Friday, 7 August 2026

वसई में ‘कजरी महोत्सव-2026’ का शानदार आयोजन

वसई में ‘कजरी महोत्सव-2026’ का शानदार आयोजन

सुश्री संजोली पाण्डेय के लोकगीतों ने मोहा श्रोताओं का दिल

वसई : संस्कार भारती प्रतिष्ठान व अभियान, मुंबई द्वारा वसई पूर्व स्थित रीजेंसी बैंक्वेट्स में ‘कजरी महोत्सव-2026’ का भव्य आयोजन किया गया। सावन की रिमझिम फुहारों और लोक संस्कृति की सुगंध से सराबोर इस सांस्कृतिक संध्या में अयोध्या से आईं सुप्रसिद्ध लोक गायिका सुश्री संजोली पाण्डेय ने अपनी सुरीली आवाज और शानदार प्रस्तुति से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ महाराष्ट्र सरकार के पूर्व राज्य मंत्री, भाजपा मुंबई के उपाध्यक्ष एवं अभियान के अध्यक्ष अमरजीत मिश्रा ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय लोक कलाओं, लोकगीतों तथा सावन से जुड़ी पारंपरिक सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के लिए संस्कार भारती प्रतिष्ठान व अभियान के प्रयासों की सराहना की।

‘सावन की रिमझिम में लोकगीतों की बहार’ थीम पर आयोजित इस महोत्सव में अयोध्या की सुप्रसिद्ध कजरी गायिका सुश्री संजोली पाण्डेय ने पारंपरिक एवं शास्त्रीय कजरी गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। उनकी भावपूर्ण गायकी और मधुर स्वर ने ऐसा समां बांधा कि पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। दर्शकों ने सावन, विरह, प्रेम और लोकजीवन से जुड़े कजरी गीतों का भरपूर आनंद लिया।

महोत्सव में क्षेत्र की अनेक प्रमुख हस्तियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें प्रसिद्ध आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली, वसई-विरार के प्रतिपक्ष नेता मनोज पाटिल, भाजपा नेता राजीव रतन मिश्रा, नगरसेवक अभय ककड़, नगरसेविका कल्पना नागपुरे, नगरसेविका पिंकी राठोड, समाजसेवक सुरेंद्र मिश्रा, अमित दुबे, शिवकुमार तिवारी, मनोज शांडिल्य, अभय सिंह, अंकित मिश्रा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

संस्था की ओर से सभी विशिष्ट अतिथियों का शाल एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मान किया गया। उपस्थित अतिथियों ने लोक संस्कृति के संरक्षण और नई पीढ़ी तक पारंपरिक लोकगीतों को पहुंचाने के लिए इस प्रकार के आयोजनों को महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए संस्था के सचिव एवं मुख्य आयोजक अखिलेश ज. मिश्रा ने सभी अतिथियों, कलाकारों, सहयोगियों और कला प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया। सूत्रसंचालन महेश मिश्रा ने किया। महोत्सव को सफल बनाने में सह-आयोजक अशोक भाटिया, महेंद्र जोशी, रीता राधेश्याम शुक्ला, आर. एन. तिवारी सहित समस्त निवेदक मंडल का विशेष योगदान रहा।

कजरी महोत्सव ने सावन की पारंपरिक लोकधुनों, संगीत और संस्कृति को एक मंच पर लाकर वसई में एक यादगार सांस्कृतिक संध्या का रूप ले लिया। 

भाषाई विदुषी थीं सुषमा स्वराज : राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा

भाषाई विदुषी थीं सुषमा स्वराज : राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा

‘अग्निशिखा सुषमा स्वराज’ के हिंदी संस्करण की प्रथम प्रति राज्यपाल को भेंट

मुंबई। देश की प्रखर राजनेता, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय सुषमा स्वराज एक अद्भुत भाषाई विदुषी थीं। उनका संपूर्ण जीवन महिला सशक्तीकरण, सेवा, समर्पण और राष्ट्रहित के प्रति प्रतिबद्धता का प्रेरणादायी उदाहरण है। उनके विचार, कार्यशैली और जनसेवा आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेंगी। यह उद्गार महाराष्ट्र के राज्यपाल महामहिम जिष्णु देव वर्मा ने मुंबई स्थित लोकभवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में व्यक्त किए।

इस अवसर पर मुंबई भाजपा के उपाध्यक्ष, पूर्व राज्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता अमरजीत मिश्र ने लेखिका मेधा किरीट सोमैया द्वारा लिखित मराठी पुस्तक ‘अग्निशिखा सुषमा स्वराज’ के अपने हिंदी अनुवाद की प्रथम प्रति राज्यपाल को भेंट की।

राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि सुषमा स्वराज की भाषा अत्यंत संस्कृतनिष्ठ, प्रभावशाली और ओजस्वी थी। अपनी वाक्पटुता, भाषाई समृद्धता और विषयों पर गहरी पकड़ के कारण उन्होंने भारतीय राजनीति में एक विशिष्ट पहचान स्थापित की। उन्होंने कहा कि सुषमा स्वराज केवल एक सफल राजनेता ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपराओं और भाषाई गौरव की सशक्त प्रतिनिधि थीं।

कार्यक्रम के दौरान लेखिका मेधा किरीट सोमैया ने सुषमा स्वराज के जीवन, संघर्ष, राजनीतिक यात्रा और सामाजिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए उनके साथ जुड़े अनेक भावनात्मक संस्मरण साझा किए। उन्होंने कहा कि सुषमा स्वराज का संवेदनशील नेतृत्व, सहज व्यक्तित्व और जनसेवा का भाव आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करता है।

अमरजीत मिश्र ने अपने संबोधन में सुषमा स्वराज की अद्भुत भाषाई क्षमता, प्रभावशाली वक्तृत्व शैली और दूरदर्शी सोच का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति, भाषाओं और मूल्यों के प्रति उनका समर्पण असाधारण था। उन्होंने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के नेतृत्व में मॉरीशस में आयोजित 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन में सहभागिता के अपने संस्मरण भी साझा किए।

राज्यपाल ने सुषमा स्वराज के संस्कृत ज्ञान का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि वे शिव तांडव स्तोत्र का अत्यंत प्रभावशाली पाठ करती थीं, जो भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति उनके गहरे लगाव का परिचायक था। उन्होंने कहा कि संस्कृत का अध्ययन बचपन से विद्यालयों में कराया जाना चाहिए, क्योंकि बाल्यावस्था में अर्जित ज्ञान जीवनभर स्मरण रहता है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि आज भी उन्हें बचपन में सीखे गए संस्कृत के अनेक श्लोक और स्तोत्र कंठस्थ हैं।

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र और व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला भी है। भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

इस अवसर पर पूर्व सांसद किरीट सोमैया, महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के पूर्व कार्याध्यक्ष डॉ. शीतला प्रसाद दुबे, पत्रकार विकास संघ के अध्यक्ष आनंद मिश्र, गायिका संजोली पांडेय, के. एस. मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार शैलेंद्र श्रीवास्तव, सुनील सिंह सहित साहित्य, राजनीति, शिक्षा और पत्रकारिता जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियां उपस्थित थीं।

समारोह में सुषमा स्वराज के जीवन-मूल्यों, उनके संघर्ष, महिला सशक्तीकरण के प्रयासों तथा समाज के प्रति उनके अमूल्य योगदान पर विस्तार से चर्चा हुई। साहित्य, संस्कृति, भाषा और प्रेरणा के इस संगम ने उपस्थित सभी लोगों को भावविभोर कर दिया। सुषमा स्वराज का व्यक्तित्व आज भी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है जो समाजसेवा, नेतृत्व और सकारात्मक परिवर्तन के पथ पर आगे बढ़ना चाहते हैं। विशेष रूप से महिलाओं के लिए उनका जीवन आत्मविश्वास, संघर्ष और सफलता का अनुपम उदाहरण है। 

Sunday, 2 August 2026

गुरु सद्ज्ञान प्रदान करने वाले और जीवन को सही दिशा देने वाले प्रकाश-स्तंभ हैं - शैफाली पंड्या

गुरु सद्ज्ञान प्रदान करने वाले और जीवन को सही दिशा देने वाले प्रकाश-स्तंभ हैं - शैफाली पंड्या 

अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा गुरुपूर्णिमा पर ‘महाशक्ति की लोकयात्रा’ कार्यक्रम संपन्न

अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा गुरुपूर्णिमा पर्व के अवसर पर ‘महाशक्ति की लोकयात्रा’ कार्यक्रम का आयोजन बोरीवली पश्चिम स्थित प्रबोधनकार ठाकरे सभागार में हर्षोल्लास एवं आध्यात्मिक वातावरण में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ शांतिकुंज, हरिद्वार के महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती शैफाली पंड्या के संरक्षण एवं गरिमामयी उपस्थिति में हुआ।

इस अवसर पर परम वंदनीया श्रीमती भगवती देवी शर्मा (माताजी) के जीवन एवं कृतित्व पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया। इसके पश्चात पार्श्व गायिका ईशिता विश्वकर्मा ने प्रज्ञा गीत एवं भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी। गायत्री परिवार के बच्चों ने नशा मुक्ति एवं व्यसन उन्मूलन विषय पर प्रभावशाली लघु नाटक प्रस्तुत किया। वहीं बाल संस्कारशाला के बच्चों ने गुरु वंदना की सुंदर प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।

दीप प्रज्ज्वलन के उपरांत अपने संबोधन में श्रीमती शैफाली पंड्या ने कहा कि गुरुपूर्णिमा आत्मचिंतन, आत्मानुशासन, आत्मविश्लेषण, श्रद्धा के अभिवर्धन और ज्ञान के पूजन का पावन पर्व है। व्यास पूर्णिमा के इस दिव्य अवसर पर हमें उन महापुरुषों को गुरु रूप में स्वीकार करना चाहिए, जिन्होंने अपनी तपश्चर्या, साधना और त्यागमय जीवन से मानवता के लिए आदर्श स्थापित किए। गुरु सद्ज्ञान प्रदान करने वाले और जीवन को सही दिशा देने वाले प्रकाश-स्तंभ हैं। उनके प्रति श्रद्धा, समर्पण और उनके आदर्शों को जीवन में उतारना ही सच्ची गुरु-पूजा है।

उन्होंने आगे कहा कि परम वंदनीया माताजी ने लगभग चार दशक पूर्व ही नारी जागरण आंदोलन का शुभारंभ किया था। उसी प्रेरणा से अखिल विश्व गायत्री परिवार इस वर्ष को ‘नारी सशक्तिकरण वर्ष’ के रूप में मना रहा है। इस अवसर पर देश-विदेश में विभिन्न कार्यक्रमों एवं जनजागरण अभियानों का आयोजन किया जा रहा है।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर बोरीवली एवं दहिसर क्षेत्र की विधायक मनीषा चौधरी ने कहा कि गायत्री परिवार वर्षों से समाज में व्यक्ति निर्माण और नैतिक मूल्यों के संवर्धन का जो कार्य कर रहा है, वह अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र में अद्भुत आध्यात्मिक शक्ति निहित है और नियमित रूप से इसका जप करने से व्यक्ति मानसिक, आध्यात्मिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ एवं संतुलित जीवन जी सकता है।

कार्यक्रम में विनय शाह, उषा शाह, नेशनल हाउसिंग बैंक के चेयरमैन महेश पुजारा, नगरसेविका अंजली सामंत, पूर्व नगरसेवक कमलेश यादव, अभिजीत सामंत तथा नानावटी मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के ट्रांसपोर्ट को-ऑर्डिनेटर अमोल कदम सहित अखिल विश्व गायत्री परिवार के हजारों कार्यकर्ता, परिजन एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम श्रद्धा, आध्यात्मिक ऊर्जा एवं सामाजिक जागरूकता के संदेश के साथ संपन्न हुआ |

