पर पूर्व मंत्री एवं विधायक असलम शेख, पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह, पूर्व मंत्री एवं विधायक विद्या ठाकुर, विधायक संजय उपाध्याय, पूर्व राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त अमरजीत मिश्र, श्री सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष पवन त्रिपाठी, शिवसेना (उबाठा) के प्रवक्ता आनंद दुबे, प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक एवं समाजसेवी डॉ. श्याम अग्रवाल, मुंबई भाजपा के महासचिव विनोद शेलार, मनपा सभागृह के गुट नेता गणेश खणकर, उपनगर स्थापत्य समिति की अध्यक्ष संगीता शर्मा, नगरसेवक योगेश वर्मा, धवल वोरा, सिद्धार्थ शर्मा, रफीक शेख, मनोनीत नगरसेवक वीरेंद्र चौधरी सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

कार्यक्रम में हिंदी पत्रकार संघ के अध्यक्ष आदित्य दुबे, क्राइम रिपोर्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल सिंह, उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त पत्रकार संघ के अध्यक्ष हेमंत तिवारी, नवभारत के संपादक बृजमोहन पांडेय, अखंड राजपूताना सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरपी सिंह, व्यापारी संघ पंचदेव के शीतला यादव एवं नीलेश भाई सहित बड़ी संख्या में पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और व्यवसायी उपस्थित रहे।

आयोजन का विशेष आकर्षण मशहूर क्रिकेट कोच एवं स्टार स्पोर्ट्स के आधिकारिक कमेंटेटर ज्वाला सिंह की उपस्थिति रही। वहीं कार्यक्रम की सफलता में भानुप्रकाश मिश्रा, अमर त्रिपाठी, अभय मिश्र, श्रीश उपाध्याय, रणजीत सिंह श्रीनेत, भगवती मिश्रा, धर्मेंद्र तिवारी, शमीउल्ला खान, मुरारी सिंह, ब्रिजेश त्रिपाठी, चेतन महोबिया, विपुल मीनावाला, देवांश मिश्रा, शिवलाल यादव, विक्रम जाधव, कवि महेश दुबे, संतोष पांडेय, तुफेल खान, अब्दुल चौधरी एवं अन्य सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

सुबह से देर रात तक चले मुकाबलों ने दर्शकों को लगातार रोमांचित रखा। खेल भावना, आपसी सौहार्द और सामाजिक समरसता का संदेश देने वाला यह आयोजन प्रतिभागियों और दर्शकों के लिए लंबे समय तक यादगार बना रहेगा।

Wednesday, 3 June 2026

भाषा विवाद का माध्यम नहीं हो सकती : मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

भाषा विवाद का माध्यम नहीं हो सकती : मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के हिंदी पत्रकारिता द्विशताब्दी समारोह में बोले मुख्यमंत्री

मुंबई। "भाषा कभी विवाद का माध्यम नहीं हो सकती। हिंदी इस देश की संपर्क भाषा है। भाषाओं के नाम पर विवाद पैदा कर वोट और सत्ता तो हासिल की जा सकती है, लेकिन इससे देश का ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत कमजोर होगी।" यह विचार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई हिंदी पत्रकार संघ द्वारा प्रभादेवी स्थित रविंद्र नाट्य मंदिर में आयोजित हिंदी पत्रकारिता द्विशताब्दी समारोह में व्यक्त किए।

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुभाषी होना एक महत्वपूर्ण योग्यता है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी मातृभाषा अवश्य सीखनी चाहिए, क्योंकि मातृभाषा हमारी स्वाभाविक ज्ञान-प्रक्रिया का आधार होती है। साथ ही यदि हम मातृभाषा के अतिरिक्त देश की अन्य भाषाएं भी सीखते हैं तो व्यापक राष्ट्रीय ज्ञान और अनुभव से जुड़ सकते हैं।

