Tuesday, 28 July 2026

मानवता के नवजागरण का आधार हैं पूज्य आचार्यश्री : शैफाली पण्ड्या

मानवता के नवजागरण का आधार हैं पूज्य आचार्यश्री : शैफाली पण्ड्या

गुरुपूर्णिमा पर्व का शुभारंभ, गुरुधाम शांतिकुंज में उमड़े हजारों गायत्री साधक

करोड़ों गायत्री साधकों की आस्था के प्रमुख केंद्र शांतिकुंज में दो दिवसीय गुरुपूर्णिमा पर्व का शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के वातावरण में हुआ। प्रातःकाल माँ गायत्री की आरती, ध्यान-साधना एवं सामूहिक उपासना के साथ पर्व की शुरुआत हुई।

विश्व कल्याण और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की मंगलकामना के साथ 24 घंटे के अखण्ड गायत्री महामंत्र जप का आयोजन किया गया, जिसमें देश-विदेश से आए एक हजार से अधिक साधकों ने सहभागिता की।

हरिद्वार स्थित शांतिकुंज में साधकों को संबोधित करते हुए शांतिकुंज के युवा प्रतिनिधि एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि जन्मशताब्दी वर्ष-2026 युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य एवं वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का महाअभियान है। यह वर्ष उनके आदर्शों को जीवन में उतारते हुए व्यक्ति, परिवार और समाज के नव निर्माण का संकल्प वर्ष है।

उन्होंने कहा कि संस्कार, सेवा, साधना, पर्यावरण संरक्षण, नारी जागरण और युवा चेतना से जुड़े रचनात्मक अभियानों को व्यापक स्तर पर जन-जन तक पहुंचाना है। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि पूज्य आचार्यश्री ने विचार क्रांति का जो दीप प्रज्वलित किया था, उसे और अधिक प्रखर बनाना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने जन्मशताब्दी वर्ष की कार्ययोजना और विभिन्न उत्तरदायित्वों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

गुरुपूर्णिमा पर्व के प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए शांतिकुंज महिला मंडल प्रमुख श्रीमती शैफाली पण्ड्या ने कहा कि युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने अपना संपूर्ण जीवन मानवता के उत्थान और विश्व में सद्भावना के विस्तार के लिए समर्पित किया।

उन्होंने कहा कि अपने तप, त्याग, प्रेम और दूरदर्शी चिंतन के आधार पर पूज्य आचार्यश्री ने अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना की, जो आज एक विराट वटवृक्ष के रूप में विश्वभर में संस्कार, सेवा और साधना का संदेश पहुंचा रहा है।

श्रीमती पण्ड्या ने साधकों से पूज्य गुरुदेव के विचारों को जीवन में आत्मसात कर परिवार, समाज और राष्ट्र के नव निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। इस अवसर पर ‘देवसंस्कृति दिग्दर्शन’ के नवीन स्वरूप का लोकार्पण भी किया गया।

शांतिकुंज मीडिया के अनुसार गुरुपूर्णिमा पर्व का मुख्य कार्यक्रम बुधवार को आयोजित होगा। देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुरुधाम शांतिकुंज पहुंच चुके हैं और आध्यात्मिक आयोजनों में भाग ले रहे हैं। 

Monday, 27 July 2026

मुंबई में गूंजा 'ऊर्जा, चेतना और राष्ट्र निर्माण' का संदेश

मुंबई में गूंजा 'ऊर्जा, चेतना और राष्ट्र निर्माण' का संदेश

ओज उत्सव 2026 में आध्यात्मिक नेतृत्व, सामाजिक सरोकार और विकसित भारत के संकल्प पर हुआ मंथन

मुंबई के जुहू स्थित नोवोटेल होटल में आयोजित ओज फाउंडेशन के भव्य ओज उत्सव 2026 ने आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण पर गंभीर एवं प्रेरक विमर्श का मंच प्रदान किया। इस अवसर पर सार्वजनिक जीवन, उद्योग, कला, प्रशासन, पत्रकारिता और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों ने सहभागिता करते हुए उत्तरदायी नेतृत्व, मानवीय मूल्यों और विकसित भारत के निर्माण पर अपने विचार रखे।

ओओजे फाउंडेशन के संस्थापक योगी प्रियव्रत अनिमेष ने अपने संबोधन में कहा कि ओज उत्सव केवल एक वार्षिक आयोजन नहीं, बल्कि चेतना, संस्कृति, नेतृत्व और सामाजिक उत्तरदायित्व को जोड़ने वाला एक सतत अभियान है। उन्होंने समाज, उद्योग, प्रशासन, शिक्षा और आध्यात्मिक जगत के बीच समन्वय को समय की आवश्यकता बताते हुए सभी अतिथियों, सहयोगियों एवं सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में पूर्व भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी सुमन मंत्री, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू, डॉ. योगेश लखानी, वरिष्ठ अभिनेत्री एवं निर्माता सुषमा शिरोमणी, उद्योगपति राजेंद्र बग्गा, प्रसिद्ध संगीतकार दिलीप सेन, रुचिता मेहरा, अरिजीत दत्ता, सहित कॉर्पोरेट जगत, उद्योग, पत्रकारिता, फिल्म जगत और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

समारोह के दौरान ओज फाउंडेशन की वार्षिक गतिविधियों, उपलब्धियों एवं भावी योजनाओं को समर्पित वार्षिक प्रतिवेदन (एनुअल रिपोर्ट) का औपचारिक लोकार्पण किया गया। इसी अवसर पर "आकाश" पुस्तक का भी विमोचन हुआ, जिसमें चेतना, मानवीय विकास और सामाजिक परिवर्तन से जुड़े विचारों को प्रस्तुत किया गया है।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रकाशित विशेष स्मारक ग्रंथ का सामूहिक प्रतीकात्मक विमोचन रहा। मंच पर उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथियों ने इस ग्रंथ का लोकार्पण करते हुए इसे राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और भारतीय जीवन मूल्यों के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।

