Monday, 16 February 2026

गोवंश आधारित काव्य प्रतियोगिता का फ़ाइनल सम्पन्न

गोवंश आधारित काव्य प्रतियोगिता का फ़ाइनल सम्पन्न

गुरु नानक खालसा महाविद्यालय, उमा कल्याण ट्रस्ट तथा भारतीय गोवंश रक्षण-संवर्द्धन परिषद के संयुक्त तत्वावधान में गोवंश आधारित प्रतियोगिताओं की श्रृंखला के अंतर्गत स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों की काव्य प्रतियोगिता का फ़ाइनल गुरु नानक खालसा कॉलेज में संपन्न हुआ।

इस अवसर पर वरिष्ठ कवयित्री प्रमिला भारती मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं और प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रत्ना शर्मा ने आगंतुकों का स्वागत किया। उपप्राचार्य एवं हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मृगेन्द्र राय ने प्रतियोगिता का संचालन किया तथा प्राध्यापिका सरिता शर्मा ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

आयोजक संस्था उमा कल्याण ट्रस्ट की ओर से राजीव नौटियाल, अशोक हमराही और राजुल अशोक ने गोवंश रक्षण एवं संरक्षण हेतु ट्रस्ट द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी तथा युवाओं के लिए आयोजित प्रतियोगिताओं के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने उमा कल्याण ट्रस्ट के प्रयासों की सराहना की।

काव्य प्रतियोगिता के फ़ाइनल में मुंबई एवं आसपास के 15 महाविद्यालयों से 42 विद्यार्थियों ने भाग लिया। परिणामस्वरूप

प्रथम स्थान: मौसम यादव (रामनिरंजन झुनझुनवाला कॉलेज)

द्वितीय स्थान: पवनजीत गुप्ता (भवंस कॉलेज)

तृतीय स्थान: तनु सिंह (राम नारायण रुइया कॉलेज)


इसके अतिरिक्त महिमा मिश्रा (कीर्ति कॉलेज) और ऐश्वर्या शुक्ला (एल. आर. तिवारी डिग्री कॉलेज) को प्रोत्साहन पुरस्कार देने की घोषणा की गई। विजेताओं को पुरस्कार वितरण हेतु शीघ्र ही एक विशेष समारोह आयोजित किया जाएगा।

प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डॉ. आर. एस. दुबे, डॉ. बी. पी. सिंह तथा डॉ. उषा मिश्रा शामिल रहे।

उल्लेखनीय है कि युवाओं को भारतीय देशी गोवंश की उपयोगिता, वैज्ञानिक महत्व, भारतीय संस्कृति, ग्रामीण जीवन तथा पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के उद्देश्य से विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय स्तर पर काव्य, निबंध, भाषण एवं चित्रकला प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। प्रथम चरण में ये प्रतियोगिताएँ मुंबई एवं आसपास के क्षेत्रों में आयोजित की जा रही हैं तथा भविष्य में अन्य स्थानों पर भी इनका विस्तार किया जाएगा। सभी प्रतियोगिताओं के विषय गोवंश आधारित एवं भाषा हिंदी रखी गई है।

प्रतियोगिताओं के आयोजन में सहयोगी संस्थान के रूप में मुंबई विश्वविद्यालय हिंदी विभाग तथा विशेष सहयोगी के रूप में हिन्द सेवा परिषद, पब्लिक हाई स्कूल, गुरु नानक खालसा कॉलेज और रामनिरंजन झुनझुनवाला कॉलेज सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

Monday, 9 February 2026

Annual Sports Meet 2.0 Celebrated with Grandeur by Ajitha Nair Educational Trust, Kurla

Annual Sports Meet 2.0 Celebrated with Grandeur by Ajitha Nair Educational Trust, Kurla


Kurla witnessed an atmosphere of enthusiasm, energy, and celebration as Ajitha Nair Educational Trust successfully organised its Annual Sports Meet 2.0 on 7th February 2026 at Kohinoor Turf.


The mega sporting event brought together students, parents, educators, and dignitaries in a vibrant celebration of sportsmanship and holistic education. Over 500 students from Nair International Pre-School and Roshan English High School participated enthusiastically, while more than 400 parents cheered wholeheartedly, transforming the venue into a lively arena of encouragement and excitement.

A wide range of fun-filled and competitive races were organised for different age groups, including Bunny Race, Picnic Race, Three-Leg Race, Cone Pyramid Race, Obstacle Race, and several other engaging activities. These events ensured active participation, enjoyment, and healthy competition among students.

Adding to the excitement, a lucky draw for parents was organised, featuring multiple consolation prizes along with three major gifts, which received an enthusiastic response from the audience. 

The Sports Meet commenced with the lighting of the ceremonial lamp by Anil Galgali Ji, Senior Journalist and National-level RTI Activist, along with Journalist Shivdinesh Sharma Ji and Ajitha Nair Ji (Amma), marking an auspicious beginning to the event.

The event was graced by Shivsena MLA Dilip (Mama) Lande as the Chief Guest. The programme was further dignified by the presence of eminent guests including IRPS Rishikumar Shukla (RPF), ACP Sudhir Hirdekar, Congress Corporator Arshad Azmi, Trustee Nilesh Kore, along with several senior officials from the social sector, police force, and media fraternity.

All dignitaries actively encouraged the students and felicitated the winners with medals, certificates, and trophies, recognising their efforts and achievements.

The programme was smoothly and confidently anchored by Ms Safa Sajid Salmani, an alumna of the institute, whose engaging presentation added charm to the proceedings.

Teachers played a pivotal role in the success of the Sports Meet.The Primary Section was efficiently headed by Mr Sashant Shivdasan Nair, Headmaster and Trustee of the Trust. The sports activities were meticulously coordinated by PT Teacher Ms Neeta Virkar, whose dedication and expertise were evident throughout the event. The Secondary Section was guided by Head Teacher Ms Shariya Khan along with her committed team. The Pre-Primary Section was managed under the leadership of Ms Misbah Sayed (Kurla Branch) and Ms Shama Shaikh (Jarimari Branch).

The programme concluded with a heartfelt Vote of Thanks delivered by Rahul Ramchandran Nair, President of Ajitha Nair Educational Trust, who expressed sincere gratitude to all guests, parents, teachers, staff members, and students for making Annual Sports Meet 2.0 a grand success.
The event truly reflected the Trust’s vision of nurturing young minds through discipline, teamwork, and physical fitness, leaving behind cherished memories of joy, motivation, and inspiration for everyone present.

Thursday, 5 February 2026

हमारे समय से संवाद करते संजय !

हमारे समय से संवाद करते संजय !

( 7 फ़रवरी 2026 जन्मदिन विशेष)

वाणी और वाणी के महात्म्य को समझना है तो प्रो.संजय द्विवेदी की संगति कीजिए। मौन को पढ़ना सीखना हो, स्निग्धता की तपस्या को जानना हो तो उनके व्यक्तित्व को जानिए, पहचानिए। सच कहूँ, विरले होते हैं वे लोग, जिन्हें चंदन और पारसमणि का स्पर्श हुआ हो जैसा संजय जी भाई साहब को हुआ है। हम बहुत भाग्यशाली हैं कि हमने स्वयं को आधुनिक पत्रकारिता के शुभ्र ललाट की संगति रूपी चंदन-पारसमणि की छुअन से परिष्कृत किया है। 

     समय के साथ रहना, समय के साथ चलना और अपने समय से संवाद करना किसी को आता है तो वे मीडिया गुरु, पत्रकारों के आदर्श भारतीय जनसंचार संस्थान के पूर्व महानिदेशक प्रो.(डा.) संजय द्विवेदी हैं। वे कहते हैं भाषाएँ और माताएँ अपने बच्चों से ही सम्मान पाती हैं। तो आपने माँ, मातृभूमि और मातृभाषा को प्रमुख स्थान देकर समाज तथा मीडिया में अपना उच्च स्थान बनाया है। आपने सदैव स्वयं को पत्रकारिता का विद्यार्थी मानकर ही अपने समय से संवाद किया है और आज भी कर रहे हैं। आपका सरल व्यक्तित्व, चंद्रमा-से ओजस्वी चेहरे पर अठखेलियाँ करती चंचल मंद मुस्कुराहट, उन्नत भाल पर संवाद संग घहराती-लहराती-अठखेलियाँ करती विचारों की रेखाएँ, मुखारबिंदु से प्रवाहित परमहंसी धीर-गंभीर वाणी चंदन की भाँति हर ताप-समस्या का त्वरित समाधान ऐसे उपस्थित करती है जैसे कोई नदी अपने जल से बिना लाग-लपेट सबको अभिसिंचित करती बहती रहती है। 

    ‘‘सुबरन को ढूँढत फिरै, कवि, लेखी अरु गौर’’ की भाँति आप सुशब्द-संचय में विश्वास करते हैं मगर भौतिक संपदा को विराग-दृष्टि से देखते हैं। वहीं ज्ञान को वैसे ही बाँटते चलते हैं जैसे बादल अपनी वृष्टि से सबको हरा-भरा कर देता है। आप निरंतर साहित्य ही नहीं अनेकानेक विषयों के पठन-पाठन में तल्लीन रहते हुए लेखन, संपादन, शिक्षण, पर्यटन, मित्रता-वार्ता सब में व्यस्त रहते हैं। जहाँ आपको ‘मीडिया विमर्श’ बहुत पसंद है वहीं विद्यार्थियों, विद्वानों संग विविध विषयों पर जनसाधारण के कल्याणार्थ चर्चा तथा फिल्म देखना भी आपको पसंद है। लेखन की कला, विचारों को सहेजकर उन्हें श्रेष्ठ रूप देकर पाठक को बाँधने की कला आपको अपने पूजनीय पिताश्री परमात्मानाथ द्विवेदी जी से विरासत में मिली है जो स्वयंसिद्ध एक श्रेष्ठ शिक्षक-लेखक हैं। 

