Tuesday, 22 March 2022

Shiva Jayanti was celebrated in Kurla by 125 Mandal's

Kurlekar decided to celebrate Shiva Jayanti on the same day i.e. Falgun Vadya Tritiya from the year 2019 by announcing that 'Kurlekar together, one Shiva Jayanti is everywhere'. 125 local Mandal's, NGO, political parties in Kurla came together and started marching together. In the year 2019, the year 2020, the procession was taken out in a grand manner. But the Corona crisis in 2021 did not lead to a grand procession. But this year, Kurlekar came together and celebrated Shiva Jayanti with a grand procession. This year's Celebration was something different. Drums, traditional halgi instruments, lezim troupe of Shrikrishna Krida Mandal girls, Shiva-era weapons demonstrations, performers in the guise of Chhatrapati Shivaji and Mavala captured everyone's attention. In this procession, every spot procession welcome By local Resident. A total of 5000 Resident were present in the procession.

In this procession, women in traditional attire performed Shivaraya in the Sarveshwar temple. Deputy Commissioner of Police Pranab Ashok welcomed Chhatrapati Shivaji Maharaj with a garland. On this occasion MLA Mangesh Kudalkar, RTI activist Anil Galgali, former corporator Dr. Anuradha Pednekar, Manoj Nathani, Umesh Gaikwad of Chhatrapati Shivaji Maharaj Janmotsav Sohla Samiti, Ganesh Chikne, Dilip Sarate, Bhanudas Gade, Ajay Balu Yadav, Kiran Surve, Kishore Sonawane, Ajay Shukla , Kiran Damle as well as office bearers of all political parties and circles were present. This magnificent procession has created an atmosphere of excitement and elation in Kurlekar.

Monday, 21 March 2022

समाज को दिशा देनेवाले ग्रंथालय कर्मियों की मांग पर सरकार उदासीन- अनिल गलगली

मुंबई के आझाद मैदान में महाराष्ट्र राज्य ग्रंथालय संघ की ओर से विभिन्न मांग को लेकर किया गया आंदोलन को समर्थन देते हुए आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने कहा कि समाज को दिशा देनेवाले ग्रंथालय कर्मियों की मांग पर सरकार उदासीन हैं.

आजाद मैदान में महाराष्ट्र राज्य ग्रंथालय संघ की ओर से विभिन्न मांग को लेकर आंदोलन चल रहा हैं. आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने कहा कि वर्ष 2012 से नई मान्यता नहीं दी गई हैं और कार्यरत ग्रंथालय की अवस्था दयनीय हैं. राज्य के उच्च व तंत्र शिक्षा विभाग आखिर क्या करता हैं ? ऐसा सवाल करते हुए गलगली ने कहा कि खास ऐसे मुंबई मराठी ग्रंथ संग्रहालय को 5 करोड़ का अनुदान दिया जाता हैं और ग्रामीण क्षेत्र के ग्रंथालय की ओर सरकार का ध्यान नहीं हैं. ग्रंथालय सेवकों की अनंत समस्याएं हैं. उस ओर ताबड़तोड़ ध्यान देने की आवश्यकता हैं. गलगली ने आगे कहा कि शिक्षा क्षेत्र में ग्रंथालय हैं लेकिन ग्रंथपाल ही नहीं हैं, ऐसी भयानक परिस्थिती हैं. पढ़ने की संस्कृती का दावा करनेवाली सरकार ईमानदारी से काम करनेवाले कर्मचारियों को किंमत नहीं दे रही हैं,यह खेदजनक हैं. इस मौके पर डॉ गजानन कोटेवार, डॉ दत्ता परदेशी, एड प्रवीण पाटील, सुनील कुबल, डॉ कृष्णा नाईक, अनिल सोनावणे, डॉ राजशेखर वालेकर, प्रमोद खानोलकर आदी उपस्थित थे.
महाराष्ट्र राज्य ग्रंथालय संघ के आंदोलन को अनिल गलगली का खुला समर्थन

समाजाला दिशा देणा-या ग्रंथालय कर्मचाऱ्यांच्या मागण्यांबाबत सरकार उदासीन- अनिल गलगली

मुंबई येथील आझाद मैदानात महाराष्ट्र राज्य ग्रंथालय संघाच्या वतीने विविध मागण्यांसाठी सुरु असलेल्या आंदोलनास पाठिंबा दर्शवित आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी प्रतिपादन केले की समाजाला दिशा देणा-या ग्रंथालय कर्मचाऱ्यांच्या मागण्यांबाबत सरकार उदासीन आहे. 

