Thursday, 10 May 2018

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हेलीकॉप्टर, विमान यात्रा पर सालाना रु 6 करोड़ का खर्च

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हेलीकॉप्टर और विमान यात्रा पर सालाना रु 6 करोड़ का खर्च होने की जानकारी  मुख्यमंत्री सचिवालय ने आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को दी हैं। हेलीकॉप्टर दुर्घटना और पायलट की कमी से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हेलीकॉप्टर, विमान यात्रा पर खर्च बढ़ गया हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मुख्यमंत्री सचिवालय से हेलीकॉप्टर, विमान यात्रा पर हुए खर्च की जानकारी मांगी थी। मुख्यमंत्री सचिवालय ने दी हुई जानकारी के अनुसार  2014-15 के आर्थिक वर्ष में रु 5.37 करोड़, 2015-16 इस वर्ष में रु 5.42 करोड़, 2016-17 इस आर्थिक वर्ष में रु 7.23 करोड़ खर्च किया गया हैं। मई 2017 में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हेलीकॉप्टर भारी दुर्घटनाग्रस्त होने से राज्य सरकार का हेलीकॉप्टर पूरीतरह क्षतिग्रस्त हुआ हैं। जिसके चलते राज्य सरकार को उस तारीख से हेलीकॉप्टर किराए पर लेना पड़ा था। जिससे रु 6.13 करोड़ यह सिर्फ हेलीकॉप्टर किराए पर खर्च हुआ हैं।  राज्य सरकार का खुद का भी विमान हैं लेकिन उसके पायलट ने नोकरी छोड़कर जाने से यह विमान उड़ान के लिए उपलब्ध नहीं था। इससे कभी ठेके पर पायलट तो कभी विमान ही किराए पर लेने से करीब रु 13.24 करोड़ राज्य सरकार ने खर्च किया हैं। बारबार पायलट नोकरी छोड़कर जाने से आखिर राज्य सरकार को विदेशी पायलट की सेवा लेने की प्रक्रिया का अवलंब करना पड़ा और उसके लिए रेगुलिटी और प्रशासकीय चीजों का पूर्तता करनी पड़ी।

राज्य सरकार का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने से जून 2017 में नए हेलीकॉप्टर खरीदी की प्रक्रिया आरंभ करनी पड़ी।  जागतिक टेंडर मंगाए गए हैं और इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शकता रखने के लिए एक कमिटी का गठन भी किया गया हैं। इस में भारतीय नौदल, कोस्ट गार्ड, भारतीय विमानतल प्राधिकरण के अधिकारियों का शुमार हैं।  इस नए खरीदी के संदर्भ में सरकारी आदेश भी जारी करने की जानकारी अनिल गलगली को मुख्यमंत्री सचिवालय ने दी हैं।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांच्या हेलिकॉप्टर आणि विमान प्रवासावर वर्षाकाठी सरासरी रु 6 कोटींचा खर्च

महाराष्ट्राचे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांच्या हेलिकॉप्टर आणि विमान प्रवासावर वर्षाकाठी सरासरी रु 6 कोटी रूपयांचा खर्च होत असल्याची माहिती मुख्यमंत्री सचिवालयाने आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांना दिली आहे. हेलिकॉप्टर अपघात आणि वैमानिकांच्या कमतरतेमुळे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांच्या हेलिकॉप्टर आणि विमान प्रवासाच्या खर्चात वाढ झाली आहे.

आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी मुख्यमंत्री सचिवालयाकडे हेलिकॉप्टर, विमान प्रवासावर झालेल्या खर्चाची माहिती मागितली होती. मुख्यमंत्री सचिवालयाने दिलेल्या माहितीनुसार 2014-15 या आर्थिक वर्षांत रु 5.37 कोटी रूपये, 2015-16 या वर्षांत रु 5.42 कोटी रूपये, 2016-17 या आर्थिक वर्षांत रु 7.23 कोटी रूपये खर्च करण्यात आला आहे. दरम्यान, मे 2017 मध्ये मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांच्या हेलिकॉप्टरला जबर अपघात झाल्याने राज्य सरकारचे हेलिकॉप्टर पूर्णपणे नादुरूस्त झाले. त्यामुळे राज्य सरकारला त्या तारखेपासून हेलिकॉप्टर भाड्याने घ्यावे लागत आहे. त्यामुळे रु 6.13 कोटी रुपये हे हेलिकॉप्टर भाड्यापोटी खर्च झाले आहेत. राज्य सरकारचे स्वत:चे विमान सुद्धा आहे. परंतू त्याचे वैमानिक नोकरी सोडून गेल्यामुळे सुमारे वर्षभराहून अधिक काळ ते विमान सुद्धा उड्डाणास उपलब्ध नव्हते. त्यामुळे कधी कंत्राटी वैमानिकांवर तर कधी विमान भाड्याने घेण्यावर सुमारे 13.24 कोटी रूपये राज्य सरकारला खर्च करावा लागला आहे. वारंवार वैमानिक नोकरी सोडून जात असल्याने अखेर राज्य सरकारला विदेशी वैमानिकांची सेवा घेण्याची प्रक्रिया करावी लागली आणि त्यासाठी नियामक आणि प्रशासकीय बाबींची पूर्तता करावी लागली.

राज्य सरकारचे हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त झाल्याने जून 2017 च्या अखेरीस नवीन हेलिकॉप्टर खरेदीची प्रक्रिया प्रारंभ करण्यात आली आहे. जागतिक निविदा मागविण्यात आल्या आणि या संपूर्ण प्रक्रियेत पारदर्शिता राखण्यासाठी एक समिती गठीत करण्यात आली. त्यात भारतीय नौदल, कोस्ट गार्ड, भारतीय विमानतळ प्राधीकरणच्या अधिकार्‍यांचा समावेश आहे. या नवीन खरेदीसंदर्भातील शासकीय आदेश सुद्धा जारी करण्यात आला आहे, अशी माहिती सुद्धा मुख्यमंत्री सचिवालयाने अनिल गलगली यांना दिली आहे.

Monday, 7 May 2018

मुंबई में संपन्न आरटीआई बचाव आंदोलन को प्रोफेशनल काँग्रेस ने दिया समर्थन

पुरे देश मे आरटीआई कानून का इस्तेमाल और इससे सत्ता में बैठे पार्टी को होनेवाली परेशानी के मद्देनजर इस कानून की धार को कम करने के लिए सभी ओर से प्रयास चल रहा हैं। मुंबई के यशवंतराव चव्हाण सभागृह में 'आरटीआई बचाव' इस अभियान के तहत 'सत्यमेव जयते' आयोजित परिसंवाद में काँग्रेस के प्रोफेशनल विभाग ने भी इस आंदोलन को अपना समर्थन घोषित किया।  

प्रोफेशनल काँग्रेस के महाराष्ट्र मुंबई पूर्व विभाग द्वारा आयोजित परिसंवाद में पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेष गांधी और आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली के समेत काँग्रेस प्रवक्ता और प्रोफेशनल काँग्रेस की महाराष्ट्र ईकाई के अध्यक्ष संजय झा ने हिस्सा लिया। इस परिसंवाद में विभिन्न क्षेत्र के  प्रोफेशनर्स और आरटीआई कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। पॅनलिस्ट शैलेश गांधी और अनिल गलगली ने उपस्थितजनों द्वारा अकार्यक्षम सूचना आयुक्त, अपील सुनवाई में देरी के अलावा निजी क्षेत्र और राजनीतिक पार्टियों को आरटीआई के दायरे में लाने पर विभिन्न सवाल पूछे। जिसका जबाब द्वय पॅनलिस्ट ने दिया।

श्री गांधी ने राजनीतिक इच्छाशक्ती के अभाव से सरकार में पारदर्शिकता लाने के लिए सक्षम ऐसा आरटीआई कानून कार्यान्वित नहीं होने पर चिंता जताते हुए कहा कि व्यक्तिगत ताकत को पहचाने और इसके लिए पहल करे ताकि अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए इस क़ानून को कोई कमजोर नहीं कर पाए।  

अनिल गलगली ने समाज में बलशाली स्थान पर बैठे लोगों से खतरा पैदा होने पर कैसे बचें, इसपर बात रखते हुए कहा कि सत्ता में जो भी आता हैं वह इस कानून का विरोध करता हैं और विपक्ष हमेशा इसके समर्थन में खड़े रहते हैं। मीडिया यह महत्वपूर्ण हिस्सा हैं क्योंकि हर एक की पोल जनता के सामने खोलने के लिए मदद होती हैं।

