Friday, 27 February 2026

33वाँ आशीर्वाद भाषा-सेतु पुरस्कार वितरित

33वाँ आशीर्वाद भाषा-सेतु पुरस्कार वितरित

भाषा संवाद का सशक्त माध्यम है – एड. आशीष शेलार

भाषा संवाद का सशक्त माध्यम है। भारत विविध भाषाओं का देश है, इसलिए हमें प्रत्येक भाषा का सम्मान करना चाहिए। यह विचार महाराष्ट्र राज्य के सांस्कृतिक कार्य, सूचना एवं प्रसारण मंत्री एड. आशीष शेलार ने व्यक्त किए। वे केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान), माटुंगा में आयोजित आशीर्वाद के 56वें उत्सव एवं 33वें आशीर्वाद भाषा-सेतु पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि आशीर्वाद संस्था पिछले 33 वर्षों से देश की विभिन्न भाषाओं के संवर्धन हेतु सतत कार्य कर रही है, जो अत्यंत गौरव की बात है। इस अभियान को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने आशीर्वाद परिवार को शुभकामनाएँ दीं।

56 वर्षों की प्रेरणादायक यात्रा

हिन्दी के प्रति समर्पित साहित्यिक-सामाजिक संस्था आशीर्वाद ने अपनी अनवरत 56 वर्षों की प्रेरणादायक यात्रा पूर्ण की है। यह संस्था संस्कारों और भाषाई समन्वय की सशक्त परंपरा को आगे बढ़ा रही है।

विचार-गोष्ठी : सरल, सहज, शालीन और सार्वभौमिक

इस अवसर पर “सरल, सहज, शालीन और सार्वभौमिक” विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा का कुशल सूत्रसंचालन डॉ. वागीश सारस्वत ने किया। परिचर्चा में चित्रा देसाई, सुभाष काबरा, डॉ. मुकेश गौतम, अमरीश कुमार (मुख्य प्रबंधक, बैंक ऑफ इंडिया) तथा सुभांशु सक्सेना (मुख्य प्रबंधक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र) ने सहभागिता की। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि हिंदी एक उदार भाषा है, जो अन्य भाषाओं के शब्दों को सहजता से आत्मसात करती है, जिससे इसका शब्दकोश निरंतर समृद्ध हो रहा है।

33वाँ आशीर्वाद भाषा-सेतु पुरस्कार

राजभाषा नीति के उत्कृष्ट अनुपालन हेतु भारत सरकार के केंद्रीय कार्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों एवं राष्ट्रीयकृत बैंकों को 33वाँ आशीर्वाद भाषा-सेतु पुरस्कार प्रदान किया गया। प्रमुख सम्मानित संस्थान रहे, रक्षा लेखा प्रधान नियंत्रक (नौसेना), पश्चिम रेलवे, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया। सार्वजनिक उपक्रमों में हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लि., भारतीय जीवन बीमा निगम, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लि.।

भाषा रत्न एवं अन्य सम्मान

भाषा रत्न एवं गौरव पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं में प्रमुख रूप से हर्ष वैद, सुरेश चंद्र तेली, के. राजेश कुमार, अविजित दास, कुशल पाल, विनायक पाटिल, डॉ. सुजीत कुमार शुक्ला, डॉ. विलास वी. झोडे, ललित कुमार गुप्ता,  मनोज हेडा शामिल रहे। भाषा श्री सम्मान सलिल विश्वनाथ (भारतीय जीवन बीमा निगम) प्रेरणा पुरस्कार त्रिलोकानंद मिश्र (एलआईसी) एवं प्रशांत गोस्वामी (भारतीय प्रबंधन संस्थान, मुंबई) महिला प्रचारक पुरस्कार डॉ. विभावरी गोरे (सेंट्रल रेलवे) शामिल थी।


साहित्य, सिनेमा और मीडिया में योगदान

22वाँ श्रेष्ठ गृहपत्रिका पुरस्कार विभिन्न बैंकों एवं सार्वजनिक उपक्रमों की पत्रिकाओं को प्रदान किया गया। कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लि. के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. संतोष कुमार झा की पुस्तक “स्याही के सिपाही” को आशीर्वाद मूल साहित्यिक कृति पुरस्कार प्रदान किया गया। श्रेष्ठ कॉर्पोरेट फिल्म का पुरस्कार ओएनजीसी की अंगदान तथा अरुण शेखर की मराठी लोककलाओं पर आधारित फिल्म ठक्कर लोककलाएँ को प्रदान किया गया।

