Monday, 25 May 2026

गुरु के बताए मार्ग पर चलना ही सौभाग्य का उदय : डॉ. चिन्मय पण्ड्या

गुरु के बताए मार्ग पर चलना ही सौभाग्य का उदय : डॉ. चिन्मय पण्ड्या

शांतिकुंज में दो दिवसीय शिक्षक गरिमा शिविर का शुभारंभ, उप्र के 500 से अधिक शिक्षकों की भागीदारी


गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में पुरुषोत्तम मास के पावन एवं आध्यात्मिक संयोग के अवसर पर दो दिवसीय शिक्षक गरिमा शिविर का शुभारंभ हुआ। शिविर में उत्तर प्रदेश के कानपुर, लखनऊ, वाराणसी, मुरादाबाद, मेरठ, प्रयागराज सहित अनेक जिलों से आए 500 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गायत्री परिवार के सक्रिय कार्यकर्ताओं की सहभागिता रही। इस अवसर पर शांतिकुंज परिसर राष्ट्रनिर्माताओं के महाकुंभ में परिवर्तित हो गया।

शिविर का उद्देश्य वर्तमान पीढ़ी का निर्माण करने वाले शिक्षकों को उनके गौरवशाली दायित्व, सांस्कृतिक चेतना एवं नैतिक मूल्यों के प्रति पुनः जागृत करना है।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने गुरु-शिष्य परंपरा तथा राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पुस्तकीय ज्ञान देने वाला माध्यम नहीं, बल्कि समाज का वास्तविक दर्पण होता है। युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का संपूर्ण जीवन मानवता के कल्याण एवं राष्ट्र के वैचारिक पुनरुत्थान के लिए समर्पित रहा और वे शिक्षक गरिमा के जीवंत प्रतीक थे।

डॉ. पण्ड्या ने कहा कि सद्गुरु के बताए सन्मार्ग पर निष्ठापूर्वक चलना ही वास्तविक अध्यात्म है। जो व्यक्ति अपने गुरु के सिद्धांतों और आदर्शों को जीवन में उतार लेता है, उसके जीवन में सौभाग्य का सूर्योदय निश्चित होता है। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में नैतिक एवं मानवीय मूल्यों का समावेश समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

शिविर के प्रथम दिन ही उत्तर प्रदेश से आए अनेक शिक्षकों ने इस आयोजन को अपने जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ बताया। कार्यक्रम में शांतिकुंज व्यवस्थापक योगेन्द्र गिरि, परमानंद द्विवेदी, रामयश तिवारी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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