Tuesday, 28 July 2026

मानवता के नवजागरण का आधार हैं पूज्य आचार्यश्री : शैफाली पण्ड्या

मानवता के नवजागरण का आधार हैं पूज्य आचार्यश्री : शैफाली पण्ड्या

गुरुपूर्णिमा पर्व का शुभारंभ, गुरुधाम शांतिकुंज में उमड़े हजारों गायत्री साधक

करोड़ों गायत्री साधकों की आस्था के प्रमुख केंद्र शांतिकुंज में दो दिवसीय गुरुपूर्णिमा पर्व का शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के वातावरण में हुआ। प्रातःकाल माँ गायत्री की आरती, ध्यान-साधना एवं सामूहिक उपासना के साथ पर्व की शुरुआत हुई।

विश्व कल्याण और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की मंगलकामना के साथ 24 घंटे के अखण्ड गायत्री महामंत्र जप का आयोजन किया गया, जिसमें देश-विदेश से आए एक हजार से अधिक साधकों ने सहभागिता की।

हरिद्वार स्थित शांतिकुंज में साधकों को संबोधित करते हुए शांतिकुंज के युवा प्रतिनिधि एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि जन्मशताब्दी वर्ष-2026 युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य एवं वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का महाअभियान है। यह वर्ष उनके आदर्शों को जीवन में उतारते हुए व्यक्ति, परिवार और समाज के नव निर्माण का संकल्प वर्ष है।

उन्होंने कहा कि संस्कार, सेवा, साधना, पर्यावरण संरक्षण, नारी जागरण और युवा चेतना से जुड़े रचनात्मक अभियानों को व्यापक स्तर पर जन-जन तक पहुंचाना है। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि पूज्य आचार्यश्री ने विचार क्रांति का जो दीप प्रज्वलित किया था, उसे और अधिक प्रखर बनाना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने जन्मशताब्दी वर्ष की कार्ययोजना और विभिन्न उत्तरदायित्वों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

गुरुपूर्णिमा पर्व के प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए शांतिकुंज महिला मंडल प्रमुख श्रीमती शैफाली पण्ड्या ने कहा कि युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने अपना संपूर्ण जीवन मानवता के उत्थान और विश्व में सद्भावना के विस्तार के लिए समर्पित किया।

उन्होंने कहा कि अपने तप, त्याग, प्रेम और दूरदर्शी चिंतन के आधार पर पूज्य आचार्यश्री ने अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना की, जो आज एक विराट वटवृक्ष के रूप में विश्वभर में संस्कार, सेवा और साधना का संदेश पहुंचा रहा है।

श्रीमती पण्ड्या ने साधकों से पूज्य गुरुदेव के विचारों को जीवन में आत्मसात कर परिवार, समाज और राष्ट्र के नव निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। इस अवसर पर ‘देवसंस्कृति दिग्दर्शन’ के नवीन स्वरूप का लोकार्पण भी किया गया।

शांतिकुंज मीडिया के अनुसार गुरुपूर्णिमा पर्व का मुख्य कार्यक्रम बुधवार को आयोजित होगा। देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुरुधाम शांतिकुंज पहुंच चुके हैं और आध्यात्मिक आयोजनों में भाग ले रहे हैं। 

Monday, 27 July 2026

मुंबई में गूंजा 'ऊर्जा, चेतना और राष्ट्र निर्माण' का संदेश

मुंबई में गूंजा 'ऊर्जा, चेतना और राष्ट्र निर्माण' का संदेश

ओज उत्सव 2026 में आध्यात्मिक नेतृत्व, सामाजिक सरोकार और विकसित भारत के संकल्प पर हुआ मंथन

मुंबई के जुहू स्थित नोवोटेल होटल में आयोजित ओज फाउंडेशन के भव्य ओज उत्सव 2026 ने आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण पर गंभीर एवं प्रेरक विमर्श का मंच प्रदान किया। इस अवसर पर सार्वजनिक जीवन, उद्योग, कला, प्रशासन, पत्रकारिता और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों ने सहभागिता करते हुए उत्तरदायी नेतृत्व, मानवीय मूल्यों और विकसित भारत के निर्माण पर अपने विचार रखे।

ओओजे फाउंडेशन के संस्थापक योगी प्रियव्रत अनिमेष ने अपने संबोधन में कहा कि ओज उत्सव केवल एक वार्षिक आयोजन नहीं, बल्कि चेतना, संस्कृति, नेतृत्व और सामाजिक उत्तरदायित्व को जोड़ने वाला एक सतत अभियान है। उन्होंने समाज, उद्योग, प्रशासन, शिक्षा और आध्यात्मिक जगत के बीच समन्वय को समय की आवश्यकता बताते हुए सभी अतिथियों, सहयोगियों एवं सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में पूर्व भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी सुमन मंत्री, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू, डॉ. योगेश लखानी, वरिष्ठ अभिनेत्री एवं निर्माता सुषमा शिरोमणी, उद्योगपति राजेंद्र बग्गा, प्रसिद्ध संगीतकार दिलीप सेन, रुचिता मेहरा, अरिजीत दत्ता, सहित कॉर्पोरेट जगत, उद्योग, पत्रकारिता, फिल्म जगत और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

समारोह के दौरान ओज फाउंडेशन की वार्षिक गतिविधियों, उपलब्धियों एवं भावी योजनाओं को समर्पित वार्षिक प्रतिवेदन (एनुअल रिपोर्ट) का औपचारिक लोकार्पण किया गया। इसी अवसर पर "आकाश" पुस्तक का भी विमोचन हुआ, जिसमें चेतना, मानवीय विकास और सामाजिक परिवर्तन से जुड़े विचारों को प्रस्तुत किया गया है।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रकाशित विशेष स्मारक ग्रंथ का सामूहिक प्रतीकात्मक विमोचन रहा। मंच पर उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथियों ने इस ग्रंथ का लोकार्पण करते हुए इसे राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और भारतीय जीवन मूल्यों के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।

अपने संबोधनों में वक्ताओं ने आध्यात्मिक चेतना, नैतिक नेतृत्व, सामाजिक उत्तरदायित्व, युवा सशक्तिकरण तथा विकसित भारत के निर्माण में जनभागीदारी की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि स्थायी एवं समावेशी विकास के लिए मानवीय मूल्य, सामाजिक सहयोग और जिम्मेदार नेतृत्व सबसे महत्वपूर्ण आधार हैं।

कार्यक्रम का समापन विशिष्ट अतिथियों के सम्मान, स्मृति-चिह्न प्रदान, सामूहिक छायाचित्र तथा राष्ट्र और मानवता के कल्याण के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। आयोजकों के अनुसार ओज उत्सव 2026 विविध क्षेत्रों के बीच संवाद, सहयोग और सकारात्मक नेतृत्व को नई दिशा देने वाली एक सार्थक पहल के रूप में स्थापित हुआ। 
 

Saturday, 18 July 2026

No Complaints Received Regarding Seating Arrangement in BMC General Body Hall

No Complaints Received Regarding Seating Arrangement in BMC General Body Hall

The seating arrangement in the General Body Hall of the Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) has not attracted a single complaint from either citizens or elected members during the past three years. In addition, no changes have been made to the seating arrangement over the last five years, according to information obtained under the Right to Information (RTI) Act, 2005. This clearly indicates that no complaints regarding any inadequacy in the seating arrangement for councillors have been submitted to the Government.

RTI activist Anil Galgali had sought detailed information regarding the seating arrangement in the BMC General Body Hall. The information was provided by the Office of the Executive Engineer (Headquarters), BMC.

According to the reply, the BMC General Body Hall currently has 237 seats, comprising 227 seats for elected corporators and 10 seats for nominated corporators. The civic body further confirmed that the existing seating arrangement has remained unchanged for the past five years.

Through his RTI application, Galgali had also sought details on the classification of seating for corporators, officials, media personnel, visitors, and other categories, the date from which the present seating arrangement has been in force, and whether any modifications had been made in recent years. However, the BMC stated that these aspects do not fall within the jurisdiction of the concerned department, and therefore the requested information was not available with it.

The RTI application also sought information on complaints received regarding the seating arrangement in the General Body Hall. In its response, the BMC clarified that no complaints have been received from citizens or members concerning the seating arrangement during the last three years.

Commenting on the disclosure, RTI activist Anil Galgali said that the BMC General Body Hall is the highest democratic decision-making forum of Mumbai, and information relating to its infrastructure and administrative arrangements should remain transparent and accessible to the public. He added that the RTI Act continues to play a vital role in promoting transparency, accountability, and informed public participation in governance.

आशीर्वाद संस्था का 57वाँ स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ संपन्न

आशीर्वाद संस्था का 57वाँ स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ संपन्न

मुंबई: सुप्रसिद्ध सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था 'आशीर्वाद' का 57वाँ स्थापना दिवस अत्यंत गरिमामय एवं भव्य वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर साहित्य, कला, संस्कृति, संगीत, फिल्म और पत्रकारिता जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति ने समारोह को यादगार बना दिया।

कार्यक्रम में संस्था की निदेशिका सुश्री नीता बाजपेयी ने आशीर्वाद संस्था की 57 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, उपलब्धियों एवं संस्थापक स्वर्गीय डॉ. उमाकांत बाजपेयी के दूरदर्शी व्यक्तित्व को स्मरण करते हुए उनके सपनों को साकार करने की प्रेरणादायी यात्रा पर प्रकाश डाला।

पद्मश्री अनूप जलोटा ने कहा कि एक समय ऐसा था जब आशीर्वाद पुरस्कार को फिल्म जगत में फिल्मफेयर पुरस्कार से भी अधिक प्रतिष्ठित माना जाता था। इसी अवसर पर कवि दास नारायण अग्रवाल की कृति "कृष्ण पद" का भव्य लोकार्पण भी अनूप जलोटा के करकमलों द्वारा किया गया। कृष्ण भक्ति पर आधारित इस कृति पर प्रो. करूणाशंकर उपाध्याय, वीरेन्द्र याज्ञिक तथा नेशनल एक्सप्रेस के संस्थापक विपिन गुप्ता ने अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में फिल्म अभिनेता अरुण बक्षी ने अपनी माँ पर आधारित भावपूर्ण कविता प्रस्तुत की, जबकि अर्चना जौहरी ने बेटी पर आधारित संवेदनशील काव्य-पाठ से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। डॉ. शैलेश श्रीवास्तव, विनोद दुबे, रवि यादव, कविता सेठ और नवीन चतुर्वेदी ने अपने गीतों से समां बाँध दिया।

शायरी की महफिल में देवमणि पांडेय ने अपने अंदाज़ से श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। उनके साथ उबेद आजम आजमी, रजिया रागिनी, शिव दत्त अक्स और महेश दुबे ने अपनी ग़ज़लों से साहित्य प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन कुमार जैन ने किया।

संस्था के अध्यक्ष बृजमोहन अग्रवाल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया, जबकि राजेश विक्रांत ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। नीता बाजपेयी ने सभी उपस्थित जनों का आत्मीय स्वागत करते हुए संस्था की भावी योजनाओं की जानकारी भी दी।