डॉ शशी थरुर की अध्यक्षता और उपाध्यक्ष मिलिंद देवरा के मार्गदर्शन तले 'आरटीआई बचाव' यह परिसंवाद आयोजित किया गया था। इसके पहले भी कई सारी गतिविधियों को अंजाम दिया गया हैं । 

मुंबईतील आरटीआय बचाव आंदोलनास प्रोफेशनल काँग्रेसचा पाठिंबा

देशभरात आरटीआय कायदाचा वापर आणि त्यामुळे सत्तेवर असणाऱ्या पक्षाला होणारा त्रास पहाता या कायदाची धार कमी करण्याचा प्रयत्न चोहोबाजूंनी होत आहे. मुंबईतील यशवंतराव चव्हाण सभागृहात 'आरटीआय वाचवा' या अभियान अंतर्गत  'सत्यमेव जयते' चर्चासत्रात काँग्रेसच्या प्रोफेशनल विभागाने आंदोलनास पाठिंबा दिला आहे.

प्रोफेशनल काँग्रेसच्या महाराष्ट्र मुंबई पूर्व विभागाने आयोजित चर्चासत्रात माजी केंद्रीय माहिती आयुक्त शैलेश गांधी आणि आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांच्यासोबत काँग्रेसचे प्रवक्ते आणि प्रोफेशनल काँग्रेसच्या महाराष्ट्र विभागाचे अध्यक्ष संजय झा यांनी भाग घेतला. या चर्चासत्रात विविध क्षेत्रातील प्रोफेशनर्स आणि आरटीआय कार्यकर्ते यांनी भाग घेतला. पॅनलिस्ट शैलेश गांधी आणि अनिल गलगली यांस उपस्थितजणांनी अकार्यक्षम माहिती आयुक्त, अपील सुनावणीत दिरंगाई तसेच खाजगी क्षेत्र आणि राजकीय पक्षांना आरटीआयच्या कक्षेत आणण्याबाबत विविध प्रश्न विचारले ज्यांची उत्तरे दोन्ही पॅनलिस्ट यांनी अचूक दिली.

श्री गांधी यांनी राजकीय इच्छाशक्तींचा अभावामुळे शासनात पारदर्शक आणण्यासाठी सक्षम असलेला आरटीआय कायदा कार्यान्वित होत नसल्याची खंत व्यक्त करत प्रतिपादन केले की व्यक्तिगत ताकद ओळखा आणि यासाठी पुढाकार घ्यावा जेणेकरुन चुकीच्या लाभासाठी हा कायदा कमजोर होणार नाही.

अनिल गलगली यांनी समाजात बलशाली स्थानी असलेल्या लोकांपासून धोका उदभवला तर कोणती काळजी घेतली गेली पाहिजे, यावर भाष्य करत प्रतिपादन केले की सत्तेत असलेले नेहमीच या कायदाच्या विरोधात असतात आणि विरोधी पक्ष हा नेहमी या कायदाचे समर्थन करतात. मीडिया हा महत्वाचा भाग असून प्रत्येक गोष्टीचा पर्दाफास हा जनतेसमोर आणण्यासाठी मदतच होते.

डॉ शशी थरुर यांच्या अध्यक्षतेखाली आणि उपाध्यक्ष असलेले मिलिंद देवरा यांच्या मार्गदर्शनाखाली 'आरटीआय वाचवा' हे चर्चासत्र आयोजित केले गेले असून यापूर्वी सुद्धा अनेक उपक्रम राबविले गेले आहेत

RTI Bachao Campaign gets support from Professionals Congress in Mumbai

Past few years have witnessed serious roadblocks in the smooth implementation of the RTI Act. To highlight the various issues regarding this landmark Act, AIPC Maharashtra's Mumbai East Chapter organised an Interactive session on 5th May at YB Chavan Center in Mumbai. Eminent RTI Activists Shailesh Gandhi and Anil Galgali who have been spear heading the RTI movement in Mumbai as well as in the Country were part of the panel discussion that was moderated by Sanjay Jha, INC spokesperson and President of AIPC Maharashtra. 