आशीर्वाद नवरत्न सम्मान

साहित्य, पत्रकारिता, फिल्म, संगीत, सिनेमा और रंगमंच के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु प्रेम जनमेजय, डॉ. सुदर्शना द्विवेदी, विनोद गणात्रा, पंडित कालीनाथ मिश्र, अभिनेता यशपाल शर्मा, प्रीता माथुर ठाकुर, अतुल कपूर को आशीर्वाद नवरत्न सम्मान से विभूषित किया गया।


संस्थान के निदेशक डॉ. सुजीत कुमार शुक्ला ने केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान के कार्यों की जानकारी दी और राजभाषा कार्यान्वयन के प्रति अपने दृढ़ संकल्प को दोहराया। अतिथियों का स्वागत डॉ. बनमाली चतुर्वेदी, श्री जे.पी. बघेल, श्री अशोक त्रिवेदी ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मधुबाला शुक्ला ने किया तथा आभार प्रदर्शन नीता उमाकांत बाजपेयी ने किया। वरिष्ठ पत्रकार विमल मिश्रा, अनिल गलगली सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में यह समारोह स्व. डॉ. उमाकांत बाजपेयी की स्मृति को समर्पित रहा।

Wednesday, 25 February 2026

हरीश पाठक को धर्मवीर भारती स्मृति व्यंग्य यात्रा सम्मान 2026

हरीश पाठक को धर्मवीर भारती स्मृति व्यंग्य यात्रा सम्मान 2026

विष्णु नागर को रवींद्रनाथ त्यागी स्मृति व्यंग्य यात्रा शीर्ष सम्मान 2026

मुंबई। प्रख्यात कथाकार एवं पत्रकार हरीश पाठक को प्रतिष्ठित धर्मवीर भारती स्मृति व्यंग्य यात्रा सम्मान 2026 से सम्मानित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व यह सम्मान विश्वनाथ सचदेव, आबिद सुरती तथा बलराम को प्रदान किया जा चुका है।

इसी क्रम में प्रख्यात कथाकार, व्यंग्यकार एवं संपादक विष्णु नागर को रवींद्रनाथ त्यागी स्मृति व्यंग्य यात्रा शीर्ष सम्मान 2026 प्रदान किया जाएगा। अन्य पुरस्कार इस प्रकार हैं। सोपान सम्मान विनोद कुमार विक्की, शारदा त्यागी स्मृति व्यंग्य यात्रा सम्मान स्नेहलता पाठक, व्यंग्य यात्रा व्यंग्य चिंतक सम्मान (संयुक्त) बी एल आच्छा एवं संजीव कुमार को प्रदान होगा।
 
ये पुरस्कार रवींद्रनाथ त्यागी स्मृति एवं व्यंग्य यात्रा प्रबंध समिति की बैठक में देशभर से प्राप्त संस्तुतियों एवं प्रविष्टियों पर गहन विचार-विमर्श के पश्चात सर्वसम्मति से तय किए गए। बैठक में प्रख्यात कथाकार ममता कालिया की गरिमामयी उपस्थिति रही। बैठक की अध्यक्षता प्रेम जनमेजय ने की। संरक्षक अशोक त्यागी तथा महासचिव रणविजय राव भी उपस्थित रहे। प्रख्यात कथाकार सूर्यबाला से दूरभाष पर संस्तुति प्राप्त की गई।

सभी सम्मानित साहित्यकारों को सम्मान राशि के साथ प्रशस्ति पत्र, स्मृति-चिह्न, शॉल एवं श्रीफल प्रदान किया जाएगा। सम्मान समारोह 21 मार्च 2026 को सायं 5 बजे हिंदी भवन, दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।