समारोह में सुलेमान फारुकी, आफ्ताब आलम, अमरीश कुमार, गुलशन मदान, संजीव शुक्ला, दालचंद गुप्ता, ममता सिंह, रीमा राय सिंह, अमर त्रिपाठी, अजय गोविंद, रवि जैन, अशोक त्रिवेदी, श्रेयांश शुक्ला, नरोत्तम शर्मा, विवेक अग्रवाल, वीरेन्द्र मिश्रा, शुभकीर्ति माहेश्वरी, बूबना, निरुपमा श्रीवास्तव, अनिल गलगली, सुनील सिंह, शैलेंद्र श्रीवास्तव, अंकित मिश्रा, कृष्णा गौतम, डॉ. बनमाली चतुर्वेदी, डॉ. जे.पी. बघेल, पूर्व पुलिस अधिकारी सोनटके, रागिनी प्रसाद, मंजुला जगतरामका, कमर हाजीपुरी, अवधेश पांडे, प्रेम प्रकाश दुबे, राकेश दुबे सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, कलाकार, पत्रकार और कला प्रेमी उपस्थित रहे।

डॉ. उमाकांत बाजपेयी की स्मृति को समर्पित इस समारोह में सभागार प्रारंभ से अंत तक खचाखच भरा रहा। उपस्थित जनों की तालियों की गड़गड़ाहट और उत्साह ने इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया तथा सभी ने संस्था की इस गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा की मुक्तकंठ से सराहना की।

मुंबई महानगरपालिका के सभागार की बैठक व्यवस्था को लेकर एक भी शिकायत नहीं मिली

मुंबई महानगरपालिका के सभागार की बैठक व्यवस्था को लेकर एक भी शिकायत नहीं मिली

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के मुख्य सभागार की बैठक व्यवस्था को लेकर पिछले तीन वर्षों में नागरिकों अथवा सदस्यों की ओर से एक भी शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। साथ ही, पिछले पाँच वर्षों में सभागार की बैठक व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह जानकारी सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त जानकारी से सामने आई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि नगरसेवकों द्वारा सदन में बैठने की व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी को लेकर शासन स्तर पर कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने महानगरपालिका के सभागार की बैठक व्यवस्था से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में कार्यकारी अभियंता (मुख्यालय) कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी में यह खुलासा हुआ है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुंबई महानगरपालिका के सभागार में वर्तमान में कुल 237 सीटें उपलब्ध हैं। इनमें 227 निर्वाचित नगरसेवकों तथा 10 स्वीकृत (नामित) नगरसेवकों के लिए बैठक व्यवस्था की गई है। महानगरपालिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि पिछले पाँच वर्षों के दौरान इस बैठक व्यवस्था में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है।

अनिल गलगली ने अपने आवेदन में यह भी जानकारी मांगी थी कि सभागार में नगरसेवकों, अधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों, दर्शकों एवं अन्य व्यक्तियों के लिए बैठक व्यवस्था का वर्गीकरण क्या है, वर्तमान व्यवस्था कब से लागू है तथा पिछले पाँच वर्षों में यदि कोई परिवर्तन किया गया हो तो उसका विवरण उपलब्ध कराया जाए। हालांकि, महानगरपालिका ने उत्तर में कहा कि ये विषय संबंधित विभाग के कार्यक्षेत्र में नहीं आते, इसलिए इस संबंध में जानकारी उपलब्ध नहीं है।

इसके अतिरिक्त, सभागार की बैठक व्यवस्था को लेकर नागरिकों अथवा सदस्यों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों का विवरण भी मांगा गया था। इस पर महानगरपालिका ने स्पष्ट किया कि पिछले तीन वर्षों में बैठक व्यवस्था के संबंध में एक भी शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने कहा कि मुंबई महानगरपालिका का सभागार शहर की सर्वोच्च लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया का केंद्र है। ऐसे में इसकी बैठक व्यवस्था, क्षमता और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होना पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम के माध्यम से नागरिकों को प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त हो रही हैं, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों को बढ़ावा मिलता है।

मुंबई पालिकेच्या सभागृहातील आसनव्यवस्थेबाबत एकही तक्रार प्राप्त नाही

मुंबई पालिकेच्या सभागृहातील आसनव्यवस्थेबाबत एकही तक्रार प्राप्त नाही

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) मुख्य सभागृहातील आसनव्यवस्थेबाबत गेल्या तीन वर्षांत नागरिक अथवा सदस्यांकडून एकही तक्रार प्राप्त झालेली नसल्याची माहिती उघडकीस आली आहे. तसेच, गेल्या पाच वर्षांत सभागृहातील आसनव्यवस्थेत कोणताही बदल करण्यात आलेला नसल्याची माहितीही समोर आली आहे. यामुळे आसनव्यवस्था कमतरता बाबत नगरसेवकांच्या तक्रारी शासन दरबारी नसल्याची बाब स्पष्ट झाली आहे. 

माहिती अधिकार कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी माहिती अधिकार अधिनियम, 2005 अंतर्गत महापालिकेकडे सभागृहातील आसनव्यवस्थेबाबत विविध मुद्द्यांवर माहिती मागविली होती. त्यास कार्यकारी अभियंता (मुख्यालय) कार्यालयाने दिलेल्या उत्तरातून ही माहिती उपलब्ध झाली आहे.

महापालिकेने दिलेल्या माहितीनुसार, मुंबई महापालिकेच्या सभागृहात सध्या एकूण 237 आसने उपलब्ध असून त्यापैकी 227 आसने नगरसेवकांसाठी तर 10 आसने स्वीकृत नगरसेवकांसाठी राखीव आहेत. सभागृहाची विद्यमान आसनरचना अनेक वर्षांपासून कायम असून, मागील पाच वर्षांत त्यामध्ये कोणताही बदल करण्यात आलेला नाही.

अनिल गलगली यांनी आसनव्यवस्थेचे वर्गीकरण, नगरसेवक, अधिकारी, प्रसारमाध्यम प्रतिनिधी, प्रेक्षक व इतरांसाठी स्वतंत्र आसनव्यवस्था असल्यास त्याचा तपशील, विद्यमान व्यवस्था कोणत्या तारखेपासून लागू आहे, तसेच मागील पाच वर्षांत त्यात बदल झाले असल्यास त्याची माहितीही मागितली होती. मात्र, या प्रश्नांपैकी काही बाबी संबंधित विभागाच्या कार्यकक्षेत येत नसल्याने ती माहिती उपलब्ध नसल्याचे महापालिकेने उत्तरात नमूद केले आहे.

याशिवाय, सभागृहातील आसनव्यवस्थेबाबत नागरिक किंवा सदस्यांकडून कोणत्याही प्रकारच्या तक्रारी प्राप्त झाल्या आहेत का, अशीही विचारणा करण्यात आली होती. त्यावर महापालिकेने स्पष्ट केले की, गेल्या तीन वर्षांच्या कालावधीत एकही तक्रार प्राप्त झालेली नाही.

माहिती अधिकार कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी सांगितले की, महापालिका सभागृह हे शहरातील सर्वोच्च लोकशाही निर्णयप्रक्रियेचे केंद्र आहे. त्यामुळे सभागृहाची क्षमता, आसनव्यवस्था आणि त्यासंदर्भातील प्रशासनाकडे उपलब्ध असलेली माहिती नागरिकांसाठी खुली असणे आवश्यक आहे. माहिती अधिकाराच्या माध्यमातून अशा महत्त्वाच्या बाबींमध्ये पारदर्शकता वाढण्यास मदत होत असल्याचे त्यांनी सांगितले.

Tuesday, 14 July 2026

मुंबई में बारिश, आलोचना के साथ सराहना भी जरूरी

अग्निशिला जुलाई 2026

संपादकीय: मुंबई में बारिश, आलोचना के साथ सराहना भी जरूरी

मुंबई का मानसून केवल एक मौसम नहीं, बल्कि महानगर की क्षमता, प्रशासनिक तैयारी और नागरिक अनुशासन की सबसे बड़ी परीक्षा है। हर वर्ष भारी वर्षा के दौरान जलभराव, यातायात अव्यवस्था, लोकल ट्रेन सेवाओं में व्यवधान, पेड़ों के गिरने और अन्य घटनाओं के कारण जनजीवन प्रभावित होता है। ऐसे समय में प्रशासन पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है, लेकिन निष्पक्ष दृष्टिकोण यह भी मांगता है कि जहाँ कमियाँ हों वहाँ आलोचना हो और जहाँ सुधार दिखाई दे, वहाँ उसकी सराहना भी की जाए।

इस वर्ष कई अवसरों पर मुंबई में अत्यधिक वर्षा हुई। कम समय में बड़ी मात्रा में वर्षा होने से अनेक स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनी। यह समझना होगा कि जब कुछ ही घंटों में सामान्य क्षमता से कहीं अधिक वर्षा होती है, तब दुनिया के किसी भी बड़े महानगर की जलनिकासी व्यवस्था पर असाधारण दबाव पड़ता है। ऐसे में कुछ समय के लिए पानी का जमा होना पूरी तरह टाला नहीं जा सकता। असली कसौटी यह है कि पानी कितनी तेजी से निकलता है और जनजीवन कितनी शीघ्र सामान्य होता है।

इसी दृष्टि से देखें तो मुंबई में पिछले कुछ वर्षों के दौरान जलनिकासी व्यवस्था में सुधार दिखाई देता है। अनेक स्थानों पर पहले जहाँ कई घंटों तक पानी भरा रहता था, वहीं अब अपेक्षाकृत कम समय में जल निकासी हो जाती है। इसका सीधा लाभ नागरिकों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और यातायात व्यवस्था को मिलता है। यद्यपि कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में अब भी स्थायी समाधान की आवश्यकता है, फिर भी समग्र रूप से सुधार को स्वीकार करना चाहिए।

बृहन्मुंबई महानगरपालिका की आयुक्त अश्विनी भिडे के नेतृत्व में पूरी प्रशासनिक टीम मानसून प्रबंधन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्री-मानसून तैयारियाँ, नालों की सफाई, पंपिंग स्टेशनों की निगरानी, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र तथा तकनीक के उपयोग से व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है। किसी भी प्रशासनिक व्यवस्था में पूर्णता संभव नहीं होती, लेकिन सतत सुधार ही सफलता का मापदंड होता है।

हालांकि अभी भी कई चुनौतियाँ बाकी हैं। शहर का तीव्र शहरीकरण, प्राकृतिक जल निकासी मार्गों पर अतिक्रमण, प्लास्टिक एवं ठोस कचरे से नालों का अवरुद्ध होना, पुराने सीवर नेटवर्क तथा जलवायु परिवर्तन के कारण कम समय में होने वाली अत्यधिक वर्षा भविष्य में और गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकती हैं। इसलिए केवल वर्तमान व्यवस्था पर निर्भर रहने के बजाय दीर्घकालिक एवं वैज्ञानिक समाधान आवश्यक हैं।

नागरिकों की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। यदि नालों में कचरा डाला जाएगा, अवैध निर्माण प्राकृतिक जल प्रवाह को रोकेंगे और सार्वजनिक संपत्तियों की उपेक्षा होगी, तो प्रशासनिक प्रयास भी सीमित हो जाएंगे। इसलिए स्वच्छता, जागरूकता और प्रशासन के साथ सहयोग प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

एक लोकतांत्रिक समाज में प्रशासन की जवाबदेही तय करना आवश्यक है, लेकिन सकारात्मक कार्यों को स्वीकार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आलोचना का उद्देश्य व्यवस्था को बेहतर बनाना होना चाहिए, न कि केवल दोषारोपण करना। मुंबई ने बार-बार यह सिद्ध किया है कि प्रशासन और नागरिक यदि मिलकर कार्य करें, तो बड़ी से बड़ी चुनौती का भी प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है।