The audience comprising of professionals from various fields and RTI activists were treated to an intense and engaging conversation.The panelists Shailesh Gandhi and Anil Galgali also answered various questions from the audience concerning ineffective Information Commissions, delays in disposing appeals, inclusion of Private sector and Political parties in the ambit of RTI etc .

Mr Gandhi was critical about the lack of political will to execute such an empowering law for transparency in governance. He called upon the audience to realise the power of the individual and take initiative so that this tool is not weakened by vested interests.

Mr Galgali advised the activists on what measures they should take in case they receive threats for filing RTI involving those in powerful positions.He laid stress on the role of media to eliminate such threats by bringing this into public.

Right to Information was the fifth in a series of interactive topics that AIPC Maharashtra has taken up. Earlier discussions have been held on women empowerment, state of the nation, urban governance, etc. All India Professionals Congress is a department of AICC (All India Congress Committee) under the Chairmanship of Dr. Shashi Tharoor. Milind Deora is the Dy. Chairman & Regional Co-Coordinator (West). The platform is to attract the professionals to engage in active politics and contribute towards Nation building.

Wednesday, 2 May 2018

आरटीआई का इस्तेमाल कर पारदर्शिता बढ़ाने पर होगा जोर

देश में पहली बार गठित आरटीआई एक्टिविस्ट फोरम की राज्यव्यापी परिषद संपन्न महाराष्ट्र दिवस एवं विश्व मजदूर दिन के मद्देनजर मुंबई के प्रभादेवी स्थित भूपेश गुप्ता भवन में संपन्न हुई. इस परिषद में विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई. इसके अलावा आरटीआई एक्ट के सुधार के लिए कटिबद्ध होकर पूरे राज्य में मुहिम छेड़ने का एेलान किया गया. इस मौके पर वरिष्ठ विचारक शिवाजी राऊत द्वारा बनाई गई एक श्वेत पत्रिका का विमोचन किया गया. आरटीआई का इस्तेमाल कर पारदर्शिता बढ़ाने पर काम करने  का एजेंडा तय किया गया।

प्रभादेवी स्थित भूपेश गुप्ता भवन में आयोजित एक दिवसीय राज्यव्यापी परिषद की अध्यक्षता रिटायर्ड न्यायमूर्ति वी. पी. पाटिल ने की. इस परिषद का उद्घाटन केंद्रीय पूर्व सूचना आयुक्त शैलेष गांधी ने किया. अपने उद्घाटन भाषण में शैलेष गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में अगर नागरिक राजा और रानी है, तो आपको आगे आना चाहिए और जानकारी उसी लहजे से मांगनी चाहिए. आज आरटीआई एक्ट महत्वपूर्ण कानून बन गया है. आरटीआई एक्टिविस्ट को आम लोगों के प्रश्नों पर काम करना चाहिए. हर एक महीने में एक आरटीआई आवेदन करने की आवश्यकता है. 

वरिष्ठ विचारक शिवाजी राऊत ने कहा कि आजादी के बाद आरटीआई एक्ट एक एेसा कानून है, जो नागरिकों को अपने अधिकारों की गारंटी दिलवाता है. आज इस कानून को मजबूत बनाने की आवश्यकता है, जो आने वाले दिनों में नई क्रांति लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. बैंकिंग विशेषज्ञ विश्वास उटगी ने कहा कि सरकार इस कानून को अपने नजरिये से देखती है. इस कानून को खत्म करने के लिए प्रयास जारी है. हमें विषयों को लेकर एेसे कार्यकर्ताओं को तैयार करना है, जो गलत चीजों को रोकने में कामयाब हो सकें. 

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने आरटीआय को कैसे सत्ताधारियों से खतरा हैं इसपर बोलते हुए कहा कि सरकारी स्तर पर एवं अफसरशाही स्तर पर आरटीआई को बदनाम करने की साजिश चल रही है. अगर सरकार हर एक जानकारी स्वयंस्फूर्त होकर अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करती है, तो किसी भी व्यक्ति को आरटीआई आवेदन करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी. जीवन में हर एक व्यक्ति को आरटीआई आवेदन करना चाहिए ताकि उसे भी इसकी जानकारी और यथार्थ स्थिती का आकलन होगा। सूचना आयोग में सूचना आयुक्त के पद रिक्त रखकर सरकार उनकी तरह सोच रखनेवाले लोगों को लाभान्वित कर रहे हैं, ताकि आरटीआई का असर कम हो. 

