Monday, 9 February 2026

Annual Sports Meet 2.0 Celebrated with Grandeur by Ajitha Nair Educational Trust, Kurla

Annual Sports Meet 2.0 Celebrated with Grandeur by Ajitha Nair Educational Trust, Kurla


Kurla witnessed an atmosphere of enthusiasm, energy, and celebration as Ajitha Nair Educational Trust successfully organised its Annual Sports Meet 2.0 on 7th February 2026 at Kohinoor Turf.


The mega sporting event brought together students, parents, educators, and dignitaries in a vibrant celebration of sportsmanship and holistic education. Over 500 students from Nair International Pre-School and Roshan English High School participated enthusiastically, while more than 400 parents cheered wholeheartedly, transforming the venue into a lively arena of encouragement and excitement.

A wide range of fun-filled and competitive races were organised for different age groups, including Bunny Race, Picnic Race, Three-Leg Race, Cone Pyramid Race, Obstacle Race, and several other engaging activities. These events ensured active participation, enjoyment, and healthy competition among students.

Adding to the excitement, a lucky draw for parents was organised, featuring multiple consolation prizes along with three major gifts, which received an enthusiastic response from the audience. 

The Sports Meet commenced with the lighting of the ceremonial lamp by Anil Galgali Ji, Senior Journalist and National-level RTI Activist, along with Journalist Shivdinesh Sharma Ji and Ajitha Nair Ji (Amma), marking an auspicious beginning to the event.

The event was graced by Shivsena MLA Dilip (Mama) Lande as the Chief Guest. The programme was further dignified by the presence of eminent guests including IRPS Rishikumar Shukla (RPF), ACP Sudhir Hirdekar, Congress Corporator Arshad Azmi, Trustee Nilesh Kore, along with several senior officials from the social sector, police force, and media fraternity.

All dignitaries actively encouraged the students and felicitated the winners with medals, certificates, and trophies, recognising their efforts and achievements.

The programme was smoothly and confidently anchored by Ms Safa Sajid Salmani, an alumna of the institute, whose engaging presentation added charm to the proceedings.

Teachers played a pivotal role in the success of the Sports Meet.The Primary Section was efficiently headed by Mr Sashant Shivdasan Nair, Headmaster and Trustee of the Trust. The sports activities were meticulously coordinated by PT Teacher Ms Neeta Virkar, whose dedication and expertise were evident throughout the event. The Secondary Section was guided by Head Teacher Ms Shariya Khan along with her committed team. The Pre-Primary Section was managed under the leadership of Ms Misbah Sayed (Kurla Branch) and Ms Shama Shaikh (Jarimari Branch).

The programme concluded with a heartfelt Vote of Thanks delivered by Rahul Ramchandran Nair, President of Ajitha Nair Educational Trust, who expressed sincere gratitude to all guests, parents, teachers, staff members, and students for making Annual Sports Meet 2.0 a grand success.
The event truly reflected the Trust’s vision of nurturing young minds through discipline, teamwork, and physical fitness, leaving behind cherished memories of joy, motivation, and inspiration for everyone present.

Thursday, 5 February 2026

हमारे समय से संवाद करते संजय !

हमारे समय से संवाद करते संजय !

( 7 फ़रवरी 2026 जन्मदिन विशेष)

वाणी और वाणी के महात्म्य को समझना है तो प्रो.संजय द्विवेदी की संगति कीजिए। मौन को पढ़ना सीखना हो, स्निग्धता की तपस्या को जानना हो तो उनके व्यक्तित्व को जानिए, पहचानिए। सच कहूँ, विरले होते हैं वे लोग, जिन्हें चंदन और पारसमणि का स्पर्श हुआ हो जैसा संजय जी भाई साहब को हुआ है। हम बहुत भाग्यशाली हैं कि हमने स्वयं को आधुनिक पत्रकारिता के शुभ्र ललाट की संगति रूपी चंदन-पारसमणि की छुअन से परिष्कृत किया है। 