शांतिकुंज परिवार ने एक बार पुनः बैरागी द्वीप पर चलाया स्वच्छता अभियान

शांतिकुंज परिवार ने एक बार पुनः बैरागी द्वीप पर चलाया स्वच्छता अभियान

अखिल विश्व गायत्री परिवार की संस्थापिका माता भगवती देवी शर्मा एवं सिद्ध अखंड दीप के शताब्दी समारोह के समापन के उपरांत हरिद्वार स्थित बैरागी द्वीप को पुनः स्वच्छ एवं सुंदर बनाने हेतु व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान शांतिकुंज की अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैलदीदी के निर्देशन तथा देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या के नेतृत्व में संचालित किया गया।

अभियान के अंतर्गत आयोजन स्थल के विभिन्न सेक्टरों, संपर्क मार्गों तथा गंगा तटीय क्षेत्रों की सघन सफाई की गई। सैकड़ों प्रशिक्षित स्वयंसेवकों ने सेवा भाव से जुटकर कूड़ा-कचरा एकत्र किया। एकत्रित अपशिष्ट को बड़े बैगों में भरकर नगर निगम के सहयोग से निर्धारित निस्तारण केंद्रों तक पहुँचाया गया।

स्वच्छता अभियान पर संदेश देते हुए श्रद्धेया शैलदीदी ने कहा कि स्वच्छता केवल एक कार्य नहीं, बल्कि सेवा का ही एक रूप है। कोई भी आध्यात्मिक आयोजन तब तक पूर्ण नहीं माना जा सकता, जब तक प्रकृति और पर्यावरण के प्रति अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन न किया जाए। उन्होंने सभी से अपने परिवेश को स्वच्छ बनाए रखने में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।

शांतिकुंज मीडिया विभाग ने बताया कि आयोजन स्थल को पूर्णतः पर्यावरण-अनुकूल स्वरूप में पुनर्स्थापित किया जा रहा है। बड़े आयोजनों के साथ-साथ उनके सामाजिक एवं पर्यावरणीय उत्तरदायित्वों का निर्वहन भी संस्था की प्राथमिकताओं में शामिल है।

स्वच्छता अभियान में स्थानीय प्रशासन का भी सहयोग प्राप्त हुआ। व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों ने स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया। प्रशासन और शांतिकुंज परिवार के इस संयुक्त प्रयास की स्थानीय नागरिकों ने भी सराहना की है।

Tuesday, 24 February 2026

देसंविवि का जिनेवा स्थित ग्लोबेथिक्स एवं इरोज इंटरनेशनल के साथ ऐतिहासिक एमओयू

देसंविवि का जिनेवा स्थित ग्लोबेथिक्स एवं इरोज इंटरनेशनल के साथ ऐतिहासिक एमओयू


देव संस्कृति विश्वविद्यालय (देसंविवि), हरिद्वार में आयोजित ‘एआई फॉर संस्कृति इंटरनेशनल समिट’ ने तकनीक और मानवीय मूल्यों के समन्वय की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की। इस समिट का सबसे महत्वपूर्ण क्षण देसंविवि और जिनेवा स्थित अंतरराष्ट्रीय संस्था ग्लोबेथिक्स के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर औपचारिक हस्ताक्षर का रहा। इस अवसर पर देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या एवं ग्लोबेथिक्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. फादी दाऊ ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

यह साझेदारी वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) परिदृश्य में नैतिकता, सांस्कृतिक संवेदनशीलता एवं मानवीय मूल्यों के संस्थागत समावेश की दिशा में एक युगांतरकारी कदम मानी जा रही है। यह समझौता केवल शैक्षणिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि उच्च-स्तरीय अनुसंधान, नीतिगत विमर्श एवं मूल्य-आधारित तकनीकी ढांचे के विकास पर केंद्रित है—ऐसा ढांचा जो मशीनी बुद्धिमत्ता को मानवीय संवेदनाओं से जोड़े।

