Saturday, 7 April 2018

सरकारी रुग्णालयाच्या खाजगीकरणास विरोधात ठाण्यात निघाला  मोर्चा 

महाराष्ट्रातील जनतेसाठी आरोग्य सेवा सरकारी पातळीवर आरोग्य सेवेचे बाजारीकरण होत असून आता सरकार खाजगीकरणाकडे वळत आहे. या खाजगीकरणाचा विरोधात जागतिक आरोग्य दिनानिमित्त ठाण्यात मोर्चा काढण्यात आला.

लोकजागृती सामाजिक संस्थेतर्फे शिवाजी मैदान, तलावपाळी पासून सिव्हिल रुग्णालय वाया जिल्हाधिकारी कार्यालयापर्यंत मोर्चा काढण्यात आला. संस्थेच्या अध्यक्ष स्वाती पाटील, आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली, डॉ श्रीकृष्ण ढोणे यांच्या नेतृत्वाखाली शिष्टमंडळाने निवासी उपजिल्हाधिकारी डॉ शिवाजी पाटील आणि सिव्हिल सर्जन डॉ केम्पी पाटील  यांची भेट घेत निवेदन सादर केली. आंदोलनात शासनाच्या त्या परिपत्रकाचा विरोध केला ज्यात 300 खाटयांच्या सरकारी रुग्णालयाचे खाजगीकरण करण्याचे संकेत दिले आहे. शासनाने 3 सदस्यीय समितीची स्थापना करत अहवाल देण्याच्या सूचना केल्या आहेत. 

यावेळी विनोद साडविलकर (सीडीएफ मुंबई), राजीव कदम, वीणा दळी, रजनी ढोणे, विश्वनाथ सावंत, चंद्रकांत यादव, प्रकाश वाघ, जितेंद्र तांडेल, अविनाश कदम, श्रेया निमोणकर, मिलिंद निमोणकर, कमला राव, श्रुती गमरे, सुखबीर कौर, संदीप पाटील, भरत खरे, राजू शेळके आणि अन्य आरोग्य चळवळीतील ज्येष्ठ कार्यकर्ते उपस्थित होते. 

सरकारी अस्पतालों का निजीकरण पर विरोध

महाराष्ट्र की जनता के लिए स्वास्थ्य सेवा सरकारी स्तर पर शुरु हैं लेकिन इस स्वास्थ्य सेवा का व्यापारीकरण होने से सरकार अब निजीकरण की ओर जा रही हैं। इस निजीकरण के खिलाफ विश्व स्वास्थ्य दिन के उपलक्ष्य पर ठाणे में मोर्चा निकाला गया।

लोकजागृती सामाजिक संस्था द्वारा शिवाजी मैदान, तलावपाली से सिविल अस्पताल वाया जिलाधिकारी कार्यालय तक मोर्चा निकाला गया। संस्था की अध्यक्ष स्वाती पाटील,आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली,डॉ श्रीकृष्ण ढोणे की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने निवासी उपजिलाधिकारी डॉ शिवाजी पाटील और सिव्हिल सर्जन डॉ केम्पी पाटील से मुलाकात कर विभिन्न मांगों का ज्ञापन सौंपा। इस आंदोलन में  सरकार के उस परिपत्रक का विरोध किया गया जिसमें 300 कॉट वाले सरकारी अस्पताल का निजीकरण करने का संकेत दिया है। सरकार ने इस मामले का अध्ययन करने के लिए 3 सदस्यीय कमिटी का गठन किया हैं।

इस मौके पर विनोद साडविलकर (सीडीएफ मुंबई), डॉ. मिरजकर (सीडीएफ मुंबई), वीणा दळी, रजनी ढोणे, विश्वनाथ सावंत,चंद्रकांत यादव, प्रकाश वाघ, जितेंद्र तांडेल, अविनाश कदम, श्रेया निमोणकर, मिलिंद निमोणकर, कमला राव, श्रुती गमरे, सुखबीर कौर, संदीप पाटील, भरत खैरे, राजू शेलके एवं स्वास्थ्य अभियान से जुड़े कार्यकर्ता उपस्थित थे।