     जैसा हमारा समाज होता है, वैसे ही हमारे समाज के सभी वर्गों के लोग होते हैं। उसी तरह संसार का मीडिया भी है। आपका आदर्श है - त्याग, हर उस भाव से जो बाँधता है, संकीर्ण करता है। ऐसा इसलिए कि आजकल बंधन मानव के अधोपतन का कारण पहले बनता है, उसके परिमार्जन, परिष्कार का बाद में। अतः आपका भाव सदैव शुद्धिकरण का रहता है। आपके संबोधन मनसा-वाचा-कर्मणा में एकनिष्ठ समन्वय के द्वारा पत्रकार-समाज ही नहीं सामान्य जन को भी परिष्कृत करने से पूर्ण रहते हैं। हम सभी को भी यही प्रयास करना चाहिए कि विविध आडंबरो से परे रहकर कर्तव्य का समुचित निर्वहन करें। आपका मानना है कि “मीडिया बहुत छोटी चीज है और समाज बहुत बड़ी चीज है।” मीडिया समाज का एक छोटा-सा हिस्सा है। मीडिया ताकतवर हो सकता है, लेकिन समाज से ताकतवर नहीं हो सकता। आप याद दिलाते रहते हैं कि मीडिया अच्छा हो जाएगा और समाज बुरा रहेगा, ऐसा नहीं हो सकता। समाज अच्छा होगा, तो समाज जीवन के सभी क्षेत्र अच्छे होंगे। जो काम आपको मिला, आपने सत्यनिष्ठा से, प्रामाणिकता से और अपना सब कुछ समर्पित कर उसे पूरा किया। कभी भी ये नहीं सोचा कि ये काम अच्छा है, बुरा है, छोटा है या बड़ा है। साथ ही, कभी भी किसी काम की, किसी दूसरे के काम से तुलना भी नहीं की। किसी भी काम में हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास किया। यही आपका मूल मंत्र है।

      आपके आदर्श वाक्यों या जीवन की समस्त ऊर्जा से यदि क्षीर ग्रहण करना चाहें तो आपका यह वाक्य सदैव मार्गदर्शक के रूप में अपने पाठकों-श्रोताओं को पथ का दीप बनकर आगे बढ़ाता रहेगा- “मेरे पास यात्राएँ हैं, कर्म हैं और साथ हैं उनसे उपजी सफलताएँ।” कर्मों में कुशाग्रता, सकारात्मक व्यवहार, मन में निश्छलता, हृदय में एकाग्रता, विनम्रता, स्पष्टवादिता और हँसमुख स्वभाव सहित नीति-निपुणता तमाम आपकी स्वाभाविक विशेषताएँ हैं और इन्हीं गुणों के कारण आपके संपर्क में आने वाला हर व्यक्ति आपका प्रशंसक बन जाता है। सच कहा जाए तो पत्रकारिता की व्यापक सृष्टि में आप ‘अजातशत्रु‘ हैं । आपका व्यक्तित्व सत्यनिष्ठा, उत्तरदायित्व और भारतीय विचारधारा का विलक्षण समन्वय है जिसमें विनम्रता-कोमलता का भाव वैसे ही दृश्यमान होता है जैसे कस्तूरी तथा उसकी सुगंध। वह मृग जीवन भर सुगंध खोजता है लेकिन आप खोजते नहीं बल्कि स्वयं अपने ज्ञान का सौरभ सभी पर बड़े प्यार से उँड़ेल देते हैं। वह अपनापन, वह स्नेहिल संग, वह कंधे पर थपकी सब कुछ इतना सहज कि बड़े से बड़ा भी नतमस्तक हुए बिना न रहे। 

     भारतीय जन संचार संस्थान के स्थापना दिवस के उपलक्ष में दिए एक इंटरव्यू में समकालीन पत्रकारिता के सामने मौजूद चुनौतियों के बारे में द्विवेदी जी कहते हैं- “हमें सवाल खड़े करने वाला ही नहीं बनना है, इस देश के संकटों को हल करने वाला पत्रकार भी बनना है। मीडिया का उद्देश्य अंततः लोकमंगल है। यही साहित्य व अन्य प्रदर्शनकारी कलाओं का उद्देश्य भी है। इसके साथ देश की समझ आवश्यक तत्व है। देश के इतिहास, भूगोल, संस्कृति, परंपरा, आर्थिक सामाजिक चिंताओं, संविधान की मूलभूत चिंताओं की गहरी समझ हमारी पत्रकारिता को प्रामाणिक बनाती है। समाज आर्थिक-सामाजिक, धार्मिक रूप से ही नहीं वैचारिक न्याय से युक्त बने। यही न्यायपूर्ण समरस समाज हम सबका साझा स्वप्न है। पत्रकारिता अपने इस कठिन दायित्वबोध से अलग नहीं हो सकती। इसमें शक नहीं कि आज मीडिया एजेंडा केन्द्रित पत्रकारिता और वस्तुनिष्ठ और निरपेक्ष पत्रकारिता के बीच बंट गया है। यह स्थिति स्वयं मीडिया की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाती है।”

      वस्तुतः संजय जी वर्तमान के लिए वही कार्य कर रहे हैं जो हमारे ऋषियों ने किया था। उन्होंने युगबोध का कार्य किया और आप भी अपनी यात्राओं, संगोष्ठियों द्वारा राष्ट् बोध जाग्रत करने का पुनीत कर्म कर रहे हैं। आपके जन्म दिवस पर यही सच्ची कामना होगी कि विश्व शुद्धिकरण, अंतःकरण में मानव प्रेम की ज्योत जगाने की यह करुणामय यात्रा सभी को अभिसिंचित करती अनन्तकाल तक प्रवाहित होती रहे। 

पवन कुमार पाण्डेय (लेखक अखिल भारतीय साहित्य परिषद जोधपुर प्रांत- राजस्थान के प्रचार प्रमुख हैं।)
आदर्श भारतीय जनसंचार संस्थान के पूर्व महानिदेशक प्रो.(डा.) संजय द्विवेदी 

लेखक पवन कुमार पाण्डेय

Tuesday, 3 February 2026

महापौर निवडणुकीतील विलंब : मुंबईकरांच्या जनादेशाची कसोटी

महापौर निवडणुकीतील विलंब : मुंबईकरांच्या जनादेशाची कसोटी


मुंबई महानगरपालिकेच्या निवडणुका 15 जानेवारी 2026 रोजी पार पडल्या आणि 16 जानेवारीला निकाल जाहीर झाले. लोकशाही प्रक्रियेचा पहिला टप्पा पूर्ण झाला. मात्र लोकशाहीचा दुसरा आणि अधिक महत्त्वाचा टप्पा, सत्तेचे त्वरित हस्तांतरण इथेच संथ झाला. महापौर निवडणूक 11 फेब्रुवारी 2026 रोजी ठेवण्यात आली. निकालानंतर तब्बल 26 दिवसांचा विलंब. हा विलंब केवळ प्रशासकीय योगायोग आहे, की सत्तेच्या सोयीसाठी केलेली आखणी, हा प्रश्न आज संपूर्ण शहर विचारत आहे.


मुंबई महानगरपालिका अधिनियम, 1888 मध्ये महापौर निवडणूक किती दिवसांत घ्यावी, याची ठोस मर्यादा नाही. मात्र पहिली सर्वसाधारण सभा अनावश्यक विलंब न करता घेणे बंधनकारक आहे. कायद्यात आकडा नसला, तरी लोकशाहीचा आत्मा स्पष्ट आहे की जनतेचा निर्णय लांबवू नका. कायद्याच्या पळवाटा शोधणे हे प्रशासनाचे कर्तव्य नसून, लोकशाहीचे रक्षण करणे ही त्याची जबाबदारी आहे.


राज्यातील इतर महानगरपालिका आणि नगरपालिकांमध्ये निकालानंतर 10 ते 15 दिवसांत महापौर निवडणुका पार पडल्या. तिथेही कायदे तेच, नियम तेच. मग मुंबईसाठी वेगळा वेळापत्रक का? उत्तर स्पष्ट आहे. मुंबईत लोकशाहीपेक्षा राजकीय गणिते अधिक गुंतागुंतीची आहेत. अधिकारांशिवाय नगरसेवक, अधिकारात प्रशासक.


निवडून आलेले नगरसेवक निर्णयक्षम होत नाहीत, तर प्रशासकीय यंत्रणेला अधिक काळ स्वायत्तता मिळते. हा काळ कोणाच्या फायद्याचा असतो? निश्चितच लोकांचा नाही. लोकांनी निवडून दिलेल्या प्रतिनिधींना अधिकार देण्यात विलंब करणे म्हणजे अप्रत्यक्षपणे लोकशाहीला बाजूला सारणे होय.


“मोठी महानगरपालिका आहे”, “सुरक्षेचा प्रश्न आहे”, “तयारीस वेळ लागतो” ही कारणे नेहमीच पुढे केली जातात. पण प्रश्न असा आहे की हीच कारणे इतर मोठ्या शहरांत का अडथळा ठरत नाहीत? प्रशासन स्वतंत्रपणे निर्णय घेत आहे की सत्ताधाऱ्यांच्या सोयीप्रमाणे वेळ ठरवत आहे, याबाबत शंका निर्माण होते.


महिला महापौर होणार, ही बाब स्वागतार्ह आहे. पण निर्णय प्रक्रियाच वेळेत होत नसेल, तर अशा घोषणांचे लोकशाही मूल्य किती? प्रतिनिधित्व हे केवळ नावापुरते नव्हे, तर वेळेत अधिकार देण्यातून सिद्ध होते. 11 फेब्रुवारी 2026 ही तारीख कदाचित कायदेशीर चौकटीत बसते. पण लोकशाही फक्त कायद्याने चालत नाही; ती नैतिकता, पारदर्शकता आणि वेळेच्या भानावर चालते. जे कायदेशीर आहे तेच नेहमी योग्य असेलच, असे नाही. हा प्रश्न एका निवडणुकीपुरता मर्यादित नाही. भविष्यात अशाच प्रकारे 40–50 दिवसांपर्यंत विलंब केला जाणार नाही, याची खात्री कोण देणार? म्हणूनच महापौर निवडणुकीसाठी कायद्यात स्पष्ट कालमर्यादा (Time-limit) ठरवणे अत्यावश्यक आहे. अन्यथा लोकशाही ही कागदावरच उरेल.

मुंबई ही देशाची आर्थिक राजधानी आहे. तिच्या लोकशाहीचा वेग संथ असेल, तर संदेश चुकीचा जातो. मुंबईकरांनी आपला कौल दिला आहे. आता प्रशासन आणि सत्ताधाऱ्यांची जबाबदारी आहे की त्यांनी तो कौल वेळेत, प्रामाणिकपणे आणि पारदर्शकपणे अंमलात आणावा. लोकशाही ही सोयीप्रमाणे नव्हे, तर जनतेच्या वेळेवर चालली पाहिजे.