समिट के दौरान वैश्विक पहल को और विस्तार देते हुए देसंविवि ने इरोज इंटरनेशनल के साथ भी एक महत्वपूर्ण समझौता किया। इसके अंतर्गत संस्कृति जीपीटी एवं धर्म जीपीटी जैसे अभिनव, मूल्य-संचालित डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने पर सहमति बनी। इस एमओयू पर देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या एवं इरोज इंटरनेशनल की सीईओ डॉ. शिल्पा देसाई ने हस्ताक्षर किए। उल्लेखनीय है कि इरोज इंटरनेशनल को 12,000 से अधिक छोटी-बड़ी फिल्मों के निर्माण का श्रेय प्राप्त है।
इन प्रस्तावित समझौतों का उद्देश्य भारतीय ज्ञान-परंपरा, सांस्कृतिक विमर्श एवं नैतिक दृष्टिकोण को एआई तकनीक के माध्यम से वैश्विक मंच तक पहुँचाना है। यह पहल इस विचार को सशक्त करती है कि आधुनिक तकनीक केवल गणनात्मक उपकरण नहीं, बल्कि सभ्यताओं के मध्य संवाद, वैश्विक सद्भाव एवं लोक-कल्याण का प्रभावी माध्यम भी बन सकती है।

हरिद्वार की आध्यात्मिक पृष्ठभूमि से प्रारंभ हुआ यह अंतरराष्ट्रीय अभियान डिजिटल क्रांति को ‘संस्कार’ और ‘संस्कृति’ की गरिमा से मंडित करने का प्रयास है। यह समझौता इस बात का प्रतीक है कि भविष्य की एआई नीतियाँ केवल एल्गोरिदम और डेटा पर आधारित न होकर नैतिक चेतना एवं मानवीय संवेदनशीलता को भी केंद्र में रखेंगी।

हरिद्वार से जिनेवा तक जुड़ा यह नैतिकता का वैश्विक सूत्र एआई विमर्श को एक नई दिशा देने की क्षमता रखता है—जहाँ तकनीक और मानवता परस्पर पूरक बनकर विश्व-कल्याण का मार्ग प्रशस्त करें।

देसंविवि का जिनेवा स्थित ग्लोबेथिक्स एवं इरोज इंटरनेशनल के साथ ऐतिहासिक एमओयू

देसंविवि का जिनेवा स्थित ग्लोबेथिक्स एवं इरोज इंटरनेशनल के साथ ऐतिहासिक एमओयू


देव संस्कृति विश्वविद्यालय (देसंविवि), हरिद्वार में आयोजित ‘एआई फॉर संस्कृति इंटरनेशनल समिट’ ने तकनीक और मानवीय मूल्यों के समन्वय की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की। इस समिट का सबसे महत्वपूर्ण क्षण देसंविवि और जिनेवा स्थित अंतरराष्ट्रीय संस्था ग्लोबेथिक्स के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर औपचारिक हस्ताक्षर का रहा। इस अवसर पर देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या एवं ग्लोबेथिक्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. फादी दाऊ ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

यह साझेदारी वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) परिदृश्य में नैतिकता, सांस्कृतिक संवेदनशीलता एवं मानवीय मूल्यों के संस्थागत समावेश की दिशा में एक युगांतरकारी कदम मानी जा रही है। यह समझौता केवल शैक्षणिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि उच्च-स्तरीय अनुसंधान, नीतिगत विमर्श एवं मूल्य-आधारित तकनीकी ढांचे के विकास पर केंद्रित है—ऐसा ढांचा जो मशीनी बुद्धिमत्ता को मानवीय संवेदनाओं से जोड़े।

समिट के दौरान वैश्विक पहल को और विस्तार देते हुए देसंविवि ने इरोज इंटरनेशनल के साथ भी एक महत्वपूर्ण समझौता किया। इसके अंतर्गत संस्कृति जीपीटी एवं धर्म जीपीटी जैसे अभिनव, मूल्य-संचालित डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने पर सहमति बनी। इस एमओयू पर देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या एवं इरोज इंटरनेशनल की सीईओ डॉ. शिल्पा देसाई ने हस्ताक्षर किए। उल्लेखनीय है कि इरोज इंटरनेशनल को 12,000 से अधिक छोटी-बड़ी फिल्मों के निर्माण का श्रेय प्राप्त है।
इन प्रस्तावित समझौतों का उद्देश्य भारतीय ज्ञान-परंपरा, सांस्कृतिक विमर्श एवं नैतिक दृष्टिकोण को एआई तकनीक के माध्यम से वैश्विक मंच तक पहुँचाना है। यह पहल इस विचार को सशक्त करती है कि आधुनिक तकनीक केवल गणनात्मक उपकरण नहीं, बल्कि सभ्यताओं के मध्य संवाद, वैश्विक सद्भाव एवं लोक-कल्याण का प्रभावी माध्यम भी बन सकती है।