उन्होंने कहा कि विश्व के जिन देशों ने उल्लेखनीय विकास किया है, वहां शिक्षा का प्रमुख माध्यम उनकी मातृभाषाएं रही हैं। पत्रकारिता पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज समाचारों की विश्वसनीयता के सामने बड़ी चुनौती है। विशेष रूप से डिजिटल मीडिया के विस्तार के बाद यह संकट और बढ़ा है। हालांकि उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह एक अस्थायी दौर है और पत्रकारिता पुनः अपने मूल मूल्यों एवं विश्वसनीयता के आधार पर स्थापित होगी।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि हिंदी और भारतीय भाषाओं के बीच किसी प्रकार का टकराव नहीं है। हिंदी तभी आगे बढ़ेगी जब क्षेत्रीय भाषाएं भी समान रूप से विकसित होंगी। उन्होंने भी मातृभाषा में शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।

मुंबई भाजपा अध्यक्ष एवं विधायक अमित साटम ने कहा कि हिंदी एक ऐसा सूत्र है जो पूरे देश को जोड़ता है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के लिए हिंदी का विरोध एक फैशन बन गया है, जबकि वे स्वयं अपने बच्चों को विदेशी भाषाएं सिखाने में रुचि रखते हैं।

मंत्री एवं विधायक मंगलप्रभात लोढ़ा ने कहा कि हिंदी जोड़ने वाली भाषा है और समाज को विभाजित करना भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है।

समारोह में सम्मानित अभिनेता विनीत कुमार सिंह ने कहा कि जिस प्रकार माला को एक सूत्र बांधकर रखता है, उसी प्रकार भारत को जोड़ने वाला सूत्र हिंदी हो सकती है। उन्होंने उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि फिल्म ‘छावा’ में उन्होंने कवि कलश की भूमिका निभाई थी। इस अवसर पर उन्होंने कवि कलश की रचना भी प्रस्तुत की।

कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता प्रोफेसर राममोहन पाठक ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) भले ही चुनौतीपूर्ण प्रतीत होती हो, लेकिन वह किसी संपादक जैसी सोच और विवेक का स्थान नहीं ले सकती।

मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के महासचिव विजय सिंह कौशिक ने कहा कि हिंदी का पहला समाचार पत्र एक गैर-हिंदी भाषी प्रदेश कोलकाता से प्रकाशित हुआ था और आज उसके 200 वर्ष पूरे होने का समारोह एक मराठी भाषी राज्य महाराष्ट्र में मनाया जा रहा है। यह भारत की विविधता में एकता की महान परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के प्रारंभिक दौर में मराठी पत्रकारों के योगदान को भी स्मरण किया।

सम्मानित हस्तियां

समारोह में हिंदी भाषा, पत्रकारिता और जनसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त समिति, लखनऊ के अध्यक्ष हेमंत तिवारी, अभिनेता विनीत कुमार सिंह, वरिष्ठ पत्रकार अवधेश व्यास, गंगाधर ढोबले तथा कुमुद संघवी चावरे को सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रोफेसर राममोहन पाठक तथा लोकगायक सुरेश शुक्ला का विशेष अभिनंदन भी किया।

इस अवसर पर पत्रकारों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों तथा सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विधायक राजहंस सिंह, संजय उपाध्याय, मुरजी पटेल, योगायतन समूह के अध्यक्ष एवं हिंदी प्रेमी डॉ. राजेंद्र प्रताप सिंह, उद्योगपति ज्ञानप्रकाश सिंह, सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी, भाजपा उत्तर भारतीय मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष संजय पांडेय, उत्तर भारतीय संघ के अध्यक्ष संतोष आर. एन. सिंह, मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के अध्यक्ष आदित्य दुबे, उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र मिश्र, कार्यकारिणी सदस्य हरिगोविंद विश्वकर्मा, अखिलेश मिश्र, अखिलेश तिवारी, अशोक शुक्ला तथा सैयद सलमान सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

Detailed Discussion on RTI Reforms and Transparency

Detailed Discussion on RTI Reforms and Transparency

RTI Activist Anil Galgali Pays Courtesy Visit to Chief Information Commissioner Rahul Pandey

RTI activist Anil Galgali paid a courtesy visit to the Chief Information Commissioner of Maharashtra, Rahul Pandey. During the meeting, detailed discussions were held on various important issues concerning the implementation of the Right to Information Act, 2005.

The discussion focused on the current status of RTI applications, first appeals, and second appeals filed before public authorities across Maharashtra, pending cases, and the challenges faced by citizens in accessing information. Various measures aimed at enhancing transparency, accountability, and efficiency in the RTI system were also deliberated upon.

