जीवन संग्राम का नाम अध्यात्म : डॉ. चिन्मय पण्ड्या
सच्ची उपासना मानव सेवा और सदाचार में निहित : शैफाली पण्ड्या
हरिद्वार स्थित गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में गायत्री जयंती महापर्व की पूर्व संध्या पर जन-जागरण एवं आत्मिक उन्नति के विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित भव्य दीप रैली का नेतृत्व अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय पण्ड्या तथा महिला मंडल प्रमुख श्रीमती शैफाली पण्ड्या ने मशाल एवं दीप प्रज्वलित कर किया।
सभा को संबोधित करते हुए देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि “जीवन के संग्राम का नाम अध्यात्म है।” उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में अनेक चुनौतियों, परिस्थितियों और आंतरिक द्वंद्वों का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में अध्यात्म ही वह शक्ति है, जो मनुष्य को स्थिरता, धैर्य और सही दिशा प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि जीवन की वास्तविकताओं को समझते हुए उनके बीच संतुलन स्थापित करना आवश्यक है। बाहरी संघर्षों के साथ-साथ मन के भीतर मौजूद इच्छाओं, क्रोध, लोभ और मोह जैसे विकारों पर विजय प्राप्त करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अध्यात्म जीवन को श्रेष्ठ बनाने की कला है। आत्मसंयम, सद्विचार और सेवा भाव को अपनाकर ही व्यक्ति जीवन संग्राम में विजयी बन सकता है। उन्होंने जन्मशताब्दी वर्ष-2026 के अंतर्गत गायत्री परिवार द्वारा वैश्विक स्तर पर संचालित विभिन्न गतिविधियों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की।
इससे पूर्व शांतिकुंज महिला मंडल प्रमुख श्रीमती शैफाली पण्ड्या ने कहा कि वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा ने अपने जीवन में गायत्री माता के करुणा, सेवा और मातृत्व के आदर्शों को साकार रूप दिया। उन्होंने अपने असीम प्रेम और आत्मीयता से संपूर्ण गायत्री परिवार को एक सूत्र में पिरोकर उसे संस्कारित एवं सशक्त परिवार का स्वरूप प्रदान किया।
उन्होंने कहा कि गायत्री माता ज्ञान, सद्बुद्धि और मानव कल्याण की प्रतीक हैं। वंदनीया माताजी ने इन्हीं आदर्शों के आधार पर नारी जागरण, संस्कार निर्माण और समाजोत्थान के कार्यों को नई दिशा दी। इस अवसर पर शांतिकुंज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों सहित देश-विदेश से आए हजारों साधक उपस्थित रहे।
शांतिकुंज मीडिया विभाग के अनुसार गायत्री जयंती महापर्व का मुख्य आयोजन बुधवार को होगा। इस दौरान अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुखद्वय का विशेष उद्बोधन होगा। साथ ही विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं के लिए गुरुदीक्षा एवं अन्य संस्कार निःशुल्क संपन्न कराए जाएंगे।