Friday, 8 September 2017

झोटिंग कमिटी पर  45.42 लाख हुआ खर्च

महाराष्ट्र के विवादित पूर्व राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे की भोसरी जमीन मामले की जांच करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने गठित की झोटिंग कमिटी पर 45.42 लाख का खर्च होने की जानकारी आरटीआई कार्यकर्ते अनिल गलगली को महाराष्ट्र सरकार ने दी हैं। इस कमिटी पर उच्च न्यायालय के निवृत्त न्यायमूर्ती डी.एस.झोटिंग की नियुक्ति की गई थी। 

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने महाराष्ट्र सरकार से झोटिंग पर हुए खर्च की जानकारी मांगी थी।  सामान्य प्रशासन विभाग के अवर सचिव सि. ना. महिरे ने अनिल गलगली को खर्च की जानकारी मांगी थी।  झोटिंग कमिटी के सदस्य दिनकर झोटिंग के वेतन पर 23 जून 2016 से 15 जुलाई 2017 इस दौरान रु 28 लाख 21 हजार 126 इतना खर्च हुआ हैं वहीं  दूरध्वनी, पेट्रोल, अखबार, बिजली, पानी , आदि चीजों पर रु  1 लाख 68 हजार 035 इतना खर्च हुआ हैं। वहीं झोटिंग कमिटी पर एक अधिकारी मधुकर चौहाण के वेतन पर दिनांक 6 अगस्त 2016 से 15 जुलाई 2017 इस दौरान रु 15 लाख 13 हजार 001 इतना खर्च हुआ हैं वहीं दूरध्वनी, पेट्रोल, अखबार, बिजली, पानी , आदि चीजों पर रु 40 हजार 262 इतना खर्च हुआ हैं।

महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल के भोसरी, जिला पुणे स्थित जमीन खरीदी के गैरव्यवहार की न्यायालयीन जांच करने को लेकर उच्च न्यायालय के रिटायर्ड  न्यायमूर्ती दिनकर झोटिंग की नियुक्ती 23 जून 2016 की गई थी। जांच की अवधि 3 महीने की थी। लेकिन जांच देरी से हुई और झोटिंग कमिटी ने उनकी रिपोर्ट 30 जून 2017 को सरकार को सौंपी हैं। यह रिपोर्ट गोपनीय होने का दावा किया जा रहा हैं। अनिल गलगली ने झोटिंग कमिटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक कर की गई सिफारिशों पर कारवाई करने की मांग की है। जनता के टैक्स से जमा होनेवाले पैसे से यह पैसा खर्च होने से इसे सार्वजनिक करना ही चाहिए, ऐसा गलगली का कहना हैं।

झोटिंग समितीवर 45.42 लाखांचा खर्च

महाराष्ट्राचे वादग्रस्त माजी महसूल मंत्री एकनाथ खडसे यांच्या भोसरी जमीन प्रकरणाची चौकशी करण्यासाठी महाराष्ट्र शासनाने नेमलेल्या झोटिंग समितीवर 45.42 लाखांचा खर्च झाल्याची माहिती आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस महाराष्ट्र शासनाने दिली आहे. या समितीवर उच्च न्यायालयातील निवृत्त न्यायमूर्ती डी.एस.झोटिंग यांच्या समितीने चौकशी केली.

आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी महाराष्ट्र शासनाकडे झोटिंग समितीवर झालेल्या खर्चाची माहिती मागितली होती. सामान्य प्रशासन विभागाचे अवर सचिव सि. ना. महिरे यांनी अनिल गलगली यांस खर्चाची माहिती दिली. झोटिंग समितीवरील सदस्य दिनकर झोटिंग यांच्या वेतनावर 23 जून 2016 ते 15 जुलै 2017 या कालावधीत रु 28 लाख 21 हजार 126 इतका वेतनावर खर्च झाला आहे. तर दूरध्वनी, पेट्रोल, वर्तमानपत्र, वीज, पाणी , इ बाबीवर रु  1 लाख 68 हजार 035 इतका खर्च झाला आहे. तर झोटिंग समितीवरील एक अधिकारी मधुकर चौहाण यांच्या वेतनावर दिनांक 6 ऑगस्ट 2016 ते 15 जुलै 2017 या कालावधीत रु 15 लाख 13 हजार 001 इतका खर्च झाला आहे. तर दूरध्वनी, पेट्रोल, वर्तमानपत्र, वीज, पाणी , इ बाबीवर रु 40 हजार 262 इतका खर्च झाला आहे.

महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडळाच्या भोसरी, जिल्हा पुणे येथील जमीन खरेदी गैरव्यवहारातील न्यायालयीन चौकशी करण्याबाबत उच्च न्यायालयातील निवृत्त न्यायमूर्ती दिनकर झोटिंग यांची नियुक्ती 23 जून 2016 रोजी करत चौकशीची मुदत 3 महिन्यांची होती. परंतु चौकशीस विलंब झाला आणि झोटिंग समितीने त्यांचा अहवाल 30 जूनला शासनाकडे सादर केला असून तो गोपनीय असल्याचा दावा केला जात आहे. अनिल गलगली यांनी झोटिंग समितीचा अहवाल सार्वजनिक करत केलेल्या शिफारशीवर कारवाई करण्याची मागणी केली आहे. जनतेच्या करातून जमा होणा-या पैश्यांतून हा पैसा खर्च झाल्याने अहवाल सार्वजनिक करण्यात काही गैर नाही, असे गलगली यांचे म्हणणे आहे.

Zoting Committee incurs expenses of Rs 45.42 Lakhs

Zoting Committee which was constituted by the Maharashtra government to investigate into the allegations of corruption by Former Revenue Minister Eknath Khadse in the Bhosari land acquisition has incurred a expenses upto Rs 45.42 Lakhs. This information was provided by the Maharashtra government to RTI Activist Anil Galgali. The Enquiry Committee consisted of Retired High court Judge D S Zoting

RTI Activist Anil Galgali had sought information from the government about the expenses incurred on the Zoting Committee. The information was provided by the GAD's Under Secretary C N Mahire. In the Zoting Committee, the salary expenses incurred on Justice Dinkar Zoting from 23rd June 2016 upto 15th July 2017 was Rs 28 Lakhs 21 Thousand 126 and the cost of expenses like Telephone, Petrol, Newspapers, Electricity, Water etc was 1 Lakh 68 Thousand 035. Similarly the on the other member Mr Madhukar Chauhan salary expenses from 6th August 2016 to 15th July 2017 was Rs 15 Lakhs 13 Thousand 001 and the expenses for Telephone, Petrol, Newspapers Electricity Water etc was Rs 40 Thousand 262.

The Enquiry Committee headed by the Retired Judge of the High court Justice Dinkar Zoting was appointed on 23rd June 2016 to enquire into the irregularities in acquiring of land Pune Districts, Bhosari for the Maharashtra Industrial Development Corporation and the term was fixed for 3 months.  But due to delay in preparation and enquiry procedure the report was submitted to the government on 30th June 2017 and has been claimed as a confidential report. Anil Galgali has demanded that the report be made public and action as per the report be taken immediately. He further claimed that the expenses incurred are met from the taxes paid by the public and hence it is imperative that the report be made public.

Sunday, 3 September 2017

सरकारी देनदारी की जानकारी छुपानेवाले पूर्व पुलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह केंद्र में बने राज्यमंत्री

लोकसभा चुनाव लड़ने के दौरान सरकारी देनदारी की जानकारी छिपाते हुए उसे अदा न करनेवाले भाजपा के सांसद और मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह को मोदी मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री बनाया गया हैं।आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने लोकसभा अध्यक्ष, प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग के पास लिखित शिकायत कर सत्यपाल सिंह का संसद सदस्यत्व रद्द करने की मांग की थी। आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने लोकसभा अध्यक्ष, प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग के पास किए गए शिकायत में सांसद सत्यपाल सिंह ने कैसे जनता और चुनाव आयोग को उल्लू बनाया हैं ? इसकी विस्तृत जानकारी दी हैं। 