     समय के साथ रहना, समय के साथ चलना और अपने समय से संवाद करना किसी को आता है तो वे मीडिया गुरु, पत्रकारों के आदर्श भारतीय जनसंचार संस्थान के पूर्व महानिदेशक प्रो.(डा.) संजय द्विवेदी हैं। वे कहते हैं भाषाएँ और माताएँ अपने बच्चों से ही सम्मान पाती हैं। तो आपने माँ, मातृभूमि और मातृभाषा को प्रमुख स्थान देकर समाज तथा मीडिया में अपना उच्च स्थान बनाया है। आपने सदैव स्वयं को पत्रकारिता का विद्यार्थी मानकर ही अपने समय से संवाद किया है और आज भी कर रहे हैं। आपका सरल व्यक्तित्व, चंद्रमा-से ओजस्वी चेहरे पर अठखेलियाँ करती चंचल मंद मुस्कुराहट, उन्नत भाल पर संवाद संग घहराती-लहराती-अठखेलियाँ करती विचारों की रेखाएँ, मुखारबिंदु से प्रवाहित परमहंसी धीर-गंभीर वाणी चंदन की भाँति हर ताप-समस्या का त्वरित समाधान ऐसे उपस्थित करती है जैसे कोई नदी अपने जल से बिना लाग-लपेट सबको अभिसिंचित करती बहती रहती है। 

    ‘‘सुबरन को ढूँढत फिरै, कवि, लेखी अरु गौर’’ की भाँति आप सुशब्द-संचय में विश्वास करते हैं मगर भौतिक संपदा को विराग-दृष्टि से देखते हैं। वहीं ज्ञान को वैसे ही बाँटते चलते हैं जैसे बादल अपनी वृष्टि से सबको हरा-भरा कर देता है। आप निरंतर साहित्य ही नहीं अनेकानेक विषयों के पठन-पाठन में तल्लीन रहते हुए लेखन, संपादन, शिक्षण, पर्यटन, मित्रता-वार्ता सब में व्यस्त रहते हैं। जहाँ आपको ‘मीडिया विमर्श’ बहुत पसंद है वहीं विद्यार्थियों, विद्वानों संग विविध विषयों पर जनसाधारण के कल्याणार्थ चर्चा तथा फिल्म देखना भी आपको पसंद है। लेखन की कला, विचारों को सहेजकर उन्हें श्रेष्ठ रूप देकर पाठक को बाँधने की कला आपको अपने पूजनीय पिताश्री परमात्मानाथ द्विवेदी जी से विरासत में मिली है जो स्वयंसिद्ध एक श्रेष्ठ शिक्षक-लेखक हैं। 

     जैसा हमारा समाज होता है, वैसे ही हमारे समाज के सभी वर्गों के लोग होते हैं। उसी तरह संसार का मीडिया भी है। आपका आदर्श है - त्याग, हर उस भाव से जो बाँधता है, संकीर्ण करता है। ऐसा इसलिए कि आजकल बंधन मानव के अधोपतन का कारण पहले बनता है, उसके परिमार्जन, परिष्कार का बाद में। अतः आपका भाव सदैव शुद्धिकरण का रहता है। आपके संबोधन मनसा-वाचा-कर्मणा में एकनिष्ठ समन्वय के द्वारा पत्रकार-समाज ही नहीं सामान्य जन को भी परिष्कृत करने से पूर्ण रहते हैं। हम सभी को भी यही प्रयास करना चाहिए कि विविध आडंबरो से परे रहकर कर्तव्य का समुचित निर्वहन करें। आपका मानना है कि “मीडिया बहुत छोटी चीज है और समाज बहुत बड़ी चीज है।” मीडिया समाज का एक छोटा-सा हिस्सा है। मीडिया ताकतवर हो सकता है, लेकिन समाज से ताकतवर नहीं हो सकता। आप याद दिलाते रहते हैं कि मीडिया अच्छा हो जाएगा और समाज बुरा रहेगा, ऐसा नहीं हो सकता। समाज अच्छा होगा, तो समाज जीवन के सभी क्षेत्र अच्छे होंगे। जो काम आपको मिला, आपने सत्यनिष्ठा से, प्रामाणिकता से और अपना सब कुछ समर्पित कर उसे पूरा किया। कभी भी ये नहीं सोचा कि ये काम अच्छा है, बुरा है, छोटा है या बड़ा है। साथ ही, कभी भी किसी काम की, किसी दूसरे के काम से तुलना भी नहीं की। किसी भी काम में हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास किया। यही आपका मूल मंत्र है।