अनिल गलगली 
माहिती अधिकार कार्यकर्ते

महापौर चुनाव में देरी : मुंबईकरों के जनादेश की परीक्षा

महापौर चुनाव में देरी : मुंबईकरों के जनादेश की परीक्षा


मुंबई महानगरपालिका के चुनाव 15 जनवरी 2026 को संपन्न हुए और 16 जनवरी को परिणाम घोषित कर दिए गए। लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पहला चरण पूरा हो चुका था। लेकिन लोकतंत्र का दूसरा और अधिक महत्वपूर्ण चरण था सत्ता का त्वरित हस्तांतरण जो यहीं आकर धीमा पड़ गया। महापौर का चुनाव 11 फरवरी 2026 को तय किया गया, यानी चुनाव परिणामों के बाद पूरे 26 दिनों की देरी। यह देरी केवल एक प्रशासनिक संयोग है या सत्ता की सुविधा के लिए की गई रणनीति, यह सवाल आज पूरे शहर में गूंज रहा है।


मुंबई महानगरपालिका अधिनियम, 1888 में यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया है कि महापौर का चुनाव कितने दिनों के भीतर होना चाहिए। हालांकि, यह अनिवार्य है कि पहली आम सभा अनावश्यक विलंब के बिना आयोजित की जाए। भले ही कानून में दिनों की स्पष्ट संख्या न हो, लेकिन लोकतंत्र की आत्मा साफ कहती है कि जनता के फैसले को टालना नहीं चाहिए। कानून की खामियों का लाभ उठाना प्रशासन का कर्तव्य नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा करना उसकी जिम्मेदारी है।


राज्य की अन्य महानगरपालिकाओं और नगरपालिकाओं में चुनाव परिणामों के 10 से 15 दिनों के भीतर महापौर के चुनाव संपन्न हो चुके हैं। वहां भी कानून वही है, नियम वही हैं। फिर मुंबई के लिए अलग समय-सारणी क्यों? उत्तर स्पष्ट है कि मुंबई में लोकतंत्र से अधिक राजनीतिक गणित जटिल हैं। परिणामस्वरूप, चुने हुए नगरसेवक अधिकारविहीन रहते हैं और प्रशासक अधिक समय तक सत्ता में बने रहते हैं। जब निर्वाचित प्रतिनिधियों को निर्णय लेने का अधिकार नहीं मिलता और प्रशासनिक तंत्र को अतिरिक्त स्वायत्तता मिलती है, तो सवाल उठता है कि इसका लाभ किसे होता है? निश्चित रूप से जनता को नहीं। जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को अधिकार सौंपने में देरी करना, अप्रत्यक्ष रूप से लोकतंत्र को दरकिनार करने जैसा है।


“महानगर बड़ा है”, “सुरक्षा का मुद्दा है”, “तैयारियों में समय लगता है”  ये तर्क बार-बार दिए जाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि यही कारण अन्य बड़े शहरों में बाधा क्यों नहीं बनते? क्या प्रशासन स्वतंत्र रूप से निर्णय ले रहा है या फिर सत्ताधारियों की सुविधा के अनुसार समय तय किया जा रहा है? इस पर संदेह होना स्वाभाविक है। महिला महापौर बनने की संभावना स्वागतयोग्य है। लेकिन यदि निर्णय प्रक्रिया ही समय पर न हो, तो ऐसी घोषणाओं का लोकतांत्रिक मूल्य क्या रह जाता है? प्रतिनिधित्व केवल नाम का नहीं, बल्कि समय पर अधिकार देने से सिद्ध होता है। 11 फरवरी 2026 की तारीख भले ही कानूनी दायरे में हो, लेकिन लोकतंत्र केवल कानून से नहीं चलता; वह नैतिकता, पारदर्शिता और समयबद्धता पर आधारित होता है। जो कानूनी है, वही हमेशा न्यायसंगत हो ऐसा आवश्यक नहीं।

यह मुद्दा केवल एक चुनाव तक सीमित नहीं है। भविष्य में क्या इसी तरह 40–50 दिनों तक देरी नहीं की जाएगी, इसकी गारंटी कौन देगा? इसलिए महापौर चुनाव के लिए कानून में स्पष्ट समय-सीमा (Time-limit) तय करना अत्यंत आवश्यक है। अन्यथा लोकतंत्र केवल कागज़ों तक सीमित रह जाएगा। मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है। यदि उसकी लोकतांत्रिक प्रक्रिया ही धीमी होगी, तो संदेश गलत जाएगा। मुंबईकरों ने अपना जनादेश दे दिया है। अब प्रशासन और सत्ताधारियों की जिम्मेदारी है कि वे इस जनादेश को समय पर, ईमानदारी से और पारदर्शी तरीके से लागू करें। लोकतंत्र सुविधा के अनुसार नहीं, बल्कि जनता के समय पर चलना चाहिए।


अनिल गलगली
सूचना अधिकार कार्यकर्ता

Monday, 2 February 2026

वीर सावरकर के जीवन और विचारधारा पर आधारित पुस्तक का मुंबई में विमोचन

वीर सावरकर के जीवन और विचारधारा पर आधारित पुस्तक का मुंबई में विमोचन

वीर सावरकर के जीवन, विचारधारा और राष्ट्रवादी दर्शन पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण पुस्तक का विमोचन मुंबई के विलेपार्ले पूर्व  में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में किया गया। इस अवसर पर देश के प्रख्यात विचारक, विद्वान, सामाजिक कार्यकर्ता और जागरूक नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विश्व हिंदू फाउंडेशन के संस्थापक एवं वैश्विक अध्यक्ष तथा प्रसिद्ध विचारक स्वामी विज्ञानंद सरस्वती और महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

इस अवसर पर लेखिका डॉ. वैदेही तमन द्वारा लिखित वीर सावरकर पर आधारित एक ही पुस्तक का विमोचन किया गया, जिसे पाठकों की व्यापक पहुँच के उद्देश्य से तीन भाषाओं—अंग्रेज़ी, हिंदी और मराठी—में प्रकाशित किया गया है।

अंग्रेज़ी में Reclaiming Bharat, हिंदी में वीर सावरकर की क्रांतिकारी यात्रा तथा मराठी में वीर सावरकरांची क्रांतिकारी यात्रा शीर्षक से प्रकाशित यह पुस्तक वीर सावरकर के क्रांतिकारी जीवन, उनके अडिग राष्ट्रवाद, स्वतंत्रता संग्राम में योगदान और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की भूमिका को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है।

कार्यक्रम में विद्वानों, लेखकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जो समकालीन संदर्भ में वीर सावरकर के विचारों के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाती है। पुस्तक विमोचन के पश्चात आयोजित संवाद सत्र में श्रोताओं ने सावरकर की विचारधारा, ऐतिहासिक व्याख्याओं और राष्ट्र निर्माण की दृष्टि पर विचार साझा किए।

सभा को संबोधित करते हुए मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा कि कुछ वर्ग इतिहास को तोड़-मरोड़ कर वीर सावरकर की नकारात्मक छवि प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे सावरकर को समझने के लिए उनके मूल विचारों और लेखन का अध्ययन करें तथा कहा कि डॉ. वैदेही तमन द्वारा लिखी गई यह पुस्तक युवाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है।

अपने संबोधन में स्वामी विज्ञानंद सरस्वती ने वीर सावरकर की दूरदर्शी सोच पर प्रकाश डालते हुए उद्यमिता, आत्मनिर्भरता, सशक्त राष्ट्रीय सुरक्षा, हिंदू एकता और समग्र राष्ट्र निर्माण की अवधारणा को रेखांकित किया। उन्होंने जटिल वैचारिक विषयों को सरल और सहज भाषा में प्रस्तुत करने के लिए डॉ. वैदेही तमन की विशेष सराहना की।

कार्यक्रम का समापन लेखिका डॉ. वैदेही तमन के सम्मान के साथ हुआ। आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि वीर सावरकर के विचार आज भी प्रासंगिक हैं और उन्हें बहुभाषी, तथ्यपरक और पाठक-हितैषी पुस्तकों के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचाने की आवश्यकता है।

Thursday, 29 January 2026

“नरसिंह के. दुबे ‘बाबूजी’ के सत्रहवें पुण्यस्मरण पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन”

“नरसिंह के. दुबे ‘बाबूजी’ के सत्रहवें पुण्यस्मरण पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन”

श्री नरसिंह के. दुबे चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित नालासोपारा आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में स्वर्गीय नरसिंह के. दुबे ‘बाबूजी’ की 17वीं पुण्यतिथि के अवसर पर विविध सामाजिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया।

इस अवसर पर नि:शुल्क चिकित्सा शिविर, सुदृढ़ बालक प्रतियोगिता, पाचन संस्थान पर आधारित वनौषधियों की प्रदर्शनी, संभाषा प्रतियोगिता, भावपूर्ण श्रद्धांजलि समारोह तथा विशुद्ध भोजपुरी–अवधी कवि सम्मेलन जैसे कार्यक्रम संपन्न हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, भगवान धन्वंतरी पूजन एवं बाबूजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया। आयोजित नि:शुल्क चिकित्सा शिविर में कुल 1127 मरीजों ने विभिन्न चिकित्सा सेवाओं का लाभ उठाया। 

शिविर में चिकित्सकों की सलाह अनुसार रक्त जांच, ईसीजी, एक्स-रे जैसी जांचें नि:शुल्क की गईं। साथ ही किफायती दरों पर चश्मा वितरण भी किया गया। महाविद्यालय के सभागृह में सुदृढ़ बालक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में नालासोपारा की प्रसिद्ध बालरोग विशेषज्ञ डॉ. जयश्री देशपांडे तथा आयुर्वेद बालरोग विशेषज्ञ डॉ. सोनम कर्णावत ने निर्णायक की भूमिका निभाई। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार ₹1501, द्वितीय पुरस्कार ₹1001 एवं तृतीय पुरस्कार ₹751 के साथ प्रमाणपत्र व ट्रॉफी प्रदान की गई।

6 माह से 2 वर्ष आयु वर्ग में प्रथम – शिव योगेश दांडेकर, द्वितीय – आदित्य दिगंबर गवळी, तृतीय – ताशविक वैष्णव, 2 से 3 वर्ष आयु वर्ग में प्रथम – देवांश दीपेश राणे, द्वितीय – गार्गी सचिन चव्हाण, तृतीय – भूमि सिंह, 3 से 5 वर्ष आयु वर्ग में प्रथम – आश्वि सिंह, द्वितीय – शिवाय मिश्रा, तृतीय – नैन्सी तिवारी
को पुरस्कृत किया गया।

इसी दौरान महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन की सूचना मिलने पर, संभाषा प्रतियोगिता के प्रारंभ में ही दो मिनट का मौन रखकर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। संभाषा प्रतियोगिता के प्राथमिक दौर में चयनित 82 प्रतियोगियों में से 15 प्रतिभागियों ने अंतिम चरण में सहभाग लिया। प्रतियोगिता में महाराष्ट्र राज्य के वैद्यकीय, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथी, नर्सिंग, फिजियोथैरेपी एवं अन्य शैक्षणिक क्षेत्रों के विद्यार्थियों ने भाग लिया।

