Tuesday, 14 July 2026

मुंबई में बारिश, आलोचना के साथ सराहना भी जरूरी

अग्निशिला जुलाई 2026

संपादकीय: मुंबई में बारिश, आलोचना के साथ सराहना भी जरूरी

मुंबई का मानसून केवल एक मौसम नहीं, बल्कि महानगर की क्षमता, प्रशासनिक तैयारी और नागरिक अनुशासन की सबसे बड़ी परीक्षा है। हर वर्ष भारी वर्षा के दौरान जलभराव, यातायात अव्यवस्था, लोकल ट्रेन सेवाओं में व्यवधान, पेड़ों के गिरने और अन्य घटनाओं के कारण जनजीवन प्रभावित होता है। ऐसे समय में प्रशासन पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है, लेकिन निष्पक्ष दृष्टिकोण यह भी मांगता है कि जहाँ कमियाँ हों वहाँ आलोचना हो और जहाँ सुधार दिखाई दे, वहाँ उसकी सराहना भी की जाए।

इस वर्ष कई अवसरों पर मुंबई में अत्यधिक वर्षा हुई। कम समय में बड़ी मात्रा में वर्षा होने से अनेक स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनी। यह समझना होगा कि जब कुछ ही घंटों में सामान्य क्षमता से कहीं अधिक वर्षा होती है, तब दुनिया के किसी भी बड़े महानगर की जलनिकासी व्यवस्था पर असाधारण दबाव पड़ता है। ऐसे में कुछ समय के लिए पानी का जमा होना पूरी तरह टाला नहीं जा सकता। असली कसौटी यह है कि पानी कितनी तेजी से निकलता है और जनजीवन कितनी शीघ्र सामान्य होता है।

इसी दृष्टि से देखें तो मुंबई में पिछले कुछ वर्षों के दौरान जलनिकासी व्यवस्था में सुधार दिखाई देता है। अनेक स्थानों पर पहले जहाँ कई घंटों तक पानी भरा रहता था, वहीं अब अपेक्षाकृत कम समय में जल निकासी हो जाती है। इसका सीधा लाभ नागरिकों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और यातायात व्यवस्था को मिलता है। यद्यपि कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में अब भी स्थायी समाधान की आवश्यकता है, फिर भी समग्र रूप से सुधार को स्वीकार करना चाहिए।

बृहन्मुंबई महानगरपालिका की आयुक्त अश्विनी भिडे के नेतृत्व में पूरी प्रशासनिक टीम मानसून प्रबंधन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्री-मानसून तैयारियाँ, नालों की सफाई, पंपिंग स्टेशनों की निगरानी, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र तथा तकनीक के उपयोग से व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है। किसी भी प्रशासनिक व्यवस्था में पूर्णता संभव नहीं होती, लेकिन सतत सुधार ही सफलता का मापदंड होता है।

हालांकि अभी भी कई चुनौतियाँ बाकी हैं। शहर का तीव्र शहरीकरण, प्राकृतिक जल निकासी मार्गों पर अतिक्रमण, प्लास्टिक एवं ठोस कचरे से नालों का अवरुद्ध होना, पुराने सीवर नेटवर्क तथा जलवायु परिवर्तन के कारण कम समय में होने वाली अत्यधिक वर्षा भविष्य में और गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकती हैं। इसलिए केवल वर्तमान व्यवस्था पर निर्भर रहने के बजाय दीर्घकालिक एवं वैज्ञानिक समाधान आवश्यक हैं।

नागरिकों की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। यदि नालों में कचरा डाला जाएगा, अवैध निर्माण प्राकृतिक जल प्रवाह को रोकेंगे और सार्वजनिक संपत्तियों की उपेक्षा होगी, तो प्रशासनिक प्रयास भी सीमित हो जाएंगे। इसलिए स्वच्छता, जागरूकता और प्रशासन के साथ सहयोग प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

एक लोकतांत्रिक समाज में प्रशासन की जवाबदेही तय करना आवश्यक है, लेकिन सकारात्मक कार्यों को स्वीकार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आलोचना का उद्देश्य व्यवस्था को बेहतर बनाना होना चाहिए, न कि केवल दोषारोपण करना। मुंबई ने बार-बार यह सिद्ध किया है कि प्रशासन और नागरिक यदि मिलकर कार्य करें, तो बड़ी से बड़ी चुनौती का भी प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है।

