मुंबई: सुप्रसिद्ध सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था 'आशीर्वाद' का 57वाँ स्थापना दिवस अत्यंत गरिमामय एवं भव्य वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर साहित्य, कला, संस्कृति, संगीत, फिल्म और पत्रकारिता जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति ने समारोह को यादगार बना दिया।
कार्यक्रम में संस्था की निदेशिका सुश्री नीता बाजपेयी ने आशीर्वाद संस्था की 57 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, उपलब्धियों एवं संस्थापक स्वर्गीय डॉ. उमाकांत बाजपेयी के दूरदर्शी व्यक्तित्व को स्मरण करते हुए उनके सपनों को साकार करने की प्रेरणादायी यात्रा पर प्रकाश डाला।
पद्मश्री अनूप जलोटा ने कहा कि एक समय ऐसा था जब आशीर्वाद पुरस्कार को फिल्म जगत में फिल्मफेयर पुरस्कार से भी अधिक प्रतिष्ठित माना जाता था। इसी अवसर पर कवि दास नारायण अग्रवाल की कृति "कृष्ण पद" का भव्य लोकार्पण भी अनूप जलोटा के करकमलों द्वारा किया गया। कृष्ण भक्ति पर आधारित इस कृति पर प्रो. करूणाशंकर उपाध्याय, वीरेन्द्र याज्ञिक तथा नेशनल एक्सप्रेस के संस्थापक विपिन गुप्ता ने अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में फिल्म अभिनेता अरुण बक्षी ने अपनी माँ पर आधारित भावपूर्ण कविता प्रस्तुत की, जबकि अर्चना जौहरी ने बेटी पर आधारित संवेदनशील काव्य-पाठ से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। डॉ. शैलेश श्रीवास्तव, विनोद दुबे, रवि यादव, कविता सेठ और नवीन चतुर्वेदी ने अपने गीतों से समां बाँध दिया।
शायरी की महफिल में देवमणि पांडेय ने अपने अंदाज़ से श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। उनके साथ उबेद आजम आजमी, रजिया रागिनी, शिव दत्त अक्स और महेश दुबे ने अपनी ग़ज़लों से साहित्य प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन कुमार जैन ने किया।
संस्था के अध्यक्ष बृजमोहन अग्रवाल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया, जबकि राजेश विक्रांत ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। नीता बाजपेयी ने सभी उपस्थित जनों का आत्मीय स्वागत करते हुए संस्था की भावी योजनाओं की जानकारी भी दी।
समारोह में सुलेमान फारुकी, आफ्ताब आलम, अमरीश कुमार, गुलशन मदान, संजीव शुक्ला, दालचंद गुप्ता, ममता सिंह, रीमा राय सिंह, अमर त्रिपाठी, अजय गोविंद, रवि जैन, अशोक त्रिवेदी, श्रेयांश शुक्ला, नरोत्तम शर्मा, विवेक अग्रवाल, वीरेन्द्र मिश्रा, शुभकीर्ति माहेश्वरी, बूबना, निरुपमा श्रीवास्तव, अनिल गलगली, सुनील सिंह, शैलेंद्र श्रीवास्तव, अंकित मिश्रा, कृष्णा गौतम, डॉ. बनमाली चतुर्वेदी, डॉ. जे.पी. बघेल, पूर्व पुलिस अधिकारी सोनटके, रागिनी प्रसाद, मंजुला जगतरामका, कमर हाजीपुरी, अवधेश पांडे, प्रेम प्रकाश दुबे, राकेश दुबे सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, कलाकार, पत्रकार और कला प्रेमी उपस्थित रहे।
डॉ. उमाकांत बाजपेयी की स्मृति को समर्पित इस समारोह में सभागार प्रारंभ से अंत तक खचाखच भरा रहा। उपस्थित जनों की तालियों की गड़गड़ाहट और उत्साह ने इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया तथा सभी ने संस्था की इस गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा की मुक्तकंठ से सराहना की।