अपने संबोधनों में वक्ताओं ने आध्यात्मिक चेतना, नैतिक नेतृत्व, सामाजिक उत्तरदायित्व, युवा सशक्तिकरण तथा विकसित भारत के निर्माण में जनभागीदारी की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि स्थायी एवं समावेशी विकास के लिए मानवीय मूल्य, सामाजिक सहयोग और जिम्मेदार नेतृत्व सबसे महत्वपूर्ण आधार हैं।

कार्यक्रम का समापन विशिष्ट अतिथियों के सम्मान, स्मृति-चिह्न प्रदान, सामूहिक छायाचित्र तथा राष्ट्र और मानवता के कल्याण के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। आयोजकों के अनुसार ओज उत्सव 2026 विविध क्षेत्रों के बीच संवाद, सहयोग और सकारात्मक नेतृत्व को नई दिशा देने वाली एक सार्थक पहल के रूप में स्थापित हुआ। 
 

Saturday, 18 July 2026

No Complaints Received Regarding Seating Arrangement in BMC General Body Hall

No Complaints Received Regarding Seating Arrangement in BMC General Body Hall

The seating arrangement in the General Body Hall of the Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) has not attracted a single complaint from either citizens or elected members during the past three years. In addition, no changes have been made to the seating arrangement over the last five years, according to information obtained under the Right to Information (RTI) Act, 2005. This clearly indicates that no complaints regarding any inadequacy in the seating arrangement for councillors have been submitted to the Government.

RTI activist Anil Galgali had sought detailed information regarding the seating arrangement in the BMC General Body Hall. The information was provided by the Office of the Executive Engineer (Headquarters), BMC.

According to the reply, the BMC General Body Hall currently has 237 seats, comprising 227 seats for elected corporators and 10 seats for nominated corporators. The civic body further confirmed that the existing seating arrangement has remained unchanged for the past five years.

Through his RTI application, Galgali had also sought details on the classification of seating for corporators, officials, media personnel, visitors, and other categories, the date from which the present seating arrangement has been in force, and whether any modifications had been made in recent years. However, the BMC stated that these aspects do not fall within the jurisdiction of the concerned department, and therefore the requested information was not available with it.

The RTI application also sought information on complaints received regarding the seating arrangement in the General Body Hall. In its response, the BMC clarified that no complaints have been received from citizens or members concerning the seating arrangement during the last three years.

Commenting on the disclosure, RTI activist Anil Galgali said that the BMC General Body Hall is the highest democratic decision-making forum of Mumbai, and information relating to its infrastructure and administrative arrangements should remain transparent and accessible to the public. He added that the RTI Act continues to play a vital role in promoting transparency, accountability, and informed public participation in governance.

आशीर्वाद संस्था का 57वाँ स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ संपन्न

आशीर्वाद संस्था का 57वाँ स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ संपन्न

मुंबई: सुप्रसिद्ध सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था 'आशीर्वाद' का 57वाँ स्थापना दिवस अत्यंत गरिमामय एवं भव्य वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर साहित्य, कला, संस्कृति, संगीत, फिल्म और पत्रकारिता जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति ने समारोह को यादगार बना दिया।

कार्यक्रम में संस्था की निदेशिका सुश्री नीता बाजपेयी ने आशीर्वाद संस्था की 57 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, उपलब्धियों एवं संस्थापक स्वर्गीय डॉ. उमाकांत बाजपेयी के दूरदर्शी व्यक्तित्व को स्मरण करते हुए उनके सपनों को साकार करने की प्रेरणादायी यात्रा पर प्रकाश डाला।

पद्मश्री अनूप जलोटा ने कहा कि एक समय ऐसा था जब आशीर्वाद पुरस्कार को फिल्म जगत में फिल्मफेयर पुरस्कार से भी अधिक प्रतिष्ठित माना जाता था। इसी अवसर पर कवि दास नारायण अग्रवाल की कृति "कृष्ण पद" का भव्य लोकार्पण भी अनूप जलोटा के करकमलों द्वारा किया गया। कृष्ण भक्ति पर आधारित इस कृति पर प्रो. करूणाशंकर उपाध्याय, वीरेन्द्र याज्ञिक तथा नेशनल एक्सप्रेस के संस्थापक विपिन गुप्ता ने अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में फिल्म अभिनेता अरुण बक्षी ने अपनी माँ पर आधारित भावपूर्ण कविता प्रस्तुत की, जबकि अर्चना जौहरी ने बेटी पर आधारित संवेदनशील काव्य-पाठ से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। डॉ. शैलेश श्रीवास्तव, विनोद दुबे, रवि यादव, कविता सेठ और नवीन चतुर्वेदी ने अपने गीतों से समां बाँध दिया।

शायरी की महफिल में देवमणि पांडेय ने अपने अंदाज़ से श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। उनके साथ उबेद आजम आजमी, रजिया रागिनी, शिव दत्त अक्स और महेश दुबे ने अपनी ग़ज़लों से साहित्य प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन कुमार जैन ने किया।

संस्था के अध्यक्ष बृजमोहन अग्रवाल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया, जबकि राजेश विक्रांत ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। नीता बाजपेयी ने सभी उपस्थित जनों का आत्मीय स्वागत करते हुए संस्था की भावी योजनाओं की जानकारी भी दी।

समारोह में सुलेमान फारुकी, आफ्ताब आलम, अमरीश कुमार, गुलशन मदान, संजीव शुक्ला, दालचंद गुप्ता, ममता सिंह, रीमा राय सिंह, अमर त्रिपाठी, अजय गोविंद, रवि जैन, अशोक त्रिवेदी, श्रेयांश शुक्ला, नरोत्तम शर्मा, विवेक अग्रवाल, वीरेन्द्र मिश्रा, शुभकीर्ति माहेश्वरी, बूबना, निरुपमा श्रीवास्तव, अनिल गलगली, सुनील सिंह, शैलेंद्र श्रीवास्तव, अंकित मिश्रा, कृष्णा गौतम, डॉ. बनमाली चतुर्वेदी, डॉ. जे.पी. बघेल, पूर्व पुलिस अधिकारी सोनटके, रागिनी प्रसाद, मंजुला जगतरामका, कमर हाजीपुरी, अवधेश पांडे, प्रेम प्रकाश दुबे, राकेश दुबे सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, कलाकार, पत्रकार और कला प्रेमी उपस्थित रहे।