आने वाले वर्षों में आवश्यकता इस बात की है कि मानसून पूर्व तैयारियों को और मजबूत किया जाए, जलनिकासी परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा नागरिक सहभागिता को और बढ़ाया जाए। तभी मुंबई न केवल आर्थिक राजधानी के रूप में, बल्कि आपदा प्रबंधन और शहरी प्रशासन के उत्कृष्ट मॉडल के रूप में भी देश के सामने उदाहरण प्रस्तुत कर सकेगी।

अनिल गलगली

Wednesday, 8 July 2026

जन्मदिन नहीं मनाकर आचार्य शैलेश पांडे ने भरत भूषण तिवारी को दी श्रद्धांजलि

जन्मदिन नहीं मनाकर आचार्य शैलेश पांडे ने भरत भूषण तिवारी को दी श्रद्धांजलि

भायंदर। बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में हाल ही में पुलिस एनकाउंटर के दौरान भरत भूषण तिवारी की हुई मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हुए संकल्प राष्ट्र सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास, अयोध्या धाम के राष्ट्रीय प्रवक्ता आचार्य शैलेश पांडे ने अपना जन्मदिन सादगी से मनाने के बजाय श्रद्धांजलि सभा आयोजित की।

भायंदर पूर्व स्थित भारत माता मंदिर सेवाश्रम के जनसंपर्क कार्यालय में आयोजित इस शोक सभा में उपस्थित लोगों ने भरत भूषण तिवारी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। इस अवसर पर आचार्य शैलेश पांडे ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का शासन सर्वोपरि होना चाहिए और प्रत्येक नागरिक को न्याय मिलने का अधिकार है।

श्रद्धांजलि सभा में शिक्षण समिति सभापति स्नेहा शैलेश पांडे, परिवहन समिति सभापति एड. राजकुमार मिश्रा, भाजपा जिला महामंत्री बृजेश तिवारी, पतंजलि योग समिति ठाणे जिला प्रमुख योग गुरु संतोष खटावकर, जिला सचिव मुकेश जांगिड़, फूलकुमार झा, समाजसेवक एल. आर. पांडे, समाजसेवी मैना पांडे, जितेंद्र प्रताप सिंह, मंडल उपाध्यक्ष विश्वनाथ तिवारी, जिला सचिव बी. एस. पाठक, संदीप दुबे, संजय दुबे, देवेंद्र सिंह, संजय गुप्ता, संदीप शर्मा, नितीन ओझा, विशाल रजक सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

मनीलाइफ फाउंडेशन की स्टडी में मुंबई मेट्रो लाइन-3 की एक्सेसिबिलिटी में कमियों का खुलासा, व्यावहारिक सुधारों की सिफारिश

मनीलाइफ फाउंडेशन की स्टडी में मुंबई मेट्रो लाइन-3 की एक्सेसिबिलिटी में कमियों का खुलासा, व्यावहारिक सुधारों की सिफारिश

मनीलाइफ फाउंडेशन द्वारा किए गए एक स्वतंत्र अध्ययन में मुंबई मेट्रो एक्वा लाइन (लाइन-3) पर यात्रियों की पहुंच (Accessibility) और उपयोगकर्ता-अनुकूल सुविधाओं में मौजूद कई व्यावहारिक कमियों की पहचान की गई है। आधुनिक अवसंरचना और उत्कृष्ट इंजीनियरिंग के बावजूद, अध्ययन में पाया गया कि दैनिक यात्रियों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, छोटे बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों तथा सामान लेकर चलने वाले यात्रियों को कई स्तरों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

'मुंबई मेट्रो एक्वा लाइन (लाइन-3) की एक्सेसिबिलिटी और यूज़र-फ्रेंडलीनेस पर अध्ययन' शीर्षक से यह रिपोर्ट 8 जुलाई 2026 को जारी की गई। इसकी प्रतियां केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA), मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (MMRC), महा मुंबई मेट्रो ऑपरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MMMOCL), मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA), महाराष्ट्र सरकार, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) सहित विभिन्न मेट्रो एजेंसियों और शोध संस्थानों को भेजी गई हैं।

अध्ययन के तहत मेट्रो लाइन-3 के सभी 27 स्टेशनों का विस्तृत निरीक्षण, यात्रियों का सर्वेक्षण तथा एक्सेसिबिलिटी, ट्रांसपोर्ट प्लानिंग और अर्बन मोबिलिटी विशेषज्ञों से परामर्श किया गया।