On the occasion, Anil Galgali requested that the State Information Commission issue necessary directions for the introduction of dedicated online RTI portals for the Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) and the Mumbai Metropolitan Region Development Authority. He pointed out that while several government departments in Maharashtra have already adopted online RTI systems, citizens continue to face inconvenience due to the absence of comprehensive online RTI mechanisms in these two major institutions.

He also proposed the creation of a public database containing RTI applications, replies provided by departments, documents disclosed, and decisions rendered under the RTI Act. Such a database would reduce the need for repeated applications seeking similar information and would further strengthen transparency in governance.

The meeting also discussed concerns regarding the growing number of second appeals being filed by a single applicant in large volumes. It was observed that such cases place an additional burden on the Commission's functioning and may impact the timely disposal of appeals filed by other citizens.

Responding to these concerns, Chief Information Commissioner Rahul Pandey emphasized that all public authorities in the State must strictly comply with Section 4 of the Right to Information Act, 2005. He stated that the Commission is taking necessary steps to ensure that maximum information is made available to citizens through proactive disclosure. Effective implementation of Section 4, he noted, would significantly reduce the number of RTI applications while making governance more transparent and citizen-centric.

Concluding the meeting, Anil Galgali described the discussion as constructive and forward-looking, emphasizing that it would contribute positively towards strengthening the RTI framework, promoting digital empowerment, and enhancing transparency in public administration.

आरटीआई व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता पर विस्तृत चर्चा

आरटीआई व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता पर विस्तृत चर्चा

मुख्य सूचना आयुक्त राहुल पांडे से सूचना अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली की सद्भावना भेंट

महाराष्ट्र राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त राहुल पांडे से सूचना अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली ने सद्भावना भेंट की। इस दौरान सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक में महाराष्ट्र के विभिन्न सार्वजनिक प्राधिकरणों में दायर होने वाले आरटीआई आवेदन, प्रथम अपील एवं द्वितीय अपीलों की वर्तमान स्थिति, लंबित मामलों तथा नागरिकों को सूचना प्राप्त करने में आने वाली कठिनाइयों की समीक्षा की गई। साथ ही सूचना अधिकार व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता लाने के लिए आवश्यक उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

इस अवसर पर अनिल गलगली ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) तथा मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) के लिए स्वतंत्र ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल प्रारंभ करने हेतु राज्य सूचना आयोग द्वारा आवश्यक निर्देश जारी किए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि राज्य के अनेक विभागों में ऑनलाइन आरटीआई व्यवस्था उपलब्ध है, किंतु मुंबई की इन दोनों महत्वपूर्ण संस्थाओं में अभी तक समग्र ऑनलाइन आरटीआई प्रणाली लागू नहीं होने के कारण नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने यह भी मांग की कि सूचना के अधिकार के अंतर्गत दायर आवेदनों, विभागों द्वारा दिए गए उत्तरों, उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों तथा निर्णयों का एक सार्वजनिक डेटाबेस तैयार किया जाए। इससे एक ही प्रकार की जानकारी के लिए बार-बार आवेदन करने की आवश्यकता कम होगी तथा प्रशासनिक पारदर्शिता को और अधिक मजबूती मिलेगी।

चर्चा के दौरान एक ही आवेदक द्वारा हजारों की संख्या में दायर की जा रही द्वितीय अपीलों के बढ़ते मामलों पर भी चिंता व्यक्त की गई। इस प्रकार के मामलों से आयोग के कार्यभार में वृद्धि होती है तथा अन्य आवेदकों के मामलों के निपटारे में विलंब होने की संभावना रहती है।

इस पर मुख्य सूचना आयुक्त राहुल पांडे ने कहा कि राज्य के सभी सार्वजनिक प्राधिकरणों को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 4 का कड़ाई से पालन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि नागरिकों को अधिकतम जानकारी स्वप्रकाशित (Proactive Disclosure) रूप में उपलब्ध कराने के लिए आयोग आवश्यक कदम उठा रहा है। उनका मानना है कि धारा 4 का प्रभावी क्रियान्वयन होने पर आरटीआई आवेदनों की संख्या में कमी आएगी और प्रशासन अधिक पारदर्शी तथा नागरिक-केंद्रित बनेगा।