डॉ. उमाकांत बाजपेयी की स्मृति को समर्पित इस समारोह में सभागार प्रारंभ से अंत तक खचाखच भरा रहा। उपस्थित जनों की तालियों की गड़गड़ाहट और उत्साह ने इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया तथा सभी ने संस्था की इस गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा की मुक्तकंठ से सराहना की।

मुंबई महानगरपालिका के सभागार की बैठक व्यवस्था को लेकर एक भी शिकायत नहीं मिली

मुंबई महानगरपालिका के सभागार की बैठक व्यवस्था को लेकर एक भी शिकायत नहीं मिली

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के मुख्य सभागार की बैठक व्यवस्था को लेकर पिछले तीन वर्षों में नागरिकों अथवा सदस्यों की ओर से एक भी शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। साथ ही, पिछले पाँच वर्षों में सभागार की बैठक व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह जानकारी सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त जानकारी से सामने आई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि नगरसेवकों द्वारा सदन में बैठने की व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी को लेकर शासन स्तर पर कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने महानगरपालिका के सभागार की बैठक व्यवस्था से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में कार्यकारी अभियंता (मुख्यालय) कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी में यह खुलासा हुआ है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुंबई महानगरपालिका के सभागार में वर्तमान में कुल 237 सीटें उपलब्ध हैं। इनमें 227 निर्वाचित नगरसेवकों तथा 10 स्वीकृत (नामित) नगरसेवकों के लिए बैठक व्यवस्था की गई है। महानगरपालिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि पिछले पाँच वर्षों के दौरान इस बैठक व्यवस्था में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है।

अनिल गलगली ने अपने आवेदन में यह भी जानकारी मांगी थी कि सभागार में नगरसेवकों, अधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों, दर्शकों एवं अन्य व्यक्तियों के लिए बैठक व्यवस्था का वर्गीकरण क्या है, वर्तमान व्यवस्था कब से लागू है तथा पिछले पाँच वर्षों में यदि कोई परिवर्तन किया गया हो तो उसका विवरण उपलब्ध कराया जाए। हालांकि, महानगरपालिका ने उत्तर में कहा कि ये विषय संबंधित विभाग के कार्यक्षेत्र में नहीं आते, इसलिए इस संबंध में जानकारी उपलब्ध नहीं है।

इसके अतिरिक्त, सभागार की बैठक व्यवस्था को लेकर नागरिकों अथवा सदस्यों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों का विवरण भी मांगा गया था। इस पर महानगरपालिका ने स्पष्ट किया कि पिछले तीन वर्षों में बैठक व्यवस्था के संबंध में एक भी शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने कहा कि मुंबई महानगरपालिका का सभागार शहर की सर्वोच्च लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया का केंद्र है। ऐसे में इसकी बैठक व्यवस्था, क्षमता और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होना पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम के माध्यम से नागरिकों को प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त हो रही हैं, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों को बढ़ावा मिलता है।

मुंबई पालिकेच्या सभागृहातील आसनव्यवस्थेबाबत एकही तक्रार प्राप्त नाही

मुंबई पालिकेच्या सभागृहातील आसनव्यवस्थेबाबत एकही तक्रार प्राप्त नाही

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) मुख्य सभागृहातील आसनव्यवस्थेबाबत गेल्या तीन वर्षांत नागरिक अथवा सदस्यांकडून एकही तक्रार प्राप्त झालेली नसल्याची माहिती उघडकीस आली आहे. तसेच, गेल्या पाच वर्षांत सभागृहातील आसनव्यवस्थेत कोणताही बदल करण्यात आलेला नसल्याची माहितीही समोर आली आहे. यामुळे आसनव्यवस्था कमतरता बाबत नगरसेवकांच्या तक्रारी शासन दरबारी नसल्याची बाब स्पष्ट झाली आहे. 

माहिती अधिकार कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी माहिती अधिकार अधिनियम, 2005 अंतर्गत महापालिकेकडे सभागृहातील आसनव्यवस्थेबाबत विविध मुद्द्यांवर माहिती मागविली होती. त्यास कार्यकारी अभियंता (मुख्यालय) कार्यालयाने दिलेल्या उत्तरातून ही माहिती उपलब्ध झाली आहे.

महापालिकेने दिलेल्या माहितीनुसार, मुंबई महापालिकेच्या सभागृहात सध्या एकूण 237 आसने उपलब्ध असून त्यापैकी 227 आसने नगरसेवकांसाठी तर 10 आसने स्वीकृत नगरसेवकांसाठी राखीव आहेत. सभागृहाची विद्यमान आसनरचना अनेक वर्षांपासून कायम असून, मागील पाच वर्षांत त्यामध्ये कोणताही बदल करण्यात आलेला नाही.

अनिल गलगली यांनी आसनव्यवस्थेचे वर्गीकरण, नगरसेवक, अधिकारी, प्रसारमाध्यम प्रतिनिधी, प्रेक्षक व इतरांसाठी स्वतंत्र आसनव्यवस्था असल्यास त्याचा तपशील, विद्यमान व्यवस्था कोणत्या तारखेपासून लागू आहे, तसेच मागील पाच वर्षांत त्यात बदल झाले असल्यास त्याची माहितीही मागितली होती. मात्र, या प्रश्नांपैकी काही बाबी संबंधित विभागाच्या कार्यकक्षेत येत नसल्याने ती माहिती उपलब्ध नसल्याचे महापालिकेने उत्तरात नमूद केले आहे.

याशिवाय, सभागृहातील आसनव्यवस्थेबाबत नागरिक किंवा सदस्यांकडून कोणत्याही प्रकारच्या तक्रारी प्राप्त झाल्या आहेत का, अशीही विचारणा करण्यात आली होती. त्यावर महापालिकेने स्पष्ट केले की, गेल्या तीन वर्षांच्या कालावधीत एकही तक्रार प्राप्त झालेली नाही.