निर्णायक मंडल में निलेश कारखानीस (आर्किटेक्ट, मुंबई), मंदार भानुशे (विभागप्रमुख, साइंस एंड टेक्नोलॉजी,मुंबई विश्वविद्यालय) तथा डॉ. सतीश पांडेय (पूर्व अधिष्ठाता, सोमय्या विद्याविहार, मुंबई विश्वविद्यालय) शामिल रहे। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार – गायत्री प्रभात देसले (येरला आयुर्वेद कॉलेज, खारघर), द्वितीय पुरस्कार – दिव्या दीपक पाटील (नालासोपारा आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज), तृतीय पुरस्कार – कृपाली शंकर वटवकर (नालासोपारा आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज), उत्तेजनार्थ पुरस्कार – शर्वरी पद्मनाभ कारखानीस (ज्ञानदेव यशवंतराव पाटील कॉलेज, नवी मुंबई) को क्रमशः ₹10,000, ₹7,500, ₹5,000 व ₹3,000, ट्रॉफी एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।

संस्था के कोषाध्यक्ष श्यामसुंदर दुबे, अध्यक्ष जयप्रकाश दुबे, डायरेक्टर डॉ. ओमप्रकाश दुबे, विश्वस्त नरेश दुबे एवं सभी निर्णायकों के हस्ते पुरस्कार वितरण संपन्न हुआ।


तत्पश्चात भोजपुरी–अवधी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध कवियों ने अपनी सशक्त रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवियों में जगदीश पंथी, सिपाही पांडे ‘मनमौजी’, निडर ‘जौनपुरी’, रसबिहारी पांडे, एड. राजीव मिश्र, सुभाष यादव, जवाहरलाल ‘निर्झर’, राम सिंह, अरुण दुबे तथा डॉ. श्रीमती मृदुल तिवारी ‘महक’ शामिल थे।

कवियों ने हास्य-व्यंग्य, करुण, श्रृंगार एवं वीर रस की कविताओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता सुभाष यादव ने की, जबकि संचालन निडर ‘जौनपुरी’ ने किया। मुंबई, ठाणे, पालघर, नवी मुंबई, वापी, सिलवासा एवं दमन क्षेत्र के भोजपुरी–अवधी भाषी नागरिकों ने कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया।

Tuesday, 27 January 2026

गायिका अंजली भारती के आपत्तिजनक बयान के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग

गायिका अंजली भारती के आपत्तिजनक बयान के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग


गायिका अंजली भारती द्वारा बलात्कार जैसे अत्यंत संवेदनशील और गंभीर विषय पर सार्वजनिक रूप से की गई आपत्तिजनक, अपमानजनक एवं अवमानकारक टिप्पणी को लेकर सहार पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है।


शिकायतकर्ता हरप्रीत सरबजीत सिंह संधू ने सहार पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक को दिए गए अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि गायिका अंजली भारती ने सार्वजनिक मंच/माध्यम के माध्यम से बलात्कार जैसे जघन्य अपराध विषय पर टिप्पणी करते हुए माननीय मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस की धर्मपत्नी मा. अमृता फडणवीस के संबंध में अत्यंत अशोभनीय, आपत्तिजनक एवं अपमानजनक वक्तव्य दिया है।

शिकायत में कहा गया है कि इस प्रकार का बयान न केवल एक महिला की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुँचाने वाला है, बल्कि समस्त महिला समाज की गरिमा पर आघात करता है। ऐसे गैर-जिम्मेदाराना और असंवेदनशील वक्तव्य समाज में गलत संदेश फैलाने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था की स्थिति को भी प्रभावित कर सकते हैं।


शिकायतकर्ता ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध प्रचलित कानूनों के अंतर्गत तत्काल संज्ञान लेकर कठोर एवं विधिसम्मत कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार के घृणास्पद और समाजविरोधी बयान देने का साहस न कर सके। पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष, त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा जताई गई है।

Saturday, 24 January 2026

चांदिवली–साकीनाका में श्रद्धा-भक्ति से संपन्न हुआ माता की चौकी का भव्य आयोजन

चांदिवली–साकीनाका में श्रद्धा-भक्ति से संपन्न हुआ माता की चौकी का भव्य आयोजन

चांदिवली के साकीनाका क्षेत्र में आयोजित माता की चौकी का भव्य कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और उल्लासपूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। माता रानी के भजनों की मधुर एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियों से संपूर्ण परिसर भक्तिमय हो उठा, वहीं श्रद्धालु माता के जयकारों में लीन नजर आए। इस पावन अवसर पर अपना संघ के संस्थापक अध्यक्ष एड दीनानाथ पाण्डेय, कार्याध्यक्ष मुकेश मिश्र तथा कोषाध्यक्ष सुरेंद्र यादव के कुशल संयोजन में कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से कांग्रेस नेता व पूर्व विधायक नसीम खान, आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली, भाजपा नेता पंकज मिश्र, डॉ. नितेश सिंह, अवधेश शुक्ला, राकेश कुमार पांडे, देवेंद्र तिवारी, राकेश मिश्रा, पूर्व नगरसेवक सीताराम तिवारी, एड अरविंद तिवारी, ठाकुर संतोष सिंह, हमारा महानगर के संपादक आदित्य दुबे, नगरसेवक हरीश भ्रादिगे, एड वीरेंद्र दुबे, राजा मिश्रा, रामस्वारथ यादव, माताप्रसाद यादव, मनोज यादव, सुरेश यादव, पंकज राय, पवन राय, चंद्रेश दुबे, रामबिलास पाठक, निवासानंद महाराज, राजेश सिंह हरीश पांडे, ओमप्रकाश प्रजापति सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

इसके अतिरिक्त एड काशीनाथ तिवारी, अखिलेश तिवारी, महेंद्र तिवारी, प्रकाश तिवारी, रामजी पांडे, निवासानंद तिवारी (विद्रोही महाराज), धर्मेंद्र उपाध्याय, रामानंद पांडे, राजेश राठौड़, मंगला शुक्ला, बंसीधर दुबे, प्रहलाद पांडे, इंद्रमणि शुक्ला, प्रभाशंकर मिश्रा, भगवान दुबे, नरेंद्र उपाध्याय, राम मंदिर (जोगेश्वरी) के अध्यक्ष मधुसूदन द्विवेदी, मनोज दुबे, सुभाष विश्वकर्मा, मुन्ना यादव, रामपति विश्वकर्मा, शिवमणि दुबे एवं पंकज मिश्रा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के समापन पर माता रानी से क्षेत्र में सुख-समृद्धि, शांति, सौहार्द और खुशहाली की कामना की गई।

Tuesday, 20 January 2026

आधुनिक भारत के स्वप्नदृष्टा थे नेताजी सुभाष चंद्र बोस- -प्रो.संजय द्विवेदी

जयंती प्रसंग (23 जनवरी)
आधुनिक भारत के स्वप्नदृष्टा थे नेताजी सुभाष चंद्र बोस
आजादी के लिए अपनी चिठ्ठी में पूछा-“मां, हम कब तक सोते रहेंगे?”
-प्रो.संजय द्विवेदी

     ये 1912 का साल था, उन्होंने अपनी मां को जो चिठ्ठी लिखी थी, वो चिट्ठी इस बात की गवाह है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के मन में गुलाम भारत की स्थिति को लेकर कितनी वेदना थी। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 15 साल थी। सैंकड़ों वर्षों की गुलामी ने देश का जो हाल कर दिया था, उसकी पीड़ा उन्‍होंने अपनी मां से पत्र के द्वारा साझा की थी। उन्‍होंने अपनी मां से पत्र में सवाल पूछा था कि, “मां, क्‍या हमारा देश दिनों-दिन और अधिक पतन में गिरता जाएगा? क्‍या ये दुखिया भारत माता का कोई एक भी पुत्र ऐसा नहीं है, जो पूरी तरह अपने स्‍वार्थ को तिलांजलि देकर, अपना संपूर्ण जीवन भारत मां की सेवा में समर्पित कर दे? बोलो मां, हम कब तक सोते रहेंगे?” इस पत्र में उन्‍होंने अपनी मां से पूछे गए सवालों का उत्तर भी दिया था। उन्‍होंने अपनी मां को स्‍पष्‍ट कर दिया था कि अब और प्रतीक्षा नहीं की जा सकती, अब और सोने का समय नहीं है, हमको अपनी जड़ता से जागना ही होगा, आलस्‍य त्‍यागना ही होगा और कर्म में जुट जाना होगा। अपने भीतर की इस तीव्र उत्‍कंठा ने उस किशोर सुभाष चंद्र को नेताजी सुभाष चंद्र बोस बनाया।

     सफल जीवन के चार सूत्र कहे जाते हैं - जिज्ञासा, धैर्य, नेतृत्व की क्षमता और एकाग्रता। जिज्ञासा का मतलब है जानने की इच्छा। धैर्य का मतलब विषम परिस्थितियों में खुद को संभाले रखना। नेतृत्व की क्षमता यानी जनसमूह को अपने कार्यों से आकर्षित करना। और एकाग्रता का अर्थ है एक ही चीज पर ध्यान केंद्रित करना। अगर भारत के संदर्भ में हम देखें, तो किसी व्यक्ति के जीवन में ये चारों सूत्र चरितार्थ होते हैं, तो वो सिर्फ नेताजी सुभाष चंद्र बोस हैं। नेताजी ने एक ऐसी सरकार के विरुद्ध लोगों को एकजुट किया, जिसका सूरज कभी अस्‍त नहीं होता था। दुनिया के एक बड़े हिस्‍से में जिसका शासन था। अगर नेताजी की खुद की लेखनी पढ़ें, तो हमें पता चलता है कि वीरता के शीर्ष पर पहुंचने की नींव कैसे उनके बचपन में ही पड़ गई‍ थी।