बैठक के अंत में अनिल गलगली ने कहा कि सूचना अधिकार व्यवस्था में सुधार, डिजिटल सशक्तिकरण तथा पारदर्शी प्रशासन की दिशा में यह चर्चा अत्यंत सकारात्मक और रचनात्मक रही।

आरटीआय व्यवस्थेतील सुधारणा आणि पारदर्शकतेवर सविस्तर चर्चा

आरटीआय व्यवस्थेतील सुधारणा आणि पारदर्शकतेवर सविस्तर चर्चा

मुख्य माहिती आयुक्त राहुल पांडे यांची माहिती अधिकार कार्यकर्ते अनिल गलगली यांच्याशी सदिच्छा भेट

महाराष्ट्र राज्याचे मुख्य माहिती आयुक्त राहुल पांडे यांची माहिती अधिकार कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी सदिच्छा भेट घेतली. या भेटीदरम्यान राज्यातील माहिती अधिकार कायदा, 2005 च्या अंमलबजावणीसंदर्भातील विविध महत्त्वाच्या विषयांवर सखोल चर्चा करण्यात आली.

बैठकीत संपूर्ण महाराष्ट्रातील सार्वजनिक प्राधिकरणांकडे दाखल होणारे माहिती अधिकार अर्ज, प्रथम अपील आणि द्वितीय अपील यांची सद्यस्थिती, प्रलंबित प्रकरणे तसेच नागरिकांना माहिती मिळविताना येणाऱ्या अडचणी यांचा आढावा घेण्यात आला. माहिती अधिकार व्यवस्थेमध्ये अधिक पारदर्शकता, उत्तरदायित्व आणि कार्यक्षमता आणण्यासाठी आवश्यक उपाययोजनांवरही विचारविनिमय करण्यात आला.

यावेळी अनिल गलगली यांनी मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) आणि मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) यांसाठी स्वतंत्र ऑनलाइन आरटीआय पोर्टल सुरू करण्याबाबत राज्य माहिती आयोगाने आवश्यक निर्देश द्यावेत, अशी विनंती केली. राज्यातील अनेक विभागांनी ऑनलाइन व्यवस्था स्वीकारली असली तरी मुंबईतील या दोन महत्त्वाच्या संस्थांमध्ये अद्याप सर्वसमावेशक ऑनलाइन आरटीआय प्रणाली उपलब्ध नसल्याने नागरिकांना गैरसोयींचा सामना करावा लागत असल्याचे त्यांनी निदर्शनास आणून दिले.

तसेच, माहिती अधिकारांतर्गत दाखल होणारे अर्ज, संबंधित विभागांकडून दिलेली उत्तरे, पुरविण्यात आलेली कागदपत्रे आणि निर्णय यांचा सार्वजनिक डेटाबेस उपलब्ध करून देण्यात यावा, अशी मागणीही त्यांनी केली. यामुळे एकाच प्रकारच्या माहितीसाठी वारंवार अर्ज करण्याची गरज कमी होईल आणि प्रशासनातील पारदर्शकता अधिक बळकट होईल, असे त्यांनी नमूद केले.

चर्चेत एका अर्जदारामार्फत हजारोच्या संख्येने दाखल करण्यात येणाऱ्या द्वितीय अपीलांच्या वाढत्या प्रमाणाबाबतही चिंता व्यक्त करण्यात आली. अशा प्रकरणांमुळे आयोगाच्या कामकाजावर अतिरिक्त ताण निर्माण होत असून इतर अर्जदारांच्या प्रकरणांच्या निपटाऱ्यावर परिणाम होण्याची शक्यता असल्याचे मत व्यक्त करण्यात आले.