Friday, 6 April 2018

31.82 करोड़ की बकायेदार सोफिटेल हॉटेल पर एमएमआरडीए मेहरबान

समय पर निर्माण कार्य को पूर्ण नहीं करनेवाली श्री नमन हॉटेल्स प्रायवेट लिमिटेड के सोफिटेल हॉटेल का अतिरिक्त प्रीमियम बकाया होते हुए हॉटेल शुरु करने की अनुमति पहले एमएमआरडीए ने देने से इंकार किया था।  उसके बाद किश्त से बकाया रकम देने का वचन देते ही एमएमआरडीए ने अनुमति तो दी लेकिन श्री नमन हॉटेल्स प्रायवेट लिमिटेड ने किश्त अदा नहीं करने से वर्तमान पर 31.82 करोड़ बकाया होने की जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को एमएमआरडीए प्रशासन ने दी हैं।उल्टे नमन हॉटेल ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली एमएमआरडीए को कोर्ट में घसीटकर दावा दायर किया हैं। भाजपा प्रमुख अमित शाह इसी हॉटेल में मेहमानवाजी में मशगूल होने से ऐसे बकायेदार सोफिटेल हॉटेल का चयन भाजपा पार्टी ने क्यों किया होगा ? यह सवाल उपस्थित किया जा रहा हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने एमएमआरडीए प्रशासन सेक्श्री नमन हॉटेल्स प्रायवेट लिमिटेड ( सोफिटेल हॉटेल ) की जानकारी मांगी थी। एमएमआरडीए प्रशासन ने अनिल गलगली को दिए हुए दस्तावेजों से वर्तमान में  31 करोड़ 82 लाख 31 हजार 975 रुपए बकाया होने की जानकारी सामने आ रही हैं। बीकेसी के जी ब्लॉक स्थित सी-57 और सी-58 ऐसे 2 भूखंड श्री नमन हॉटेल्स प्रायवेट लिमिटेड को 409.20 करोड़ कक मूल्य लेकर लीज पर दिए थे। 4 वर्ष में निर्माण कार्य को पूर्ण करने में चूकी श्री नमन हॉटेल्स प्रायवेट लिमिटेड को 20.46 करोड़ और 1 करोड़ 6 लाख 50 हजार 411 ऐसे कुल एकूण 21 करोड़ 52 लाख 50 हजार 411 इतना अतिरिक्त प्रीमियम अदा करने की जरुरत थी।  11 अक्टूबर 2011 को एमएमआरडीए प्रशासन ने ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट देने के दौरान जबतक अतिरिक्त प्रीमियम अदा नहीं किया जाता हैं तबतक हॉटेल शुरु करने पर पाबंदी लगाई थी। लेकिन 15 फरवरी 2012 को संपत कुमार जो एमएमआरडीए प्रशासन में नगर व क्षेत्र नियोजन विभाग के प्रमुख हैं, उन्होंने हॉटेल को 5 किश्त की सहूलियत देते हुए पुराने पत्र में बदलाव किया।  गत 56 महीने में श्री नमन हॉटेल्स प्रायवेट लिमिटेड ने सिर्फ 2 किश्त अदा करते हुए 8 करोड़ 76 लाख 28 हजार 100 रुपए एमएमआरडीए के ख़ज़ाने में जमा किया हैं। वर्तमान में श्री नमन हॉटेल्स प्रायवेट लिमिटेड से ब्याज सहित 31 करोड़ 82 लाख 31 हजार 975 रुपए आना शेष हैं औऱ हॉटेल भी जोर शोर से शुरु हैं। 

