देव संस्कृति विश्वविद्यालय (देसंविवि), हरिद्वार में आयोजित ‘एआई फॉर संस्कृति इंटरनेशनल समिट’ ने तकनीक और मानवीय मूल्यों के समन्वय की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की। इस समिट का सबसे महत्वपूर्ण क्षण देसंविवि और जिनेवा स्थित अंतरराष्ट्रीय संस्था ग्लोबेथिक्स के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर औपचारिक हस्ताक्षर का रहा। इस अवसर पर देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या एवं ग्लोबेथिक्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. फादी दाऊ ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
यह साझेदारी वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) परिदृश्य में नैतिकता, सांस्कृतिक संवेदनशीलता एवं मानवीय मूल्यों के संस्थागत समावेश की दिशा में एक युगांतरकारी कदम मानी जा रही है। यह समझौता केवल शैक्षणिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि उच्च-स्तरीय अनुसंधान, नीतिगत विमर्श एवं मूल्य-आधारित तकनीकी ढांचे के विकास पर केंद्रित है—ऐसा ढांचा जो मशीनी बुद्धिमत्ता को मानवीय संवेदनाओं से जोड़े।
समिट के दौरान वैश्विक पहल को और विस्तार देते हुए देसंविवि ने इरोज इंटरनेशनल के साथ भी एक महत्वपूर्ण समझौता किया। इसके अंतर्गत संस्कृति जीपीटी एवं धर्म जीपीटी जैसे अभिनव, मूल्य-संचालित डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने पर सहमति बनी। इस एमओयू पर देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या एवं इरोज इंटरनेशनल की सीईओ डॉ. शिल्पा देसाई ने हस्ताक्षर किए। उल्लेखनीय है कि इरोज इंटरनेशनल को 12,000 से अधिक छोटी-बड़ी फिल्मों के निर्माण का श्रेय प्राप्त है।
इन प्रस्तावित समझौतों का उद्देश्य भारतीय ज्ञान-परंपरा, सांस्कृतिक विमर्श एवं नैतिक दृष्टिकोण को एआई तकनीक के माध्यम से वैश्विक मंच तक पहुँचाना है। यह पहल इस विचार को सशक्त करती है कि आधुनिक तकनीक केवल गणनात्मक उपकरण नहीं, बल्कि सभ्यताओं के मध्य संवाद, वैश्विक सद्भाव एवं लोक-कल्याण का प्रभावी माध्यम भी बन सकती है।
हरिद्वार की आध्यात्मिक पृष्ठभूमि से प्रारंभ हुआ यह अंतरराष्ट्रीय अभियान डिजिटल क्रांति को ‘संस्कार’ और ‘संस्कृति’ की गरिमा से मंडित करने का प्रयास है। यह समझौता इस बात का प्रतीक है कि भविष्य की एआई नीतियाँ केवल एल्गोरिदम और डेटा पर आधारित न होकर नैतिक चेतना एवं मानवीय संवेदनशीलता को भी केंद्र में रखेंगी।
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