आने वाले वर्षों में आवश्यकता इस बात की है कि मानसून पूर्व तैयारियों को और मजबूत किया जाए, जलनिकासी परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा नागरिक सहभागिता को और बढ़ाया जाए। तभी मुंबई न केवल आर्थिक राजधानी के रूप में, बल्कि आपदा प्रबंधन और शहरी प्रशासन के उत्कृष्ट मॉडल के रूप में भी देश के सामने उदाहरण प्रस्तुत कर सकेगी।

अनिल गलगली

Wednesday, 8 July 2026

जन्मदिन नहीं मनाकर आचार्य शैलेश पांडे ने भरत भूषण तिवारी को दी श्रद्धांजलि

जन्मदिन नहीं मनाकर आचार्य शैलेश पांडे ने भरत भूषण तिवारी को दी श्रद्धांजलि

भायंदर। बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में हाल ही में पुलिस एनकाउंटर के दौरान भरत भूषण तिवारी की हुई मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हुए संकल्प राष्ट्र सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास, अयोध्या धाम के राष्ट्रीय प्रवक्ता आचार्य शैलेश पांडे ने अपना जन्मदिन सादगी से मनाने के बजाय श्रद्धांजलि सभा आयोजित की।

भायंदर पूर्व स्थित भारत माता मंदिर सेवाश्रम के जनसंपर्क कार्यालय में आयोजित इस शोक सभा में उपस्थित लोगों ने भरत भूषण तिवारी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। इस अवसर पर आचार्य शैलेश पांडे ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का शासन सर्वोपरि होना चाहिए और प्रत्येक नागरिक को न्याय मिलने का अधिकार है।

श्रद्धांजलि सभा में शिक्षण समिति सभापति स्नेहा शैलेश पांडे, परिवहन समिति सभापति एड. राजकुमार मिश्रा, भाजपा जिला महामंत्री बृजेश तिवारी, पतंजलि योग समिति ठाणे जिला प्रमुख योग गुरु संतोष खटावकर, जिला सचिव मुकेश जांगिड़, फूलकुमार झा, समाजसेवक एल. आर. पांडे, समाजसेवी मैना पांडे, जितेंद्र प्रताप सिंह, मंडल उपाध्यक्ष विश्वनाथ तिवारी, जिला सचिव बी. एस. पाठक, संदीप दुबे, संजय दुबे, देवेंद्र सिंह, संजय गुप्ता, संदीप शर्मा, नितीन ओझा, विशाल रजक सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

मनीलाइफ फाउंडेशन की स्टडी में मुंबई मेट्रो लाइन-3 की एक्सेसिबिलिटी में कमियों का खुलासा, व्यावहारिक सुधारों की सिफारिश

मनीलाइफ फाउंडेशन की स्टडी में मुंबई मेट्रो लाइन-3 की एक्सेसिबिलिटी में कमियों का खुलासा, व्यावहारिक सुधारों की सिफारिश

मनीलाइफ फाउंडेशन द्वारा किए गए एक स्वतंत्र अध्ययन में मुंबई मेट्रो एक्वा लाइन (लाइन-3) पर यात्रियों की पहुंच (Accessibility) और उपयोगकर्ता-अनुकूल सुविधाओं में मौजूद कई व्यावहारिक कमियों की पहचान की गई है। आधुनिक अवसंरचना और उत्कृष्ट इंजीनियरिंग के बावजूद, अध्ययन में पाया गया कि दैनिक यात्रियों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, छोटे बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों तथा सामान लेकर चलने वाले यात्रियों को कई स्तरों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

'मुंबई मेट्रो एक्वा लाइन (लाइन-3) की एक्सेसिबिलिटी और यूज़र-फ्रेंडलीनेस पर अध्ययन' शीर्षक से यह रिपोर्ट 8 जुलाई 2026 को जारी की गई। इसकी प्रतियां केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA), मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (MMRC), महा मुंबई मेट्रो ऑपरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MMMOCL), मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA), महाराष्ट्र सरकार, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) सहित विभिन्न मेट्रो एजेंसियों और शोध संस्थानों को भेजी गई हैं।

अध्ययन के तहत मेट्रो लाइन-3 के सभी 27 स्टेशनों का विस्तृत निरीक्षण, यात्रियों का सर्वेक्षण तथा एक्सेसिबिलिटी, ट्रांसपोर्ट प्लानिंग और अर्बन मोबिलिटी विशेषज्ञों से परामर्श किया गया।

रिपोर्ट में प्रमुख रूप से पाया गया कि अधिकांश स्टेशनों पर नीचे उतरने वाले एस्केलेटर उपलब्ध नहीं हैं। यात्रियों को बाहर निकलते समय लंबी सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं, जिससे वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और भारी सामान लेकर यात्रा करने वालों को अनावश्यक कठिनाई होती है।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि कई स्टेशनों पर अत्यधिक सीढ़ियां चढ़नी-उतरनी पड़ती हैं। यद्यपि लिफ्ट उपलब्ध हैं, लेकिन सभी यात्री उनका उपयोग नहीं कर पाते, जिससे सीढ़ियों पर निर्भरता बढ़ जाती है।

रिपोर्ट में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को भी एक बड़ी चुनौती बताया गया है। यात्रियों ने बस, ऑटो-रिक्शा और टैक्सी तक पहुंचने में कठिनाई तथा आसपास के परिवहन नेटवर्क के साथ पर्याप्त समन्वय न होने की शिकायत की। अध्ययन के अनुसार, स्टेशन के बाहर बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और कनेक्टिविटी विकसित करना आवश्यक है।

इसके अलावा, मार्गदर्शन (Wayfinding) और एक्सेसिबिलिटी संबंधी संकेतकों को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता बताई गई है, ताकि पहली बार यात्रा करने वाले यात्रियों और दिव्यांगजनों को आसानी से मार्ग मिल सके।

एयरपोर्ट स्टेशनों पर लंबी पैदल दूरी, ट्रॉली की सीमित उपलब्धता तथा एयरपोर्ट टर्मिनल और मेट्रो स्टेशन के बीच सुगम संपर्क की कमी को भी महत्वपूर्ण समस्या के रूप में चिन्हित किया गया है।

मनीलाइफ फाउंडेशन ने अपनी सिफारिशों में जहां संभव हो वहां डाउन एस्केलेटर की स्थापना, बेहतर संकेतक, बस एवं अन्य सार्वजनिक परिवहन से प्रभावी एकीकरण, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी में सुधार तथा भविष्य की मेट्रो परियोजनाओं में यूनिवर्सल एक्सेसिबिलिटी को अनिवार्य रूप से शामिल करने का सुझाव दिया है।

फाउंडेशन की सुचेता दलाल का मानना है कि यह अध्ययन मुंबई मेट्रो लाइन-3 में व्यावहारिक सुधारों का आधार बनेगा तथा भविष्य की शहरी परिवहन परियोजनाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज सिद्ध होगा।

यह अध्ययन मनीलाइफ फाउंडेशन द्वारा सार्वजनिक नीति, सुशासन और उपभोक्ता अधिकारों पर अपने निरंतर कार्य के अंतर्गत किया गया। इस परियोजना के फील्ड रिसर्च का कार्य फाउंडेशन के मार्गदर्शन में अशोका विश्वविद्यालय की इंटर्न अगम्या जैन और मिहिका ओमसीमा ने किया।

Saturday, 4 July 2026

एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई के चुनाव में 'एशियाटिक टुमॉरो' पैनल की ऐतिहासिक जीत

एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई के चुनाव में 'एशियाटिक टुमॉरो' पैनल की ऐतिहासिक जीत, कुमार केतकर पैनल पर मिली निर्णायक विजय

एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई के बहुप्रतीक्षित चुनाव में डॉ. विनय सहस्रबुद्धे के नेतृत्व वाले 'एशियाटिक टुमॉरो' पैनल ने शानदार और एकतरफा जीत दर्ज करते हुए वरिष्ठ पत्रकार कुमार केतकर के नेतृत्व वाले पैनल को निर्णायक रूप से पराजित कर दिया। कई महीनों तक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बाद संपन्न हुए इस चुनाव में कुल 517 सदस्यों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

अध्यक्ष पद पर डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने 352 मत प्राप्त कर विजय हासिल की, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी वरिष्ठ पत्रकार कुमार केतकर को 147 मत मिले। उपाध्यक्ष पद की चारों सीटों पर रमेश पतंगे (329), नितीश भारद्वाज (328), चंद्रप्रकाश द्विवेदी (327) और संजय देशमुख (323) विजयी रहे। सचिव पद पर विवेक गणपुले ने 352 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की। मैनेजिंग कमेटी के लिए प्राची मोघे (341), माधव भंडारी (339), मल्हार कुलकर्णी (333), प्रमोद बापट (329), वी. एम. चक्रवर्ती (324) तथा राजेश बेहरे (321) निर्वाचित हुए। स्क्रूटिनाइजिंग कमेटी में स्नेह नगरकर (370), अभिजीत मुले (362), माधवी नरसाले (362), उमंग काले (358), अमोल जाधव (349), मल्हार गोखले (348) तथा दत्तात्रय पंचवाघ (344) ने जीत दर्ज की।

इस परिणाम के साथ 'एशियाटिक टुमॉरो' पैनल ने सभी प्रमुख पदों और समितियों में विजय प्राप्त कर एशियाटिक सोसायटी के चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल किया। यह परिणाम संस्था के प्रशासन, संरक्षण और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए सदस्यों के स्पष्ट जनादेश के रूप में देखा जा रहा है।

लोकसभा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्रियों से डॉ. चिन्मय पण्ड्या की शिष्टाचार भेंट

लोकसभा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्रियों से डॉ. चिन्मय पण्ड्या की शिष्टाचार भेंट

जन्मशताब्दी वर्ष समारोह हेतु राष्ट्रीय नेतृत्व को आमंत्रण

अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने नई दिल्ली प्रवास के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तथा केंद्रीय मंत्रियों ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, चिराग पासवान, सर्बानंद सोनोवाल, भूपेन्द्र यादव एवं सी. आर. पाटिल से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें अखिल विश्व गायत्री परिवार की संस्थापिका वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों, अखंड दीपक शताब्दी समारोह तथा अन्य विशेष आयोजनों में सहभागिता हेतु आमंत्रित किया।

बैठकों के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों, भारतीय संस्कृति, वैज्ञानिक अध्यात्म, नैतिक नेतृत्व, युवा सशक्तिकरण, मूल्यनिष्ठ शिक्षा तथा विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की रचनात्मक भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक एवं प्रेरणादायी चर्चा हुई। साथ ही देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा योग, भारतीय ज्ञान परंपरा, समग्र व्यक्तित्व विकास एवं संस्कार आधारित शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों एवं प्रयासों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने जन्मशताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों और राष्ट्र निर्माण के व्यापक जनजागरण का अभियान बताते हुए सभी जनप्रतिनिधियों से सक्रिय सहभागिता का आग्रह किया।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रियों ने अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा समाज जागरण, संस्कार संवर्धन, नैतिक मूल्यों के प्रसार, सांस्कृतिक पुनर्जागरण तथा राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में किए जा रहे रचनात्मक एवं प्रेरणादायी कार्यों की सराहना की। उन्होंने माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी वर्ष समारोह एवं अखंड दीपक शताब्दी समारोह की सफलता, गरिमा एवं व्यापक जनप्रेरणा के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ व्यक्त करते हुए इन आयोजनों में सहभागिता का आश्वासन भी दिया। 

Friday, 3 July 2026

महाराष्ट्रातील माहितीचा अधिकार नियम, २०२६ ला स्थगिती : जनदबावाचा विजय की सरकारची धोरणात्मक माघार?

