८ मार्च विश्व महिला दिवस के अवसर पर अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए देशभर में अनेक महिलाओं को सम्मानित किया गया। इसी कड़ी में मुंबई के अंधेरी स्थित शकुंतल स्टूडियो में मुनीब खान द्वारा चार विशिष्ट महिलाओं को सम्मानित किया गया, जिसमें मुनीब खान की सुपुत्री ने भी बढ़-चढ़कर सहयोग किया।
सम्मानित नामों में साहित्य के क्षेत्र में अनवरत कार्य कर रहीं नीलांबरी फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. नीलिमा पाण्डेय, शायरा रेखा किंगर, कुसुम त्रिपाठी तथा उत्कृष्ट शायरा तबस्सुम नाडिवाल को सम्मान प्रदान किया गया।
सभी सम्मानित जनों ने अपने-अपने उत्कृष्ट विचार रखे। कुसुम त्रिपाठी ने विश्व महिला दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि बताई। रेखा किंगर चूँकि वकील हैं, इसलिए उन्होंने महिलाओं के हित में बने कानूनों की जानकारी दी। तबस्सुम नाडिवाल ने भी महिला सशक्तिकरण का समर्थन किया।
इसी क्रम में डॉ. नीलिमा पाण्डेय ने अपने विचार रखते हुए स्त्री-पुरुष के समान वर्चस्व की बात कही। उन्होंने कहा कि समाज को सशक्त बनाने में महिला रीढ़ की हड्डी के समान है। उन्होंने यह भी बताया कि क्रांति आवश्यक होते हुए भी उचित समय और परिस्थितियों में ही होनी चाहिए, क्योंकि कोई भी क्रांति बदलाव तो लाती है, किन्तु सामाजिक परिवेश को नुकसान भी पहुँचा सकती है। समाज और देश के हित की बात करते हुए उन्होंने वेदों, उपनिषदों, चाणक्य नीति और विदुर नीति का भी उल्लेख किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अभिलाष अवस्थी ने की। इसी आयोजन में मुंशी प्रेमचंद की चार कहानियों — मासूम बच्चा, लांछन, बड़े भाई साहब और होली — का नाट्य मंचन भी किया गया। साथ ही साहिर लुधियानवी को याद करते हुए उनकी रचनाओं का पाठ किया गया। मुनीब खान के निर्देशन में प्रस्तुत नाटक के सभी कलाकारों ने उत्कृष्ट अभिनय किया, जिसकी सभी ने सराहना की।
अंधेरी के शाकुंतल स्टूडियो में सुप्रसिद्ध रंगकर्मी मुजीब खान की संस्था आइडिया के माध्यम से प्रेमचंद की कहानियों का नाट्य मंचन पिछले 20 साल से कर रहे हैं। लगभग 300 कहानियों का अब तक मंचन कर चुके हैं।
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