कार्यक्रम की अध्यक्षता करनेवाले पूर्व न्यायमूर्ति वी. पी. पाटिल ने कहा कि आज सूचना आयोग तो है, लेकिन आम लोगों को इसके खिलाफ अपील करने के लिए ट्रिब्यूनल की आवश्यकता है. हर एक व्यक्ति को एक आरटीआई आवेदन करने की आवश्यकता है, ताकि उन्हें भी पता चले कि आखिरकार आरटीआई क्या होता है?

आरटीआई एक्टिविस्ट फोरम के अध्यक्ष सुधाकर कश्यप ने कहा कि लोग एक साथ काम करें और बड़े पैमाने पर सरकार द्वारा किए गए वादे सचमुच में कार्यान्वित होते हैं कि नहीं इस पर ध्यान रखने के लिए इस फोरम का गठन किया गया है. यह फोरम गैर राजनीतिक है और यहां पर आनेवाले हर एक व्यक्ति की समस्या को समझकर उसका निराकरण करने के लिए फोरम काम करेगा. कार्यक्रम का सूत्र संचालन अर्चना ताजने ने किया तथा आभार प्रदर्शन प्रिं रमेश खानविलकर ने माना. इस मौके पर आरटीआई कार्यकर्ता प्रवीण वाटेगावकर, अनिल गलगली, रमेश खानविलकर, रवि चिपळूणकर, योगेश दळवी का सम्मान किया गया।

इस परिषद में मुंबई ही नहीं ठाणे, कल्याण, नवी मुंबई, मीरा भायंदर, नाशिक इन इलाकों से भी लोग आए थे. पहले ही राज्यव्यापी परिषद में आम लोगों ने आरटीआई एक्टिविस्ट फोरम की सदस्यता ग्रहण की. आरटीआई एक्टिविस्ट की राज्यव्यापी परिषद को सफल बनाने के लिए संतोष सावर्डेकर, राजन पवार, स्वाति पाटिल, राजी सरोदे, राहुल जाधव, गिरीश रावराणे, विनोद परब, अबु बकर खान, अरुण गायकवाड़, आनंद इंगले, बाबा सावंत, प्रवीण येरूनकर, अरुण पनीकर का योगदान रहा.

आरटीआयचा वापराने पारदर्शकता वाढविण्यावर दिला जाणार भर

देशात प्रथमच स्थापित आरटीआय ऍक्टिव्हिस्ट फोरमच्या वतीने राज्यव्यापी परिषद महाराष्ट्र दिन आणि जागतिक कामगार दिनानिमित्त मुंबईतील प्रभादेवी येथील भूपेश गुप्ता भवन येथे  संपन्न झाली. या परिषदेत विविध बिंदूवर चर्चा झाली. याच शिवाय आरटीआय कायद्यात सकारात्मक सुधारासाठी संकल्पित होत संपूर्ण राज्यात जनजागृती करण्याची घोषणा करण्यात आली. यावेळी ज्येष्ठ विचारवंत शिवाजी राऊत यांनी तयार केलेल्या श्वेतपत्रिकेचे प्रकाशन करण्यात आले. आरटीआयचा वापराने पारदर्शकता वाढविण्यावर भर देण्याची जाहीर करण्यात आले.

प्रभादेवी येथील भूपेश गुप्ता भवन येथे आयोजित एक दिवसीय राज्यव्यापी परिषदेच्या अध्यक्षस्थानी माजी न्यायमूर्ति व्ही. पी. पाटील हे होते. या इस परिषदेचे उद्घाटन केंद्रीय माजी माहिती आयुक्त शैलेश गांधी यांनी केले. आपल्या उद्घाटन भाषणात शैलेश गांधी म्हणाले की लोकशाहीत जनता राजा आणि रानी आहे असे आपले मान्य करत आहो तर सर्वांनी पुढे येत माहितीसुद्धा त्याच पद्धतीने मागितली पाहिजे. आज आरटीआय कायदा एक महत्वपूर्ण कायदा बनला आहे. आरटीआय ऍक्टिव्हिस्ट यांनी सामान्य जनतेच्या प्रश्नावर काम करणे गरजेचे आहे. प्रत्येक महिन्याला एक आरटीआय अर्ज करण्याची आवश्यकता आहे. 