हरिद्वार की आध्यात्मिक पृष्ठभूमि से प्रारंभ हुआ यह अंतरराष्ट्रीय अभियान डिजिटल क्रांति को ‘संस्कार’ और ‘संस्कृति’ की गरिमा से मंडित करने का प्रयास है। यह समझौता इस बात का प्रतीक है कि भविष्य की एआई नीतियाँ केवल एल्गोरिदम और डेटा पर आधारित न होकर नैतिक चेतना एवं मानवीय संवेदनशीलता को भी केंद्र में रखेंगी।

हरिद्वार से जिनेवा तक जुड़ा यह नैतिकता का वैश्विक सूत्र एआई विमर्श को एक नई दिशा देने की क्षमता रखता है—जहाँ तकनीक और मानवता परस्पर पूरक बनकर विश्व-कल्याण का मार्ग प्रशस्त करें।

देवभूमि हरिद्वार में भारतीय संस्कृति और ऋषि परंपरा के स्वर्णिम अध्याय का शुभारंभ

देवभूमि हरिद्वार में भारतीय संस्कृति और ऋषि परंपरा के स्वर्णिम अध्याय का शुभारंभ

हरिद्वार की देवभूमि, वैरागी कैंप में भारतीय संस्कृति और ऋषि परंपरा के एक स्वर्णिम अध्याय का भव्य शुभारंभ हुआ। अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा माता भगवती देवी एवं अखंड दीपक के शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर ऋषि क्षेत्र का भव्य अनावरण किया गया।

यह ऐतिहासिक आयोजन न केवल देवभूमि को आध्यात्मिक ऊर्जा से आप्लावित करता है, बल्कि आधुनिक युग में प्राचीन ऋषि-ज्ञान की प्रासंगिकता को भी सशक्त रूप से रेखांकित करता है।
अनावरण समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री एवं सांसद अजय भट्ट ने कहा कि गुरुदेव ने कठिन साधना और तपश्चर्या से जो बीज बोया था, वह आज एक विराट वटवृक्ष का रूप ले चुका है। स्वयं को तपाकर उन्होंने मानवता को जो संदेश दिया, वह अमर है और विश्व के कोने-कोने में अखंड दीप की भांति प्रकाश फैलाता रहेगा। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार का प्रत्येक परिजन कठिन परिस्थितियों में भी मुस्कान के साथ निरंतर सेवा में संलग्न दिखाई देता है, जो उनके भीतर रचे-बसे कर्मयोग का प्रमाण है।

मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने कहा कि आध्यात्मिकता जीवन को संतुलन देने की विधि है तथा जीवन जीने की सही दिशा प्रदान करती है। वही विद्या सार्थक है, जो चरित्र निर्माण और लोककल्याण की भावना को विकसित करे। हमारे ऋषियों ने समाज के बीच रहकर जीवन को ऊँचा उठाने की शिक्षा दी। गायत्री परिवार के अधिष्ठाता आचार्यश्री ने धर्म को चरित्र और कर्तव्य से जोड़कर प्रस्तुत किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा— “युग बदलता नहीं, युग बदला जाता है।”

डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि युगऋषि गुरुदेव ने हम सभी को एक सूत्रबद्ध भावधारा से जोड़ा है। आज का यह समय आध्यात्मिक और सामाजिक—दोनों दृष्टियों से अत्यंत मूल्यवान है। उन्होंने माता भगवती देवी के संदेश का स्मरण कराते हुए कहा कि भारत को सर्वसमर्थ बनाने के लिए भारतीय संस्कृति को सुदृढ़ करना होगा तथा प्राचीन ऋषि परंपरा के पुनर्जीवन की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