आझाद मैदान येथे महाराष्ट्र राज्य ग्रंथालय संघाच्या वतीने विविध मागण्यांसाठी आंदोलन सुरु आहे. आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली म्हणाले की वर्ष 2012 पासून नवीन मान्यता दिली नसून अस्तित्वात असलेल्या ग्रंथालयाची अवस्था बिकट आहे. राज्याचे उच्च व तंत्र शिक्षण खाते नेमके काय करत आहे? असा सवाल करत गलगली म्हणाले की विशिष्ट असे मुंबई मराठी ग्रंथ संग्रहालयाला 5 कोटींचे अनुदान दिले जाते आणि ग्रामीण भागातील ग्रंथालयाकडे शासनाचे दुर्लक्ष होत आहे. ग्रंथालय सेवकांचे अनंत प्रश्न आहे त्याकडे तत्काळ लक्ष देणे गरजेचे आहे. गलगली पुढे म्हणाले की शिक्षण क्षेत्रात ग्रंथालय आहेत पण ग्रंथपालच नाही अशी दारुण परिस्थिती आहे.  वाचन संस्कृतीच्या बाता करणारे शासन ते काम प्रामाणिकपणे काम करणाऱ्या कर्मचाऱ्यांना वा-यांवर सोडत आहे, ही चिंताजनक बाब आहे. यावेळी डॉ गजानन कोटेवार, डॉ दत्ता परदेशी, एड प्रवीण पाटील, सुनील कुबल, डॉ कृष्णा नाईक, अनिल सोनावणे, डॉ राजशेखर वालेकर, प्रमोद खानोलकर आदी उपस्थित होते.

Thursday, 17 March 2022

267 करोड़ के 19 में से 17 ऑक्सिजन प्लांट समय पर बिठाने में मनपा अधिकारी और ठेकेदार फेल

कोरोना समय में विवादित ऑक्सिजन प्लांट के टेंडर में हुई अनियमितता और अधिक मूल्य देने का आरोप लगाया गया था। बड़ा दावा कर मुंबई में बिठाया गया 267 करोड़ के मूल्य के 19 में से 17 ऑक्सिजन प्लांट का काम समय अवधि तक पूर्ण करने में ठेकेदार और उनके सरंक्षक अधिकारी फेल होने की जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को उपलब्ध हुए जवाब से सामने आई हैं वही दूसरीओर कुछ कार्रवाई करने के नाम पर ठेकेदारों को सिर्फ 4.07 करोड़ का नाममात्र जुर्माना लगाकर अभय देने का काम हुआ हैं। 


आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मुंबई मनपा से मुंबई में बिठाए गए ऑक्सिजन प्लांट की जानकारी मांगी थी। मनपा के यांत्रिकी व विद्युत विभाग के कार्यकारी अभियंता शाम भारती ने अनिल गलगली को 19 प्लांट की जानकारी दी हैं इसमें से 17 ऑक्सिजन प्लांट का निर्माण काम समय पर पूर्ण नहीं किया गया। इस 19 में से 12 काम मेसर्स हायवे कन्स्ट्रक्शन कंपनी को वहीं 7 काम यह मेसर्स जीएसएन असोसिएट को दिया गया हैं। 

मुंबई महानगरपालिका ने पहिले चरण में मेसर्स हायवे कन्स्ट्रक्शन कंपनी को 9 स्थानों पर  22,790 एलपीएम प्लांट का निर्माण करने के लिए 25 जून 2021 को कार्यादेश जारी किया गया जिसकी किंमत 77.15 करोड़ इतनी हैं। सभी काम की अवधि  30 दिन की थी। वीएन देसाई, बीडीबीए, कस्तुरबा, नायर, कूपर और केईएम में प्लांट 19 अगस्त 2021 को पूर्ण किया गया और 20 अगस्त 2021 को कुर्ला भाभा, 25 अगस्त 2021 को सायन वहीं 26 अगस्त 2021 को जीटीबी में काम पूर्ण किया गया। इसमें 3.06 करोड़ का जुर्माना लगाया गया। इस कारवाई को ठेकेदार ने चुनौती दी हैं। 

पहिले चरण में पूरी तरह फेल होने के बाद असफल साबित हुए मेसर्स हायवे कन्स्ट्रक्शन कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने के बजाय मनपा ने मेहरबान होकर दूसरे चरण में और 59.36 करोड़ का नया काम का कार्यादेश 27 सप्टेंबर 2021 को जारी किया गया। इसमें 19,760 एलपीएम प्लांट निर्माण का काम था। दहिसर और ऑक्टय नाके का काम समय पर पूरा किया गया लेकिन केजे सोमय्या स्थित काम 12 दिन की देरी से पूरा किया गया। 