माहिती अधिकार कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी सांगितले की, महापालिका सभागृह हे शहरातील सर्वोच्च लोकशाही निर्णयप्रक्रियेचे केंद्र आहे. त्यामुळे सभागृहाची क्षमता, आसनव्यवस्था आणि त्यासंदर्भातील प्रशासनाकडे उपलब्ध असलेली माहिती नागरिकांसाठी खुली असणे आवश्यक आहे. माहिती अधिकाराच्या माध्यमातून अशा महत्त्वाच्या बाबींमध्ये पारदर्शकता वाढण्यास मदत होत असल्याचे त्यांनी सांगितले.

Tuesday, 14 July 2026

मुंबई में बारिश, आलोचना के साथ सराहना भी जरूरी

अग्निशिला जुलाई 2026

संपादकीय: मुंबई में बारिश, आलोचना के साथ सराहना भी जरूरी

मुंबई का मानसून केवल एक मौसम नहीं, बल्कि महानगर की क्षमता, प्रशासनिक तैयारी और नागरिक अनुशासन की सबसे बड़ी परीक्षा है। हर वर्ष भारी वर्षा के दौरान जलभराव, यातायात अव्यवस्था, लोकल ट्रेन सेवाओं में व्यवधान, पेड़ों के गिरने और अन्य घटनाओं के कारण जनजीवन प्रभावित होता है। ऐसे समय में प्रशासन पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है, लेकिन निष्पक्ष दृष्टिकोण यह भी मांगता है कि जहाँ कमियाँ हों वहाँ आलोचना हो और जहाँ सुधार दिखाई दे, वहाँ उसकी सराहना भी की जाए।

इस वर्ष कई अवसरों पर मुंबई में अत्यधिक वर्षा हुई। कम समय में बड़ी मात्रा में वर्षा होने से अनेक स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनी। यह समझना होगा कि जब कुछ ही घंटों में सामान्य क्षमता से कहीं अधिक वर्षा होती है, तब दुनिया के किसी भी बड़े महानगर की जलनिकासी व्यवस्था पर असाधारण दबाव पड़ता है। ऐसे में कुछ समय के लिए पानी का जमा होना पूरी तरह टाला नहीं जा सकता। असली कसौटी यह है कि पानी कितनी तेजी से निकलता है और जनजीवन कितनी शीघ्र सामान्य होता है।

इसी दृष्टि से देखें तो मुंबई में पिछले कुछ वर्षों के दौरान जलनिकासी व्यवस्था में सुधार दिखाई देता है। अनेक स्थानों पर पहले जहाँ कई घंटों तक पानी भरा रहता था, वहीं अब अपेक्षाकृत कम समय में जल निकासी हो जाती है। इसका सीधा लाभ नागरिकों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और यातायात व्यवस्था को मिलता है। यद्यपि कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में अब भी स्थायी समाधान की आवश्यकता है, फिर भी समग्र रूप से सुधार को स्वीकार करना चाहिए।

बृहन्मुंबई महानगरपालिका की आयुक्त अश्विनी भिडे के नेतृत्व में पूरी प्रशासनिक टीम मानसून प्रबंधन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्री-मानसून तैयारियाँ, नालों की सफाई, पंपिंग स्टेशनों की निगरानी, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र तथा तकनीक के उपयोग से व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है। किसी भी प्रशासनिक व्यवस्था में पूर्णता संभव नहीं होती, लेकिन सतत सुधार ही सफलता का मापदंड होता है।

हालांकि अभी भी कई चुनौतियाँ बाकी हैं। शहर का तीव्र शहरीकरण, प्राकृतिक जल निकासी मार्गों पर अतिक्रमण, प्लास्टिक एवं ठोस कचरे से नालों का अवरुद्ध होना, पुराने सीवर नेटवर्क तथा जलवायु परिवर्तन के कारण कम समय में होने वाली अत्यधिक वर्षा भविष्य में और गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकती हैं। इसलिए केवल वर्तमान व्यवस्था पर निर्भर रहने के बजाय दीर्घकालिक एवं वैज्ञानिक समाधान आवश्यक हैं।

नागरिकों की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। यदि नालों में कचरा डाला जाएगा, अवैध निर्माण प्राकृतिक जल प्रवाह को रोकेंगे और सार्वजनिक संपत्तियों की उपेक्षा होगी, तो प्रशासनिक प्रयास भी सीमित हो जाएंगे। इसलिए स्वच्छता, जागरूकता और प्रशासन के साथ सहयोग प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

एक लोकतांत्रिक समाज में प्रशासन की जवाबदेही तय करना आवश्यक है, लेकिन सकारात्मक कार्यों को स्वीकार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आलोचना का उद्देश्य व्यवस्था को बेहतर बनाना होना चाहिए, न कि केवल दोषारोपण करना। मुंबई ने बार-बार यह सिद्ध किया है कि प्रशासन और नागरिक यदि मिलकर कार्य करें, तो बड़ी से बड़ी चुनौती का भी प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है।

आने वाले वर्षों में आवश्यकता इस बात की है कि मानसून पूर्व तैयारियों को और मजबूत किया जाए, जलनिकासी परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा नागरिक सहभागिता को और बढ़ाया जाए। तभी मुंबई न केवल आर्थिक राजधानी के रूप में, बल्कि आपदा प्रबंधन और शहरी प्रशासन के उत्कृष्ट मॉडल के रूप में भी देश के सामने उदाहरण प्रस्तुत कर सकेगी।

अनिल गलगली

Wednesday, 8 July 2026

जन्मदिन नहीं मनाकर आचार्य शैलेश पांडे ने भरत भूषण तिवारी को दी श्रद्धांजलि

जन्मदिन नहीं मनाकर आचार्य शैलेश पांडे ने भरत भूषण तिवारी को दी श्रद्धांजलि

भायंदर। बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में हाल ही में पुलिस एनकाउंटर के दौरान भरत भूषण तिवारी की हुई मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हुए संकल्प राष्ट्र सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास, अयोध्या धाम के राष्ट्रीय प्रवक्ता आचार्य शैलेश पांडे ने अपना जन्मदिन सादगी से मनाने के बजाय श्रद्धांजलि सभा आयोजित की।