      आपके आदर्श वाक्यों या जीवन की समस्त ऊर्जा से यदि क्षीर ग्रहण करना चाहें तो आपका यह वाक्य सदैव मार्गदर्शक के रूप में अपने पाठकों-श्रोताओं को पथ का दीप बनकर आगे बढ़ाता रहेगा- “मेरे पास यात्राएँ हैं, कर्म हैं और साथ हैं उनसे उपजी सफलताएँ।” कर्मों में कुशाग्रता, सकारात्मक व्यवहार, मन में निश्छलता, हृदय में एकाग्रता, विनम्रता, स्पष्टवादिता और हँसमुख स्वभाव सहित नीति-निपुणता तमाम आपकी स्वाभाविक विशेषताएँ हैं और इन्हीं गुणों के कारण आपके संपर्क में आने वाला हर व्यक्ति आपका प्रशंसक बन जाता है। सच कहा जाए तो पत्रकारिता की व्यापक सृष्टि में आप ‘अजातशत्रु‘ हैं । आपका व्यक्तित्व सत्यनिष्ठा, उत्तरदायित्व और भारतीय विचारधारा का विलक्षण समन्वय है जिसमें विनम्रता-कोमलता का भाव वैसे ही दृश्यमान होता है जैसे कस्तूरी तथा उसकी सुगंध। वह मृग जीवन भर सुगंध खोजता है लेकिन आप खोजते नहीं बल्कि स्वयं अपने ज्ञान का सौरभ सभी पर बड़े प्यार से उँड़ेल देते हैं। वह अपनापन, वह स्नेहिल संग, वह कंधे पर थपकी सब कुछ इतना सहज कि बड़े से बड़ा भी नतमस्तक हुए बिना न रहे। 

     भारतीय जन संचार संस्थान के स्थापना दिवस के उपलक्ष में दिए एक इंटरव्यू में समकालीन पत्रकारिता के सामने मौजूद चुनौतियों के बारे में द्विवेदी जी कहते हैं- “हमें सवाल खड़े करने वाला ही नहीं बनना है, इस देश के संकटों को हल करने वाला पत्रकार भी बनना है। मीडिया का उद्देश्य अंततः लोकमंगल है। यही साहित्य व अन्य प्रदर्शनकारी कलाओं का उद्देश्य भी है। इसके साथ देश की समझ आवश्यक तत्व है। देश के इतिहास, भूगोल, संस्कृति, परंपरा, आर्थिक सामाजिक चिंताओं, संविधान की मूलभूत चिंताओं की गहरी समझ हमारी पत्रकारिता को प्रामाणिक बनाती है। समाज आर्थिक-सामाजिक, धार्मिक रूप से ही नहीं वैचारिक न्याय से युक्त बने। यही न्यायपूर्ण समरस समाज हम सबका साझा स्वप्न है। पत्रकारिता अपने इस कठिन दायित्वबोध से अलग नहीं हो सकती। इसमें शक नहीं कि आज मीडिया एजेंडा केन्द्रित पत्रकारिता और वस्तुनिष्ठ और निरपेक्ष पत्रकारिता के बीच बंट गया है। यह स्थिति स्वयं मीडिया की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाती है।”

      वस्तुतः संजय जी वर्तमान के लिए वही कार्य कर रहे हैं जो हमारे ऋषियों ने किया था। उन्होंने युगबोध का कार्य किया और आप भी अपनी यात्राओं, संगोष्ठियों द्वारा राष्ट् बोध जाग्रत करने का पुनीत कर्म कर रहे हैं। आपके जन्म दिवस पर यही सच्ची कामना होगी कि विश्व शुद्धिकरण, अंतःकरण में मानव प्रेम की ज्योत जगाने की यह करुणामय यात्रा सभी को अभिसिंचित करती अनन्तकाल तक प्रवाहित होती रहे। 