महाराष्ट्रातील माहितीचा अधिकार नियम, २०२६ ला स्थगिती : जनदबावाचा विजय की सरकारची धोरणात्मक माघार?

महाराष्ट्र सरकारने लागू केलेल्या माहितीचा अधिकार (आरटीआय) नियम, २०२६ संदर्भात मोठा वाद निर्माण झाल्यानंतर अखेर सरकारने या नियमांच्या अंमलबजावणीला तात्पुरती स्थगिती देण्याचा निर्णय घेतला आहे. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांच्या निर्देशानंतर या नियमांच्या अंमलबजावणीला स्थगिती देण्याची प्रक्रिया सुरू करण्यात आली. देशभरातील आरटीआय कार्यकर्ते, सामाजिक संस्था, कायदेतज्ज्ञ तसेच ज्येष्ठ समाजसेवक अण्णा हजारे यांनी या नियमांना तीव्र विरोध केला होता. अण्णा हजारे यांनी या विरोधात उपोषणाची घोषणाही केली होती. त्यामुळे सरकारने घेतलेला हा निर्णय केवळ प्रशासकीय नसून नागरिकांच्या अधिकारांशी संबंधित महत्त्वाच्या प्रश्नावर सरकारने एक पाऊल मागे घेतल्याचे मानले जात आहे.

महाराष्ट्र सरकारने १२ जून २०२६ रोजी राजपत्रात अधिसूचना प्रसिद्ध करून माहितीचा अधिकार नियम, २०२६ तात्काळ प्रभावाने लागू केले होते. या नियमांमध्ये अनेक महत्त्वपूर्ण बदल करण्यात आले होते. यापूर्वी आरटीआय अर्जासाठी ₹१० शुल्क आकारले जात होते. नवीन नियमांनुसार ते वाढवून ₹३० करण्यात आले. प्रथम अपीलचे शुल्क ₹२० वरून ₹५० करण्यात आले, तर द्वितीय अपीलचे शुल्क ₹२० वरून ₹१०० करण्यात आले. माहितीच्या प्रती मिळविण्यासाठीही शुल्क वाढविण्यात आले. ए-४ आकाराच्या प्रत्येक पानासाठी ₹५, तसेच स्कॅन अथवा डिजिटल प्रतीसाठीही ₹५ प्रति पान शुल्क निश्चित करण्यात आले. अभिलेखांचे निरीक्षण पहिले एक तास मोफत ठेवण्यात आले होते; त्यानंतर प्रत्येक तासासाठी ₹५० शुल्क आकारण्याची तरतूद करण्यात आली. दारिद्र्यरेषेखालील (बीपीएल) अर्जदारांना अर्ज शुल्कातून सवलत देण्यात आली होती; मात्र ५० पानांपेक्षा अधिक माहिती घेतल्यास त्यांनाही निर्धारित शुल्क भरावे लागणार होते.

नवीन नियमांनुसार एका आरटीआय अर्जात सामान्यतः केवळ एकाच विषयाचा समावेश असावा आणि अर्ज १५० शब्दांपेक्षा अधिक नसावा, अशी अट घालण्यात आली होती. एका अर्जात एकापेक्षा अधिक विषय असल्यास लोक माहिती अधिकारी केवळ पहिल्या विषयावरच कार्यवाही करेल आणि उर्वरित विषयांसाठी स्वतंत्र अर्ज करण्याचा सल्ला देईल, अशी तरतूद होती. आरटीआय कार्यकर्त्यांचे म्हणणे होते की, प्रत्यक्षात अनेक वेळा एका विषयाशी संबंधित अनेक मुद्द्यांवर माहिती मागविणे आवश्यक असते. त्यामुळे ही अट नागरिकांवर अतिरिक्त आर्थिक व प्रशासकीय भार टाकणारी ठरली असती.

या नियमांमधील सर्वाधिक वादग्रस्त तरतूद म्हणजे भारतीय नागरिकत्वाचा पुरावा अनिवार्य करणे होय. प्रत्येक आरटीआय अर्जासोबत भारतीय नागरिक असल्याचा स्वप्रमाणित छायाचित्रयुक्त ओळखपत्र जोडणे बंधनकारक करण्यात आले होते. ओळखपत्र जोडले नसल्यास अर्ज परत करण्याची तरतूदही करण्यात आली होती. विरोधकांचे म्हणणे होते की, माहितीचा अधिकार अधिनियम, २००५ मध्ये अशी कोणतीही अट नाही आणि राज्य सरकारला नियमांच्या माध्यमातून मूळ कायद्यात अतिरिक्त अटी घालण्याचा अधिकार नाही.

आरटीआय कार्यकर्ते आणि कायदेतज्ज्ञांच्या मते हे नियम माहिती मिळविण्याची प्रक्रिया सुलभ करण्याऐवजी अधिक कठीण करणारे होते. अर्ज शुल्कात मोठी वाढ, ओळखपत्र अनिवार्य केल्यामुळे गोपनीयता आणि सुरक्षेचे प्रश्न, एका अर्जात एकच विषय ठेवण्याची सक्ती, १५० शब्दांची मर्यादा आणि मूळ कायद्याच्या भावनेला छेद देणाऱ्या अतिरिक्त अटी या प्रमुख आक्षेप होत्या. अनेक संघटनांनी असा युक्तिवाद केला की, राज्य सरकार नियम करू शकते; मात्र त्या नियमांद्वारे नागरिकांचे मूलभूत वैधानिक अधिकार मर्यादित करू शकत नाही.

ज्येष्ठ समाजसेवक अण्णा हजारे यांनी या नियमांना लोकशाही अधिकारांवरील आघात असल्याचे सांगत आंदोलन आणि उपोषणाची घोषणा केली. त्यांच्या घोषणेनंतर सरकारवर राजकीय आणि सामाजिक दबाव वाढला. आरटीआय कार्यकर्ते, सामाजिक संस्था तसेच विरोधी पक्षांनीही हे नियम मागे घेण्याची मागणी केली. या पार्श्वभूमीवर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी नियमांच्या अंमलबजावणीला स्थगिती देण्याचा निर्णय घेतला.

सध्या सरकारने केवळ या नियमांच्या अंमलबजावणीला स्थगिती दिली आहे. म्हणजेच हे नियम सध्या लागू होणार नाहीत. भविष्यात सरकार आवश्यक सुधारणा करून नवी अधिसूचना जारी करू शकते. त्यामुळे हा अंतिम निर्णय मानता येणार नाही. सरकार लवकरच आरटीआय कार्यकर्त्यांशी चर्चा करणार असून, वादग्रस्त तरतुदींचा फेरविचार करून आवश्यक सुधारणा करण्याची किंवा पूर्वीचे नियम कायम ठेवण्याची शक्यता आहे.

माहितीचा अधिकार अधिनियम, २००५ हा भारतातील सर्वात प्रभावी पारदर्शकता कायद्यांपैकी एक मानला जातो. या कायद्यामुळे शासनाच्या कामकाजात उत्तरदायित्व आणि पारदर्शकता वाढली असून लाखो नागरिकांना त्यांच्या हक्कांचे संरक्षण करण्याचे प्रभावी साधन उपलब्ध झाले आहे. महाराष्ट्र सरकारने या नियमांना स्थगिती दिल्याने लोकशाही व्यवस्थेत जनमत, नागरी समाज आणि शांततामय आंदोलन यांची ताकद आजही प्रभावी असल्याचे पुन्हा एकदा सिद्ध झाले आहे. तसेच माहितीच्या अधिकारासारख्या महत्त्वाच्या कायद्यात कोणताही बदल करण्यापूर्वी व्यापक सार्वजनिक चर्चा आणि सर्व संबंधित घटकांशी सल्लामसलत होणे आवश्यक असल्याचेही या घटनाक्रमातून स्पष्ट झाले आहे. नागरिकांच्या अधिकारांशी संबंधित कायद्यांमध्ये बदल करताना पारदर्शकता, घटनात्मक मूल्ये आणि लोकसहभाग यांना सर्वोच्च प्राधान्य दिले गेले पाहिजे, हा संदेश या निर्णयातून अधोरेखित झाला आहे.

अनिल गलगली
माहितीचा अधिकार कार्यकर्ता

Wednesday, 1 July 2026

जौनपुर और ज़फराबाद के प्राचीन इतिहास के अध्ययन एवं संरक्षण हेतु पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान की पहल

जौनपुर और ज़फराबाद के प्राचीन इतिहास के अध्ययन एवं संरक्षण हेतु पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान की पहल

मीरा रोड पूर्व स्थित श्री लल्लन तिवारी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के सभागार में पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान द्वारा एक सभा आयोजित की गई, जिसमें जौनपुर एवं ज़फराबाद क्षेत्र के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक महत्व पर चर्चा की गई तथा उनके अध्ययन, संरक्षण और पुनर्परिभाषा से संबंधित प्रस्ताव पारित किए गए।

सभा को संबोधित करते हुए प्रतिष्ठान के सचिव एवं पत्रकार ओम प्रकाश ने सनातन परंपरा के वैश्विक सांस्कृतिक विस्तार तथा भगवती तारा एवं आदि पराशक्ति से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों पर अपने विचार रखे। वहीं श्री जयशंकर तिवारी ने जौनपुर और ज़फराबाद के ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और उनके प्राचीन स्वरूप के अध्ययन से संबंधित प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, शिक्षाविद लल्लन तिवारी, मीरा भायंदर की महापौर डिंपल मेहता, पूर्व सांसद संजय निरुपम, पूर्व मंत्री विद्या ठाकुर, विधायक नरेंद्र मेहता, पद्मश्री डॉ. सोमा घोष, भाजपा नेता आर. यू. सिंह सहित बड़ी संख्या में पूर्वांचल समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

सभा में पारित प्रस्तावों में जौनपुर जिले के ज़फराबाद स्थित मनहेच किला और मछलीशहर स्थित सगरेकोट क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कर संरक्षित करने, जमैथा एवं मादरडीह क्षेत्रों के व्यापक ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक अध्ययन, क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान पर शोध तथा अटाला मस्जिद से जुड़े विषयों पर संवाद एवं संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान खोजने की मांग शामिल रही।

सभा में यह भी निर्णय लिया गया कि भविष्य में बख्शा, राजेपुर, सिरकोनी, मल्हनी, मड़ियाहूं, केराकत एवं अन्य क्षेत्रों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के दस्तावेजीकरण और अध्ययन के लिए विस्तृत प्रस्ताव राज्य सरकार को प्रस्तुत किए जाएंगे।

दिलीप घोष को ‘डॉ. मुखर्जी स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया

दिलीप घोष को ‘डॉ. मुखर्जी स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया

पश्चिम बंगाल में सरकार गठन के बाद पहली बार मुंबई पहुंचे पश्चिम बंगाल के ग्राम्य विकास एवं पंचायत राज मंत्री दिलीप घोष ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न (मरणोपरांत) प्रदान किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता की रक्षा में डॉ. मुखर्जी का योगदान ऐतिहासिक रहा है और राष्ट्रहित में उनके योगदान को सर्वोच्च सम्मान मिलना चाहिए।

