Saturday, 18 July 2026

मुंबई महानगरपालिका के सभागार की बैठक व्यवस्था को लेकर एक भी शिकायत नहीं मिली

मुंबई महानगरपालिका के सभागार की बैठक व्यवस्था को लेकर एक भी शिकायत नहीं मिली

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के मुख्य सभागार की बैठक व्यवस्था को लेकर पिछले तीन वर्षों में नागरिकों अथवा सदस्यों की ओर से एक भी शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। साथ ही, पिछले पाँच वर्षों में सभागार की बैठक व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह जानकारी सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त जानकारी से सामने आई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि नगरसेवकों द्वारा सदन में बैठने की व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी को लेकर शासन स्तर पर कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने महानगरपालिका के सभागार की बैठक व्यवस्था से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में कार्यकारी अभियंता (मुख्यालय) कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी में यह खुलासा हुआ है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुंबई महानगरपालिका के सभागार में वर्तमान में कुल 237 सीटें उपलब्ध हैं। इनमें 227 निर्वाचित नगरसेवकों तथा 10 स्वीकृत (नामित) नगरसेवकों के लिए बैठक व्यवस्था की गई है। महानगरपालिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि पिछले पाँच वर्षों के दौरान इस बैठक व्यवस्था में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है।

अनिल गलगली ने अपने आवेदन में यह भी जानकारी मांगी थी कि सभागार में नगरसेवकों, अधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों, दर्शकों एवं अन्य व्यक्तियों के लिए बैठक व्यवस्था का वर्गीकरण क्या है, वर्तमान व्यवस्था कब से लागू है तथा पिछले पाँच वर्षों में यदि कोई परिवर्तन किया गया हो तो उसका विवरण उपलब्ध कराया जाए। हालांकि, महानगरपालिका ने उत्तर में कहा कि ये विषय संबंधित विभाग के कार्यक्षेत्र में नहीं आते, इसलिए इस संबंध में जानकारी उपलब्ध नहीं है।

इसके अतिरिक्त, सभागार की बैठक व्यवस्था को लेकर नागरिकों अथवा सदस्यों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों का विवरण भी मांगा गया था। इस पर महानगरपालिका ने स्पष्ट किया कि पिछले तीन वर्षों में बैठक व्यवस्था के संबंध में एक भी शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने कहा कि मुंबई महानगरपालिका का सभागार शहर की सर्वोच्च लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया का केंद्र है। ऐसे में इसकी बैठक व्यवस्था, क्षमता और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होना पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम के माध्यम से नागरिकों को प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त हो रही हैं, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों को बढ़ावा मिलता है।

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