पवन कुमार पाण्डेय (लेखक अखिल भारतीय साहित्य परिषद जोधपुर प्रांत- राजस्थान के प्रचार प्रमुख हैं।)
आदर्श भारतीय जनसंचार संस्थान के पूर्व महानिदेशक प्रो.(डा.) संजय द्विवेदी 

लेखक पवन कुमार पाण्डेय

Tuesday, 3 February 2026

महापौर निवडणुकीतील विलंब : मुंबईकरांच्या जनादेशाची कसोटी

महापौर निवडणुकीतील विलंब : मुंबईकरांच्या जनादेशाची कसोटी


मुंबई महानगरपालिकेच्या निवडणुका 15 जानेवारी 2026 रोजी पार पडल्या आणि 16 जानेवारीला निकाल जाहीर झाले. लोकशाही प्रक्रियेचा पहिला टप्पा पूर्ण झाला. मात्र लोकशाहीचा दुसरा आणि अधिक महत्त्वाचा टप्पा, सत्तेचे त्वरित हस्तांतरण इथेच संथ झाला. महापौर निवडणूक 11 फेब्रुवारी 2026 रोजी ठेवण्यात आली. निकालानंतर तब्बल 26 दिवसांचा विलंब. हा विलंब केवळ प्रशासकीय योगायोग आहे, की सत्तेच्या सोयीसाठी केलेली आखणी, हा प्रश्न आज संपूर्ण शहर विचारत आहे.


मुंबई महानगरपालिका अधिनियम, 1888 मध्ये महापौर निवडणूक किती दिवसांत घ्यावी, याची ठोस मर्यादा नाही. मात्र पहिली सर्वसाधारण सभा अनावश्यक विलंब न करता घेणे बंधनकारक आहे. कायद्यात आकडा नसला, तरी लोकशाहीचा आत्मा स्पष्ट आहे की जनतेचा निर्णय लांबवू नका. कायद्याच्या पळवाटा शोधणे हे प्रशासनाचे कर्तव्य नसून, लोकशाहीचे रक्षण करणे ही त्याची जबाबदारी आहे.


राज्यातील इतर महानगरपालिका आणि नगरपालिकांमध्ये निकालानंतर 10 ते 15 दिवसांत महापौर निवडणुका पार पडल्या. तिथेही कायदे तेच, नियम तेच. मग मुंबईसाठी वेगळा वेळापत्रक का? उत्तर स्पष्ट आहे. मुंबईत लोकशाहीपेक्षा राजकीय गणिते अधिक गुंतागुंतीची आहेत. अधिकारांशिवाय नगरसेवक, अधिकारात प्रशासक.


निवडून आलेले नगरसेवक निर्णयक्षम होत नाहीत, तर प्रशासकीय यंत्रणेला अधिक काळ स्वायत्तता मिळते. हा काळ कोणाच्या फायद्याचा असतो? निश्चितच लोकांचा नाही. लोकांनी निवडून दिलेल्या प्रतिनिधींना अधिकार देण्यात विलंब करणे म्हणजे अप्रत्यक्षपणे लोकशाहीला बाजूला सारणे होय.


“मोठी महानगरपालिका आहे”, “सुरक्षेचा प्रश्न आहे”, “तयारीस वेळ लागतो” ही कारणे नेहमीच पुढे केली जातात. पण प्रश्न असा आहे की हीच कारणे इतर मोठ्या शहरांत का अडथळा ठरत नाहीत? प्रशासन स्वतंत्रपणे निर्णय घेत आहे की सत्ताधाऱ्यांच्या सोयीप्रमाणे वेळ ठरवत आहे, याबाबत शंका निर्माण होते.