     नेताजी कहा करते थे कि, “सफलता हमेशा असफलता के स्तंभ पर खड़ी होती है। इसलिए किसी को असफलता से घबराना नहीं चाहिए।” इस छोटी सी पंक्ति के माध्यम से नेताजी ने असफल और निराश लोगों के लिए सफलता के नए द्वारा खोल दिए। यही सरलता और सहजता ही उनकी संचार कला का अभिन्न अंग थी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने स्वाधीनता संग्राम में भाग लेने के साथ-साथ पत्रकारिता भी की थी और उसके माध्यम से पूर्ण स्वराज के अपने स्वप्न और विचारों को शब्दबद्ध किया था। नेताजी ने 5 अगस्त, 1939 को अंग्रेजी में राजनीतिक साप्ताहिक समाचार पत्र ‘फॉरवर्ड ब्लॉक’ निकाला और 1 जून, 1940 तक उसका संपादन किया। इस अखबार के एक अंक की कीमत थी, एक आना। नेताजी ने अपनी पत्रकारिता का उद्देश्य पूर्ण स्वाधीनता के लक्ष्य से जोड़ रखा था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पत्रकारिता में यह विवेक था कि सही बात का अभिनंदन और गलत का विरोध करना चाहिए। नेताजी अंग्रेजी शासन के धुर विरोधी थे, लेकिन ब्रिटेन के जिन अखबारों ने भारतीय स्वाधीनता संग्राम का समर्थन किया, उसकी प्रशंसा करते हुए उन अखबारों के मत को नेताजी ने अपने अखबार में पुनर्प्रस्तुत किया। नेताजी ने स्वाधीनता की लक्ष्यपूर्ति के लिए अखबार निकाला, तो रेडियो के माध्यम का भी उपयोग किया। 1941 में ‘रेडियो जर्मनी’ से नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भारतीयों के नाम संदेश में कहा था, “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।” उसके बाद 1942 में ‘आजाद हिंद रेडियो’ की स्थापना हुई, जो पहले जर्मनी से और फिर सिंगापुर और रंगून से भारतीयों के लिए समाचार प्रसारित करता रहा। 6 जुलाई, 1944 को ‘आजाद हिंद रेडियो’ से नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने पहली बार महात्मा गांधी के लिए ‘राष्ट्रपिता’ संबोधन का प्रयोग किया था।

      आजाद हिंद सरकार की स्थापना के समय नेताजी ने शपथ लेते हुए एक ऐसा भारत बनाने का वादा किया था, जहां सभी के पास समान अधिकार हों, सभी के पास समान अवसर हों। आज स्‍वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भारत अनेक कदम आगे बढ़ा है, लेकिन अभी नई ऊंचाइयों पर पहुंचना बाकी है। इसी लक्ष्‍य को पाने के लिए आज भारत के सवा सौ करोड़ लोग नए भारत के संकल्‍प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। एक ऐसा नया भारत, जिसकी कल्‍पना नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने की थी। समाज के प्रत्‍येक स्‍तर पर देश का संतुलित विकास, प्रत्‍येक व्‍यक्ति को राष्‍ट्र निर्माण का अवसर और राष्ट्र की प्रगति में उसकी भूमिका, नेताजी के विजन का एक अहम हिस्‍सा था। नेताजी ने कहा था, “हथियारों की ताकत और खून की कीमत से तुम्‍हें आजादी प्राप्‍त करनी है। फिर जब भारत आजाद होगा, तो देश के लिए तुम्‍हें स्‍थाई सेना बनानी होगी, जिसका काम होगा हमारी आजादी को हमेशा बनाए रखना।” आज भारत एक ऐसी सेना के निर्माण की तरफ बढ़ रहा है, जिसका सपना नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने देखा था। जोश, जुनून और जज्‍बा, हमारी सैन्‍य परम्‍परा का हिस्‍सा रहा है। अब तकनीक और आधुनिक हथियारी शक्ति भी उसके साथ जोड़ी जा रही है। सशस्‍त्र सेना में महिलाओं की बराबर की भागीदारी हो, इसकी नींव नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने ही रखी थी। देश की पहली सशस्‍त्र महिला रेजिमेंट, जिसे रानी झांसी रेजिमेंट के नाम से जाना जाता है, भारत की समृद्ध परम्‍पराओं के प्रति सुभाष बाबू के आगाध विश्‍वास का परिणाम था।

     नेताजी जैसे महान व्यक्तित्वों के जीवन से हम सबको और खासकर युवाओं को बहुत कुछ सीखने को मिलता है। लेकिन एक और बात जो सबसे ज्यादा प्रभावित करती है, वो है अपने लक्ष्य के लिए अनवरत प्रयास। अपने संकल्पों को सिद्धि तक ले जाने की उनकी क्षमता अद्वितीय थी। अगर वो किसी काम के लिए एक बार आश्वस्त हो जाते थे, तो उसे पूरा करने के लिए किसी भी सीमा तक प्रयास करते थे। उन्होंने हमें ये बात सिखाई कि, अगर कोई विचार बहुत सरल नहीं है, साधारण नहीं है, अगर इसमें कठिनाइयां भी हैं, तो भी कुछ नया करने से डरना नहीं चाहिए। अगर हमें नेताजी को याद रखना है, तो संपूर्ण दुनिया में अपने प्रत्येक विचार, सिद्धांत, व्यवहार को किसी जन समूह के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने वाले संचारक के रूप में याद रखना चाहिए। आज भारत में जनसंचार के विभिन्न माध्यम हैं। आजादी के पूर्व सीमित संचार के साधनों के बाद भी नेताजी लोकप्रिय हुए। वे तब लोकप्रिय हुए, जब जन संचार की कोई अधोसंरचना उपलब्ध नहीं थी। भारत जैसी विविधता वाले देश में एक राष्ट्र की अवधारणा को बढ़ावा देने का कार्य एक कुशल संचारक ही कर सकता था और यह कार्य नेताजी ने किया। नेताजी ने अपने व्यक्तित्व के प्रयास से स्त्री, पुरुष, शिक्षित, अशिक्षित, किसान, मजदूर, पूंजीपति, सभी को प्रभावित किया और देश की स्वतंत्रता के लिए सबको एक साथ पिरोने का कार्य किया।

     आज जिस मॉर्डन इंडिया को हम देख पा रहे हैं, उसका सपना नेताजी ने बहुत पहले देखा था। भारत के लिए उनका जो विजन था, वो अपने समय से बहुत आगे का था। नेताजी कहा करते थे कि अगर हमें वाकई में भारत को सशक्त बनाना है, तो हमें सही दृष्टिकोण अपनाने की जरुरत है और इस कार्य में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। एकता, अखंडता और आत्‍मविश्‍वास की हमारी ये यात्रा नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आशीर्वाद से निरंतर आगे बढ़ रही है।

(लेखक भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी), नई दिल्ली के पूर्व महानिदेशक हैं और संप्रति माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में जनसंचार विभाग के अध्यक्ष हैं।)

Monday, 19 January 2026

भारतीय सदविचार मंच ने किया विजय सिंह कौशिक और डॉ. पारसनाथ त्रिपाठी को पुरस्कृत

भारतीय सदविचार मंच ने किया विजय सिंह कौशिक और डॉ. पारसनाथ त्रिपाठी को पुरस्कृत

महानगर की सुप्रसिद्ध और चर्चित सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक संस्था भारतीय सदविचार मंच द्वारा दहिसर (पूर्व ) स्थित संस्था सभागार में संस्था संस्थापक एवं प्रमुख मार्गदर्शक डॉ राधेश्याम तिवारी की अध्यक्षता और कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि बोरीवली के विधायक संजय उपाध्याय, उत्तर भारतीय संघ के अध्यक्ष संतोष आर एन सिंह और शिक्षाविद् डॉ हृदय नारायण मिश्रा के सानिध्य में संपन्न इस भव्य पुरस्कार समारोह में वरिष्ठ पत्रकार, दैनिक भास्कर के स्थानीय संपादक विजय सिंह कौशिक को 8 वां ठाकुर हरदत्त सिंह आदर्श पत्रकारिता पुरस्कार -2025 और वरिष्ठ समाजसेवी डॉ.पारसनाथ तिवारी को बाबू आर.एन.सिंह आदर्श समाजसेवी पुरस्कार -2025 द्वारा सम्मानित किया गया।

पूर्व विधायक रमेश सिंह ठाकुर को 25 वां डॉ राममनोहर त्रिपाठी पुरस्कार-2025 घोषित किया गया। समारोह में विजय सिंह कौशिक द्वारा लिखित यात्रा संस्मरण पुस्तक कुछ रंग इधर के ,कुछ रंग उधर के (एक पत्रकार का सफरनामा) का अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया।

इस समारोह में नवभारत के संपादक ब्रजमोहन पाण्डेय, शिवसेना (उ.बा.ठा)के राष्ट्रीय प्रवक्ता आनंद दुबे, समरस फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. किशोर सिंह, मुंबई भाजपा के प्रवक्ता उदयप्रताप सिंह,हमारा महानगर के संपादक राघवेन्द्र द्विवेदी, वरिष्ठ पत्रकार अनुराग त्रिपाठी, यश भारत के सहायक संपादक अभय मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार अनिल गलगली, प्रारम्भ उत्तर दर्शन के सम्पादक विनोद हरदत्त सिंह, संस्था के सह संस्थापक दिनेशचंद्र उपाध्याय और राघवेन्द्र सेवा मंच के अध्यक्ष सुरेंद्र मिश्रा सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

संस्था अध्यक्ष डॉ.शिवश्याम तिवारी के मुख्य संयोजन और महामंत्री नागेन्द्र मिश्रा के संचालन में समाजसेवी श्रीनिवास तिवारी विद्रोही , संस्था के मार्गदर्शक मंडल के सदस्य श्रीकांत पाण्डेय, हरिशंकर तिवारी, संस्था शिक्षक प्रकोष्ठ के संयोजक हरिप्रसाद पाण्डेय, समाजसेवी रामसेवक पाण्डेय, समाजसेवी आशुतोष उपाध्याय, समाजसेवी डॉ.अजय एल. दुबे, हमारा महानगर के स्थानीय संपादक आदित्य दुबे, समाजसेवी अनिरुद्ध पाण्डेय, पूर्व नगर सेवक रामनारायण दुबे, वरिष्ठ पत्रकार सुनील मेहरोत्रा, वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सिंह, वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पाण्डेय, शिक्षाविद् चिंतामणि पाण्डेय और समाजसेवी प्रमोद श्यामाचरण पाण्डेय प सहित सैकड़ों गणमान्य उपस्थित थे।

संस्था पदाधिकारी पं.कमलाशंकर मिश्रा, बैजनाथ मिश्रा,  गणेश प्रसाद पाण्डेय, राजकुमार सिंह, मनोज चतुर्वेदी, बी.एम.गुप्ता, सुभाषचन्द्र दुबे,एड.शिशिर पाण्डेय, रत्नेश दुबे और रामप्रकाश तिवारी नेआये हुए अतिथियों का स्वागत किया। कार्यसमिति सदस्य कमलाकांत त्रिपाठी, उमेश सिंह, अमित तिवारी और संस्था की अंधेरी शाखा के अध्यक्ष प्रेमचंद (बाबा) तिवारी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना भरपूर सहयोग प्रदान किया। संस्था के मंत्री राजीव मिश्रा द्वारा आभार व्यक्त किया गया।