भायंदर पूर्व स्थित भारत माता मंदिर सेवाश्रम के जनसंपर्क कार्यालय में आयोजित इस शोक सभा में उपस्थित लोगों ने भरत भूषण तिवारी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। इस अवसर पर आचार्य शैलेश पांडे ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का शासन सर्वोपरि होना चाहिए और प्रत्येक नागरिक को न्याय मिलने का अधिकार है।

श्रद्धांजलि सभा में शिक्षण समिति सभापति स्नेहा शैलेश पांडे, परिवहन समिति सभापति एड. राजकुमार मिश्रा, भाजपा जिला महामंत्री बृजेश तिवारी, पतंजलि योग समिति ठाणे जिला प्रमुख योग गुरु संतोष खटावकर, जिला सचिव मुकेश जांगिड़, फूलकुमार झा, समाजसेवक एल. आर. पांडे, समाजसेवी मैना पांडे, जितेंद्र प्रताप सिंह, मंडल उपाध्यक्ष विश्वनाथ तिवारी, जिला सचिव बी. एस. पाठक, संदीप दुबे, संजय दुबे, देवेंद्र सिंह, संजय गुप्ता, संदीप शर्मा, नितीन ओझा, विशाल रजक सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

मनीलाइफ फाउंडेशन की स्टडी में मुंबई मेट्रो लाइन-3 की एक्सेसिबिलिटी में कमियों का खुलासा, व्यावहारिक सुधारों की सिफारिश

मनीलाइफ फाउंडेशन की स्टडी में मुंबई मेट्रो लाइन-3 की एक्सेसिबिलिटी में कमियों का खुलासा, व्यावहारिक सुधारों की सिफारिश

मनीलाइफ फाउंडेशन द्वारा किए गए एक स्वतंत्र अध्ययन में मुंबई मेट्रो एक्वा लाइन (लाइन-3) पर यात्रियों की पहुंच (Accessibility) और उपयोगकर्ता-अनुकूल सुविधाओं में मौजूद कई व्यावहारिक कमियों की पहचान की गई है। आधुनिक अवसंरचना और उत्कृष्ट इंजीनियरिंग के बावजूद, अध्ययन में पाया गया कि दैनिक यात्रियों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, छोटे बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों तथा सामान लेकर चलने वाले यात्रियों को कई स्तरों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

'मुंबई मेट्रो एक्वा लाइन (लाइन-3) की एक्सेसिबिलिटी और यूज़र-फ्रेंडलीनेस पर अध्ययन' शीर्षक से यह रिपोर्ट 8 जुलाई 2026 को जारी की गई। इसकी प्रतियां केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA), मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (MMRC), महा मुंबई मेट्रो ऑपरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MMMOCL), मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA), महाराष्ट्र सरकार, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) सहित विभिन्न मेट्रो एजेंसियों और शोध संस्थानों को भेजी गई हैं।

अध्ययन के तहत मेट्रो लाइन-3 के सभी 27 स्टेशनों का विस्तृत निरीक्षण, यात्रियों का सर्वेक्षण तथा एक्सेसिबिलिटी, ट्रांसपोर्ट प्लानिंग और अर्बन मोबिलिटी विशेषज्ञों से परामर्श किया गया।

रिपोर्ट में प्रमुख रूप से पाया गया कि अधिकांश स्टेशनों पर नीचे उतरने वाले एस्केलेटर उपलब्ध नहीं हैं। यात्रियों को बाहर निकलते समय लंबी सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं, जिससे वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और भारी सामान लेकर यात्रा करने वालों को अनावश्यक कठिनाई होती है।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि कई स्टेशनों पर अत्यधिक सीढ़ियां चढ़नी-उतरनी पड़ती हैं। यद्यपि लिफ्ट उपलब्ध हैं, लेकिन सभी यात्री उनका उपयोग नहीं कर पाते, जिससे सीढ़ियों पर निर्भरता बढ़ जाती है।

रिपोर्ट में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को भी एक बड़ी चुनौती बताया गया है। यात्रियों ने बस, ऑटो-रिक्शा और टैक्सी तक पहुंचने में कठिनाई तथा आसपास के परिवहन नेटवर्क के साथ पर्याप्त समन्वय न होने की शिकायत की। अध्ययन के अनुसार, स्टेशन के बाहर बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और कनेक्टिविटी विकसित करना आवश्यक है।

इसके अलावा, मार्गदर्शन (Wayfinding) और एक्सेसिबिलिटी संबंधी संकेतकों को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता बताई गई है, ताकि पहली बार यात्रा करने वाले यात्रियों और दिव्यांगजनों को आसानी से मार्ग मिल सके।

एयरपोर्ट स्टेशनों पर लंबी पैदल दूरी, ट्रॉली की सीमित उपलब्धता तथा एयरपोर्ट टर्मिनल और मेट्रो स्टेशन के बीच सुगम संपर्क की कमी को भी महत्वपूर्ण समस्या के रूप में चिन्हित किया गया है।

मनीलाइफ फाउंडेशन ने अपनी सिफारिशों में जहां संभव हो वहां डाउन एस्केलेटर की स्थापना, बेहतर संकेतक, बस एवं अन्य सार्वजनिक परिवहन से प्रभावी एकीकरण, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी में सुधार तथा भविष्य की मेट्रो परियोजनाओं में यूनिवर्सल एक्सेसिबिलिटी को अनिवार्य रूप से शामिल करने का सुझाव दिया है।

फाउंडेशन की सुचेता दलाल का मानना है कि यह अध्ययन मुंबई मेट्रो लाइन-3 में व्यावहारिक सुधारों का आधार बनेगा तथा भविष्य की शहरी परिवहन परियोजनाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज सिद्ध होगा।

यह अध्ययन मनीलाइफ फाउंडेशन द्वारा सार्वजनिक नीति, सुशासन और उपभोक्ता अधिकारों पर अपने निरंतर कार्य के अंतर्गत किया गया। इस परियोजना के फील्ड रिसर्च का कार्य फाउंडेशन के मार्गदर्शन में अशोका विश्वविद्यालय की इंटर्न अगम्या जैन और मिहिका ओमसीमा ने किया।