रिपोर्ट में प्रमुख रूप से पाया गया कि अधिकांश स्टेशनों पर नीचे उतरने वाले एस्केलेटर उपलब्ध नहीं हैं। यात्रियों को बाहर निकलते समय लंबी सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं, जिससे वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और भारी सामान लेकर यात्रा करने वालों को अनावश्यक कठिनाई होती है।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि कई स्टेशनों पर अत्यधिक सीढ़ियां चढ़नी-उतरनी पड़ती हैं। यद्यपि लिफ्ट उपलब्ध हैं, लेकिन सभी यात्री उनका उपयोग नहीं कर पाते, जिससे सीढ़ियों पर निर्भरता बढ़ जाती है।

रिपोर्ट में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को भी एक बड़ी चुनौती बताया गया है। यात्रियों ने बस, ऑटो-रिक्शा और टैक्सी तक पहुंचने में कठिनाई तथा आसपास के परिवहन नेटवर्क के साथ पर्याप्त समन्वय न होने की शिकायत की। अध्ययन के अनुसार, स्टेशन के बाहर बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और कनेक्टिविटी विकसित करना आवश्यक है।

इसके अलावा, मार्गदर्शन (Wayfinding) और एक्सेसिबिलिटी संबंधी संकेतकों को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता बताई गई है, ताकि पहली बार यात्रा करने वाले यात्रियों और दिव्यांगजनों को आसानी से मार्ग मिल सके।

एयरपोर्ट स्टेशनों पर लंबी पैदल दूरी, ट्रॉली की सीमित उपलब्धता तथा एयरपोर्ट टर्मिनल और मेट्रो स्टेशन के बीच सुगम संपर्क की कमी को भी महत्वपूर्ण समस्या के रूप में चिन्हित किया गया है।

मनीलाइफ फाउंडेशन ने अपनी सिफारिशों में जहां संभव हो वहां डाउन एस्केलेटर की स्थापना, बेहतर संकेतक, बस एवं अन्य सार्वजनिक परिवहन से प्रभावी एकीकरण, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी में सुधार तथा भविष्य की मेट्रो परियोजनाओं में यूनिवर्सल एक्सेसिबिलिटी को अनिवार्य रूप से शामिल करने का सुझाव दिया है।

फाउंडेशन की सुचेता दलाल का मानना है कि यह अध्ययन मुंबई मेट्रो लाइन-3 में व्यावहारिक सुधारों का आधार बनेगा तथा भविष्य की शहरी परिवहन परियोजनाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज सिद्ध होगा।

यह अध्ययन मनीलाइफ फाउंडेशन द्वारा सार्वजनिक नीति, सुशासन और उपभोक्ता अधिकारों पर अपने निरंतर कार्य के अंतर्गत किया गया। इस परियोजना के फील्ड रिसर्च का कार्य फाउंडेशन के मार्गदर्शन में अशोका विश्वविद्यालय की इंटर्न अगम्या जैन और मिहिका ओमसीमा ने किया।

Saturday, 4 July 2026

एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई के चुनाव में 'एशियाटिक टुमॉरो' पैनल की ऐतिहासिक जीत

एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई के चुनाव में 'एशियाटिक टुमॉरो' पैनल की ऐतिहासिक जीत, कुमार केतकर पैनल पर मिली निर्णायक विजय

एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई के बहुप्रतीक्षित चुनाव में डॉ. विनय सहस्रबुद्धे के नेतृत्व वाले 'एशियाटिक टुमॉरो' पैनल ने शानदार और एकतरफा जीत दर्ज करते हुए वरिष्ठ पत्रकार कुमार केतकर के नेतृत्व वाले पैनल को निर्णायक रूप से पराजित कर दिया। कई महीनों तक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बाद संपन्न हुए इस चुनाव में कुल 517 सदस्यों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

अध्यक्ष पद पर डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने 352 मत प्राप्त कर विजय हासिल की, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी वरिष्ठ पत्रकार कुमार केतकर को 147 मत मिले। उपाध्यक्ष पद की चारों सीटों पर रमेश पतंगे (329), नितीश भारद्वाज (328), चंद्रप्रकाश द्विवेदी (327) और संजय देशमुख (323) विजयी रहे। सचिव पद पर विवेक गणपुले ने 352 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की। मैनेजिंग कमेटी के लिए प्राची मोघे (341), माधव भंडारी (339), मल्हार कुलकर्णी (333), प्रमोद बापट (329), वी. एम. चक्रवर्ती (324) तथा राजेश बेहरे (321) निर्वाचित हुए। स्क्रूटिनाइजिंग कमेटी में स्नेह नगरकर (370), अभिजीत मुले (362), माधवी नरसाले (362), उमंग काले (358), अमोल जाधव (349), मल्हार गोखले (348) तथा दत्तात्रय पंचवाघ (344) ने जीत दर्ज की।