अंत में संस्था की कार्यसमिति के सदस्य सूर्यप्रकाश (संतोष ) मिश्र की धर्मपत्नी और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री राज के.राजपुरोहित के दुखद निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।

Sunday, 18 January 2026

डॉ. विजय नारायण पंडित के कहानी संग्रह ‘बड़े भाग मानुष तन पावा’ का लोकार्पण सम्पन्न

डॉ. विजय नारायण पंडित के कहानी संग्रह ‘बड़े भाग मानुष तन पावा’ का लोकार्पण सम्पन्न

कल्याण (पश्चिम) स्थित के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय के हिन्दी विभाग के तत्वावधान में 16–17 जनवरी 2026 को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी अत्यंत गरिमामय वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से पधारे प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, साहित्यकारों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

संगोष्ठी का उद्घाटन सत्र महाविद्यालय के अध्यक्ष एवं प्रख्यात साहित्यकार डॉ. विजय नारायण पंडित के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. शीतला प्रसाद दुबे ने की। बीज वक्तव्य प्रो. मनोज सिंह (प्रोफेसर, हिन्दी विभाग, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय) ने प्रस्तुत किया, जिसमें हिन्दी साहित्य के समकालीन विमर्श, सामाजिक सरोकारों तथा वैचारिक प्रवृत्तियों पर गहन एवं विचारोत्तेजक दृष्टि डाली गई। मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती रेनू पृथियानी (अंचल निदेशक, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, मुंबई) की गरिमामयी उपस्थिति रही।

स्वागताध्यक्ष ओम प्रकाश (मुन्ना) पाण्डेय (सचिव, के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय) ने सभी अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। प्रस्ताविकी डॉ. अनिता मन्ना (प्राचार्या, के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय) द्वारा प्रस्तुत की गई, जिसमें संगोष्ठी के उद्देश्यों, वैचारिक पृष्ठभूमि एवं अकादमिक महत्व को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय प्रबंधन समिति के कांतिलाल जैन, डॉ. सुजीत सिंह एवं विजय तिवारी की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।

उद्घाटन सत्र का विशेष आकर्षण चार महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण रहा। इनमें अमरकांत पर केन्द्रित आलेख-संग्रह, मध्य एशिया में हिन्दी से जुड़े लेखों का संकलन, पंडित विद्यानिवास मिश्र पर केन्द्रित समीचीन पत्रिका का विशेष अंक तथा डॉ. विजय नारायण पंडित का नवीनतम कहानी संग्रह ‘बड़े भाग मानुष तन पावा’ शामिल रहा। इस कथा-संग्रह पर उपस्थित विद्वानों ने इसे मानवीय संवेदना, जीवन-दृष्टि और सामाजिक यथार्थ से सम्पन्न सशक्त रचना बताते हुए मुक्त कंठ से सराहना की।

संगोष्ठी के अंतर्गत दो दिनों में कुल पाँच अकादमिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें हिन्दी साहित्य, आलोचना, संस्कृति, समकालीन विमर्श तथा शोध की नवीन प्रवृत्तियों पर गंभीर और सार्थक चर्चा हुई। देशभर से आए विद्वानों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए, जबकि अनुभवी शिक्षाविदों की अध्यक्षता एवं सत्र-संचालन ने संगोष्ठी के अकादमिक स्तर को अत्यंत समृद्ध बनाया।
द्वितीय दिवस के समापन सत्र में प्रतिभागियों ने संगोष्ठी को शोधोन्मुखी, संवादपरक एवं अत्यंत उपयोगी बताया। समापन सत्र की अध्यक्षता डॉ. अनिता मन्ना ने की। प्रो. ईश्वर पवार तथा प्रो. पुरुषोत्तम कुंदे विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए।

पूरे आयोजन का कुशल संचालन एवं प्रभावी आभार प्रदर्शन डॉ. मनीष कुमार मिश्रा (हिन्दी विभाग, के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय) द्वारा किया गया। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी की सफलता ने के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय को राष्ट्रीय अकादमिक मानचित्र पर एक सशक्त एवं प्रतिष्ठित पहचान प्रदान की।

Saturday, 17 January 2026

मुंबई मनपा निवडणूक २०२५–२६ : आकडेवारीतून उमटलेले राजकीय चित्र

मुंबई मनपा निवडणूक २०२५–२६ : आकडेवारीतून उमटलेले राजकीय चित्र


बृहन्मुंबई महानगरपालिकेच्या (BMC) २०२५–२६ या सार्वत्रिक निवडणुकीचे निकाल जाहीर झाले असून, या निवडणुकीत मुंबईच्या राजकारणाचे स्पष्ट चित्र आकडेवारीतून समोर आले आहे. एकूण २२७ जागांसाठी झालेल्या या निवडणुकीत विविध राष्ट्रीय व प्रादेशिक पक्षांनी आपली ताकद आजमावली.

या निवडणुकीत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सर्वाधिक प्रभावी ठरली. भाजपाने ८९ जागांवर विजय मिळवत एकूण ११,७९,२७३ मते प्राप्त केली. एकूण मतदानाच्या तुलनेत भाजपाचा मतांचा वाटा २१.५८ टक्के असून, विजयी उमेदवारांना मिळालेल्या एकूण मतांपैकी तब्बल ४५.२२ टक्के मते भाजपाकडे गेली आहेत.

दुसऱ्या क्रमांकावर शिवसेना (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे गट) राहिली. या गटाने ६५ जागांवर विजय मिळवून ७,१७,७३६ मते मिळवली. एकूण मतदानात त्यांचा वाटा १३.१३ टक्के असून, विजयी मतांपैकी २७.५२ टक्के मते या पक्षाला मिळाली.
तर पारंपरिक शिवसेना पक्षाने २९ जागा जिंकत २,७३,३२६ मते मिळवली. त्यांचा एकूण मतदानातील वाटा ५ टक्के असून, विजयी मतांमध्ये १०.४८ टक्के हिस्सा आहे.

इंडियन नॅशनल काँग्रेस पक्षाने २४ जागांवर यश मिळवत २,४२,६४६ मते मिळवली. काँग्रेसचा एकूण मतदानातील वाटा ४.४४ टक्के असून, विजयी मतांमध्ये ९.३१ टक्के हिस्सा आहे.
याशिवाय ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) यास ८ जागा आणि ६८,०७२ मते, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) यास ६ जागा आणि ७४,९४६ मते, नॅशनलिस्ट काँग्रेस पार्टी यास ३ जागा आणि २४,६९१ मते, समाजवादी पार्टी यास २ जागा आणि १५,१६२ मते, राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गट) यास १ जागा आणि ११,७६० मते प्राप्त झाली आहे. 

एकूण २२७ विजयी उमेदवारांना २६,०७,६१२ मते मिळाली असून, हे प्रमाण एकूण मतदानाच्या ४७.७२ टक्के इतके आहे. महत्त्वाची बाब म्हणजे संपूर्ण मुंबईत एकूण मतदान ५४,६४,४१२ इतके झाले, तर ११,६७७ मते बाद (रद्द) ठरली.

या आकडेवारीवरून स्पष्ट होते की, मुंबई पालिकेत बहुपक्षीय राजकारण कायम असले तरी भाजपाचा प्रभाव लक्षणीय वाढलेला आहे. शिवसेनेच्या दोन्ही गटांची एकत्रित ताकद अजूनही महत्त्वाची असून, काँग्रेस व इतर पक्षांची भूमिका संख्येने मर्यादित असली तरी राजकीय समतोल राखण्यात ती निर्णायक ठरू शकते. मुंबईकरांनी दिलेला हा कौल पुढील काळात मनपातील सत्ता-समीकरणे, विकास धोरणे आणि प्रशासकीय दिशा ठरवणारा ठरणार आहे.


अनिल गलगली 
माहिती अधिकार कार्यकर्तेमुंबई मनपा निवडणूक २०२५–२६ : आकडेवारीतून उमटलेले राजकीय चित्र


बृहन्मुंबई महानगरपालिकेच्या (BMC) २०२५–२६ या सार्वत्रिक निवडणुकीचे निकाल जाहीर झाले असून, या निवडणुकीत मुंबईच्या राजकारणाचे स्पष्ट चित्र आकडेवारीतून समोर आले आहे. एकूण २२७ जागांसाठी झालेल्या या निवडणुकीत विविध राष्ट्रीय व प्रादेशिक पक्षांनी आपली ताकद आजमावली.

या निवडणुकीत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सर्वाधिक प्रभावी ठरली. भाजपाने ८९ जागांवर विजय मिळवत एकूण ११,७९,२७३ मते प्राप्त केली. एकूण मतदानाच्या तुलनेत भाजपाचा मतांचा वाटा २१.५८ टक्के असून, विजयी उमेदवारांना मिळालेल्या एकूण मतांपैकी तब्बल ४५.२२ टक्के मते भाजपाकडे गेली आहेत.

दुसऱ्या क्रमांकावर शिवसेना (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे गट) राहिली. या गटाने ६५ जागांवर विजय मिळवून ७,१७,७३६ मते मिळवली. एकूण मतदानात त्यांचा वाटा १३.१३ टक्के असून, विजयी मतांपैकी २७.५२ टक्के मते या पक्षाला मिळाली.
तर पारंपरिक शिवसेना पक्षाने २९ जागा जिंकत २,७३,३२६ मते मिळवली. त्यांचा एकूण मतदानातील वाटा ५ टक्के असून, विजयी मतांमध्ये १०.४८ टक्के हिस्सा आहे.

इंडियन नॅशनल काँग्रेस पक्षाने २४ जागांवर यश मिळवत २,४२,६४६ मते मिळवली. काँग्रेसचा एकूण मतदानातील वाटा ४.४४ टक्के असून, विजयी मतांमध्ये ९.३१ टक्के हिस्सा आहे.
याशिवाय ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) यास ८ जागा आणि ६८,०७२ मते, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) यास ६ जागा आणि ७४,९४६ मते, नॅशनलिस्ट काँग्रेस पार्टी यास ३ जागा आणि २४,६९१ मते, समाजवादी पार्टी यास २ जागा आणि १५,१६२ मते, राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गट) यास १ जागा आणि ११,७६० मते प्राप्त झाली आहे. 

एकूण २२७ विजयी उमेदवारांना २६,०७,६१२ मते मिळाली असून, हे प्रमाण एकूण मतदानाच्या ४७.७२ टक्के इतके आहे. महत्त्वाची बाब म्हणजे संपूर्ण मुंबईत एकूण मतदान ५४,६४,४१२ इतके झाले, तर ११,६७७ मते बाद (रद्द) ठरली.