तीसरा चरण इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि प्रोजेक्ट की किंमत यह 130.86 करोड़ इतनी हैं जिसमें 43,500 एलपीएम प्लांट का निर्माण करने का काम यह मेसर्स जीएसएन असोसिएटस को दिया गया। कार्यादेश 27 सितंबर 2021 को जारी किया गया लेकिन एक भी काम निश्चित अवधि में पूरा नहीं किया गया। 12 से 86 दिन की देरी से हुई लेकिन इसमें ठेकेदार को मनपा अधिकारियों ने बचाने का काम करते हुए सिर्फ 1.04 करोड़ का जुर्माना लगाया गया। इसमें बीकेसी फेज 1, बीकेसी फेज 2, नेस्को, दहिसर चेकनाका, भायखला और मुलुंड का रिचर्डसन अँड कृडस वहीं कांजूरमार्ग को लेकर 7 स्थान हैं।

पहिले चरण में 30 दिन यह काम को पूरा करने की समय अवधि थी जिसे दुसरे और तीसरे चरण में बढ़ाकर 45 दिन किया गया। इस खेल में ठेकेदार को मदद करने के बावजूद 8 काम यह अवधि बढ़ाकर देने के बाद भी समय पर पूरे नहीं हो पाए। काम जो समय में पूरे नहीं हो पाए उसके लिए जो खुलासा किया गया वह समझ से परे हैं। इसमें बड़ी बारिश और बिजली आपूर्ति को आगे किया गया है। एक स्थान पर प्लांट निर्माण के लिए मौजूदा घरों का निष्कासन न होने का कारण दिया गया हैं।

अनिल गलगली का कहना हैं कि ऑक्सिजन प्लांट टेंडर तैयार करते वक्त बाजारमूल्य से अधिक किंमत उल्लेखित करने से मनपा को 100 करोड़ से अधिक का घाटा हुआ हैं। अनुभव न होते हुए भी जिन ठेकेदारों को काम दिया गया उनपर मामूली जुर्माना लगाकर मनपा अधिकारी अपनी गलतियों को छिपाने का काम कर रहे हैं। इसलिए बाद में ठेकेदार को मदद करने के लिए पहले जो समय अवधि 30 दिन की थी उसे बढ़ाकर 45 दिन किया गया इसके बाद भी काम समय पर पूरा नहीं हो पाया। इस काम में जूनियर से लेकर सीनियर अधिकारियों ने किस उद्देश्य से नजरअंदाजी की इसकी जांच होनी चाहिए। जुर्माना सिर्फ ठेकेदार को लगाया गया हैं जबकी सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी निश्चित कर कारवाई करने की मांग अनिल गलगली ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और मनपा आयुक्त को भेजे हुए पत्र में की हैं।

267 कोटींचे 19 पैकी 17 ऑक्सिजन प्लांट वेळेत पूर्ण करण्यात पालिका अधिकारी व कंत्राटदार अपयशी

कोरोना काळात वादग्रस्त ठरलेल्या ऑक्सिजन प्लांट निविदेत अनियमितता आणि अधिक मूल्य देण्याचा आरोप करण्यात आला होता. मोठमोठे दावे करत मुंबईत उभारलेल्या 267 कोटींचे 19 पैकी 17 ऑक्सिजन प्लांट वेळेत पूर्ण करण्यात कंत्राटदार आणि त्यांचे पाठीराखे अधिकारी वर्गास अपयश आल्याची धक्कादायक माहिती आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस उपलब्ध करुन देण्यात आलेल्या माहितीतून समोर आली आहे तर काहीतरी कारवाई करण्याच्या हेतुने कंत्राटदारांवर फक्त 4.07 कोटींचा शुल्लक दंड आकारत अभय देण्यात आले आहे.


आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी बृहन्मुंबई महानगरपालिकेकडे मुंबईत उभारण्यात आलेल्या ऑक्सिजन प्लांटची माहिती विचारली होती. पालिकेच्या यांत्रिकी व विद्युत खात्याचे कार्यकारी अभियंता शाम भारती यांनी अनिल गलगली यांस 19 प्लांटची माहिती दिली आहे त्यापैकी एकाही ऑक्सिजन प्लांटचे काम वेळेत पूर्ण करण्यात आले नाही. या 19 पैकी 12 कामे मेसर्स हायवे कन्स्ट्रक्शन कंपनीस तर 7 कामे ही मेसर्स जीएसएन असोसिएटसला देण्यात आली आहेत. 