पुलिस आयुक्त पद का इस्तीफा देकर सत्यपाल सिंह ने 2014 में लोकसभा चुनाव उत्तर प्रदेश स्थित बागपत सीट से लड़ा था।  चुनाव आयोग ने जारी किए हैण्ड बुक में उम्मीदवारों को जिन 5 चीजों का ब्यौरा देने को आदेशित किया था उसमें अपराधिक मामले, प्रलंबित मामले, संपत्ति, देनदारी और शैक्षणिक योग्यता का समावेश हैं। इसमें के नियम क्रमांक 3 के अनुक्रमांक 4 में सरकारी वित्तीय संस्थान और सरकारी बकाया की देनदारी का ब्यौरा शामिल हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2 मई 2002 को एसोसिएशन ऑफ़ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की याचिका पर आदेश जारी किया था।  सत्यपाल सिंह ने सरकारी बकाया देनदारी की जानकारी उम्मीदवारी अर्जी पेश करने के दौरान सार्वजनिक नही की थी।

मुंबई के पाटलीपुत्र सहकारी गृहनिर्माण संस्था में स्थित फ्लैट सत्यपाल सिंह ने किराए पर तो दिया लेकिन आज तक रु 48,420/- इतनी जुर्माना की रकम अदा नही की और सरकारी बकाया देनदारी की जानकारी को उम्मीदवारी अर्जी पेश करने के दौरान सार्वजनिक नही किया। असल में 10 वर्षों से फ्लैट को किराए पर देकर नियमों का उल्लंघन तो किया और फ्लैट को बिना अनुमति किराए पर देकर लाखों रुपए की कमाई भी की। सत्यपाल के ही फ्लैट में ही 2 जून 2014 को सेक्स रैकेट का भांडाफोड़ हुआ था। अनिल गलगली की शिकायत के बाद सत्यपाल सिंह की जांच शुरु होते हुए भी मोदी कैबिनेट में इन्हें राज्यमंत्री बनाया गया हैं।

थकबाकीची माहिती दडविणारे माजी पोलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह केंद्रात बनले राज्यमंत्री

लोकसभा निवडणुक लढविताना सरकारी थकबाकीची माहिती दडविणारे भाजपाचे खासदार आणि माजी पोलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह यांस मोदी मंत्रिमंडळात राज्यमंत्री बनविले आहे. आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी लोकसभा अध्यक्ष, पंतप्रधान आणि निवडणूक आयोगाकडे रीतसर तक्रार करत सत्यपाल सिंह यांचे सदस्यत्व रद्द करण्याची मागणी होती.आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी लोकसभा अध्यक्ष, पंतप्रधान आणि निवडणूक आयोगाकडे केलेल्या रीतसर तक्रारीत खासदार सत्यपाल सिंह यांनी कशी जनता आणि निवडणूक आयोगाची फसवणूक केली आहे? याची विस्तृत माहिती दिली आहे.

पोलिस आयुक्त पदाचा राजीनामा देत सत्यपाल सिंह यांनी 2014 ची लोकसभा निवडणूक उत्तर प्रदेश येथील बागपत मतदारसंघातून लढविली होती. निवडणूक आयोगाने 27 मार्च 2003 रोजीच्या हैण्ड बुक मध्ये उमेदवारासाठी ज्या 5 बाबी जाहीर करण्याचे आदेशित केले होते त्यात दाखल गुन्हे, प्रलंबित गुन्हे, मालमत्ता, थकबाकी दायित्व आणि शैक्षणिक पात्रता याचा समावेश आहे. यातील नियम क्रमांक 3 मधील 4 मध्ये सरकारी वित्तीय संस्थान आणि सरकारी थकबाकी या दायित्वाचा तपशील आहे. याबाबतीत सुप्रीम कोर्टाने 2 मे 2002 रोजी एसोसिएशन ऑफ़ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्सच्या जनहित याचिकेवर आदेश जारी केले होते. सत्यपाल सिंह यांनी सरकारी थकबाकीची माहिती उमेदवारी अर्ज सादर करताना दिली नाही.