या आकडेवारीवरून स्पष्ट होते की, मुंबई पालिकेत बहुपक्षीय राजकारण कायम असले तरी भाजपाचा प्रभाव लक्षणीय वाढलेला आहे. शिवसेनेच्या दोन्ही गटांची एकत्रित ताकद अजूनही महत्त्वाची असून, काँग्रेस व इतर पक्षांची भूमिका संख्येने मर्यादित असली तरी राजकीय समतोल राखण्यात ती निर्णायक ठरू शकते. मुंबईकरांनी दिलेला हा कौल पुढील काळात मनपातील सत्ता-समीकरणे, विकास धोरणे आणि प्रशासकीय दिशा ठरवणारा ठरणार आहे.


अनिल गलगली 
माहिती अधिकार कार्यकर्ते

Wednesday, 14 January 2026

मुंबईतील मतदान : यंदा तरी उदासीनतेचा पाडाव होणार का?

मुंबईतील मतदान : यंदा तरी उदासीनतेचा पाडाव होणार का?


देशाची आर्थिक राजधानी असलेली मुंबई पुन्हा एकदा लोकशाहीच्या महत्त्वाच्या टप्प्यावर उभी आहे. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (मुंबई महानगरपालिका) निवडणुकीसाठी आज संपूर्ण शहरात मतदान होत आहे. यंदा तरी मतदारांचा प्रतिसाद वाढेल का, याकडे सर्वांचे लक्ष लागले आहे. मुंबईसारख्या महानगरात स्थानिक स्वराज्य संस्थांच्या निवडणुकांमध्ये मतदानाचा टक्का नेहमीच चिंतेचा विषय राहिला आहे. धावपळीची जीवनशैली, नोकरी-व्यवसायाचा ताण, लांब पल्ल्याची प्रवासाची अडचण, तसेच “माझ्या एका मताने काय फरक पडणार?” ही मानसिकता यामुळे अनेकदा मतदानाकडे पाठ फिरवली जाते.

महानगरपालिका निवडणुका आणि मतदानाचा इतिहास
गेल्या तीन दशकांतील आकडेवारी पाहिली तर मुंबई महानगरपालिका निवडणुकांमध्ये मतदानाचा टक्का दीर्घकाळ ५० टक्क्यांच्या खालीच राहिलेला दिसतो. मुंबई महानगरपालिका निवडणुकीतील मतदान टक्केवारी (१९९२–२०१७):

१९९२: ४९.१४%
१९९७: ४४.३६%
२००२: ४२.०५%
२००७: ४६.०५%
२०१२: ४४.७५%
२०१७: ५५.२८%

१९९७ ते २०१२ या कालावधीत सलग चार निवडणुकांमध्ये मतदान ४२ ते ४६ टक्क्यांच्या दरम्यानच मर्यादित राहिले. हा काळ मुंबईसाठी सर्वात कमी मतदार सहभागाचा मानला जातो. मात्र २०१७ मध्ये ५५.२८ टक्के मतदान झाले आणि तब्बल २५ वर्षांनंतर मतदानाने नवा उच्चांक गाठला.


२०१७ मध्ये मतदान का वाढले?

२०१७ ची निवडणूक अनेक अर्थांनी वेगळी ठरली. प्रमुख राजकीय पक्षांमध्ये थेट आणि तीव्र लढत झाली. रस्त्यांची दुरवस्था, पावसाळ्यातील जलसाठा, कचरा व्यवस्थापन, भ्रष्टाचार, आरोग्य व शिक्षण व्यवस्था असे स्थानिक प्रश्न केंद्रस्थानी होते. सोशल मीडियावरील चर्चांमुळे, नागरिक संघटनांच्या जनजागृतीमुळे आणि तरुण मतदारांच्या वाढत्या सहभागामुळे मतदानाचा टक्का लक्षणीयरीत्या वाढला.

यंदाची निवडणूक का महत्त्वाची आहे?

यंदाची मुंबई महानगरपालिका निवडणूक जवळपास तीन वर्षांच्या प्रशासकीय कालावधीनंतर होत आहे. या काळात निवडून दिलेले लोकप्रतिनिधी नसल्याने अनेक नागरी प्रश्न प्रलंबित राहिले. त्यामुळे यावेळी नागरिकांमध्ये आपल्या स्थानिक प्रतिनिधींची निवड करण्याबाबत अधिक उत्सुकता दिसून येत आहे.
राज्य निवडणूक आयोगानेही मतदान वाढवण्यासाठी विशेष उपाययोजना केल्या आहेत. हाउसिंग सोसायट्यांमध्ये मतदान केंद्रे, ज्येष्ठ नागरिक व दिव्यांगांसाठी सुविधा, मतदार जनजागृती मोहिमा आणि डिजिटल माध्यमांचा वापर. यंदा ६० ते ७० टक्के मतदान होण्याचे उद्दिष्ट ठेवण्यात आले आहे.

लोकशाहीची खरी ताकद मतदार

मुंबई महानगरपालिका ही देशातील सर्वात श्रीमंत स्थानिक स्वराज्य संस्था आहे. शहरातील रस्ते, पाणीपुरवठा, आरोग्य सेवा, शिक्षण, स्वच्छता आणि आपत्ती व्यवस्थापन या सर्व बाबी थेट या संस्थेशी निगडित आहेत. त्यामुळे नगरसेवकांची निवड म्हणजे केवळ राजकीय प्रक्रिया नसून मुंबईच्या भविष्यासाठी घेतला जाणारा निर्णय आहे. कमी मतदान म्हणजे काही मोजक्या लोकांच्या हातात निर्णय. जास्त मतदान म्हणजे लोकशाही मजबूत आणि प्रशासन अधिक जबाबदार.

१५ जानेवारीचा मतदानाचा दिवस हा मुंबईकरांसाठी केवळ औपचारिकता नाही, तर आपल्या शहराची दिशा ठरवण्याची संधी आहे. २०१७ पेक्षा अधिक मतदान झाले, तर ते नागरिकांच्या जागृतीचे प्रतीक ठरेल. यंदा मुंबई केवळ आर्थिक राजधानी म्हणून नव्हे, तर जागरूक मतदारांची राजधानी म्हणूनही ओळखली जाईल, अशी अपेक्षा आहे.


अनिल गलगली 
माहिती अधिकार कार्यकर्ते

मुंबई में मतदान: क्या इस बार बदलेगी उदासीनता की तस्वीर?

मुंबई में मतदान: क्या इस बार बदलेगी उदासीनता की तस्वीर?


देश की आर्थिक राजधानी मुंबई एक बार फिर लोकतंत्र के सबसे अहम पड़ाव पर खड़ी है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के लिए शहरभर में मतदान हो रहा है। करोड़ों मतदाताओं की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस बार मुंबईकर बड़ी संख्या में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे या फिर पिछली तरह मतदान प्रतिशत सीमित ही रहेगा।


मुंबई जैसे महानगर में स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव हमेशा से एक विरोधाभास पेश करते रहे हैं। एक ओर यह देश की सबसे अमीर और प्रभावशाली महानगरपालिका है, वहीं दूसरी ओर यहां के नागरिकों की चुनावी भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही है। व्यस्त जीवनशैली, नौकरी-धंधे का दबाव, लंबी यात्रा, मतदान को लेकर उदासीनता और “मेरे वोट से क्या फर्क पड़ेगा” जैसी मानसिकता इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं।

बीएमसी चुनाव और मतदान प्रतिशत का इतिहास

अगर पिछले तीन दशकों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो यह साफ दिखाई देता है कि मुंबई महानगरपालिका चुनावों में मतदान प्रतिशत लंबे समय तक 50 प्रतिशत से नीचे ही रहा।
बीएमसी चुनावों में मतदान प्रतिशत (1992–2017):
1992: 49.14%
1997: 44.36%
2002: 42.05%
2007: 46.05%
2012: 44.75%
2017: 55.28%

1997 से 2012 तक लगातार चार चुनावों में मतदान 42 से 46 प्रतिशत के बीच सिमटा रहा। यह दौर मुंबई के लिए सबसे कमजोर मतदाता भागीदारी वाला समय माना जाता है। लेकिन वर्ष 2017 में तस्वीर बदली और मतदान प्रतिशत बढ़कर 55.28% तक पहुंच गया, जो अब तक का सर्वाधिक रिकॉर्ड है।

2017 में क्यों टूटा रिकॉर्ड?

2017 का मनपा चुनाव कई मायनों में अलग था। उस समय राजनीतिक माहौल बेहद गर्म था और प्रमुख दलों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला। स्थानीय मुद्दों जैसे खराब सड़कें, जलभराव, कचरा प्रबंधन, भ्रष्टाचार, स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं
इन सभी विषयों पर जोरदार बहस हुई। सोशल मीडिया, नागरिक समूहों और युवाओं की सक्रियता ने भी मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित किया। खासतौर पर पहली बार वोट देने वाले युवा और मध्यम वर्ग बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों तक पहुंचे। यही कारण था कि 25 वर्षों में पहली बार बीएमसी चुनाव में मतदान 55 प्रतिशत के पार गया।

2026 का चुनाव: क्यों है खास?

इस बार का मनपा का चुनाव कई कारणों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लगभग तीन वर्षों के अंतराल के बाद जनता को अपने स्थानीय प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिला है। अब तक नगर निगम प्रशासकीय व्यवस्था के तहत चल रहा था। नागरिकों में स्थानीय समस्याओं को लेकर असंतोष और अपेक्षाएं दोनों बढ़ी हैं।
राज्य चुनाव आयोग और प्रशासन ने भी इस बार मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए हैं। हाउसिंग सोसायटी में मतदान केंद्र, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए सुविधाएं, मतदाता जागरूकता अभियान और डिजिटल माध्यमों का उपयोग—ये सभी कदम इसी दिशा में उठाए गए हैं। चुनाव आयोग का स्पष्ट संदेश है कि मुंबई में इस बार 60 से 70 प्रतिशत मतदान का लक्ष्य रखा गया है।

लोकतंत्र की असली कसौटी: नागरिक सहभागिता

मुंबई महानगरपालिका केवल एक मनपा नहीं है, बल्कि यह देश की सबसे समृद्ध और प्रभावशाली स्थानीय स्वशासन संस्था है। शहर की सड़कें, अस्पताल, स्कूल, पानी की आपूर्ति, सफाई व्यवस्था और आपदा प्रबंधन सीधे इसी संस्था से जुड़े हैं। ऐसे में नगरसेवकों का चुनाव केवल राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मुंबई के भविष्य का फैसला है। कम मतदान का अर्थ है कि कुछ सीमित लोग पूरे शहर के लिए निर्णय करें। अधिक मतदान का अर्थ है कि जनता की मजबूत भागीदारी और जवाबदेह शासन।


15 जनवरी को होने वाला मतदान केवल एक तारीख नहीं, बल्कि मुंबईकरों के लिए एक अवसर है कि अपने शहर की दिशा तय करने का, अपने अधिकारों का प्रयोग करने का और लोकतंत्र को मजबूत बनाने का। यदि 2017 की तरह या उससे भी अधिक मतदान होता है, तो यह संकेत होगा कि मुंबई की जनता अब स्थानीय राजनीति को गंभीरता से ले रही है। उम्मीद है कि इस बार मुंबई न सिर्फ आर्थिक राजधानी के रूप में, बल्कि नागरिक जागरूकता के मामले में भी मिसाल पेश करेगी।

अनिल गलगली 
आरटीआई कार्यकर्ता

Voting in Mumbai: Will the Picture of Apathy Change This Time?