इस परिणाम के साथ 'एशियाटिक टुमॉरो' पैनल ने सभी प्रमुख पदों और समितियों में विजय प्राप्त कर एशियाटिक सोसायटी के चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल किया। यह परिणाम संस्था के प्रशासन, संरक्षण और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए सदस्यों के स्पष्ट जनादेश के रूप में देखा जा रहा है।

लोकसभा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्रियों से डॉ. चिन्मय पण्ड्या की शिष्टाचार भेंट

लोकसभा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्रियों से डॉ. चिन्मय पण्ड्या की शिष्टाचार भेंट

जन्मशताब्दी वर्ष समारोह हेतु राष्ट्रीय नेतृत्व को आमंत्रण

अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने नई दिल्ली प्रवास के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तथा केंद्रीय मंत्रियों ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, चिराग पासवान, सर्बानंद सोनोवाल, भूपेन्द्र यादव एवं सी. आर. पाटिल से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें अखिल विश्व गायत्री परिवार की संस्थापिका वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों, अखंड दीपक शताब्दी समारोह तथा अन्य विशेष आयोजनों में सहभागिता हेतु आमंत्रित किया।

बैठकों के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों, भारतीय संस्कृति, वैज्ञानिक अध्यात्म, नैतिक नेतृत्व, युवा सशक्तिकरण, मूल्यनिष्ठ शिक्षा तथा विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की रचनात्मक भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक एवं प्रेरणादायी चर्चा हुई। साथ ही देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा योग, भारतीय ज्ञान परंपरा, समग्र व्यक्तित्व विकास एवं संस्कार आधारित शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों एवं प्रयासों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने जन्मशताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों और राष्ट्र निर्माण के व्यापक जनजागरण का अभियान बताते हुए सभी जनप्रतिनिधियों से सक्रिय सहभागिता का आग्रह किया।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रियों ने अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा समाज जागरण, संस्कार संवर्धन, नैतिक मूल्यों के प्रसार, सांस्कृतिक पुनर्जागरण तथा राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में किए जा रहे रचनात्मक एवं प्रेरणादायी कार्यों की सराहना की। उन्होंने माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी वर्ष समारोह एवं अखंड दीपक शताब्दी समारोह की सफलता, गरिमा एवं व्यापक जनप्रेरणा के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ व्यक्त करते हुए इन आयोजनों में सहभागिता का आश्वासन भी दिया। 

Friday, 3 July 2026

महाराष्ट्रातील माहितीचा अधिकार नियम, २०२६ ला स्थगिती : जनदबावाचा विजय की सरकारची धोरणात्मक माघार?

महाराष्ट्रातील माहितीचा अधिकार नियम, २०२६ ला स्थगिती : जनदबावाचा विजय की सरकारची धोरणात्मक माघार?

महाराष्ट्र सरकारने लागू केलेल्या माहितीचा अधिकार (आरटीआय) नियम, २०२६ संदर्भात मोठा वाद निर्माण झाल्यानंतर अखेर सरकारने या नियमांच्या अंमलबजावणीला तात्पुरती स्थगिती देण्याचा निर्णय घेतला आहे. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांच्या निर्देशानंतर या नियमांच्या अंमलबजावणीला स्थगिती देण्याची प्रक्रिया सुरू करण्यात आली. देशभरातील आरटीआय कार्यकर्ते, सामाजिक संस्था, कायदेतज्ज्ञ तसेच ज्येष्ठ समाजसेवक अण्णा हजारे यांनी या नियमांना तीव्र विरोध केला होता. अण्णा हजारे यांनी या विरोधात उपोषणाची घोषणाही केली होती. त्यामुळे सरकारने घेतलेला हा निर्णय केवळ प्रशासकीय नसून नागरिकांच्या अधिकारांशी संबंधित महत्त्वाच्या प्रश्नावर सरकारने एक पाऊल मागे घेतल्याचे मानले जात आहे.