महिला महापौर होणार, ही बाब स्वागतार्ह आहे. पण निर्णय प्रक्रियाच वेळेत होत नसेल, तर अशा घोषणांचे लोकशाही मूल्य किती? प्रतिनिधित्व हे केवळ नावापुरते नव्हे, तर वेळेत अधिकार देण्यातून सिद्ध होते. 11 फेब्रुवारी 2026 ही तारीख कदाचित कायदेशीर चौकटीत बसते. पण लोकशाही फक्त कायद्याने चालत नाही; ती नैतिकता, पारदर्शकता आणि वेळेच्या भानावर चालते. जे कायदेशीर आहे तेच नेहमी योग्य असेलच, असे नाही. हा प्रश्न एका निवडणुकीपुरता मर्यादित नाही. भविष्यात अशाच प्रकारे 40–50 दिवसांपर्यंत विलंब केला जाणार नाही, याची खात्री कोण देणार? म्हणूनच महापौर निवडणुकीसाठी कायद्यात स्पष्ट कालमर्यादा (Time-limit) ठरवणे अत्यावश्यक आहे. अन्यथा लोकशाही ही कागदावरच उरेल.

मुंबई ही देशाची आर्थिक राजधानी आहे. तिच्या लोकशाहीचा वेग संथ असेल, तर संदेश चुकीचा जातो. मुंबईकरांनी आपला कौल दिला आहे. आता प्रशासन आणि सत्ताधाऱ्यांची जबाबदारी आहे की त्यांनी तो कौल वेळेत, प्रामाणिकपणे आणि पारदर्शकपणे अंमलात आणावा. लोकशाही ही सोयीप्रमाणे नव्हे, तर जनतेच्या वेळेवर चालली पाहिजे.

अनिल गलगली 
माहिती अधिकार कार्यकर्ते

महापौर चुनाव में देरी : मुंबईकरों के जनादेश की परीक्षा

महापौर चुनाव में देरी : मुंबईकरों के जनादेश की परीक्षा


मुंबई महानगरपालिका के चुनाव 15 जनवरी 2026 को संपन्न हुए और 16 जनवरी को परिणाम घोषित कर दिए गए। लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पहला चरण पूरा हो चुका था। लेकिन लोकतंत्र का दूसरा और अधिक महत्वपूर्ण चरण था सत्ता का त्वरित हस्तांतरण जो यहीं आकर धीमा पड़ गया। महापौर का चुनाव 11 फरवरी 2026 को तय किया गया, यानी चुनाव परिणामों के बाद पूरे 26 दिनों की देरी। यह देरी केवल एक प्रशासनिक संयोग है या सत्ता की सुविधा के लिए की गई रणनीति, यह सवाल आज पूरे शहर में गूंज रहा है।


मुंबई महानगरपालिका अधिनियम, 1888 में यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया है कि महापौर का चुनाव कितने दिनों के भीतर होना चाहिए। हालांकि, यह अनिवार्य है कि पहली आम सभा अनावश्यक विलंब के बिना आयोजित की जाए। भले ही कानून में दिनों की स्पष्ट संख्या न हो, लेकिन लोकतंत्र की आत्मा साफ कहती है कि जनता के फैसले को टालना नहीं चाहिए। कानून की खामियों का लाभ उठाना प्रशासन का कर्तव्य नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा करना उसकी जिम्मेदारी है।


राज्य की अन्य महानगरपालिकाओं और नगरपालिकाओं में चुनाव परिणामों के 10 से 15 दिनों के भीतर महापौर के चुनाव संपन्न हो चुके हैं। वहां भी कानून वही है, नियम वही हैं। फिर मुंबई के लिए अलग समय-सारणी क्यों? उत्तर स्पष्ट है कि मुंबई में लोकतंत्र से अधिक राजनीतिक गणित जटिल हैं। परिणामस्वरूप, चुने हुए नगरसेवक अधिकारविहीन रहते हैं और प्रशासक अधिक समय तक सत्ता में बने रहते हैं। जब निर्वाचित प्रतिनिधियों को निर्णय लेने का अधिकार नहीं मिलता और प्रशासनिक तंत्र को अतिरिक्त स्वायत्तता मिलती है, तो सवाल उठता है कि इसका लाभ किसे होता है? निश्चित रूप से जनता को नहीं। जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को अधिकार सौंपने में देरी करना, अप्रत्यक्ष रूप से लोकतंत्र को दरकिनार करने जैसा है।