अनिल गलगली के अनुसार बकाया रकम न अदा करनेपर इनका ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट तत्काल रद्द कर एमएमआरडीए प्रशासन ने सोफिटेल हॉटेल को सील करने की जरुरत हैं। इसके अलावा एमएमआरडीए प्रशासन को बड़े पैमाने दिए गए अधिकारियों की समीक्षा मुख्यमंत्री नव अब करने की जरुरत होने का मत अनिल गलगली ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजे हुए पत्र में की हैं। लेकिन एमएमआरडीए अधिकारियों की साठगांठ के चलते कार्रवाई हुई नहीं और नमन हॉटेल ने एमएमआरडीए को कोर्ट में खींचने की हिम्मत दिखाई। ऐसे बकायेदार हॉटेल में अमित शाह जैसे भाजपा प्रमुख का निवास करना अयोग्य होने का मत व्यक्त हो रहा हैं।

31.82 कोटीची थकबाकी एमएमआरडीएला न भरणाऱ्या सोफिटेल  हॉटेलात अमित शाह वास्तव्यास

वेळेत काम पूर्ण न करणा-या श्री नमन हॉटेल्स प्रायवेट लिमिटेडच्या सोफिटेल हॉटेलचे अतिरिक्त प्रीमियम थकीत असल्यामुळे त्यास हॉटेल उघडण्याची परवानगी आधी एमएमआरडीएने नाकारलेली होती. त्यानंतर हफ्ता-हफ्ताने रक्कम अदा करण्याचे मान्य करताच एमएमआरडीएने परवानगी दिली पण श्री नमन हॉटेल्स प्रायवेट लिमिटेडने शब्दाला न जागत पुढचा हफ्ताच भरला नसल्यामुळे या घडीला 31.82 कोटी थकीत असल्याची माहिती आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस एमएमआरडीए प्रशासनाने दिली आहे. उलट नमन हॉटेलने एमएमआरडीएला कोर्टात खेचत दावा दाखल केला आहे. भाजपा प्रमुख अमित शाह याच हॉटेलमध्ये वास्तव्यास असून अश्या थकबाकीदार असलेल्या सोफिटेल हॉटेलची निवड भाजपा पक्षाने का केली असावी? हा प्रश्न उपस्थित केला जात आहे.

आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी एमएमआरडीए प्रशासनाकडे श्री नमन हॉटेल्स प्रायवेट लिमिटेड ( सोफिटेल हॉटेल ) बाबत माहिती विचारली होती. एमएमआरडीए प्रशासनाने अनिल गलगली यांस दिलेल्या कागदपत्रांवरुन आजपावेतो 31 कोटी 82 लाख 31 हजार 975 रुपयांची थकबाकी असल्याची माहिती समोर येत आहे. बीकेसी येथील जी ब्लॉक मधील सी-57 आणि सी-58 असे 2 भूखंड श्री नमन हॉटेल्स प्रायवेट लिमिटेड यांस 409.20 कोटीचे मूल्य घेत लीजवर दिले. 4 वर्षात बांधकाम पूर्ण करण्यात अपयशी ठरलेल्या श्री नमन हॉटेल्स प्रायवेट लिमिटेडला 20.46 कोटी आणि 1 कोटी 6 लाख 50 हजार 411 असे एकूण 21 कोटी 52 लाख 50 हजार 411 इतके अतिरिक्त प्रीमियम अदा करणे आवश्यक होते. 11ऑक्टोबर 2011 रोजी एमएमआरडीए प्रशासनाने भोगवटा प्रमाणपत्र देताना जोपर्यंत अतिरिक्त प्रीमियम अदा केले जात नाही तोपर्यंत हॉटेल सुरु करण्यास मज्जाव केला होता. पण 15 फेब्रुवारी 2012 रोजी संपत कुमार जे एमएमआरडीए प्रशासनाच्या नगर व क्षेत्र नियोजन विभागाचे प्रमुख आहेत त्यांनी 5 हफ्ताची सूट देत हॉटेल पूर्वीच्या पत्रास स्वतः बदल केला. गेल्या 56 महिन्यात श्री नमन हॉटेल्स प्रायवेट लिमिटेडने फक्त 2 हफ्ते अदा करत 8 कोटी 76 लाख 28 हजार 100 रुपये एमएमआरडीएच्या तिजोरीत भरले. आजघडीला श्री नमन हॉटेल्स प्रायवेट लिमिटेड कडून व्याजासह 31 कोटी 82 लाख 31 हजार 975 रुपये येणे बाकी आहे आणि हॉटेल सुद्धा जोरात सुरु आहे.