महाराष्ट्र सरकारने १२ जून २०२६ रोजी राजपत्रात अधिसूचना प्रसिद्ध करून माहितीचा अधिकार नियम, २०२६ तात्काळ प्रभावाने लागू केले होते. या नियमांमध्ये अनेक महत्त्वपूर्ण बदल करण्यात आले होते. यापूर्वी आरटीआय अर्जासाठी ₹१० शुल्क आकारले जात होते. नवीन नियमांनुसार ते वाढवून ₹३० करण्यात आले. प्रथम अपीलचे शुल्क ₹२० वरून ₹५० करण्यात आले, तर द्वितीय अपीलचे शुल्क ₹२० वरून ₹१०० करण्यात आले. माहितीच्या प्रती मिळविण्यासाठीही शुल्क वाढविण्यात आले. ए-४ आकाराच्या प्रत्येक पानासाठी ₹५, तसेच स्कॅन अथवा डिजिटल प्रतीसाठीही ₹५ प्रति पान शुल्क निश्चित करण्यात आले. अभिलेखांचे निरीक्षण पहिले एक तास मोफत ठेवण्यात आले होते; त्यानंतर प्रत्येक तासासाठी ₹५० शुल्क आकारण्याची तरतूद करण्यात आली. दारिद्र्यरेषेखालील (बीपीएल) अर्जदारांना अर्ज शुल्कातून सवलत देण्यात आली होती; मात्र ५० पानांपेक्षा अधिक माहिती घेतल्यास त्यांनाही निर्धारित शुल्क भरावे लागणार होते.

नवीन नियमांनुसार एका आरटीआय अर्जात सामान्यतः केवळ एकाच विषयाचा समावेश असावा आणि अर्ज १५० शब्दांपेक्षा अधिक नसावा, अशी अट घालण्यात आली होती. एका अर्जात एकापेक्षा अधिक विषय असल्यास लोक माहिती अधिकारी केवळ पहिल्या विषयावरच कार्यवाही करेल आणि उर्वरित विषयांसाठी स्वतंत्र अर्ज करण्याचा सल्ला देईल, अशी तरतूद होती. आरटीआय कार्यकर्त्यांचे म्हणणे होते की, प्रत्यक्षात अनेक वेळा एका विषयाशी संबंधित अनेक मुद्द्यांवर माहिती मागविणे आवश्यक असते. त्यामुळे ही अट नागरिकांवर अतिरिक्त आर्थिक व प्रशासकीय भार टाकणारी ठरली असती.

या नियमांमधील सर्वाधिक वादग्रस्त तरतूद म्हणजे भारतीय नागरिकत्वाचा पुरावा अनिवार्य करणे होय. प्रत्येक आरटीआय अर्जासोबत भारतीय नागरिक असल्याचा स्वप्रमाणित छायाचित्रयुक्त ओळखपत्र जोडणे बंधनकारक करण्यात आले होते. ओळखपत्र जोडले नसल्यास अर्ज परत करण्याची तरतूदही करण्यात आली होती. विरोधकांचे म्हणणे होते की, माहितीचा अधिकार अधिनियम, २००५ मध्ये अशी कोणतीही अट नाही आणि राज्य सरकारला नियमांच्या माध्यमातून मूळ कायद्यात अतिरिक्त अटी घालण्याचा अधिकार नाही.

आरटीआय कार्यकर्ते आणि कायदेतज्ज्ञांच्या मते हे नियम माहिती मिळविण्याची प्रक्रिया सुलभ करण्याऐवजी अधिक कठीण करणारे होते. अर्ज शुल्कात मोठी वाढ, ओळखपत्र अनिवार्य केल्यामुळे गोपनीयता आणि सुरक्षेचे प्रश्न, एका अर्जात एकच विषय ठेवण्याची सक्ती, १५० शब्दांची मर्यादा आणि मूळ कायद्याच्या भावनेला छेद देणाऱ्या अतिरिक्त अटी या प्रमुख आक्षेप होत्या. अनेक संघटनांनी असा युक्तिवाद केला की, राज्य सरकार नियम करू शकते; मात्र त्या नियमांद्वारे नागरिकांचे मूलभूत वैधानिक अधिकार मर्यादित करू शकत नाही.

ज्येष्ठ समाजसेवक अण्णा हजारे यांनी या नियमांना लोकशाही अधिकारांवरील आघात असल्याचे सांगत आंदोलन आणि उपोषणाची घोषणा केली. त्यांच्या घोषणेनंतर सरकारवर राजकीय आणि सामाजिक दबाव वाढला. आरटीआय कार्यकर्ते, सामाजिक संस्था तसेच विरोधी पक्षांनीही हे नियम मागे घेण्याची मागणी केली. या पार्श्वभूमीवर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी नियमांच्या अंमलबजावणीला स्थगिती देण्याचा निर्णय घेतला.