“महानगर बड़ा है”, “सुरक्षा का मुद्दा है”, “तैयारियों में समय लगता है”  ये तर्क बार-बार दिए जाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि यही कारण अन्य बड़े शहरों में बाधा क्यों नहीं बनते? क्या प्रशासन स्वतंत्र रूप से निर्णय ले रहा है या फिर सत्ताधारियों की सुविधा के अनुसार समय तय किया जा रहा है? इस पर संदेह होना स्वाभाविक है। महिला महापौर बनने की संभावना स्वागतयोग्य है। लेकिन यदि निर्णय प्रक्रिया ही समय पर न हो, तो ऐसी घोषणाओं का लोकतांत्रिक मूल्य क्या रह जाता है? प्रतिनिधित्व केवल नाम का नहीं, बल्कि समय पर अधिकार देने से सिद्ध होता है। 11 फरवरी 2026 की तारीख भले ही कानूनी दायरे में हो, लेकिन लोकतंत्र केवल कानून से नहीं चलता; वह नैतिकता, पारदर्शिता और समयबद्धता पर आधारित होता है। जो कानूनी है, वही हमेशा न्यायसंगत हो ऐसा आवश्यक नहीं।

यह मुद्दा केवल एक चुनाव तक सीमित नहीं है। भविष्य में क्या इसी तरह 40–50 दिनों तक देरी नहीं की जाएगी, इसकी गारंटी कौन देगा? इसलिए महापौर चुनाव के लिए कानून में स्पष्ट समय-सीमा (Time-limit) तय करना अत्यंत आवश्यक है। अन्यथा लोकतंत्र केवल कागज़ों तक सीमित रह जाएगा। मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है। यदि उसकी लोकतांत्रिक प्रक्रिया ही धीमी होगी, तो संदेश गलत जाएगा। मुंबईकरों ने अपना जनादेश दे दिया है। अब प्रशासन और सत्ताधारियों की जिम्मेदारी है कि वे इस जनादेश को समय पर, ईमानदारी से और पारदर्शी तरीके से लागू करें। लोकतंत्र सुविधा के अनुसार नहीं, बल्कि जनता के समय पर चलना चाहिए।


अनिल गलगली
सूचना अधिकार कार्यकर्ता

Monday, 2 February 2026

वीर सावरकर के जीवन और विचारधारा पर आधारित पुस्तक का मुंबई में विमोचन

वीर सावरकर के जीवन और विचारधारा पर आधारित पुस्तक का मुंबई में विमोचन

वीर सावरकर के जीवन, विचारधारा और राष्ट्रवादी दर्शन पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण पुस्तक का विमोचन मुंबई के विलेपार्ले पूर्व  में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में किया गया। इस अवसर पर देश के प्रख्यात विचारक, विद्वान, सामाजिक कार्यकर्ता और जागरूक नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विश्व हिंदू फाउंडेशन के संस्थापक एवं वैश्विक अध्यक्ष तथा प्रसिद्ध विचारक स्वामी विज्ञानंद सरस्वती और महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

इस अवसर पर लेखिका डॉ. वैदेही तमन द्वारा लिखित वीर सावरकर पर आधारित एक ही पुस्तक का विमोचन किया गया, जिसे पाठकों की व्यापक पहुँच के उद्देश्य से तीन भाषाओं—अंग्रेज़ी, हिंदी और मराठी—में प्रकाशित किया गया है।

अंग्रेज़ी में Reclaiming Bharat, हिंदी में वीर सावरकर की क्रांतिकारी यात्रा तथा मराठी में वीर सावरकरांची क्रांतिकारी यात्रा शीर्षक से प्रकाशित यह पुस्तक वीर सावरकर के क्रांतिकारी जीवन, उनके अडिग राष्ट्रवाद, स्वतंत्रता संग्राम में योगदान और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की भूमिका को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है।

कार्यक्रम में विद्वानों, लेखकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जो समकालीन संदर्भ में वीर सावरकर के विचारों के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाती है। पुस्तक विमोचन के पश्चात आयोजित संवाद सत्र में श्रोताओं ने सावरकर की विचारधारा, ऐतिहासिक व्याख्याओं और राष्ट्र निर्माण की दृष्टि पर विचार साझा किए।