पहिल्या टप्प्यात 77.15 कोटींचे काम

बृहन्मुंबई महानगरपालिकेने पहिल्या टप्प्यात मेसर्स हायवे कन्स्ट्रक्शन कंपनीस 9 ठिकाणी 22,790 एलपीएम प्लांट उभारणी करण्यासाठी 25 जून 2021 रोजी कार्यादेश जारी केले ज्याची एकूण किंमत 77.15 कोटी इतकी होती. सर्व कामांची मुदत 30 दिवस होती. व्हीएन देसाई, बीडीबीए, कस्तुरबा, नायर, कूपर आणि केईएम येथील प्लांट 19 ऑगस्ट 2021 रोजी पूर्ण करण्यात आले आणि 20 ऑगस्ट रोजी कुर्ला भाभा, 25 ऑगस्ट रोजी सायन तर 26 ऑगस्ट रोजी जीटीबी येथील काम पूर्ण करण्यात आले. यात 3.06 कोटींचा दंड आकारण्यात आला असून या कारवाईला कंत्राटदाराने आव्हान दिले आहे.

दुसऱ्या टप्पा 59.36 कोटींचा 

पहिल्या टप्प्यात अपयशी ठरलेल्या मेसर्स हायवे कन्स्ट्रक्शन कंपनीस काळया यादीत टाकण्याऐवजी पालिकेने उदार होत दुसऱ्या टप्प्यात 59.36 कोटींचे नवीन कामाचे कार्यादेश 27 सप्टेंबर 2021 रोजी जारी केले. यात 19,760 एलपीएम प्लांट उभारणी करण्याचे काम होते. दहिसर आणि ऑकंट्रोई नाक्यावरील काम वेळेत पूर्ण झाले पण केजे सोमय्या येथील काम 12 दिवसांच्या विलंबाने पूर्ण करण्यात आले. 

तिसरा टप्पा 130.86 कोटींचा 

तिसरा टप्पा यासाठी महत्वाचा आहे कारण प्रकल्पाची किंमत ही 130.86 कोटी इतकी असून यात 43,500 एलपीएम प्लांट उभारणी करण्याचे काम हे मेसर्स जीएसएन असोसिएटसला देण्यात आली. कार्यादेश 27 सप्टेंबर 2021 रोजी काढण्यात आले पण एकही काम मुदतीत पूर्ण करण्यात आले नाही. 12 ते 86 दिवसांचा विलंब झाला पण यात कंत्राटदारांस पालिका अधिकारी वर्गानी वाचवले आणि फक्त 1.04 कोटींचा दंड आकारला. यात बीकेसी फेज 1, बीकेसी फेज 2, नेस्को, दहिसर चेकनाका, भायखळा आणि मुलुंड येथील रिचर्डसन अँड कृडस तसेच कांजूरमार्ग येथील 7 ठिकाणे आहेत.

कामाची मुदत कशी वाढविली?

पहिल्या टप्प्यात 30 दिवसांची मुदत ही दुसऱ्या आणि तिसऱ्या टप्प्यात वाढवित 45 दिवस करण्यात आली. यात कंत्राटदारांना झुकते माप देण्यात आले तरीही 8 कामे ही अधिक दिवस वाढवूनही पूर्ण करण्यात आली नाही. काम मुदतीत न करण्यामागे जी कारणे दिली आहेत ती न पटण्याजोगी असून यात मोठा पाऊस आणि नसलेला वीज पुरवठा ही समाविष्ट करण्यात आली आहेत तर एका ठिकाणी प्लांट बांधण्यासाठी अस्तित्वात असलेल्या खोल्यांचे निष्कासन न होण्याचे कारण दिले आहे.

अनिल गलगली यांच्या मते ऑक्सिजन प्लांट निविदा तयार करताना बाजारमूल्य पेक्षा अवाढव्य किंमत नमूद करण्यात आली त्यामुळे पालिकेस 100 कोटींचे नुकसान झाले आहे. अनुभव नसतांनाही ज्या कंत्राटदारांस काम दिले त्यास दंड आकारत पालिका अधिकारी आपल्या चुकांवर पांघरूण घालत आहे. कंत्राटदारांस मदत करण्यासाठी आधी 30 दिवसांची असलेल्या मुदतीत 45 दिवस करण्यात आले त्यानंतरही कामे वेळेत पूर्ण करण्यात आली नाही. यात कामांत कनिष्ठ ते वरिष्ठ अधिकारी यांनी कोणत्या प्रयोजनाने दुर्लक्ष केले याची चौकशी करणे आवश्यक आहे तसेच दंड फक्त कंत्राटदार यांस आकारला गेला असून सर्व अधिकार वर्गाची जबाबदारी निश्चित करत त्यांच्यावरही कारवाई करण्यात यावी, अशी मागणी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे आणि पालिका आयुक्तांना लिहिलेल्या पत्रात गलगली यांनी केली आहे.