दिलीप घोष मुंबई भाजपा के उपाध्यक्ष अमरजीत मिश्रा की संस्था दीप कमल फाउंडेशन द्वारा आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। विलेपार्ले (पूर्व) स्थित दीनानाथ मंगेशकर सभागृह में भारतीय जनसंघ एवं भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिक, भाजपा कार्यकर्ता एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में दिलीप घोष ने कहा कि विभाजन के दौर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बंगाल के पश्चिमी हिस्से को भारत में बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व और संकल्प ने उस समय की परिस्थितियों में ऐतिहासिक प्रभाव छोड़ा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मुंबई भाजपा अध्यक्ष एवं विधायक अमित साटम ने की। इस अवसर पर सार्वजनिक जीवन एवं राष्ट्रसेवा में योगदान के लिए दिलीप घोष को ‘डॉ. मुखर्जी स्मृति सम्मान’ प्रदान किया गया।

समारोह में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री आशीष शेलार, राज्यसभा सांसद एवं वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम, पश्चिम बंगाल भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद राहुल सिन्हा सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।

पिछले 16 वर्षों से आयोजित किए जा रहे इस कार्यक्रम की संकल्पना एवं आयोजन के लिए भाजपा नेता अमरजीत मिश्रा की सभी वक्ताओं ने सराहना की। श्री मिश्रा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।

कार्यक्रम का भावनात्मक क्षण तब आया जब उन वीर माताओं का सम्मान किया गया, जिनके पुत्रों ने देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिया। शहीद सैनिक दिनकर नाळे की माता यशोदा नाळे तथा मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित कैप्टन आर. सुब्रमण्यम की माता सुब्बलक्ष्मी रामचंद्रन को शाल एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की हालिया चुनावी सफलता को जनसमर्थन और राजनीतिक परिवर्तन का संकेत बताया।

कार्यक्रम में बंगाली संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। बांग्ला संगीत, लोकधुनों, पारंपरिक बंगाली वेशभूषा और ढाक की प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं, “मी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी बोलतोय” नाटक के मंचन को भी सराहना मिली।

समारोह में मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों से आए बंगाली संगठनों के प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, भाजपा पदाधिकारियों तथा बड़ी संख्या में बंगाली समुदाय के नागरिकों ने सहभागिता की। राष्ट्रभक्ति और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न यह आयोजन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक सहभागिता का भी प्रतीक बना।

Wednesday, 24 June 2026

Maharashtra RTI Rules 2026: Reform or a New Question on Transparency?

Maharashtra RTI Rules 2026: Reform or a New Question on Transparency?

Were these controversial changes really necessary?

The Right to Information (RTI) is not merely a law; it is one of the most significant democratic tools that enables citizens to seek accountability from the government. The Right to Information Act, 2005, introduced by the Government of India, was designed to promote transparency, improve governance and strengthen public participation.

While states were empowered to frame procedural rules within their jurisdiction, such rules were expected to remain aligned with the spirit and objectives of the parent legislation. Against this backdrop, the Government of Maharashtra announced a set of amendments to its RTI rules on 12 June 2026, triggering widespread public discussion and debate.

The revised framework reportedly introduced provisions relating to higher fees, disclosure of purpose for seeking information, proof of citizenship requirements, restrictions concerning legal representation, and additional procedural conditions. The issue, however, is not only about what was changed but also how those changes were introduced.

When laws or rules that directly affect citizens are modified, public consultation, stakeholder engagement, and publication of draft proposals are generally regarded as important elements of good governance. Therefore, questions naturally emerged: Was there adequate consultation? Were citizen groups, RTI users, or institutional stakeholders sufficiently involved before implementation?

This is not the first time RTI-related procedural changes have generated public debate in Maharashtra. In 2012, during the tenure of then Chief Minister Prithviraj Chavan, a proposal introducing a 150-word limit on RTI applications had attracted opposition from RTI activists and civil society groups. The matter subsequently entered legal scrutiny. In that context, the return of procedural restrictions after many years revived concerns among transparency advocates.

Among the recent amendments, the most debated provision was the requirement that applicants disclose the purpose for seeking information. One of the long-standing principles associated with RTI practice has been that citizens should ordinarily not be required to justify why information is being requested. Consequently, the proposal invited strong reactions from several quarters.

Significantly, on 19 June 2026, the government withdrew the requirement relating to disclosure of purpose. That reversal within seven days raised further questions. If the provision was necessary, why was it withdrawn so quickly? If it was unnecessary, why was it introduced in the first place? Was sufficient legal and administrative review undertaken before notification?

During this period, discussions also intensified following public objections and reported protest warnings from senior social activist Anna Hazare.
However, an equally important issue often receives less attention.

Under Section 4(1)(b) of the RTI Act, 2005, public authorities are expected to proactively disclose key categories of information. Effective implementation of proactive disclosure could significantly reduce the need for citizens to file RTI applications.

This leads to broader governance questions. How many public authorities have fully implemented proactive disclosure obligations? How effective is record management? Are reasons for policy decisions being consistently documented and communicated?Has accountability been fixed where disclosure obligations were ignored?

At the same time, it may also be useful to evaluate the relationship between the Maharashtra State Information Commission and the government. If institutional coordination exists, an independent review could examine. How many recommendations were made by the Commission? How many were accepted by the state government? How many resulted in actual implementation?

The long-term strength of the RTI framework will not come from increasing procedural barriers but from improving transparency, strengthening records management, and expanding proactive disclosure. In a democracy, citizens seeking information should not be viewed as an administrative burden, but as participants in better governance.

Anil Galgali 
RTI Activist

महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम 2026 : सुधार या पारदर्शिता पर नया प्रश्न?

महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम 2026 : सुधार या पारदर्शिता पर नया प्रश्न?

क्या वास्तव में इतने विवादास्पद बदलावों की आवश्यकता थी?

सूचना का अधिकार केवल एक कानून नहीं, बल्कि लोकतंत्र में नागरिकों को शासन से जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रभावी माध्यम है। शासन के कार्यों में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और नागरिक सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 लागू किया। राज्यों को अपने प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र के अनुसार नियम बनाने की स्वतंत्रता दी गई, लेकिन यह अपेक्षा भी रखी गई कि नियम कानून की मूल भावना के अनुरूप हों।

इसी पृष्ठभूमि में महाराष्ट्र सरकार ने 12 जून 2026 को सूचना अधिकार नियमों में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव घोषित किए। सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से जारी इन संशोधनों ने नागरिकों, सूचना कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों के बीच व्यापक चर्चा को जन्म दिया।

इन बदलावों में शुल्क वृद्धि, सूचना मांगने का प्रयोजन बताने की शर्त, नागरिकता का प्रमाण, वकीलों की भूमिका पर सीमाएं तथा आवेदन प्रक्रिया में अतिरिक्त औपचारिकताएं जैसे प्रावधान शामिल थे। शासन की दृष्टि से इनका उद्देश्य प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना हो सकता है, लेकिन अनेक लोगों ने इसे सूचना तक पहुंच को जटिल बनाने वाला कदम माना।

सबसे बड़ा प्रश्न बदलावों की सामग्री नहीं, बल्कि उनकी प्रक्रिया को लेकर उठाया गया। सार्वजनिक हित से जुड़े कानूनों या नियमों में परिवर्तन करते समय सामान्यतः मसौदा सार्वजनिक किया जाता है, नागरिकों और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे जाते हैं तथा व्यापक चर्चा की जाती है। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या इन बदलावों से पहले पर्याप्त सार्वजनिक परामर्श किया गया था?

यह पहली बार नहीं है जब सूचना अधिकार व्यवस्था में ऐसे प्रश्न उठे हों। इससे पहले 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के कार्यकाल में RTI आवेदन के लिए 150 शब्दों की सीमा का विषय चर्चा में आया था। उस समय सूचना कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया और मामला न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचा। ऐसे में वर्षों बाद फिर आवेदन प्रक्रिया को सीमित करने जैसे कदमों की चर्चा ने पुराने विवादों को पुनः सामने ला दिया।

नए नियमों में सबसे अधिक विवाद सूचना मांगने का प्रयोजन बताने की शर्त को लेकर हुआ। सूचना का अधिकार अधिनियम की मूल भावना यह रही है कि नागरिक को जानकारी मांगने का कारण बताने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। यही कारण है कि इस प्रावधान को लेकर व्यापक आपत्तियां सामने आईं।

विशेष रूप से ध्यान देने योग्य बात यह रही कि 19 जून 2026 को सरकार ने सूचना के प्रयोजन वाली शर्त वापस ले ली। मात्र सात दिनों में निर्णय बदलने से कई प्रश्न उठे यदि यह शर्त आवश्यक थी तो वापस क्यों ली गई? और यदि आवश्यक नहीं थी तो प्रारंभ में जोड़ी क्यों गई? इस बीच वरिष्ठ समाजसेवी अण्णा हजारे द्वारा विरोध और आंदोलन की चेतावनी के बाद इस विषय पर प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां तेज होने की चर्चा भी सामने आई।

हालांकि इस पूरे विवाद के बीच एक महत्वपूर्ण प्रश्न अक्सर पीछे छूट जाता है। सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4(1)(ख) के तहत सार्वजनिक प्राधिकरणों को अनेक प्रकार की सूचनाएं स्वयं प्रकाशित करनी होती हैं। यदि इस व्यवस्था का प्रभावी पालन किया जाए तो नागरिकों को बार-बार आवेदन करने की आवश्यकता ही कम हो सकती है।

इसलिए चर्चा केवल नए नियमों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यह भी समीक्षा का विषय होना चाहिए कि कितने विभागों ने स्वप्रेरित सूचना प्रकटीकरण लागू किया? अभिलेख प्रबंधन कितना प्रभावी है? नीति निर्णयों के कारण सार्वजनिक करने में कितनी प्रगति हुई? लापरवाही के मामलों में कितनी जवाबदेही तय की गई? इसके साथ ही यह भी मूल्यांकन होना चाहिए कि महाराष्ट्र राज्य सूचना आयोग द्वारा समय-समय पर दी गई सिफारिशों में से कितनी सरकार ने स्वीकार कीं और उनमें से कितनी वास्तव में लागू हुईं।

सूचना अधिकार व्यवस्था की मजबूती अधिक शर्तें लगाने से नहीं, बल्कि पारदर्शी प्रशासन, बेहतर अभिलेख व्यवस्था और नागरिकों को समय पर सूचना उपलब्ध कराने से आएगी। लोकतंत्र में सूचना मांगने वाला नागरिक बाधा नहीं, बल्कि सुशासन का सहभागी होता है।

अनिल गलगली 
सूचना का अधिकार कार्यकर्ता

महाराष्ट्र माहिती अधिकार नियम 2026 : बदल की पारदर्शकतेवर प्रश्न?

महाराष्ट्र माहिती अधिकार नियम 2026 : बदल की पारदर्शकतेवर प्रश्न?

माहिती अधिकार अधिक सक्षम होणार की अधिक गुंतागुंतीचा?

माहितीचा अधिकार हा लोकशाहीतील नागरिकांचा एक महत्त्वाचा हक्क मानला जातो. शासनाच्या कामकाजात पारदर्शकता, उत्तरदायित्व आणि नागरिकांचा सहभाग वाढविण्यासाठी केंद्र शासनाने माहितीचा अधिकार अधिनियम, 2005 लागू केला. या कायद्यामुळे नागरिकांना शासनाकडे माहिती मागण्याचा वैधानिक अधिकार प्राप्त झाला.

राज्य शासनांना त्यांच्या प्रशासकीय कार्यपद्धतीनुसार नियम तयार करण्याचा अधिकार असला तरी त्या नियमांचा मूळ कायद्याच्या उद्देशाशी सुसंगत असणे अपेक्षित असते. याच पार्श्वभूमीवर महाराष्ट्र शासनाने 12 जून 2026 रोजी माहिती अधिकार नियमांमध्ये काही महत्त्वपूर्ण बदल जाहीर केले आणि त्यावरून राज्यभर चर्चा सुरू झाली.