Saturday, 4 July 2026

एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई के चुनाव में 'एशियाटिक टुमॉरो' पैनल की ऐतिहासिक जीत

एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई के चुनाव में 'एशियाटिक टुमॉरो' पैनल की ऐतिहासिक जीत, कुमार केतकर पैनल पर मिली निर्णायक विजय

एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई के बहुप्रतीक्षित चुनाव में डॉ. विनय सहस्रबुद्धे के नेतृत्व वाले 'एशियाटिक टुमॉरो' पैनल ने शानदार और एकतरफा जीत दर्ज करते हुए वरिष्ठ पत्रकार कुमार केतकर के नेतृत्व वाले पैनल को निर्णायक रूप से पराजित कर दिया। कई महीनों तक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बाद संपन्न हुए इस चुनाव में कुल 517 सदस्यों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

अध्यक्ष पद पर डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने 352 मत प्राप्त कर विजय हासिल की, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी वरिष्ठ पत्रकार कुमार केतकर को 147 मत मिले। उपाध्यक्ष पद की चारों सीटों पर रमेश पतंगे (329), नितीश भारद्वाज (328), चंद्रप्रकाश द्विवेदी (327) और संजय देशमुख (323) विजयी रहे। सचिव पद पर विवेक गणपुले ने 352 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की। मैनेजिंग कमेटी के लिए प्राची मोघे (341), माधव भंडारी (339), मल्हार कुलकर्णी (333), प्रमोद बापट (329), वी. एम. चक्रवर्ती (324) तथा राजेश बेहरे (321) निर्वाचित हुए। स्क्रूटिनाइजिंग कमेटी में स्नेह नगरकर (370), अभिजीत मुले (362), माधवी नरसाले (362), उमंग काले (358), अमोल जाधव (349), मल्हार गोखले (348) तथा दत्तात्रय पंचवाघ (344) ने जीत दर्ज की।

इस परिणाम के साथ 'एशियाटिक टुमॉरो' पैनल ने सभी प्रमुख पदों और समितियों में विजय प्राप्त कर एशियाटिक सोसायटी के चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल किया। यह परिणाम संस्था के प्रशासन, संरक्षण और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए सदस्यों के स्पष्ट जनादेश के रूप में देखा जा रहा है।

लोकसभा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्रियों से डॉ. चिन्मय पण्ड्या की शिष्टाचार भेंट

लोकसभा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्रियों से डॉ. चिन्मय पण्ड्या की शिष्टाचार भेंट

जन्मशताब्दी वर्ष समारोह हेतु राष्ट्रीय नेतृत्व को आमंत्रण

अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने नई दिल्ली प्रवास के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तथा केंद्रीय मंत्रियों ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, चिराग पासवान, सर्बानंद सोनोवाल, भूपेन्द्र यादव एवं सी. आर. पाटिल से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें अखिल विश्व गायत्री परिवार की संस्थापिका वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों, अखंड दीपक शताब्दी समारोह तथा अन्य विशेष आयोजनों में सहभागिता हेतु आमंत्रित किया।

बैठकों के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों, भारतीय संस्कृति, वैज्ञानिक अध्यात्म, नैतिक नेतृत्व, युवा सशक्तिकरण, मूल्यनिष्ठ शिक्षा तथा विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की रचनात्मक भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक एवं प्रेरणादायी चर्चा हुई। साथ ही देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा योग, भारतीय ज्ञान परंपरा, समग्र व्यक्तित्व विकास एवं संस्कार आधारित शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों एवं प्रयासों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने जन्मशताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों और राष्ट्र निर्माण के व्यापक जनजागरण का अभियान बताते हुए सभी जनप्रतिनिधियों से सक्रिय सहभागिता का आग्रह किया।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रियों ने अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा समाज जागरण, संस्कार संवर्धन, नैतिक मूल्यों के प्रसार, सांस्कृतिक पुनर्जागरण तथा राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में किए जा रहे रचनात्मक एवं प्रेरणादायी कार्यों की सराहना की। उन्होंने माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी वर्ष समारोह एवं अखंड दीपक शताब्दी समारोह की सफलता, गरिमा एवं व्यापक जनप्रेरणा के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ व्यक्त करते हुए इन आयोजनों में सहभागिता का आश्वासन भी दिया। 

Friday, 3 July 2026

महाराष्ट्रातील माहितीचा अधिकार नियम, २०२६ ला स्थगिती : जनदबावाचा विजय की सरकारची धोरणात्मक माघार?

महाराष्ट्रातील माहितीचा अधिकार नियम, २०२६ ला स्थगिती : जनदबावाचा विजय की सरकारची धोरणात्मक माघार?

महाराष्ट्र सरकारने लागू केलेल्या माहितीचा अधिकार (आरटीआय) नियम, २०२६ संदर्भात मोठा वाद निर्माण झाल्यानंतर अखेर सरकारने या नियमांच्या अंमलबजावणीला तात्पुरती स्थगिती देण्याचा निर्णय घेतला आहे. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांच्या निर्देशानंतर या नियमांच्या अंमलबजावणीला स्थगिती देण्याची प्रक्रिया सुरू करण्यात आली. देशभरातील आरटीआय कार्यकर्ते, सामाजिक संस्था, कायदेतज्ज्ञ तसेच ज्येष्ठ समाजसेवक अण्णा हजारे यांनी या नियमांना तीव्र विरोध केला होता. अण्णा हजारे यांनी या विरोधात उपोषणाची घोषणाही केली होती. त्यामुळे सरकारने घेतलेला हा निर्णय केवळ प्रशासकीय नसून नागरिकांच्या अधिकारांशी संबंधित महत्त्वाच्या प्रश्नावर सरकारने एक पाऊल मागे घेतल्याचे मानले जात आहे.