अनिल गलगली यांच्या मते पैसे भरत नसल्यास ताबडतोब भोगवटा प्रमाणपत्र रद्द करत एमएमआरडीए प्रशासनाने सोफिटेल हॉटेल सील करण्याची गरज आहे तसेच एमएमआरडीए प्रशासनास दिलेले अंधाधुंद अधिकाराची समीक्षा मुख्यमंत्र्यांनी आता करण्याची गरज असल्याचे मत अनिल गलगली यांनी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांस पाठविलेल्या पत्रात केली आहे.परंतु एमएमआरडीए अधिकारी वर्गाचे लागेबांधे असल्यामुळे कारवाईस विलंब झाला आणि नमन हॉटेलने एमएमआरडीए प्रशासनाला कोर्टात खेचण्याची हिंमत दाखविली. अश्या थकबाकीदार हॉटेलमध्ये अमित शाह सारख्या भाजपा प्रमुखांनी राहणे अयोग्य असल्याचे मत व्यक्त होत आहे.

BJP president Amit Shah will be using the hospitality of Sofitel hotel in BKC, Which has not paid dues of 31.82 crores to MMRDA

The MMRDA had refused the permission to start the operation of Sofitel Hotel, owned by Shree Naman Hotels Pvt Ltd due to the outstanding dues payable by them on account of additional premium payable due to delayed execution of the project. After the Hotel owners promised to make the payment in installments the MMRDA gave it's permission to start the hotel. But going back on its promises Shree Naman Hotels Pvt ltd did not make the payments for the future EMI's thereby an outstanding of Rs 31.82 crores is pending in default as per the information provided by MMRDA to RTI Activist Anil Galgali. Now, Why should BJP have chosen to host their national head in a hotel that owes & refuses to pay such a large sum to a Government body, Chaired by nobody else, but the CM of the state- Devendra Fadnavis.  It is clear that MMRDA officials are 'hand in glove' with the hotel owing large sum to the Government body. What should one expect further, when the top leaders of ruling party will be seen sharing the luxuries of this 7 star defaulter hotel.

Questions arise as BJP chief Amit shah stays in sofitel hotel that owes Rs  31.82 crores to Mmrda. Sofitel owes Rs 31.82 crores in dues to MMRDA . The hotel instead of paying the dues has pulled the mmrda to court. Now question to be raised on Shah staying in the same hotel, incidentally MMRDA chairman is Cm devendra Fadnavis. Questions are being raised on shahs stay at hotel will influence MMRDA to go soft on sofitel.

RTI Activist Anil Galgali had sought information from the MMRDA about the the project of Shree Naman Hotels Pvt ltd (Sofitel Hotel). As per the information and documents provided by the MMRDA to Galgali, it can be understood that as on date Rs 31 crores 82 lakhs 31 thousand 975 is outstanding. The MMRDA had given on lease the plot now C-57 and C-58 in the G Block of the BKC to Shree Naman Hotels Pvt ltd for Rs 409.20 crores. Since the Hotel project could not be completed within the stipulated period of 4 years, Shree Naman Hotels Pvt ltd were levied a penalty of Rs 20.46 crores and Rs 1 crore 6 lakhs 50 thousand 411 taking the total to Rs 21 crores 52 lakhs 50 thousand 411 as additional premium for 2 plots. On 11th October 2011 at the time of issuing the Partly OC had restricted the opening for non payment of the additional premium. But on 15th February 2012 the Mr Sampatkumar, Chief of the MMRDA's City and Regional Planning department modified it's MMRDA order and granted 5 instalments to make the payment and granted the permission to start operations. In the ensued 56 months, Shree Naman Hotels Pvt ltd has made payment for only 2 instalments totaling Rs 8 crores 76 lakhs 28 thousand 100, but as on date, MMRDA has to receive a total of Rs 31 crores 82 lakhs 31 thousand 975 including interest. The Hotel continues to do brisk business. 