नवीन नियमांमध्ये शुल्कवाढ, माहिती मागण्याचे प्रयोजन नमूद करणे, नागरिकत्वाचा पुरावा, काही प्रक्रियात्मक निर्बंध अशा अनेक बाबींचा समावेश करण्यात आला. शासनाच्या मते यामागे प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित करणे हा उद्देश असू शकतो; मात्र अनेक माहिती कार्यकर्ते आणि नागरिकांनी या बदलांबाबत गंभीर आक्षेप नोंदविले.

मुख्य प्रश्न बदलांचा नसून ते कसे आणि कोणत्या प्रक्रियेतून करण्यात आले याचा आहे. सार्वजनिक हिताशी संबंधित नियम बदलताना सामान्यतः संबंधित घटकांची मते मागविणे, मसुदा सार्वजनिक करणे आणि व्यापक चर्चा करणे ही सुशासनाची अपेक्षित पद्धत मानली जाते. त्यामुळे प्रश्न उपस्थित झाला की या बदलांपूर्वी पुरेसा लोकसहभाग झाला होता का?

यापूर्वी 2012 मध्ये तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यांच्या कार्यकाळात माहिती अर्जासाठी 150 शब्दांची मर्यादा प्रस्तावित करण्यात आली होती. त्यावेळी माहिती कार्यकर्त्यांनी त्याला विरोध केला आणि संबंधित विषय न्यायालयीन प्रक्रियेत गेला. अशा परिस्थितीत अनेक वर्षांनंतर पुन्हा अर्ज प्रक्रियेला अतिरिक्त अटी जोडण्याचा प्रयत्न का करण्यात आला, अशी चर्चा सुरू झाली.

नवीन नियमांमधील सर्वाधिक चर्चेत राहिलेली बाब म्हणजे माहिती मागण्याचे प्रयोजन नमूद करण्याची अट. माहिती अधिकाराच्या मूलभूत तत्त्वांनुसार नागरिकाने माहिती का मागितली हे विचारले जाणार नाही, अशी भूमिका अनेकदा मांडली गेली आहे. त्यामुळे ही अट समाविष्ट झाल्यानंतर नागरिक व सामाजिक संघटनांनी प्रश्न उपस्थित केले.
विशेष म्हणजे, 19 जून 2026 रोजी शासनाने माहितीचे प्रयोजन नमूद करण्याची अट मागे घेतली. अवघ्या सात दिवसांत झालेल्या या निर्णयबदलामुळे अनेक प्रश्न निर्माण झाले. जर अट आवश्यक होती तर ती मागे का घेण्यात आली? आणि जर ती आवश्यक नव्हती, तर ती समाविष्ट करण्याची गरज काय होती?

दरम्यान, ज्येष्ठ समाजसेवक अण्णा हजारे यांनी या विषयावर आंदोलनाचा इशारा दिल्यानंतर शासनस्तरावर हालचाली वाढल्याचे दिसून आले. मात्र या चर्चेत आणखी एक मूलभूत मुद्दा अनेकदा दुर्लक्षित राहतो. माहिती अधिकार कायद्याच्या कलम 4(1)(ब) नुसार सार्वजनिक प्राधिकरणांनी अनेक प्रकारची माहिती स्वयंस्फूर्तीने प्रसिद्ध करणे अपेक्षित आहे. जर ही तरतूद प्रभावीपणे अंमलात आली असती तर नागरिकांना मोठ्या प्रमाणात स्वतंत्र माहिती अर्ज करण्याची गरजच कमी झाली असती.

म्हणूनच प्रश्न केवळ नवीन नियमांचा नाही. प्रश्न असा आहे की शासनाने आधी अस्तित्वातील जबाबदाऱ्या कितपत पूर्ण केल्या आहेत? तसेच महाराष्ट्र राज्य माहिती आयोगाने वेळोवेळी केलेल्या शिफारशींपैकी किती शासनाने स्वीकारल्या आणि किती प्रत्यक्षात अंमलात आणल्या याचे स्वतंत्र मूल्यमापन होणे आवश्यक आहे.

माहिती अधिकार व्यवस्थेचे खरे बळ हे अर्जांवरील निर्बंधांमध्ये नसून पारदर्शक प्रशासन, सक्षम अभिलेख व्यवस्थापन आणि स्वयंस्फूर्त माहिती प्रकटनात आहे. आज गरज आहे ती माहिती मिळवणे कठीण करण्याची नव्हे, तर शासन अधिक खुले आणि उत्तरदायी बनवण्याची.

अनिल गलगली 
माहिती अधिकार कार्यकर्ते

Tuesday, 23 June 2026

“एक शाम आर्थर जेल के कैदियों के नाम” नारी सम्मान संगठन की अनोखी पहल

“एक शाम आर्थर जेल के कैदियों के नाम” नारी सम्मान संगठन की अनोखी पहल

संगीत, हास्य और संवेदना के माध्यम से कैदियों तक पहुंचा मानवीय संदेश

समाज में सकारात्मक परिवर्तन और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने की दिशा में एक अनोखी पहल करते हुए नारी सम्मान संगठन की प्रमुख डॉ. सुंदरी ठाकुर द्वारा “एक शाम आर्थर जेल के कैदियों के नाम” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जेल में अपनी सजा काट रहे कैदियों तक संवेदना, सकारात्मक सोच और सामाजिक पुनर्संवाद का संदेश पहुंचाना था।

कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जीवन में परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, परिवर्तन और आत्मविश्वास के अवसर हमेशा बने रहते हैं। कला, संगीत और संवाद के जरिए कैदियों के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और आत्मचिंतन का वातावरण बनाने का प्रयास किया गया।

इस अवसर पर अनेक प्रतिष्ठित कलाकारों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े व्यक्तित्वों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। कार्यक्रम में डॉ. विनय सिंह, प्रसिद्ध कॉमेडियन संजय शर्मा, गायक मिकी नरूला, गायिका चंचल लहरी, आल्फिया सिंगर, सोनी सिंगर सहित अन्य कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को यादगार बनाया।

इसके अतिरिक्त प्रणाली शाह, पूनम छाबड़िया, रूपल जौहरी, धर्मेश सिंह एवं उनकी टीम ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने संगीत, हास्य और प्रेरणादायक संवादों के माध्यम से उपस्थित कैदियों के साथ भावनात्मक जुड़ाव स्थापित किया। आयोजन का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि समाज के हर वर्ग तक मानवीय संवेदनाओं और सकारात्मक सोच को पहुंचाना था।

नारी सम्मान संगठन की प्रमुख डॉ. सुंदरी ठाकुर ने कहा कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति परिवर्तन और नई शुरुआत का अवसर पाने का अधिकारी है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज और संवेदनाओं के बीच एक सकारात्मक सेतु का कार्य करते हैं।

यह आयोजन सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदनशीलता और पुनर्वास की भावना को समर्पित रहा।

शांतिकुंज में गायत्री जयंती महापर्व से पूर्व निकाली गई भव्य दीप रैली

शांतिकुंज में गायत्री जयंती महापर्व से पूर्व निकाली गई भव्य दीप रैली

जीवन संग्राम का नाम अध्यात्म : डॉ. चिन्मय पण्ड्या

सच्ची उपासना मानव सेवा और सदाचार में निहित : शैफाली पण्ड्या

हरिद्वार स्थित गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में गायत्री जयंती महापर्व की पूर्व संध्या पर जन-जागरण एवं आत्मिक उन्नति के विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित भव्य दीप रैली का नेतृत्व अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय पण्ड्या तथा महिला मंडल प्रमुख श्रीमती शैफाली पण्ड्या ने मशाल एवं दीप प्रज्वलित कर किया।

सभा को संबोधित करते हुए देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि “जीवन के संग्राम का नाम अध्यात्म है।” उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में अनेक चुनौतियों, परिस्थितियों और आंतरिक द्वंद्वों का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में अध्यात्म ही वह शक्ति है, जो मनुष्य को स्थिरता, धैर्य और सही दिशा प्रदान करती है।

उन्होंने कहा कि जीवन की वास्तविकताओं को समझते हुए उनके बीच संतुलन स्थापित करना आवश्यक है। बाहरी संघर्षों के साथ-साथ मन के भीतर मौजूद इच्छाओं, क्रोध, लोभ और मोह जैसे विकारों पर विजय प्राप्त करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अध्यात्म जीवन को श्रेष्ठ बनाने की कला है। आत्मसंयम, सद्विचार और सेवा भाव को अपनाकर ही व्यक्ति जीवन संग्राम में विजयी बन सकता है। उन्होंने जन्मशताब्दी वर्ष-2026 के अंतर्गत गायत्री परिवार द्वारा वैश्विक स्तर पर संचालित विभिन्न गतिविधियों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की।

इससे पूर्व शांतिकुंज महिला मंडल प्रमुख श्रीमती शैफाली पण्ड्या ने कहा कि वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा ने अपने जीवन में गायत्री माता के करुणा, सेवा और मातृत्व के आदर्शों को साकार रूप दिया। उन्होंने अपने असीम प्रेम और आत्मीयता से संपूर्ण गायत्री परिवार को एक सूत्र में पिरोकर उसे संस्कारित एवं सशक्त परिवार का स्वरूप प्रदान किया।

उन्होंने कहा कि गायत्री माता ज्ञान, सद्बुद्धि और मानव कल्याण की प्रतीक हैं। वंदनीया माताजी ने इन्हीं आदर्शों के आधार पर नारी जागरण, संस्कार निर्माण और समाजोत्थान के कार्यों को नई दिशा दी। इस अवसर पर शांतिकुंज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों सहित देश-विदेश से आए हजारों साधक उपस्थित रहे।

शांतिकुंज मीडिया विभाग के अनुसार गायत्री जयंती महापर्व का मुख्य आयोजन बुधवार को होगा। इस दौरान अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुखद्वय का विशेष उद्बोधन होगा। साथ ही विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं के लिए गुरुदीक्षा एवं अन्य संस्कार निःशुल्क संपन्न कराए जाएंगे।

Tuesday, 16 June 2026

Inauguration of Vedvyas Flavy’s Pre-School Providing Free Education in Chandivali

Inauguration of Vedvyas Flavy’s Pre-School Providing Free Education in Chandivali

A new initiative to provide free education was launched with the inauguration of Vedvyas Flavy’s Pre-School at Safed Pul, Chandivali, Mumbai, through the efforts of Panchsheel Mahila Mandal. The school was inaugurated by RTI activist Anil Galgali. This social initiative was undertaken by Manali Subhash Gaikwad, while Subhash Gaikwad welcomed all dignitaries and citizens present at the event.

Speaking on the occasion, Anil Galgali stated that free and quality education is the foundation of overall social development and that such initiatives play an important role in bringing positive change to society.

The inauguration ceremony was attended by Educationist Ravi Nair, Adv. Amol Matele, Babu Batteli, Lawrence Baba D’Souza, Sunil Jain, Surya Gowda, Adv. Kailas Agawane, Krishna Nalawade, Ajay Shukla, Uttam Pokharkar, Hirachand Suryavanshi, Raju Sonawane, Rajendra Kamble, Jagnnath Udugade, Adv. Rehman, Banshi Singh, Aziz Khan, Mohsin Shaikh, Saeed Khan, Sarjerao Kamble, Ratnakar Shetty, Pushpendra Goswami, Pankaj Sharma, Pratik Prajapati, Swapnil Chavan, Ishwar Chand, Sandeep Pasalkar, Ram Sahu, Tausif Siddiqui, Dinanath Yadav, Shivaji Londhe, Datta Shelke, Rajshri Patil, Janhavi Dongre, Janhavi D’Souza, along with several other distinguished guests.