महाराष्ट्र सरकारने १२ जून २०२६ रोजी राजपत्रात अधिसूचना प्रसिद्ध करून माहितीचा अधिकार नियम, २०२६ तात्काळ प्रभावाने लागू केले होते. या नियमांमध्ये अनेक महत्त्वपूर्ण बदल करण्यात आले होते. यापूर्वी आरटीआय अर्जासाठी ₹१० शुल्क आकारले जात होते. नवीन नियमांनुसार ते वाढवून ₹३० करण्यात आले. प्रथम अपीलचे शुल्क ₹२० वरून ₹५० करण्यात आले, तर द्वितीय अपीलचे शुल्क ₹२० वरून ₹१०० करण्यात आले. माहितीच्या प्रती मिळविण्यासाठीही शुल्क वाढविण्यात आले. ए-४ आकाराच्या प्रत्येक पानासाठी ₹५, तसेच स्कॅन अथवा डिजिटल प्रतीसाठीही ₹५ प्रति पान शुल्क निश्चित करण्यात आले. अभिलेखांचे निरीक्षण पहिले एक तास मोफत ठेवण्यात आले होते; त्यानंतर प्रत्येक तासासाठी ₹५० शुल्क आकारण्याची तरतूद करण्यात आली. दारिद्र्यरेषेखालील (बीपीएल) अर्जदारांना अर्ज शुल्कातून सवलत देण्यात आली होती; मात्र ५० पानांपेक्षा अधिक माहिती घेतल्यास त्यांनाही निर्धारित शुल्क भरावे लागणार होते.

नवीन नियमांनुसार एका आरटीआय अर्जात सामान्यतः केवळ एकाच विषयाचा समावेश असावा आणि अर्ज १५० शब्दांपेक्षा अधिक नसावा, अशी अट घालण्यात आली होती. एका अर्जात एकापेक्षा अधिक विषय असल्यास लोक माहिती अधिकारी केवळ पहिल्या विषयावरच कार्यवाही करेल आणि उर्वरित विषयांसाठी स्वतंत्र अर्ज करण्याचा सल्ला देईल, अशी तरतूद होती. आरटीआय कार्यकर्त्यांचे म्हणणे होते की, प्रत्यक्षात अनेक वेळा एका विषयाशी संबंधित अनेक मुद्द्यांवर माहिती मागविणे आवश्यक असते. त्यामुळे ही अट नागरिकांवर अतिरिक्त आर्थिक व प्रशासकीय भार टाकणारी ठरली असती.

या नियमांमधील सर्वाधिक वादग्रस्त तरतूद म्हणजे भारतीय नागरिकत्वाचा पुरावा अनिवार्य करणे होय. प्रत्येक आरटीआय अर्जासोबत भारतीय नागरिक असल्याचा स्वप्रमाणित छायाचित्रयुक्त ओळखपत्र जोडणे बंधनकारक करण्यात आले होते. ओळखपत्र जोडले नसल्यास अर्ज परत करण्याची तरतूदही करण्यात आली होती. विरोधकांचे म्हणणे होते की, माहितीचा अधिकार अधिनियम, २००५ मध्ये अशी कोणतीही अट नाही आणि राज्य सरकारला नियमांच्या माध्यमातून मूळ कायद्यात अतिरिक्त अटी घालण्याचा अधिकार नाही.

आरटीआय कार्यकर्ते आणि कायदेतज्ज्ञांच्या मते हे नियम माहिती मिळविण्याची प्रक्रिया सुलभ करण्याऐवजी अधिक कठीण करणारे होते. अर्ज शुल्कात मोठी वाढ, ओळखपत्र अनिवार्य केल्यामुळे गोपनीयता आणि सुरक्षेचे प्रश्न, एका अर्जात एकच विषय ठेवण्याची सक्ती, १५० शब्दांची मर्यादा आणि मूळ कायद्याच्या भावनेला छेद देणाऱ्या अतिरिक्त अटी या प्रमुख आक्षेप होत्या. अनेक संघटनांनी असा युक्तिवाद केला की, राज्य सरकार नियम करू शकते; मात्र त्या नियमांद्वारे नागरिकांचे मूलभूत वैधानिक अधिकार मर्यादित करू शकत नाही.

ज्येष्ठ समाजसेवक अण्णा हजारे यांनी या नियमांना लोकशाही अधिकारांवरील आघात असल्याचे सांगत आंदोलन आणि उपोषणाची घोषणा केली. त्यांच्या घोषणेनंतर सरकारवर राजकीय आणि सामाजिक दबाव वाढला. आरटीआय कार्यकर्ते, सामाजिक संस्था तसेच विरोधी पक्षांनीही हे नियम मागे घेण्याची मागणी केली. या पार्श्वभूमीवर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी नियमांच्या अंमलबजावणीला स्थगिती देण्याचा निर्णय घेतला.

सध्या सरकारने केवळ या नियमांच्या अंमलबजावणीला स्थगिती दिली आहे. म्हणजेच हे नियम सध्या लागू होणार नाहीत. भविष्यात सरकार आवश्यक सुधारणा करून नवी अधिसूचना जारी करू शकते. त्यामुळे हा अंतिम निर्णय मानता येणार नाही. सरकार लवकरच आरटीआय कार्यकर्त्यांशी चर्चा करणार असून, वादग्रस्त तरतुदींचा फेरविचार करून आवश्यक सुधारणा करण्याची किंवा पूर्वीचे नियम कायम ठेवण्याची शक्यता आहे.

माहितीचा अधिकार अधिनियम, २००५ हा भारतातील सर्वात प्रभावी पारदर्शकता कायद्यांपैकी एक मानला जातो. या कायद्यामुळे शासनाच्या कामकाजात उत्तरदायित्व आणि पारदर्शकता वाढली असून लाखो नागरिकांना त्यांच्या हक्कांचे संरक्षण करण्याचे प्रभावी साधन उपलब्ध झाले आहे. महाराष्ट्र सरकारने या नियमांना स्थगिती दिल्याने लोकशाही व्यवस्थेत जनमत, नागरी समाज आणि शांततामय आंदोलन यांची ताकद आजही प्रभावी असल्याचे पुन्हा एकदा सिद्ध झाले आहे. तसेच माहितीच्या अधिकारासारख्या महत्त्वाच्या कायद्यात कोणताही बदल करण्यापूर्वी व्यापक सार्वजनिक चर्चा आणि सर्व संबंधित घटकांशी सल्लामसलत होणे आवश्यक असल्याचेही या घटनाक्रमातून स्पष्ट झाले आहे. नागरिकांच्या अधिकारांशी संबंधित कायद्यांमध्ये बदल करताना पारदर्शकता, घटनात्मक मूल्ये आणि लोकसहभाग यांना सर्वोच्च प्राधान्य दिले गेले पाहिजे, हा संदेश या निर्णयातून अधोरेखित झाला आहे.