यावर मुख्य माहिती आयुक्त राहुल पांडे यांनी राज्यातील सर्व सार्वजनिक प्राधिकरणांनी माहिती अधिकार कायदा, 2005 मधील कलम 4 चे काटेकोर पालन करणे आवश्यक असल्याचे स्पष्ट केले. नागरिकांना जास्तीत जास्त माहिती स्वयंप्रकाशित स्वरूपात उपलब्ध व्हावी यासाठी आयोगाकडून आवश्यक कार्यवाही सुरू असल्याचे त्यांनी सांगितले. कलम 4 ची प्रभावी अंमलबजावणी झाल्यास माहिती अधिकार अर्जांची संख्या कमी होऊन प्रशासन अधिक पारदर्शक आणि नागरिकाभिमुख होईल, असा विश्वास त्यांनी व्यक्त केला. माहिती अधिकार व्यवस्थेतील सुधारणा, डिजिटल सक्षमीकरण आणि पारदर्शक प्रशासनाच्या दृष्टीने सकारात्मक आणि विधायक ठरल्याचे मत सरतेशेवटी अनिल गलगली यांनी व्यक्त केली. 

Saturday, 30 May 2026

मुंबई एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स के अनेक श्रमिकों ने राष्ट्रीय एकजुट कामगार संगठन में किया प्रवेश

मुंबई एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स के अनेक श्रमिकों ने राष्ट्रीय एकजुट कामगार संगठन में किया प्रवेश


भारतीय जनता पार्टी से संबद्ध राष्ट्रीय एकजुट कामगार संगठन के लिए आज का दिन गौरवपूर्ण रहा, जब मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड (सहार) स्थित एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स के अनेक फोर्कलिफ्ट ऑपरेटर, लोडर एवं अन्य श्रमिकों ने विभिन्न यूनियनों की भ्रामक प्रचार नीति एवं श्रमिक हितों की अनदेखी से निराश होकर राष्ट्रीय एकजुट कामगार संगठन में प्रवेश किया।

श्रमिकों ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, राष्ट्रीय एकजुट कामगार संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण दटके, सलाहकार एवं पूर्व विधायक सुधाकरराव देशमुख, राष्ट्रीय सचिव बलबीर नेगी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल वालंज, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजा घारे, भाजपा के युवा एवं गतिशील नेता संतोष धुरी तथा राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अभिषेक राऊत के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन पर पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए संगठन की सदस्यता ग्रहण की।

संगठन में शामिल हुए श्रमिकों ने कहा कि राष्ट्रीय एकजुट कामगार संगठन सदैव श्रमिकों के अधिकारों, सम्मान एवं हितों की रक्षा के लिए संघर्षरत रहा है और इसी विश्वास के साथ उन्होंने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

राष्ट्रीय एकजुट कामगार संगठन सभी नवप्रविष्ट श्रमिक साथियों का हार्दिक स्वागत करता है तथा उनके द्वारा संगठन पर व्यक्त किए गए विश्वास के लिए आभार प्रकट करता है। संगठन उन्हें विश्वास दिलाता है कि उनके न्यायोचित अधिकारों, कल्याण एवं समस्याओं के समाधान के लिए हर स्तर पर मजबूती से उनके साथ खड़ा रहेगा।

Monday, 25 May 2026

गुरु के बताए मार्ग पर चलना ही सौभाग्य का उदय : डॉ. चिन्मय पण्ड्या

गुरु के बताए मार्ग पर चलना ही सौभाग्य का उदय : डॉ. चिन्मय पण्ड्या

शांतिकुंज में दो दिवसीय शिक्षक गरिमा शिविर का शुभारंभ, उप्र के 500 से अधिक शिक्षकों की भागीदारी


गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में पुरुषोत्तम मास के पावन एवं आध्यात्मिक संयोग के अवसर पर दो दिवसीय शिक्षक गरिमा शिविर का शुभारंभ हुआ। शिविर में उत्तर प्रदेश के कानपुर, लखनऊ, वाराणसी, मुरादाबाद, मेरठ, प्रयागराज सहित अनेक जिलों से आए 500 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गायत्री परिवार के सक्रिय कार्यकर्ताओं की सहभागिता रही। इस अवसर पर शांतिकुंज परिसर राष्ट्रनिर्माताओं के महाकुंभ में परिवर्तित हो गया।

शिविर का उद्देश्य वर्तमान पीढ़ी का निर्माण करने वाले शिक्षकों को उनके गौरवशाली दायित्व, सांस्कृतिक चेतना एवं नैतिक मूल्यों के प्रति पुनः जागृत करना है।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने गुरु-शिष्य परंपरा तथा राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पुस्तकीय ज्ञान देने वाला माध्यम नहीं, बल्कि समाज का वास्तविक दर्पण होता है। युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का संपूर्ण जीवन मानवता के कल्याण एवं राष्ट्र के वैचारिक पुनरुत्थान के लिए समर्पित रहा और वे शिक्षक गरिमा के जीवंत प्रतीक थे।