Voting in Mumbai: Will the Picture of Apathy Change This Time?

The financial capital of the country, Mumbai, is once again standing at one of the most crucial milestones of democracy. Voting is underway across the city for the Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) elections. The eyes of millions of voters are fixed on one key question will Mumbaikars come out in large numbers to exercise their right to vote this time, or will voter turnout remain limited as in the past?


In a metropolitan city like Mumbai, elections to local self-government bodies have always presented a paradox. On one hand, it is the richest and most influential municipal corporation in the country; on the other, citizens’ participation in elections has traditionally been relatively low. A busy lifestyle, work pressure, long commutes, voter apathy, and the mindset of “my vote won’t make a difference” are often cited as the main reasons.


BMC Elections and the History of Voter Turnout

If we look at the data from the last three decades, it becomes clear that voter turnout in Mumbai Municipal Corporation elections remained below 50 percent for a long time. Voter turnout in BMC elections (1992–2017):
1992: 49.14%
1997: 44.36%
2002: 42.05%
2007: 46.05%
2012: 44.75%
2017: 55.28%
From 1997 to 2012, four consecutive elections saw turnout confined between 42 and 46 percent. This period is considered the weakest phase of voter participation in Mumbai. However, in 2017, the picture changed—voter turnout rose to 55.28 percent, the highest ever recorded.


Why Did 2017 Break the Record?

The 2017 municipal election was different in many ways. The political atmosphere was extremely charged, with a direct and intense contest among major political parties. Local issues such as poor roads, waterlogging, waste management, corruption, and health and education services dominated public debate. Social media campaigns, citizen groups, and active youth participation played a major role in motivating voters. First-time voters and the urban middle class, in particular, turned up in large numbers at polling stations. As a result, for the first time in 25 years, BMC election turnout crossed the 55 percent mark.


The 2026 Election: Why Is It Special?

This time, the municipal election is considered extremely significant for several reasons. After a gap of nearly three years, citizens are getting the opportunity to elect their local representatives again. Until now, the municipal corporation was being run under an administrative setup. Public dissatisfaction and expectations regarding local civic issues have both increased. The State Election Commission and the administration have also made special efforts this time to boost voter turnout. Polling booths in housing societies, special facilities for senior citizens and persons with disabilities, voter awareness campaigns, and the use of digital platforms are all steps taken in this direction. The Election Commission has clearly stated its aim of achieving a 60 to 70 percent voter turnout in Mumbai.


The Real Test of Democracy: Citizen Participation

The Brihanmumbai Municipal Corporation is not just another civic body, it is the country’s most affluent and powerful local self-government institution. Roads, hospitals, schools, water supply, sanitation, and disaster management in the city are directly linked to it. In this context, electing corporators is not merely a political process; it is a decision that shapes Mumbai’s future. Low voter turnout means a small section of society decides the fate of the entire city. Higher turnout signifies strong public participation and accountable governance.

Voting on January 15 is not just a date, it is an opportunity for Mumbaikars to decide the direction of their city, exercise their rights, and strengthen democracy. If voter turnout matches or exceeds that of 2017, it will signal that Mumbai’s citizens are now taking local politics seriously. Hopefully, this time Mumbai will set an example not only as the financial capital of India, but also as a model of civic awareness.

Anil Galgali
RTI Activist

स्वानंद बाबा आश्रम में मकर संक्रांति का भव्य एवं सेवाभावी आयोजन

स्वानंद बाबा आश्रम में मकर संक्रांति का भव्य एवं सेवाभावी आयोजन

प. पू. स्वानंद बाबा सेवा न्यास की ओर से ठाणे के येऊर हिल्स स्थित प. पू. स्वानंद बाबा आश्रम में मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर भव्य धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सेवाभावी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आश्रम परिसर श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक सेवा के भाव से सराबोर नजर आया।कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके पश्चात भजन-कीर्तन की भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई, जिसमें भक्तों ने श्रद्धा के साथ सहभागिता की। भजनों की मधुर स्वर-लहरियों से पूरा वातावरण भक्तिमय बन गया।

इस अवसर पर सामाजिक सेवा के अंतर्गत महिलाओं को साड़ी का वितरण किया गया, वहीं जरूरतमंदों को ठंड से बचाव हेतु कंबलों का वितरण भी किया गया। सेवा न्यास की इस पहल की उपस्थित श्रद्धालुओं एवं अतिथियों ने सराहना करते हुए इसे मानवीय संवेदनाओं और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का प्रतीक बताया।

कार्यक्रम में पं. दुर्गाप्रसाद पाठक, प्रेम शुक्ल, शांति शुक्ल, मुद्रा शुक्ला, अनिल गलगली, उदय प्रताप सिंह, पंकज मिश्रा, शैलेंद्र श्रीवास्तव, राकेश पांडेय, संजय मिश्रा, राज पाण्डेय, विजय पाण्डेय, राम सजीवन तिवारी, अमित गुप्ता, आर. पी. सिंह, शिवसागर मिश्र सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। मुंबई के अलावा ठाणे, नालासोपारा, मीरा-भाईंदर और कल्याण से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आश्रम पहुंचे और उन्होंने कार्यक्रम का लाभ लिया।

Sunday, 4 January 2026

पूनम महाजन का कमबैक

पूनम महाजन का कमबैक

भाजपा वसई–विरार की मुख्य चुनाव प्रमुख नियुक्त


महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर पूनम महाजन का प्रभावशाली कमबैक देखने को मिला है। भारतीय जनता पार्टी ने आगामी वसई–विरार महानगरपालिका चुनाव के मद्देनज़र उन्हें भाजपा वसई–विरार की मुख्य चुनाव प्रमुख नियुक्त किया है। यह नियुक्ति मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की संस्तुति पर भाजपा महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण द्वारा की गई है। यह फैसला केवल एक संगठनात्मक नियुक्ति नहीं, बल्कि भाजपा की चुनावी रणनीति और राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।


पार्टी नेतृत्व का भरोसा और रणनीतिक निर्णय

पूनम महाजन भाजपा की उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने पार्टी को शहरी क्षेत्रों में मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई है। वे मुंबई उत्तर मध्य लोकसभा क्षेत्र से सांसद रह चुकी हैं और संगठनात्मक, प्रशासनिक व चुनावी अनुभव का लंबा रिकॉर्ड रखती हैं।
वसई–विरार जैसे तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्र में स्थानीय मुद्दों की गहरी समझ, कार्यकर्ताओं के साथ सीधा संवाद, चुनावी प्रबंधन का अनुभव को देखते हुए भाजपा ने पूनम महाजन को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।

मुख्यमंत्री की संस्तुति का महत्व

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की संस्तुति पर हुई यह नियुक्ति इस बात का संकेत है कि पार्टी नेतृत्व वसई–विरार चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रहा है। संगठन और सरकार के बीच समन्वय के साथ चुनावी लड़ाई लड़ी जाएगी। अनुभवी नेतृत्व को आगे लाकर पार्टी को निर्णायक बढ़त दिलाने की कोशिश है। प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण द्वारा की गई यह नियुक्ति संगठनात्मक संतुलन और चुनावी तैयारी का स्पष्ट संकेत देती है।

वसई–विरार चुनाव : भाजपा के लिए क्यों अहम


वसई–विरार महानगरपालिका क्षेत्र में बड़ी जनसंख्या, विविध सामाजिक और आर्थिक वर्ग के साथ बुनियादी सुविधाओं, ट्रैफिक, पानी, कचरा प्रबंधन और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों के कारण हमेशा से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। यहां भाजपा लंबे समय से संगठन विस्तार और सत्ता में मजबूत उपस्थिति के लिए प्रयासरत है। पूनम महाजन की नियुक्ति से पार्टी को सशक्त चुनावी नेतृत्व, बेहतर माइक्रो-मैनेजमेंट, वार्ड स्तर पर प्रभावी रणनीति मिलने की उम्मीद है। 

मुख्य चुनाव प्रमुख के रूप में भूमिका

मुख्य चुनाव प्रमुख के तौर पर पूनम महाजन की जिम्मेदारियां व्यापक होंगी, जिनमें चुनावी रणनीति और रोडमैप तैयार करना, वार्ड स्तर पर संगठन को सक्रिय करना, उम्मीदवार चयन और प्रचार की दिशा तय करना, कार्यकर्ताओं में समन्वय और उत्साह बनाए रखना और स्थानीय मुद्दों को चुनावी एजेंडे में प्रमुखता देना शामिल हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, वे जमीनी स्तर पर लगातार संपर्क और डेटा आधारित चुनाव प्रबंधन पर विशेष ध्यान देंगी।

राजनीतिक संदेश और संभावनाएं

पूनम महाजन के कमबैक से भाजपा ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पार्टी अनुभव और प्रदर्शन को प्राथमिकता दे रही है। स्थानीय निकाय चुनावों में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। मजबूत नेतृत्व के साथ मैदान में उतरकर सत्ता परिवर्तन का लक्ष्य रखा गया है।
यह नियुक्ति न केवल वसई–विरार, बल्कि पूरे महाराष्ट्र में भाजपा की चुनावी रणनीति को नई धार देने वाली मानी जा रही है।


पूनम महाजन का भाजपा वसई–विरार की मुख्य चुनाव प्रमुख बनना उनके राजनीतिक अनुभव और पार्टी नेतृत्व के भरोसे का प्रतीक है। उनके नेतृत्व में भाजपा को वसई–विरार महानगरपालिका चुनाव में संगठनात्मक मजबूती, रणनीतिक स्पष्टता और निर्णायक बढ़त मिलने की पूरी संभावना है। यह कमबैक आने वाले चुनावी मुकाबले को और भी दिलचस्प और निर्णायक बनाने वाला माना जा रहा है।