अनिल गलगली
माहितीचा अधिकार कार्यकर्ता

Wednesday, 1 July 2026

जौनपुर और ज़फराबाद के प्राचीन इतिहास के अध्ययन एवं संरक्षण हेतु पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान की पहल

जौनपुर और ज़फराबाद के प्राचीन इतिहास के अध्ययन एवं संरक्षण हेतु पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान की पहल

मीरा रोड पूर्व स्थित श्री लल्लन तिवारी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के सभागार में पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान द्वारा एक सभा आयोजित की गई, जिसमें जौनपुर एवं ज़फराबाद क्षेत्र के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक महत्व पर चर्चा की गई तथा उनके अध्ययन, संरक्षण और पुनर्परिभाषा से संबंधित प्रस्ताव पारित किए गए।

सभा को संबोधित करते हुए प्रतिष्ठान के सचिव एवं पत्रकार ओम प्रकाश ने सनातन परंपरा के वैश्विक सांस्कृतिक विस्तार तथा भगवती तारा एवं आदि पराशक्ति से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों पर अपने विचार रखे। वहीं श्री जयशंकर तिवारी ने जौनपुर और ज़फराबाद के ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और उनके प्राचीन स्वरूप के अध्ययन से संबंधित प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, शिक्षाविद लल्लन तिवारी, मीरा भायंदर की महापौर डिंपल मेहता, पूर्व सांसद संजय निरुपम, पूर्व मंत्री विद्या ठाकुर, विधायक नरेंद्र मेहता, पद्मश्री डॉ. सोमा घोष, भाजपा नेता आर. यू. सिंह सहित बड़ी संख्या में पूर्वांचल समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

सभा में पारित प्रस्तावों में जौनपुर जिले के ज़फराबाद स्थित मनहेच किला और मछलीशहर स्थित सगरेकोट क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कर संरक्षित करने, जमैथा एवं मादरडीह क्षेत्रों के व्यापक ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक अध्ययन, क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान पर शोध तथा अटाला मस्जिद से जुड़े विषयों पर संवाद एवं संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान खोजने की मांग शामिल रही।

सभा में यह भी निर्णय लिया गया कि भविष्य में बख्शा, राजेपुर, सिरकोनी, मल्हनी, मड़ियाहूं, केराकत एवं अन्य क्षेत्रों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के दस्तावेजीकरण और अध्ययन के लिए विस्तृत प्रस्ताव राज्य सरकार को प्रस्तुत किए जाएंगे।

दिलीप घोष को ‘डॉ. मुखर्जी स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया

दिलीप घोष को ‘डॉ. मुखर्जी स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया

पश्चिम बंगाल में सरकार गठन के बाद पहली बार मुंबई पहुंचे पश्चिम बंगाल के ग्राम्य विकास एवं पंचायत राज मंत्री दिलीप घोष ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न (मरणोपरांत) प्रदान किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता की रक्षा में डॉ. मुखर्जी का योगदान ऐतिहासिक रहा है और राष्ट्रहित में उनके योगदान को सर्वोच्च सम्मान मिलना चाहिए।

दिलीप घोष मुंबई भाजपा के उपाध्यक्ष अमरजीत मिश्रा की संस्था दीप कमल फाउंडेशन द्वारा आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। विलेपार्ले (पूर्व) स्थित दीनानाथ मंगेशकर सभागृह में भारतीय जनसंघ एवं भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिक, भाजपा कार्यकर्ता एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में दिलीप घोष ने कहा कि विभाजन के दौर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बंगाल के पश्चिमी हिस्से को भारत में बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व और संकल्प ने उस समय की परिस्थितियों में ऐतिहासिक प्रभाव छोड़ा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मुंबई भाजपा अध्यक्ष एवं विधायक अमित साटम ने की। इस अवसर पर सार्वजनिक जीवन एवं राष्ट्रसेवा में योगदान के लिए दिलीप घोष को ‘डॉ. मुखर्जी स्मृति सम्मान’ प्रदान किया गया।

समारोह में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री आशीष शेलार, राज्यसभा सांसद एवं वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम, पश्चिम बंगाल भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद राहुल सिन्हा सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।

पिछले 16 वर्षों से आयोजित किए जा रहे इस कार्यक्रम की संकल्पना एवं आयोजन के लिए भाजपा नेता अमरजीत मिश्रा की सभी वक्ताओं ने सराहना की। श्री मिश्रा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।

कार्यक्रम का भावनात्मक क्षण तब आया जब उन वीर माताओं का सम्मान किया गया, जिनके पुत्रों ने देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिया। शहीद सैनिक दिनकर नाळे की माता यशोदा नाळे तथा मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित कैप्टन आर. सुब्रमण्यम की माता सुब्बलक्ष्मी रामचंद्रन को शाल एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की हालिया चुनावी सफलता को जनसमर्थन और राजनीतिक परिवर्तन का संकेत बताया।

कार्यक्रम में बंगाली संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। बांग्ला संगीत, लोकधुनों, पारंपरिक बंगाली वेशभूषा और ढाक की प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं, “मी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी बोलतोय” नाटक के मंचन को भी सराहना मिली।

समारोह में मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों से आए बंगाली संगठनों के प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, भाजपा पदाधिकारियों तथा बड़ी संख्या में बंगाली समुदाय के नागरिकों ने सहभागिता की। राष्ट्रभक्ति और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न यह आयोजन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक सहभागिता का भी प्रतीक बना।