डॉ. पण्ड्या ने कहा कि सद्गुरु के बताए सन्मार्ग पर निष्ठापूर्वक चलना ही वास्तविक अध्यात्म है। जो व्यक्ति अपने गुरु के सिद्धांतों और आदर्शों को जीवन में उतार लेता है, उसके जीवन में सौभाग्य का सूर्योदय निश्चित होता है। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में नैतिक एवं मानवीय मूल्यों का समावेश समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

शिविर के प्रथम दिन ही उत्तर प्रदेश से आए अनेक शिक्षकों ने इस आयोजन को अपने जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ बताया। कार्यक्रम में शांतिकुंज व्यवस्थापक योगेन्द्र गिरि, परमानंद द्विवेदी, रामयश तिवारी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

Wednesday, 13 May 2026

गायत्री विद्यापीठ शांतिकुंज की छात्राओं ने फिर रचा सफलता का इतिहास

गायत्री विद्यापीठ शांतिकुंज की छात्राओं ने फिर रचा सफलता का इतिहास

टॉप 15 में 12 छात्राएँ शामिल, विद्यार्थियों के चेहरे खुशी से खिले


गायत्री विद्यापीठ शांतिकुंज के कक्षा 12वीं के छात्र-छात्राओं ने उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम प्राप्त कर एक बार फिर सफलता का नया इतिहास रच दिया। रिजल्ट घोषित होते ही विद्यार्थियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। उल्लेखनीय है कि पिछले कई वर्षों से विद्यापीठ का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा है।

कला संकाय के छात्र रक्षक सैनी ने 96.8 प्रतिशत अंक प्राप्त कर विद्यापीठ टॉपर बनने का गौरव हासिल किया। वहीं कॉमर्स संकाय की रिया सैनी ने 94.5 प्रतिशत अंक प्राप्त कर द्वितीय स्थान प्राप्त किया। कॉमर्स की ऋषिका शर्मा ने 93.5 प्रतिशत, कला संकाय की साची अमोली ने 93 प्रतिशत, विज्ञान संकाय की ख्यातिप्रिया ने 92 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।

इसके अतिरिक्त वैष्णवी गुप्ता ने 90.3 प्रतिशत, अक्षित ने 89 प्रतिशत, लावण्या ने 88 प्रतिशत, आस्था वासुदेवा ने 87.8 प्रतिशत, करिश्मा ने 87.7 प्रतिशत, श्रुति मानोरी ने 86.2 प्रतिशत, स्तुति पण्ड्या ने 85.7 प्रतिशत, रुद्राक्षी ने 85.3 प्रतिशत, शिवी साहू ने 84.2 प्रतिशत तथा आयुष मिश्रा ने 83.7 प्रतिशत अंक प्राप्त कर सफलता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए।

विद्यार्थियों की सफलता पर विद्यापीठ की अभिभाविका श्रद्धेया शैलदीदी ने कहा कि यह उपलब्धि विद्यार्थियों के परिश्रम, अनुशासन तथा शिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है। उन्होंने सभी सफल विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

विद्यापीठ की प्रबंधिका शैफाली पण्ड्या ने कहा कि संस्था सदैव संस्कारयुक्त एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए प्रतिबद्ध रही है। विद्यार्थियों की सफलता समर्पित शिक्षकों एवं अभिभावकों के सहयोग का प्रतिफल है। उन्होंने बताया कि कई विद्यार्थी सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं, जबकि कुछ विद्यार्थी देश की सुरक्षा एवं सेवा हेतु सेना में योगदान देने के लिए प्रेरित हैं। वहीं कई छात्र-छात्राएँ शिक्षा जगत में अपना कैरियर बनाने की इच्छा रखते हैं।

इस अवसर पर विद्यापीठ के प्रधानाचार्य सीताराम सिन्हा सहित समस्त शिक्षक एवं शिक्षिकाओं ने विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।