Friday, 28 January 2022

सरकार ने विधान परिषद के सदस्यों की राज्यपाल को भेजी गई 12 व्यक्तियों की सूची देने से इंकार कर दिया

एक ओर राजभवन स्थित राज्यपाल सचिवालय विधान परिषद के लिए प्राप्त 12 सदस्यों की सूची उपलब्ध नहीं कराता है। उधर, महाराष्ट्र सरकार ने विधान परिषद के 12 सदस्यों की सूची राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजी है, वह सूची समेत अन्य जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को देने को तैयार नहीं हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली कई महीनों से इस सूची की मांग कर रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से न तो राज्यपाल सचिवालय और न ही महाराष्ट्र सरकार सूची देने को तैयार है। अनिल गलगली ने राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्यपाल द्वारा मनोनीत 12 विधान परिषद सदस्यों के लिए स्वीकृत प्रस्ताव एवं प्रस्ताव की जानकारी मुख्य सचिव कार्यालय से मांगी थी। मुख्य सचिव कार्यालय ने गलगली के आवेदन को संसदीय कार्य विभाग को अग्रेषित कर दिया। इस विभाग के कक्ष अधिकारी टी. एन शिखरामे ने अनिल गलगली को बताया कि धारा 8(1) के तहत जानकारी उपलब्ध नहीं करायी जा सकती क्योंकि मामला अभी पूरा नहीं हुआ है.

अनिल गलगली के मुताबिक विधान परिषद के सदस्यों की नियुक्ति और भेजी गई सूची देने से राज्यपाल सचिवालय और महाराष्ट्र सरकार इन दोनों की ओर से टालमटोल की जा रही है। महाराष्ट्र सरकार को ईमानदारी से इस सूची को जनता के लिए उपलब्ध कराना चाहिए। इसमें आख़िर समस्या क्या है? इसका खुलासा हो जाएगा।

राज्यपालांकडे विधानपरिषद सदस्यांसाठी मंजुरीसाठी पाठविलेल्या 12 जणांची यादी देण्यास शासनाचा नकार

एकीकडे राजभवन येथील राज्यपालाचे सचिवालय विधानपरिषद सदस्यांसाठी प्राप्त 12 जणांची यादी देत नाही तर दुसरीकडे ज्या महाराष्ट्र शासनाने राज्यपालांकडे विधानपरिषद सदस्यांसाठी 12 जणांची यादी मंजुरीसाठी पाठविलेली आहे ते ही यादी सहित माहिती आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस आता  देण्यास तयार नाही.

आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली हे कित्येक महिन्यापासून त्या यादीची मागणी करत आहे. परंतु दुर्दैवाने यादी देण्यास ना राज्यपाल सचिवालय तयार आहे ना महाराष्ट्र शासन. अनिल गलगली यांनी मुख्य सचिव कार्यालयाकडे राज्य मंत्रिमंडळ बैठकीत राज्यपाल नामित 12 विधानपरिषद सदस्यांसाठी मंजूर करण्यात आलेला प्रस्ताव आणि ठरावाची माहिती मागितली होती. मुख्य सचिव कार्यालयाने गलगली यांचा अर्ज संसदीय कार्य विभागाकडे हस्तांतरित केला. या विभागाचे कक्ष अधिकारी टी. एन. शिखरामे यांनी अनिल गलगली यांस कळविले की अद्यापही प्रकरण पूर्ण व समाप्त झाले नसल्याने ही माहिती कलम 8(1) अनुसार उपलब्ध करुन देता येत नाही. 

अनिल गलगली यांच्या मते विधानपरिषद सदस्य नेमणूक आणि पाठविलेल्या यादी बाबत दोन्हीकडून टाळाटाळ केली जात आहे. महाराष्ट्र शासनाने प्रामाणिकपणे ही यादी जनतेस उपलब्ध करुन देणे आवश्यक आहे. यामुळे नेमकी अडचण काय आहे? याचा खुलासा होईल.