मुंबईतील पाटलीपुत्र सहकारी गृहनिर्माण संस्थेतील सदनिका डॉ सत्यपाल सिंह यांनी भाड्याने देत  रु 48,420/- इतकी दंडाची रक्कम अदा केली नाही आणि सरकारी थकबाकीची माहिती उमेदवारी अर्ज सादर करताना दिली नाही. प्रत्यक्षात त्यांनी 10 वर्षापासून सदनिका भाडयाने देत एकप्रकारे नियमांचे उल्लंघन तर केले आणि सदनिका विना परवानगी भाडयाने देत लाखों रुपये कमविले. त्यानंतर त्यांनी विशेष म्हणजे त्यांच्या याच सदनिकेत 2 जून 2014 रोजी सेक्स रैकेटचा भांडाफोड झाला होता. अनिल गलगली यांच्या तक्रारी नंतर सत्यपाल सिंह यांची चौकशी सुरु असताना त्यांस राज्यमंत्री बनविण्यात आले आहे, ही बाब विशेष असल्याची खंत गलगली यांनी व्यक्त केली.

Satyapal Singh concealed information about dues unpaid to govt, rewarded with induction in the Central Ministry

Ex Police Commissioner & BJP MP Satyapal Singh's withheld information about unpaid dues to the collector's office in his election affidavit. Now he sworn as State Minister in Modi Cabinet. RTI Activist Anil Galgali has filed application before Election Commissioner, Loksabha speaker & Prime minister's office that MP Satyapal Singh be stripped of his membership of Loksabha for defying election rules. Ex Police Commissioner Satyapal Singh concealed information about dues unpaid to govt, rewarded with induction in the Central Ministry.

RTI activist Anil Galgali had revealed that Satyapal Singh, had failed to pay Rs 48,420/- fine imposed by collector, Mumbai suburbs, for renting out his flat at Patliputra Society, Andheri without proper permission from collector, as required by law. His flat is built on highly subsidised land provided for housing of top government officials & according to rules, he is bound to take collector's permission after payment of prescribed fee. Collector issued him a notice on 28th January 2013 for payment of dues. Singh, then holding the post of Police commissioner of Mumbai Police choose to overlook this notice & following reminders.

Satyapal Singh resigned from post of commissioner to contest & win 2014 Loksabha election from Baghpat seat in Uttar Pradesh. Now, this fact has come to light that Singh has not mentioned these 'Government dues' in his election affidavit. The handbook for candidates of Loksabha election specifically states that candidates should furnish details on 5 counts as prescribed by Supreme court judgement in Union of India v/s Association for democratic reforms. According to this provision, candidate is bound to reveal details of his criminal conviction, pending cases, Assets, Government liabilities & educational qualifications in affidavit filed before election officer. The relevant rule 4 (3) prescribes that the candidate reveal- 'Laibilities if any, particularly whether there are any old dues of any financial institution or government dues'.

Anil Galgali has filed application before Election Commissioner, Loksabha speaker & Prime minister's office that MP Satyapal Singh be stripped of his membership of Loksabha for defying election rules. Interesting also that A sex racket was exposed by Mumbai police being run from his same flat no 1002 in Patliputra Society in 2 June 2014. Inspite of an enquiry pending on the complaint filed by Anil Galgali, Satyapal Singh has been appointed as a Minister of State is a sad state of affairs expressed Galgali.

31.82 करोड़ की बकायेदार सोफिटेल हॉटेल पर एमएमआरडीए मेहरबान

समय पर निर्माण कार्य को पूर्ण नहीं करनेवाली श्री नमन हॉटेल्स प्रायवेट लिमिटेड के सोफिटेल हॉटेल का अतिरिक्त प्रीमियम बकाया होते हुए हॉटेल शुरु करने की अनुमति पहले एमएमआरडीए ने देने से इंकार किया था।  उसके बाद किश्त से बकाया रकम देने का वचन देते ही एमएमआरडीए ने अनुमति तो दी लेकिन श्री नमन हॉटेल्स प्रायवेट लिमिटेड ने किश्त अदा नहीं करने से वर्तमान पर 31.82 करोड़ बकाया होने की जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को एमएमआरडीए प्रशासन ने दी हैं। पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के एक रिमार्क्स से कंफ्यूज हुई एमएमआरडीए आज भी श्री नमन हॉटेल्स प्रायवेट लिमिटेड पर सॉफ्ट हैं। 