सध्या सरकारने केवळ या नियमांच्या अंमलबजावणीला स्थगिती दिली आहे. म्हणजेच हे नियम सध्या लागू होणार नाहीत. भविष्यात सरकार आवश्यक सुधारणा करून नवी अधिसूचना जारी करू शकते. त्यामुळे हा अंतिम निर्णय मानता येणार नाही. सरकार लवकरच आरटीआय कार्यकर्त्यांशी चर्चा करणार असून, वादग्रस्त तरतुदींचा फेरविचार करून आवश्यक सुधारणा करण्याची किंवा पूर्वीचे नियम कायम ठेवण्याची शक्यता आहे.

माहितीचा अधिकार अधिनियम, २००५ हा भारतातील सर्वात प्रभावी पारदर्शकता कायद्यांपैकी एक मानला जातो. या कायद्यामुळे शासनाच्या कामकाजात उत्तरदायित्व आणि पारदर्शकता वाढली असून लाखो नागरिकांना त्यांच्या हक्कांचे संरक्षण करण्याचे प्रभावी साधन उपलब्ध झाले आहे. महाराष्ट्र सरकारने या नियमांना स्थगिती दिल्याने लोकशाही व्यवस्थेत जनमत, नागरी समाज आणि शांततामय आंदोलन यांची ताकद आजही प्रभावी असल्याचे पुन्हा एकदा सिद्ध झाले आहे. तसेच माहितीच्या अधिकारासारख्या महत्त्वाच्या कायद्यात कोणताही बदल करण्यापूर्वी व्यापक सार्वजनिक चर्चा आणि सर्व संबंधित घटकांशी सल्लामसलत होणे आवश्यक असल्याचेही या घटनाक्रमातून स्पष्ट झाले आहे. नागरिकांच्या अधिकारांशी संबंधित कायद्यांमध्ये बदल करताना पारदर्शकता, घटनात्मक मूल्ये आणि लोकसहभाग यांना सर्वोच्च प्राधान्य दिले गेले पाहिजे, हा संदेश या निर्णयातून अधोरेखित झाला आहे.

अनिल गलगली
माहितीचा अधिकार कार्यकर्ता

Wednesday, 1 July 2026

जौनपुर और ज़फराबाद के प्राचीन इतिहास के अध्ययन एवं संरक्षण हेतु पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान की पहल

जौनपुर और ज़फराबाद के प्राचीन इतिहास के अध्ययन एवं संरक्षण हेतु पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान की पहल

मीरा रोड पूर्व स्थित श्री लल्लन तिवारी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के सभागार में पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान द्वारा एक सभा आयोजित की गई, जिसमें जौनपुर एवं ज़फराबाद क्षेत्र के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक महत्व पर चर्चा की गई तथा उनके अध्ययन, संरक्षण और पुनर्परिभाषा से संबंधित प्रस्ताव पारित किए गए।

सभा को संबोधित करते हुए प्रतिष्ठान के सचिव एवं पत्रकार ओम प्रकाश ने सनातन परंपरा के वैश्विक सांस्कृतिक विस्तार तथा भगवती तारा एवं आदि पराशक्ति से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों पर अपने विचार रखे। वहीं श्री जयशंकर तिवारी ने जौनपुर और ज़फराबाद के ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और उनके प्राचीन स्वरूप के अध्ययन से संबंधित प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, शिक्षाविद लल्लन तिवारी, मीरा भायंदर की महापौर डिंपल मेहता, पूर्व सांसद संजय निरुपम, पूर्व मंत्री विद्या ठाकुर, विधायक नरेंद्र मेहता, पद्मश्री डॉ. सोमा घोष, भाजपा नेता आर. यू. सिंह सहित बड़ी संख्या में पूर्वांचल समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

सभा में पारित प्रस्तावों में जौनपुर जिले के ज़फराबाद स्थित मनहेच किला और मछलीशहर स्थित सगरेकोट क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कर संरक्षित करने, जमैथा एवं मादरडीह क्षेत्रों के व्यापक ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक अध्ययन, क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान पर शोध तथा अटाला मस्जिद से जुड़े विषयों पर संवाद एवं संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान खोजने की मांग शामिल रही।

सभा में यह भी निर्णय लिया गया कि भविष्य में बख्शा, राजेपुर, सिरकोनी, मल्हनी, मड़ियाहूं, केराकत एवं अन्य क्षेत्रों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के दस्तावेजीकरण और अध्ययन के लिए विस्तृत प्रस्ताव राज्य सरकार को प्रस्तुत किए जाएंगे।