विश्व हिंदू परिषद के मिलिंद परांडे ने कहा कि गायत्री परिवार ने सभी जाति और धर्मों को एक सूत्र में पिरोने का भगीरथ प्रयास किया है। इससे पूर्व मेयर श्रीमती किरण जैसल सहित अन्य अतिथियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने साधना, सेवा, संस्कार एवं राष्ट्र-निर्माण के क्षेत्र में गायत्री परिवार द्वारा किए जा रहे कार्यों को प्रेरणास्पद बताया।

इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों सहित नितिन गौतम, तरुण वशिष्ठ आदि को देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतीक चिह्न, युगसाहित्य, गंगाजली एवं गायत्री महामंत्र युक्त उपवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, अनेक प्रशासनिक अधिकारी, शांतिकुंज व्यवस्थापक योगेंद्र गिरि सहित देश के कोने-कोने से आए हजारों स्वयंसेवकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

Monday, 16 February 2026

गोवंश आधारित काव्य प्रतियोगिता का फ़ाइनल सम्पन्न

गोवंश आधारित काव्य प्रतियोगिता का फ़ाइनल सम्पन्न

गुरु नानक खालसा महाविद्यालय, उमा कल्याण ट्रस्ट तथा भारतीय गोवंश रक्षण-संवर्द्धन परिषद के संयुक्त तत्वावधान में गोवंश आधारित प्रतियोगिताओं की श्रृंखला के अंतर्गत स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों की काव्य प्रतियोगिता का फ़ाइनल गुरु नानक खालसा कॉलेज में संपन्न हुआ।

इस अवसर पर वरिष्ठ कवयित्री प्रमिला भारती मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं और प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रत्ना शर्मा ने आगंतुकों का स्वागत किया। उपप्राचार्य एवं हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मृगेन्द्र राय ने प्रतियोगिता का संचालन किया तथा प्राध्यापिका सरिता शर्मा ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

आयोजक संस्था उमा कल्याण ट्रस्ट की ओर से राजीव नौटियाल, अशोक हमराही और राजुल अशोक ने गोवंश रक्षण एवं संरक्षण हेतु ट्रस्ट द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी तथा युवाओं के लिए आयोजित प्रतियोगिताओं के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने उमा कल्याण ट्रस्ट के प्रयासों की सराहना की।

काव्य प्रतियोगिता के फ़ाइनल में मुंबई एवं आसपास के 15 महाविद्यालयों से 42 विद्यार्थियों ने भाग लिया। परिणामस्वरूप

प्रथम स्थान: मौसम यादव (रामनिरंजन झुनझुनवाला कॉलेज)

द्वितीय स्थान: पवनजीत गुप्ता (भवंस कॉलेज)

तृतीय स्थान: तनु सिंह (राम नारायण रुइया कॉलेज)


इसके अतिरिक्त महिमा मिश्रा (कीर्ति कॉलेज) और ऐश्वर्या शुक्ला (एल. आर. तिवारी डिग्री कॉलेज) को प्रोत्साहन पुरस्कार देने की घोषणा की गई। विजेताओं को पुरस्कार वितरण हेतु शीघ्र ही एक विशेष समारोह आयोजित किया जाएगा।

प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डॉ. आर. एस. दुबे, डॉ. बी. पी. सिंह तथा डॉ. उषा मिश्रा शामिल रहे।

उल्लेखनीय है कि युवाओं को भारतीय देशी गोवंश की उपयोगिता, वैज्ञानिक महत्व, भारतीय संस्कृति, ग्रामीण जीवन तथा पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के उद्देश्य से विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय स्तर पर काव्य, निबंध, भाषण एवं चित्रकला प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। प्रथम चरण में ये प्रतियोगिताएँ मुंबई एवं आसपास के क्षेत्रों में आयोजित की जा रही हैं तथा भविष्य में अन्य स्थानों पर भी इनका विस्तार किया जाएगा। सभी प्रतियोगिताओं के विषय गोवंश आधारित एवं भाषा हिंदी रखी गई है।

प्रतियोगिताओं के आयोजन में सहयोगी संस्थान के रूप में मुंबई विश्वविद्यालय हिंदी विभाग तथा विशेष सहयोगी के रूप में हिन्द सेवा परिषद, पब्लिक हाई स्कूल, गुरु नानक खालसा कॉलेज और रामनिरंजन झुनझुनवाला कॉलेज सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।