चांदिवली में निःशुल्क शिक्षा देने वाले वेदव्यास फ्लेवीज़ प्री स्कूल का शुभारंभ

चांदिवली में निःशुल्क शिक्षा देने वाले वेदव्यास फ्लेवीज़ प्री स्कूल का शुभारंभ

मुंबई के चांदिवली स्थित सफेद पुल परिसर में पंचशील महिला मंडल के माध्यम से निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने वाले वेदव्यास फ्लेवीज़ प्री स्कूल का शुभारंभ किया गया। इस स्कूल का उद्घाटन आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली के हस्ते संपन्न हुआ। इस उपक्रम की पहल मनाली सुभाष गायकवाड द्वारा की गई। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों एवं नागरिकों का स्वागत सुभाष गायकवाड ने किया।

इस अवसर पर शिक्षाविद रवि नायर, एड अमोल मातेले, बाबू बत्तेली, लॉरेंस बाबा डिसोझा, सुनील जैन, सूर्या गौडा, एड कैलास आगवणे, कृष्णा नलावडे, अजय शुक्ला, उत्तम पोखरकर, हिराचंद सूर्यवंशी, राजू सोनवणे, राजेंद्र कांबळे, जगन्नाथ उदूगडे, एड रेहमान, बंशी सिंह, अजीज खान, मोहसिन शेख, सईद खान, सर्जेराव कांबळे, रत्नाकर शेट्टी, पुष्पेंद्र गोस्वामी, पंकज शर्मा, प्रतीक प्रजापती, स्वप्निल चव्हाण, ईश्वर चंद, संदीप पासलकर, राम साहू, तौसिफ सिद्दीकी, दीनानाथ यादव, शिवाजी लोंढे, दत्ता शेळके, राजश्री पाटील, जान्हवी डोंगरे एवं जान्हवी डिसोझा सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

इस अवसर पर अनिल गलगली ने कहा कि निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा समाज के सर्वांगीण विकास का आधार है तथा ऐसे उपक्रम समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

चांदिवली में निःशुल्क शिक्षा देने वाले वेदव्यास फ्लेवीज़ प्री स्कूल का शुभारंभ

चांदिवली में निःशुल्क शिक्षा देने वाले वेदव्यास फ्लेवीज़ प्री स्कूल का शुभारंभ

मुंबई के चांदिवली स्थित सफेद पुल परिसर में पंचशील महिला मंडल के माध्यम से निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने वाले वेदव्यास फ्लेवीज़ प्री स्कूल का शुभारंभ किया गया। इस स्कूल का उद्घाटन आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली के हस्ते संपन्न हुआ। इस उपक्रम की पहल मनाली सुभाष गायकवाड द्वारा की गई। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों एवं नागरिकों का स्वागत सुभाष गायकवाड ने किया।

इस अवसर पर शिक्षाविद रवि नायर, एड अमोल मातेले, बाबू बत्तेली, लॉरेंस बाबा डिसोझा, सुनील जैन, सूर्या गौडा, एड कैलास आगवणे, कृष्णा नलावडे, अजय शुक्ला, उत्तम पोखरकर, हिराचंद सूर्यवंशी, राजू सोनवणे, राजेंद्र कांबळे, जगन्नाथ उदूगडे, एड रेहमान, बंशी सिंह, अजीज खान, मोहसिन शेख, सईद खान, सर्जेराव कांबळे, रत्नाकर शेट्टी, पुष्पेंद्र गोस्वामी, पंकज शर्मा, प्रतीक प्रजापती, स्वप्निल चव्हाण, ईश्वर चंद, संदीप पासलकर, राम साहू, तौसिफ सिद्दीकी, दीनानाथ यादव, शिवाजी लोंढे, दत्ता शेळके, राजश्री पाटील, जान्हवी डोंगरे एवं जान्हवी डिसोझा सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

इस अवसर पर अनिल गलगली ने कहा कि निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा समाज के सर्वांगीण विकास का आधार है तथा ऐसे उपक्रम समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Monday, 15 June 2026

चांदिवली येथे मोफत शिक्षण देणाऱ्या वेदव्यास फ्लेवीज प्री स्कूलचे उद्घाटन

चांदिवली येथे मोफत शिक्षण देणाऱ्या वेदव्यास फ्लेवीज प्री स्कूलचे उद्घाटन

मुंबईतील चांदिवली येथील सफेद पूल परिसरात पंचशील महिला मंडळाच्या माध्यमातून लहान मुलांना मोफत व गुणवत्तापूर्ण शिक्षण उपलब्ध करून देण्याच्या उद्देशाने सुरू करण्यात आलेल्या वेदव्यास फ्लेवीज प्री स्कूलचे उद्घाटन करण्यात आले. या शाळेचे उद्घाटन माहिती अधिकार कार्यकर्ते अनिल गलगली यांच्या हस्ते संपन्न झाले.

या सामाजिक उपक्रमाची संकल्पना व पुढाकार मनाली सुभाष गायकवाड यांनी घेतला असून कार्यक्रमात उपस्थित मान्यवर व नागरिकांचे स्वागत सुभाष गायकवाड यांनी केले.

या प्रसंगी शिक्षण तज्ञ रवि नायर, ॲड. अमोल मातेले, बाबू बत्तेली, लॉरेन्स बाबा डिसोझा, सुनील जैन, सूर्या गौडा, ॲड. कैलास आगवणे, कृष्णा नलावडे, अजय शुक्ला, उत्तम पोखरकर, हिराचंद सूर्यवंशी, राजू सोनवणे, राजेंद्र कांबळे, जगन्नाथ उदूगडे, सुभाष गायकवाड, ॲड. रेहमान, बंशी सिंह, अजीज खान, मोहसिन शेख, सईद खान, सर्जेराव कांबळे, रत्नाकर शेट्टी, पुष्पेंद्र गोस्वामी, पंकज शर्मा, प्रतीक प्रजापती, स्वप्निल चव्हाण, ईश्वर चंद, संदीप पासलकर, राम साहू, तौसिफ सिद्दीकी, दीनानाथ यादव, शिवाजी लोंढे, दत्ता शेळके, राजश्री पाटील, जान्हवी डोंगरे आणि जान्हवी डिसोझा यांच्यासह अनेक मान्यवर उपस्थित होते.

यावेळी अनिल गलगली म्हणाले की, समाजातील प्रत्येक मुलापर्यंत शिक्षण पोहोचणे ही काळाची गरज असून मोफत शिक्षणाची संकल्पना सामाजिक समतेचा पाया मजबूत करते. आर्थिक परिस्थितीमुळे कोणतेही मूल शिक्षणापासून वंचित राहू नये, या उद्देशाने सुरू करण्यात आलेले असे उपक्रम समाजात सकारात्मक बदल घडवून आणण्यासाठी महत्त्वपूर्ण ठरतात. मोफत, सुलभ आणि गुणवत्तापूर्ण शिक्षण देण्याचा हा उपक्रम चांदिवली परिसरातील अनेक कुटुंबांसाठी आशेचा किरण ठरणार असल्याचे मत यावेळी व्यक्त करण्यात आले.



Friday, 5 June 2026

महाराष्ट्र महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष बनने पर अलका पांडेय का भव्य अभिनंदन

महाराष्ट्र महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष बनने पर अलका पांडेय का भव्य अभिनंदन

हिंदी साहित्य भारती के महाराष्ट्र महिला प्रकोष्ठ के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति के उपलक्ष्य में वरिष्ठ साहित्यकार, समाजसेवी एवं अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका पांडेय का भव्य अभिनंदन समारोह मुंबई प्रेस क्लब में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह का आयोजन प्रसिद्ध पत्रिका क्राइम पॉइंट की संपादक कमलेश गुप्ता द्वारा किया गया।

हिंदी साहित्य भारती के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रविंद्र शुक्ल, वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. दयानंद तिवारी तथा सुनीता मंडल द्वारा व्यक्त विश्वास के आधार पर अलका पांडेय को महाराष्ट्र महिला प्रकोष्ठ का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है। इसी उपलब्धि के सम्मान में आयोजित समारोह साहित्य, समाज सेवा और सांस्कृतिक जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति से विशेष रूप से गौरवान्वित हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. दयानंद तिवारी ने की, जबकि पवन तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में ममता झा, सूचना अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली तथा रामकुमार त्रिपाठी शामिल रहे। कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन पल्लवी रानी ने किया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. दयानंद तिवारी ने कहा कि अलका पांडेय की सक्रियता, संगठन क्षमता, साहित्यिक प्रतिबद्धता और सामाजिक सरोकारों को देखते हुए उन्हें इस पद के लिए सर्वाधिक उपयुक्त पाया गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में महाराष्ट्र महिला प्रकोष्ठ नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा और हिंदी साहित्य भारती को नई दिशा एवं गति मिलेगी।

मुख्य अतिथि पवन तिवारी ने अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए अलका पांडेय के साहित्यिक, सामाजिक और संगठनात्मक योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके कार्य प्रेरणादायी हैं तथा उनकी नई जिम्मेदारी संगठन को और अधिक सशक्त बनाएगी।

विशिष्ट अतिथि ममता झा ने महाराष्ट्र महिला इकाई को मजबूत एवं सक्रिय बनाने पर बल देते हुए अलका पांडेय की नेतृत्व क्षमता और समाज के प्रति समर्पण की प्रशंसा की। अनिल गलगली और रामकुमार त्रिपाठी ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके सफल एवं उज्ज्वल कार्यकाल की कामना की तथा कमलेश गुप्ता द्वारा आयोजित इस अभिनंदन समारोह की सराहना की।

सम्मान के प्रत्युत्तर में अलका पांडेय ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि उन सभी साहित्यकारों, समाजसेवियों और विशेष रूप से महिलाओं का सम्मान है जो समाज और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में निरंतर योगदान दे रही हैं। उन्होंने आयोजन के लिए कमलेश गुप्ता का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका विश्वास और स्नेह उनके लिए अमूल्य है। उन्होंने हिंदी साहित्य भारती के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रविंद्र शुक्ल, प्रो. दयानंद तिवारी और सुनीता मंडल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि यह पद केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि साहित्य, समाज और संस्कृति की सेवा का अवसर है, जिसका निर्वहन वे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ करेंगी।

समारोह में सेवा सदन प्रसाद, ओमप्रकाश पांडेय, नीरज ठाकुर, अनीता झा, सीमा त्रिवेदी, कविता झा, रोमा झा, चंद्रिका व्यास, दिव्या जैन, कलावती मोरया, डॉ. अनु, मृदुल, मनीषा सिंह, सूर्यकांत शुक्ला, रामस्वरूप साहू, नंदलाल क्षितिज, रोशनी किरण, प्रमेन्द्र सिंह, सैयद जाहिद अली, रियासत, संतोष साहू, हेरम्ब तिवारी, चंद्रकांत जाधव, निरज कुमार सहित अनेक साहित्यकार, समाजसेवी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

अंत में रामकुमार त्रिपाठी ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजकों का आभार व्यक्त किया।

यह अभिनंदन समारोह केवल एक सम्मान कार्यक्रम नहीं, बल्कि साहित्य, समाज सेवा और महिला सशक्तिकरण के प्रति समर्पित व्यक्तित्वों के सम्मान का प्रेरणादायी उत्सव बन गया, जिसकी गरिमा, आत्मीयता और सकारात्मक संदेश लंबे समय तक स्मरणीय रहेंगे।