मनीलाइफ फाउंडेशन द्वारा किए गए एक स्वतंत्र अध्ययन में मुंबई मेट्रो एक्वा लाइन (लाइन-3) पर यात्रियों की पहुंच (Accessibility) और उपयोगकर्ता-अनुकूल सुविधाओं में मौजूद कई व्यावहारिक कमियों की पहचान की गई है। आधुनिक अवसंरचना और उत्कृष्ट इंजीनियरिंग के बावजूद, अध्ययन में पाया गया कि दैनिक यात्रियों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, छोटे बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों तथा सामान लेकर चलने वाले यात्रियों को कई स्तरों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
'मुंबई मेट्रो एक्वा लाइन (लाइन-3) की एक्सेसिबिलिटी और यूज़र-फ्रेंडलीनेस पर अध्ययन' शीर्षक से यह रिपोर्ट 8 जुलाई 2026 को जारी की गई। इसकी प्रतियां केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA), मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (MMRC), महा मुंबई मेट्रो ऑपरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MMMOCL), मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA), महाराष्ट्र सरकार, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) सहित विभिन्न मेट्रो एजेंसियों और शोध संस्थानों को भेजी गई हैं।
अध्ययन के तहत मेट्रो लाइन-3 के सभी 27 स्टेशनों का विस्तृत निरीक्षण, यात्रियों का सर्वेक्षण तथा एक्सेसिबिलिटी, ट्रांसपोर्ट प्लानिंग और अर्बन मोबिलिटी विशेषज्ञों से परामर्श किया गया।
रिपोर्ट में प्रमुख रूप से पाया गया कि अधिकांश स्टेशनों पर नीचे उतरने वाले एस्केलेटर उपलब्ध नहीं हैं। यात्रियों को बाहर निकलते समय लंबी सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं, जिससे वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और भारी सामान लेकर यात्रा करने वालों को अनावश्यक कठिनाई होती है।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि कई स्टेशनों पर अत्यधिक सीढ़ियां चढ़नी-उतरनी पड़ती हैं। यद्यपि लिफ्ट उपलब्ध हैं, लेकिन सभी यात्री उनका उपयोग नहीं कर पाते, जिससे सीढ़ियों पर निर्भरता बढ़ जाती है।
रिपोर्ट में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को भी एक बड़ी चुनौती बताया गया है। यात्रियों ने बस, ऑटो-रिक्शा और टैक्सी तक पहुंचने में कठिनाई तथा आसपास के परिवहन नेटवर्क के साथ पर्याप्त समन्वय न होने की शिकायत की। अध्ययन के अनुसार, स्टेशन के बाहर बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और कनेक्टिविटी विकसित करना आवश्यक है।
इसके अलावा, मार्गदर्शन (Wayfinding) और एक्सेसिबिलिटी संबंधी संकेतकों को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता बताई गई है, ताकि पहली बार यात्रा करने वाले यात्रियों और दिव्यांगजनों को आसानी से मार्ग मिल सके।
एयरपोर्ट स्टेशनों पर लंबी पैदल दूरी, ट्रॉली की सीमित उपलब्धता तथा एयरपोर्ट टर्मिनल और मेट्रो स्टेशन के बीच सुगम संपर्क की कमी को भी महत्वपूर्ण समस्या के रूप में चिन्हित किया गया है।
मनीलाइफ फाउंडेशन ने अपनी सिफारिशों में जहां संभव हो वहां डाउन एस्केलेटर की स्थापना, बेहतर संकेतक, बस एवं अन्य सार्वजनिक परिवहन से प्रभावी एकीकरण, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी में सुधार तथा भविष्य की मेट्रो परियोजनाओं में यूनिवर्सल एक्सेसिबिलिटी को अनिवार्य रूप से शामिल करने का सुझाव दिया है।
फाउंडेशन की सुचेता दलाल का मानना है कि यह अध्ययन मुंबई मेट्रो लाइन-3 में व्यावहारिक सुधारों का आधार बनेगा तथा भविष्य की शहरी परिवहन परियोजनाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज सिद्ध होगा।
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