सभा को संबोधित करते हुए मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा कि कुछ वर्ग इतिहास को तोड़-मरोड़ कर वीर सावरकर की नकारात्मक छवि प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे सावरकर को समझने के लिए उनके मूल विचारों और लेखन का अध्ययन करें तथा कहा कि डॉ. वैदेही तमन द्वारा लिखी गई यह पुस्तक युवाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है।

अपने संबोधन में स्वामी विज्ञानंद सरस्वती ने वीर सावरकर की दूरदर्शी सोच पर प्रकाश डालते हुए उद्यमिता, आत्मनिर्भरता, सशक्त राष्ट्रीय सुरक्षा, हिंदू एकता और समग्र राष्ट्र निर्माण की अवधारणा को रेखांकित किया। उन्होंने जटिल वैचारिक विषयों को सरल और सहज भाषा में प्रस्तुत करने के लिए डॉ. वैदेही तमन की विशेष सराहना की।

कार्यक्रम का समापन लेखिका डॉ. वैदेही तमन के सम्मान के साथ हुआ। आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि वीर सावरकर के विचार आज भी प्रासंगिक हैं और उन्हें बहुभाषी, तथ्यपरक और पाठक-हितैषी पुस्तकों के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचाने की आवश्यकता है।

Thursday, 29 January 2026

“नरसिंह के. दुबे ‘बाबूजी’ के सत्रहवें पुण्यस्मरण पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन”

“नरसिंह के. दुबे ‘बाबूजी’ के सत्रहवें पुण्यस्मरण पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन”

श्री नरसिंह के. दुबे चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित नालासोपारा आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में स्वर्गीय नरसिंह के. दुबे ‘बाबूजी’ की 17वीं पुण्यतिथि के अवसर पर विविध सामाजिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया।

इस अवसर पर नि:शुल्क चिकित्सा शिविर, सुदृढ़ बालक प्रतियोगिता, पाचन संस्थान पर आधारित वनौषधियों की प्रदर्शनी, संभाषा प्रतियोगिता, भावपूर्ण श्रद्धांजलि समारोह तथा विशुद्ध भोजपुरी–अवधी कवि सम्मेलन जैसे कार्यक्रम संपन्न हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, भगवान धन्वंतरी पूजन एवं बाबूजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया। आयोजित नि:शुल्क चिकित्सा शिविर में कुल 1127 मरीजों ने विभिन्न चिकित्सा सेवाओं का लाभ उठाया। 

शिविर में चिकित्सकों की सलाह अनुसार रक्त जांच, ईसीजी, एक्स-रे जैसी जांचें नि:शुल्क की गईं। साथ ही किफायती दरों पर चश्मा वितरण भी किया गया। महाविद्यालय के सभागृह में सुदृढ़ बालक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में नालासोपारा की प्रसिद्ध बालरोग विशेषज्ञ डॉ. जयश्री देशपांडे तथा आयुर्वेद बालरोग विशेषज्ञ डॉ. सोनम कर्णावत ने निर्णायक की भूमिका निभाई। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार ₹1501, द्वितीय पुरस्कार ₹1001 एवं तृतीय पुरस्कार ₹751 के साथ प्रमाणपत्र व ट्रॉफी प्रदान की गई।

6 माह से 2 वर्ष आयु वर्ग में प्रथम – शिव योगेश दांडेकर, द्वितीय – आदित्य दिगंबर गवळी, तृतीय – ताशविक वैष्णव, 2 से 3 वर्ष आयु वर्ग में प्रथम – देवांश दीपेश राणे, द्वितीय – गार्गी सचिन चव्हाण, तृतीय – भूमि सिंह, 3 से 5 वर्ष आयु वर्ग में प्रथम – आश्वि सिंह, द्वितीय – शिवाय मिश्रा, तृतीय – नैन्सी तिवारी
को पुरस्कृत किया गया।

इसी दौरान महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन की सूचना मिलने पर, संभाषा प्रतियोगिता के प्रारंभ में ही दो मिनट का मौन रखकर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। संभाषा प्रतियोगिता के प्राथमिक दौर में चयनित 82 प्रतियोगियों में से 15 प्रतिभागियों ने अंतिम चरण में सहभाग लिया। प्रतियोगिता में महाराष्ट्र राज्य के वैद्यकीय, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथी, नर्सिंग, फिजियोथैरेपी एवं अन्य शैक्षणिक क्षेत्रों के विद्यार्थियों ने भाग लिया।