Anil Galgali has demanded that the OC issued to the Sofitel Hotel be immediately revoked if the company fails to make the payment of outstanding of additional premium and if necessary seal premises. In a letter addressed to CM Devendra Fadnavis, Galgali has demanded that the vide discretionary power given to the officer's of MMRDA should be reviewed immediately. But till date no reply from MMRDA. After continuously follow-up by Galgali, now Naman Hotel has taken MMRDA, headed by chief minister devendra Fadnavis to court. MMRDA has been lax in collecting the arrears from this 7 star hotel & now when the top leaders of ruling party decide to take the services of the offending hospitality, what is the message being sent!

Saturday, 31 March 2018

मोदी सरकार अण्णासमोर तूर्तास शरणागत! 

प्रसिद्ध समाजसेवक अण्णा हजारे यांच्या लाक्षणिक उपोषणावर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांच्या मध्यस्थीने तोडगा काढत केंद्र सरकारने 6 महिन्यात मागण्या सोडविण्याचे आश्वासन दिले आहे. अण्णाच्या या आंदोलनाने काय कमविले आणि काय गमविले? यावर दिल्लीत न भरकटणारे कथित बुद्धिजीवी विचारमंथन करत आहे. पण या आंदोलनाने सर्वच त्या त्या क्षेत्रातील 'बाहुबली' यांचाही बुरखा टरकन फाटला आहे. मोदी सरकारने 6 महिन्यांची मुदत मागितली असून आता प्रतिक्षा करण्याचा पर्याय शिल्लक आहे. एकंदरीत मोदी सरकार अण्णासमोर तूर्तास शरणागत झाले आहे.

अण्णांच्या आधीच्या आणि आतांच्या आंदोलनाची तुलना सर्व स्तरावर केली जात आहे. यापूर्वी जे आंदोलन झाले त्यावेळी केंद्रात आणि राज्यात काँग्रेसचे सरकार होते. पंतप्रधान डॉ मनमोहन सिंह यांच्यासारखा सज्जन आणि नम्र अश्या व्यक्तीशी अण्णांनी तेव्हा सामना केला आणि तत्कालीन केंद्रीय मंत्री आणि माजी मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख यांनी यशस्वी खेळी करत समेट घडवून आणला पण दुर्दैवाने त्या आंदोलनानंतर प्रत्यक्षात कार्यवाही झालीच नाही. नवीन निवडणूक निकालात या सर्व आंदोलनाचा फटका काँग्रेस पक्षाला बसला आणि संपूर्ण देशात काँग्रेस पक्षाची प्रतिमा मलिन झाली त्याचा अप्रत्यक्ष लाभ नरेंद्र मोदी आणि भाजपा व मित्र पक्षाला झाला. निवडणूक संपताच अण्णांनी पत्रव्यवहार सुरु करत नवीन सरकारला त्या बाबींची आठवण करुन दिली ज्यास विरोधी पक्षात असताना पाठिंबा देत काँग्रेस विरोधात वातावरण बनविण्यात यश मिळवित सत्ता काबिज केली. अण्णांनी प्रयत्न केले आणि जे मुद्दे देशांच्या हिताचे होते ज्यामुळे भ्रष्टाचार, कुशासन आणि सरकारी यंत्रणेची बदमाशी यावर अंकुश बसत जनहित साध्य होत होते. पण दुर्दैव म्हणावे की सत्तेची मग्रुरी, नेहमीच सर्वांना पत्राचे उत्तर देणारे पंतप्रधान असो किंवा त्यांचे कार्यालय असो, कोणीच पुढे येण्यास तयार नव्हते ना अण्णांना एक ओळींचे पत्र दिले नाही. यामुळे आंदोलन जरी अण्णांच्या नेतृत्वाखाली केले गेले पण ते लादण्याचा प्रयत्न स्वतः सरकारने आणि पंतप्रधान असलेले नरेंद्र मोदी यांनी केला,असे म्हणणे चूक ठरणार नाही.