ज्येष्ठ विचारवंत शिवाजी राऊत म्हणाले की स्वातंत्र्य मिळाल्यानंतर आरटीआय कायदा असा कायदा आहे जो जनतेला आपले अधिकार मिळवून देण्याची हमी देतो. आज या कायद्याला बळकटी देण्याची आवश्यकता आहे जो येणाऱ्या काळात नवीन क्रांती आणण्यात महत्वाची भूमिका निभावेल. बँक तज्ञ विश्वास उटगी यांनी सांगितले की शासन आपल्या नजरेतून या कायद्याकडे बघते आणि या कायद्यास संपविण्याचा प्रयत्न करत आहे. आपल्याला विषयाला निवडत अश्या कार्यकर्त्यांला तयार करण्याची गरज आहे जे चुकीच्या बाबी रोखण्यात यशस्वी ठरतील. 

आरटीआय कार्यकर्ता अनिल गलगली यांनी आरटीआय कायद्याला कशा राज्यकर्त्यांकडून धोका आहे यावर भाष्य करत प्रतिपादन केले की शासन आणि शासकीय बाबूच्या स्तरावर आरटीआय कायद्याला बदनाम करण्याचे षडयंत्र सुरु आहे. जर शासन प्रत्येक माहिती स्वतःहून संकेतस्थळावर अपलोड केली तर कोणत्याही नागरिकाला माहितीचा अधिकाराचा अर्ज करण्याची वेळच येणार नाही. आयुष्यात प्रत्येक व्यक्तीने एक तरी आरटीआय अर्ज केला पाहिजे जेणेकरुन त्यास या कायद्याची माहिती आणि सत्यस्थितीची कल्पना येईल. माहिती आयोगात माहिती आयुक्तांचे पद रिक्त ठेवत शासन त्यांच्यासारखी विचारसरणी ठेवणा-या लोकांस लाभान्वित करत आहे जेणेकरुन या आरटीआय कायदाची धार आणि प्रभाव कमी होईल. 

कार्यक्रमाच्या अध्यक्षस्थानी असलेले माजी न्यायमूर्ति व्ही. पी. पाटील यांनी प्रतिपादन केले की आज माहिती आयोग तर आहे पण या आयोगाच्या विरोधात अपील करण्यासाठी ट्रिब्यूनल आवश्यकता आहे. प्रत्येक व्यक्तीला एक तरी आरटीआय अर्ज करण्याची आवश्यकता आहे जेणेकरुन त्यास या कायदाची माहिती मिळेल.

आरटीआय ऍक्टिव्हिस्ट फोरमचे अध्यक्ष सुधाकर कश्यप यांनी या फोरमच्या स्थापनेची माहिती देत सांगितले की लोकांनी एकत्र येत सामूहिकरित्या काम करणे आणि शासनाने केलेल्या जाहिरातीवर खरोखरच काम झाले किंवा नाही? यावर लक्ष ठेवण्यासाठी या फोरमची स्थापना करण्यात आली असून हे बिगर राजकीय आहे आणि येथे येणाऱ्या प्रत्येक व्यक्तींच्या समस्येचे निराकरण करण्याचे काम केले जाईल. या कार्यक्रमाचे सूत्र संचालन अर्चना ताजने यांनी केले तर आभार प्रदर्शन प्रिं रमेश खानविलकर यांनी मानले. यावेळी आरटीआय कार्यकर्ते प्रवीण वाटेगावकर, अनिल गलगली, रमेश खानविलकर, रवि चिपळूणकर, योगेश दळवी यांचा सत्कार करण्यात आला.

या परिषदेत मुंबई, ठाणे, कल्याण, नवी मुंबई, मीरा भायंदर, नाशिक या विभागातील कार्यकर्ते आले होते. आरटीआय ऍक्टिव्हिस्ट फोरमची राज्यव्यापी परिषद यशस्वी बनविण्यात संतोष सावर्डेकर, राजन पवार, स्वाति पाटिल, राजी सरोदे, राहुल जाधव, गिरीश रावराणे, विनोद परब, अबु बकर खान, अरुण गायकवाड़, आनंद इंगले, बाबा सावंत, प्रवीण येरूनकर, अरुण पनीकर यांनी परिश्रम घेतले.