निर्णायक मंडल में निलेश कारखानीस (आर्किटेक्ट, मुंबई), मंदार भानुशे (विभागप्रमुख, साइंस एंड टेक्नोलॉजी,मुंबई विश्वविद्यालय) तथा डॉ. सतीश पांडेय (पूर्व अधिष्ठाता, सोमय्या विद्याविहार, मुंबई विश्वविद्यालय) शामिल रहे। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार – गायत्री प्रभात देसले (येरला आयुर्वेद कॉलेज, खारघर), द्वितीय पुरस्कार – दिव्या दीपक पाटील (नालासोपारा आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज), तृतीय पुरस्कार – कृपाली शंकर वटवकर (नालासोपारा आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज), उत्तेजनार्थ पुरस्कार – शर्वरी पद्मनाभ कारखानीस (ज्ञानदेव यशवंतराव पाटील कॉलेज, नवी मुंबई) को क्रमशः ₹10,000, ₹7,500, ₹5,000 व ₹3,000, ट्रॉफी एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।

संस्था के कोषाध्यक्ष श्यामसुंदर दुबे, अध्यक्ष जयप्रकाश दुबे, डायरेक्टर डॉ. ओमप्रकाश दुबे, विश्वस्त नरेश दुबे एवं सभी निर्णायकों के हस्ते पुरस्कार वितरण संपन्न हुआ।


तत्पश्चात भोजपुरी–अवधी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध कवियों ने अपनी सशक्त रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवियों में जगदीश पंथी, सिपाही पांडे ‘मनमौजी’, निडर ‘जौनपुरी’, रसबिहारी पांडे, एड. राजीव मिश्र, सुभाष यादव, जवाहरलाल ‘निर्झर’, राम सिंह, अरुण दुबे तथा डॉ. श्रीमती मृदुल तिवारी ‘महक’ शामिल थे।

कवियों ने हास्य-व्यंग्य, करुण, श्रृंगार एवं वीर रस की कविताओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता सुभाष यादव ने की, जबकि संचालन निडर ‘जौनपुरी’ ने किया। मुंबई, ठाणे, पालघर, नवी मुंबई, वापी, सिलवासा एवं दमन क्षेत्र के भोजपुरी–अवधी भाषी नागरिकों ने कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया।

Tuesday, 27 January 2026

गायिका अंजली भारती के आपत्तिजनक बयान के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग

गायिका अंजली भारती के आपत्तिजनक बयान के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग


गायिका अंजली भारती द्वारा बलात्कार जैसे अत्यंत संवेदनशील और गंभीर विषय पर सार्वजनिक रूप से की गई आपत्तिजनक, अपमानजनक एवं अवमानकारक टिप्पणी को लेकर सहार पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है।


शिकायतकर्ता हरप्रीत सरबजीत सिंह संधू ने सहार पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक को दिए गए अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि गायिका अंजली भारती ने सार्वजनिक मंच/माध्यम के माध्यम से बलात्कार जैसे जघन्य अपराध विषय पर टिप्पणी करते हुए माननीय मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस की धर्मपत्नी मा. अमृता फडणवीस के संबंध में अत्यंत अशोभनीय, आपत्तिजनक एवं अपमानजनक वक्तव्य दिया है।

शिकायत में कहा गया है कि इस प्रकार का बयान न केवल एक महिला की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुँचाने वाला है, बल्कि समस्त महिला समाज की गरिमा पर आघात करता है। ऐसे गैर-जिम्मेदाराना और असंवेदनशील वक्तव्य समाज में गलत संदेश फैलाने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था की स्थिति को भी प्रभावित कर सकते हैं।


शिकायतकर्ता ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध प्रचलित कानूनों के अंतर्गत तत्काल संज्ञान लेकर कठोर एवं विधिसम्मत कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार के घृणास्पद और समाजविरोधी बयान देने का साहस न कर सके। पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष, त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा जताई गई है।