दिल्लीला अण्णांच्या आंदोलनात भाग घेतला तेव्हा सर्वजण यात दिल्लीकर, दिल्ली बाहेरुन आलेले कार्यकर्ते, दिल्ली पोलीस आणि प्रसार माध्यमे यांचा समावेश होता. सर्वच गर्दीपासून अण्णांचा टीआरपी नसल्याची चर्चा करत होती. पण अण्णांचे वय आणि दृढनिश्चय यावर सर्वांचे दुर्लक्ष होते. वयाच्या ८१ व्या वर्षीही तोच जोम आणि उमेद उराशी बाळगत अण्णांनी सर्वांना एक नवीन संदेश दिला की गर्दी आणि टीआरपीने आंदोलन यशस्वी होतात असे नाही पण जिद्द आणि मागण्या योग्य असल्या तर कोणतेही सरकार असो, त्यास झुकावे लागते. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांस महाराष्ट्रातून स्वतः यावे लागले आणि केंद्रीय सरकार सोबत सल्लामसलत करत अण्णांच्या मागण्या मान्य करत आंदोलन संपुष्टात आणले. या आंदोलनात २ बाबी जाणवल्या की आंदोलन करताना गृह क्षेत्र असल्यास लोकांचा ओढा अधिक असतो तेच जेव्हा आपण दुसऱ्या राज्यात असतो तेव्हा ओढा असतोच पण सर्वांना येणे शक्य नसते. अश्या आंदोलनात नियोजन मुख्य असते ज्यामुळे गर्दी सोबत रोजच्या दिनचर्येत आवश्यक बाबींची पूर्तता होते. यावेळी या २ बाबीमुळे अण्णांचे आंदोलन प्रचंड गर्दी खेचून आणण्यात जरी अपयशी ठरले असले तरी जी मंडळी तळ ठोकून बसली होती त्यांचाच दृढशक्तीमुळे अण्णांला हुरुप मिळाला आणि 'करो या मरो' या स्थितीला जाऊन पोहचले.

केंद्र सरकार प्रथम गाफील होते आणि दिल्ली पोलिसांच्या भरोवशावर आंदोलन एका दिवसांत संपेल, अश्या आशावादात होते  जेव्हा आशावाद संपला तेव्हा गिरीष महाजन या मंत्र्यांस पाठविले जे अण्णांच्या जवळीक असण्याचा दावा करत असं. पण अण्णा मानले नाही ना महाजन यांच्या तोडग्यावर मोदी सरकार सहमत झाले. अण्णांची तब्येत जशी बिघडत चालली तशी यंत्रणा हलली आणि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांस दिल्लीला यावे लागले. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांच्या मध्यस्थीने आंदोलन संपले असले तरी मागण्या अजून पूर्ण झाल्या नाहीत. यानंतर विरोधी पक्ष आणि त्यांचे बालिश नेते म्हणू लागले आहेत की मोदी सरकारने अण्णांला गाजर दिले आणि गप्प बसविले. पण वस्तुस्थिती ही आहे की जो मसुदा बनविला गेला आहेत त्यात विस्तृत मागणी आणि सरकारची भूमिका यात  

चांगली सुस्पष्टता आहे. अण्णा यांस गाजर दिले असा कुप्रचार करणारे महोदयांस मसुदा आणि त्यातील मागण्यांची माहितीच नाही. समजा हे सरकार संवेदनशील आणि पारदर्शक असले असते तर अण्णांला आंदोलनाची गरज भासलीच नसती, या सत्यास कोणीही स्वीकारत नाही आणि एका प्रामाणिक वयोवृद्ध व्यक्तीस नाव ठेवून मोकळे होत आहे.

