मुलुंड में ‘नारी शक्ति नवयुग जननी’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन
अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा आयोजित “नारी शक्ति नवयुग जननी” कार्यक्रम का भव्य आयोजन मुंबई के मुलुंड स्थित कालिदास ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ। इस अवसर पर देशभर की सशक्त नारियों को नारी जागरण एवं सशक्तिकरण विषय पर विचार-विमर्श हेतु आमंत्रित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी द्वारा किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने अखंड दीप प्रज्वलन एवं परम वंदनीया माताजी भगवती देवी शर्मा के जन्म-शताब्दी वर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि माताजी ने भारतवर्ष में नारी जागरण की जो अलख जगाई, वह आज एक सशक्त आंदोलन का रूप ले चुकी है।
उन्होंने बताया कि नारी जागरण कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षा, आत्मविश्वास, समान अधिकार और सामाजिक चेतना के विकास पर विशेष बल दिया गया। यह वह प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से महिलाएँ अपने अधिकारों, कर्तव्यों और क्षमताओं को पहचानकर समाज की मुख्यधारा में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब उसकी आधी आबादी—नारी—सशक्त और जागरूक हो।
श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने अपने निजी अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे स्वयं पिछले 40 वर्षों से गायत्री परिवार से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा, “सशक्त नारी शोर नहीं करती, वह परिवार में संस्कारों का संचार कर एक सशक्त समाज का निर्माण करती है।”
उन्होंने मोदी सरकार द्वारा नारी सशक्तिकरण हेतु संचालित योजनाओं—बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, सुकन्या समृद्धि योजना तथा लाड़ली बहना योजना का भी उल्लेख किया।
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए न्यूक्लियर साइंटिस्ट श्रीमती दीप्ति भचावत ने विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विज्ञान बाहरी जगत की खोज है, जबकि अध्यात्म आंतरिक जगत की। एक नारी जब परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए कार्य करती है, तो वह समाज के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करती है।
इसके अतिरिक्त डॉ. संध्या शेनॉय, पूर्णिमा शिरीशकर, भाग्यलक्ष्मी गोहोकर, शायना एनसी एवं मंजुश्री पाटील ने भी अपने विचार व्यक्त किए। ‘वंडर वुमन ऑफ इंडिया’ के नाम से विख्यात श्रीमती सीमा राव, जो भारतीय विशेष रक्षा बलों को प्रशिक्षण देती हैं, ने वैश्विक स्तर पर भारतीय नारी के बढ़ते वर्चस्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के समापन सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार के प्रति-कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि प्राचीन भारतीय समाज में नारी को अत्यंत सम्मानपूर्ण स्थान प्राप्त था। गार्गी, मैत्रेयी और इला जैसी विदुषियों ने ज्ञान के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन और कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने न्याय, धर्म और जनकल्याण के सिद्धांतों पर आधारित आदर्श शासन दिया तथा काशी विश्वनाथ मंदिर सहित देशभर में अनेक धार्मिक और सामाजिक संरचनाओं का निर्माण कराया।
डॉ. पंड्या ने कहा कि आधुनिक युग में शिक्षा, संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक आंदोलनों के कारण नारी जागरण को नई दिशा मिली है। आज महिलाएँ शिक्षा, विज्ञान, राजनीति, खेल, प्रशासन और व्यापार जैसे क्षेत्रों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। पंचायत से लेकर संसद तक उनकी भागीदारी सशक्तिकरण का सशक्त प्रमाण है।
अंत में उन्होंने कहा कि नारी जागरण केवल महिलाओं का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। जब नारी सशक्त होगी, तभी परिवार सुदृढ़ होगा और राष्ट्र प्रगति करेगा। अखिल विश्व गायत्री परिवार नारी जागरण की पताका लेकर विश्वभर में ऐसा संदेश दे रहा है, जिसे वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया जा रहा है। इन्हीं शब्दों के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस अवसर पर अखिल विश्व गायत्री परिवार के हजारों कार्यकर्ताओं के साथ-साथ भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री प्रेम शुक्ल, श्रीमती शांति प्रेम शुक्ल, वरिष्ठ पत्रकार श्री अनिल गलगली, अमित नारायण, विनीता नारायण, मीनल मित्तल, उपेंद्र चौबे, डॉ. वरुण मानेक, इंद्रभूषण गोखले एवं प्रह्लाद पांचाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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