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने एमएमआरडीए प्रशासन सेक्श्री नमन हॉटेल्स प्रायवेट लिमिटेड ( सोफिटेल हॉटेल ) की जानकारी मांगी थी।  एमएमआरडीए प्रशासन ने अनिल गलगली को दिए हुए दस्तावेजों से वर्तमान में  31 करोड़ 82 लाख 31 हजार 975 रुपए बकाया होने की जानकारी सामने आ रही हैं। बीकेसी के जी ब्लॉक स्थित सी-57 और सी-58 ऐसे 2 भूखंड श्री नमन हॉटेल्स प्रायवेट लिमिटेड को 409.20 करोड़ कक मूल्य लेकर लीज पर दिए थे। 4 वर्ष में निर्माण कार्य को पूर्ण करने में चूकी श्री नमन हॉटेल्स प्रायवेट लिमिटेड को 20.46 करोड़ और 1 करोड़ 6 लाख 50 हजार 411 ऐसे कुल एकूण 21 करोड़ 52 लाख 50 हजार 411 इतना अतिरिक्त प्रीमियम अदा करने की जरुरत थी।  11 अक्टूबर 2011 को एमएमआरडीए प्रशासन ने ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट देने के दौरान जबतक अतिरिक्त प्रीमियम अदा नहीं किया जाता हैं तबतक हॉटेल शुरु करने पर पाबंदी लगाई थी।  लेकिम 15 फरवरी 2012 को संपत कुमार जो एमएमआरडीए प्रशासन में नगर व क्षेत्र नियोजन विभाग के प्रमुख हैं, उन्होंने हॉटेल को 5 किश्त की सहूलियत देते हुए पुराने पत्र में बदलाव किया।  गत 56 महीने में श्री नमन हॉटेल्स प्रायवेट लिमिटेड ने सिर्फ 2 किश्त अदा करते हुए 8 करोड़ 76 लाख 28 हजार 100 रुपए एमएमआरडीए के ख़ज़ाने में जमा किया हैं। वर्तमान में श्री नमन हॉटेल्स प्रायवेट लिमिटेड से ब्याज सहित 31 करोड़ 82 लाख 31 हजार 975 रुपए आना शेष हैं औऱ हॉटेल भी जोर शोर से शुरु हैं। 

मिस्टर क्लीन के रुबाब में काँग्रेस ने जिस पृथ्वीराज चव्हाण को मुख्यमंत्री बनाया था उन्होंने जाते-जाते  23 सितंबर 2014 को आचारसंहिता होते हुए एमएमआरडीए प्रशासन को आदेश दिया। श्री नमन हॉटेल्स प्रायवेट लिमिटेड द्वारा अतिरिक्त प्रीमियम माफ करने के लिए  मुख्यमंत्री को दिए आवेदन पर चव्हाण ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने के 3 दिन पूर्व  पहले  'निरीक्षण करो और आवश्यक वह करे ' ऐसा रिमार्क्स देते हुए एमएमआरडीए प्रशासन को आदेश जारी किया था लेकिन उसके बाद भी एमएमआरडीए प्रशासन ने अतिरिक्त प्रीमियम माफ तो नहीं किया ना बकाया रकम वसूल की।

एमएमआरडीए प्रशासन ने ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट देने के दौरान जो नियम और शर्तों का जिक्र पत्र में किया हैं उसे पढ़कर कोई भी चकरा जाएगा क्योंकि इसमें कई सारी सुविधाओं को मुफ्त में मांगा है।। हर वर्ष 50 रातों के लिए 2 सुइट्स मुफ्त में दिए जाएं। हर वर्ष 20 आयोजन के लिए 20 लोगों का कॉन्फरस कक्ष बैठक हेतु सभी टेक्निकल उपकरणों सहित मुफ्त में दिया जाए।  साथ ही में भोजन, पेय और अन्य सेवा पर टॅक्स सहित होनेवाले बिल पर 20 प्रतिशत की सहुलियत दी जाए। 

अनिल गलगली के अनुसार बकाया रकम न अदा करनेपर इनका ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट तत्काल रद्द कर एमएमआरडीए प्रशासन ने सोफिटेल हॉटेल को सील करने की जरुरत हैं। इसके अलावा एमएमआरडीए प्रशासन को बड़े पैमाने दिए गए अधिकारियों की समीक्षा मुख्यमंत्री नव अब करने की जरुरत होने का मत अनिल गलगली ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजे हुए पत्र में की हैं।