आंदोलन हे 6 महिन्यांसाठी दिलेल्या आश्वासनावर थांबले आहे आणि शत प्रतिशत प्रत्यक्षात साकार झाले नाही तर अण्णा पुन्हा एकदा आंदोलनासाठी सज्ज होतील. यावेळेच्या आंदोलनात आलेला अनुभव लक्षात घेता भविष्यात होणाऱ्या आंदोलनात स्वतः अण्णा हजारे गाफिल राहणार नाहीत, हे निश्चित आहे. मोदी सरकार अण्णासमोर तूर्तास शरणागत झाले असले तरी ज्या अण्णा आणि त्यांच्या कोअर टीमला त्या मागण्याचा पाठपुरावा करण्याचे आवाहन आहे.

Friday, 30 March 2018

सीएम के आदेशानुसार श्रीदेवी की अंत्यविधि राजकीय सम्मान में

दुबई में अभिनेत्री अम्मा यंगर अय्यपन उर्फ श्रीदेवी की हुई मौत के बाद सरकारी सम्मान में उनकी अंत्यविधि की गई। श्रीदेवी पद्मश्री होने से सरकारी सम्मान में अंत्यविधि होने की चर्चा थी जबकि असल में सरकारी सम्मान में किन- किन व्यक्तियों की अंत्यविधि करनी हैं, इसका अधिकार मुख्यमंत्री महोदय को होने की जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को महाराष्ट्र सरकार ने दी हैं। मुख्यमंत्री के आदेशानुसार श्रीदेवी का सरकारी सम्मान में अंत्यविधि करने की बात स्पष्ट हुई हैं। 22 जून 2012 से 26 मार्च 2018 तक महाराष्ट्र में 40 व्यक्तियों पर इसीतरह सरकारी सम्मान में अंत्यविधि हुई हैं। 

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने महाराष्ट्र सरकार के प्रोटोकॉल विभाग से सरकारी सम्मान में श्रीदेवी की हुई अंत्यविधि और इसे लेकर निर्णय लेने का अधिकार जिसे हैं उसकी जानकारी मांगी थी। मुख्यमंत्री जिस सामान्य प्रशासन विभाग के मुखिया हैं उसके अंतर्गत आनेवाले प्रोटोकॉल विभाग ने अनिल गलगली को जानकारी दी कि सरकारी सम्मान में किन- किन व्यक्तियों पर अंत्यविधि करना हैं, इस मामले में निर्णय लेने का अधिकार मुख्यमंत्री महोदय को हैं। आहेत. दिवंगत अभिनेत्री अम्मा यंगर अय्यपन उर्फ श्रीदेवी की अंत्यविधि सरकारी सम्मान में करने के लिए दिनांक 25 फरवरी 2018 को मुख्यमंत्री सचिवालय से मौखिक निर्देश प्राप्त हुआ और दिनांक 26 फरवरी 2018 के सरकारी पत्रानुसार कार्रवाई करने के लिए मुंबई उपनगर जिलाधिकारी और मुंबई पुलिस आयुक्त को सूचना जारी की गई। इस सवाल को पूंछने के प्रयोजन को लेकर अनिल गलगली से सवाल दागा गया तो गलगली ने बताया कि  ' श्रीदेवी की मौत के बाद जब सरकारी सम्मान में उनकी अंत्यविधि की गई तब बताया जा रहा था कि जिन्हें पद्मश्री दी गई हैं ऐसे व्यक्तियों का सरकारी सम्मान में अंत्यविधि की जाती हैं। इस जानकारी की पुष्टी करने के लिए जानकारी मांगी गई तो सिर्फ पद्मश्री होने से ही सरकारी सम्मान में अंत्यविधि नहीं होती हैं इस बात की पुष्टी हुए उल्टे यह अधिकार मुख्यमंत्री को होने की नई जानकारी सामने आई हैं। 

दिनांक 22 जून, 2012 से दिनांक 26 मार्च, 2018 तक कुल  40 मान्यवरों की अंत्यविधि राजकीय सम्मान में की गई थी इनमें श्रीदेवी के अलावा श्रीमती मृणाल गोरे, पूर्व सांसद  (17/07/2012), विलासराव देशमुख, पूर्व केंद्रिय मंत्री व 

पूर्व मुख्यमंत्री ( 14/08/2012), प्रभाकर कुंटे, पूर्व मंत्री (15/08/2012), कृष्णराव देसाई ऊर्फ बाबासाहेब कुपेकर, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष (26/09/2012), शंकरराव देवराम काळे, पूर्व राज्यमंत्री (05/11/2012),  बाळासाहेब ठाकरे, शिवसेना प्रमुख (17/11/2012), लक्ष्मण रंगनाथ हातणकर, माजी राज्यमंत्री (22/11/2012), शंकरराव जगताप, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष (10/12/2012 ), दिनकर बाळू पाटील, पूर्व सांसद  (24/06/2013), सहकार महर्षी छत्रपाल उर्फ बाबासाहेब आनंदराव केदार, पूर्व राज्यमंत्री (02/08/2013), रजनी रॉय, पूर्व नायब राज्यपाल, पाँडेचरी (29/08/2013), सत्यनारायण गोएंका,  विपश्यना गुरुजी (29/09/2013), मोहन धारिया, पूर्व केंद्रीय मंत्री (14/10/2013), सुभाष झनक, पूर्व मंत्री (28/10/2013), सय्यदना मोहम्मद बुऱ्हानुद्दीन, बोहरा धर्मगुरु ( 17/01/2014), दत्तात्रय नारायण पाटील,पूर्व विधायक (28/02/2014) , अ.र.अंतुले, केंद्रिय मंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री (02/12/2014), आर.आर. पाटील, पूर्व उप मुख्यमंत्री (16/02/2015 ), गोविंदराव वामनराव आदिक, पूर्व मंत्री (07/06/2015 ), डॉ. सय्यद अहमद, राज्यपाल, मणिपूर ( 27/09/2015) , रामभाऊ कापसे, अंदमान व निकोबार के पूर्व नायब राज्यपाल ( 29/09/2015),  मदन विश्वनाथ पाटील, पूर्व कॅबिनेट मंत्री (16/10/2015), प्रमोदबाबू भाऊरावजी शेंडे, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष (14/11/2015), शरद जोशी, पूर्व सांसद व शेतकरी संघटनेचे संस्थापक, अध्यक्ष (12/12/2015), मंगेश पाडगावकर, वरिष्ठ कवीवर्य (30/12/2015), डॉ.दौलतराव आहेर, पूर्व आरोग्यमंत्री (19/01/2016), डॉ. भवरलाल जैन, जैन इरिगेशन समूह के संस्थापक (25/02/2016),  निहाल मौलवी मो. उस्मान अहमद ,पूर्व मंत्री (29/02/2016), निवृत्त नामदेव ऊर्फ बापूसाहेब थिटे, पूर्व सांसद एवं राज्य गृह मंत्री (19/03/2016),  बाबूराव महादेव भारस्कर, पूर्व समाजकल्याण मंत्री (01/05/2016), मनोहर ऊर्फ बाबासाहेब गोपले, मातंग समाज के नेता (21/08/2016), श्रीमती जयवंतीबेन मेहता, पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री (07/11/2016), मधुकरराव किंमतकर, पूर्व अर्थ राज्यमंत्री (03/01/2018), वसंत डावखरे, विधानपरिषद के पूर्व सभापती (05/01/2018),  प्रा. नारायण सदाशिव फरांदे, विधानपरिषद के पूर्व सभापती(16/01/2018), ॲड. चिंतामण वनगा, लोकसभा सदस्य (30/01/2018), मुझफ्फर हुसेन, वरिष्ठ पत्रकार (13/02/2018), डॉ. बी. के. गोयल, पद्मविभूषण (20/02/2018) और डॉ. पतंगराव कदम, पूर्व मंत्री (09/03/2018) के नामों का शुमार हैं।