Wednesday, 14 January 2026

मुंबईतील मतदान : यंदा तरी उदासीनतेचा पाडाव होणार का?

मुंबईतील मतदान : यंदा तरी उदासीनतेचा पाडाव होणार का?


देशाची आर्थिक राजधानी असलेली मुंबई पुन्हा एकदा लोकशाहीच्या महत्त्वाच्या टप्प्यावर उभी आहे. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (मुंबई महानगरपालिका) निवडणुकीसाठी आज संपूर्ण शहरात मतदान होत आहे. यंदा तरी मतदारांचा प्रतिसाद वाढेल का, याकडे सर्वांचे लक्ष लागले आहे. मुंबईसारख्या महानगरात स्थानिक स्वराज्य संस्थांच्या निवडणुकांमध्ये मतदानाचा टक्का नेहमीच चिंतेचा विषय राहिला आहे. धावपळीची जीवनशैली, नोकरी-व्यवसायाचा ताण, लांब पल्ल्याची प्रवासाची अडचण, तसेच “माझ्या एका मताने काय फरक पडणार?” ही मानसिकता यामुळे अनेकदा मतदानाकडे पाठ फिरवली जाते.

महानगरपालिका निवडणुका आणि मतदानाचा इतिहास
गेल्या तीन दशकांतील आकडेवारी पाहिली तर मुंबई महानगरपालिका निवडणुकांमध्ये मतदानाचा टक्का दीर्घकाळ ५० टक्क्यांच्या खालीच राहिलेला दिसतो. मुंबई महानगरपालिका निवडणुकीतील मतदान टक्केवारी (१९९२–२०१७):

१९९२: ४९.१४%
१९९७: ४४.३६%
२००२: ४२.०५%
२००७: ४६.०५%
२०१२: ४४.७५%
२०१७: ५५.२८%

१९९७ ते २०१२ या कालावधीत सलग चार निवडणुकांमध्ये मतदान ४२ ते ४६ टक्क्यांच्या दरम्यानच मर्यादित राहिले. हा काळ मुंबईसाठी सर्वात कमी मतदार सहभागाचा मानला जातो. मात्र २०१७ मध्ये ५५.२८ टक्के मतदान झाले आणि तब्बल २५ वर्षांनंतर मतदानाने नवा उच्चांक गाठला.


२०१७ मध्ये मतदान का वाढले?

२०१७ ची निवडणूक अनेक अर्थांनी वेगळी ठरली. प्रमुख राजकीय पक्षांमध्ये थेट आणि तीव्र लढत झाली. रस्त्यांची दुरवस्था, पावसाळ्यातील जलसाठा, कचरा व्यवस्थापन, भ्रष्टाचार, आरोग्य व शिक्षण व्यवस्था असे स्थानिक प्रश्न केंद्रस्थानी होते. सोशल मीडियावरील चर्चांमुळे, नागरिक संघटनांच्या जनजागृतीमुळे आणि तरुण मतदारांच्या वाढत्या सहभागामुळे मतदानाचा टक्का लक्षणीयरीत्या वाढला.

यंदाची निवडणूक का महत्त्वाची आहे?

यंदाची मुंबई महानगरपालिका निवडणूक जवळपास तीन वर्षांच्या प्रशासकीय कालावधीनंतर होत आहे. या काळात निवडून दिलेले लोकप्रतिनिधी नसल्याने अनेक नागरी प्रश्न प्रलंबित राहिले. त्यामुळे यावेळी नागरिकांमध्ये आपल्या स्थानिक प्रतिनिधींची निवड करण्याबाबत अधिक उत्सुकता दिसून येत आहे.
राज्य निवडणूक आयोगानेही मतदान वाढवण्यासाठी विशेष उपाययोजना केल्या आहेत. हाउसिंग सोसायट्यांमध्ये मतदान केंद्रे, ज्येष्ठ नागरिक व दिव्यांगांसाठी सुविधा, मतदार जनजागृती मोहिमा आणि डिजिटल माध्यमांचा वापर. यंदा ६० ते ७० टक्के मतदान होण्याचे उद्दिष्ट ठेवण्यात आले आहे.

लोकशाहीची खरी ताकद मतदार

मुंबई महानगरपालिका ही देशातील सर्वात श्रीमंत स्थानिक स्वराज्य संस्था आहे. शहरातील रस्ते, पाणीपुरवठा, आरोग्य सेवा, शिक्षण, स्वच्छता आणि आपत्ती व्यवस्थापन या सर्व बाबी थेट या संस्थेशी निगडित आहेत. त्यामुळे नगरसेवकांची निवड म्हणजे केवळ राजकीय प्रक्रिया नसून मुंबईच्या भविष्यासाठी घेतला जाणारा निर्णय आहे. कमी मतदान म्हणजे काही मोजक्या लोकांच्या हातात निर्णय. जास्त मतदान म्हणजे लोकशाही मजबूत आणि प्रशासन अधिक जबाबदार.

१५ जानेवारीचा मतदानाचा दिवस हा मुंबईकरांसाठी केवळ औपचारिकता नाही, तर आपल्या शहराची दिशा ठरवण्याची संधी आहे. २०१७ पेक्षा अधिक मतदान झाले, तर ते नागरिकांच्या जागृतीचे प्रतीक ठरेल. यंदा मुंबई केवळ आर्थिक राजधानी म्हणून नव्हे, तर जागरूक मतदारांची राजधानी म्हणूनही ओळखली जाईल, अशी अपेक्षा आहे.


अनिल गलगली 
माहिती अधिकार कार्यकर्ते

मुंबई में मतदान: क्या इस बार बदलेगी उदासीनता की तस्वीर?

मुंबई में मतदान: क्या इस बार बदलेगी उदासीनता की तस्वीर?


देश की आर्थिक राजधानी मुंबई एक बार फिर लोकतंत्र के सबसे अहम पड़ाव पर खड़ी है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के लिए शहरभर में मतदान हो रहा है। करोड़ों मतदाताओं की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस बार मुंबईकर बड़ी संख्या में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे या फिर पिछली तरह मतदान प्रतिशत सीमित ही रहेगा।


मुंबई जैसे महानगर में स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव हमेशा से एक विरोधाभास पेश करते रहे हैं। एक ओर यह देश की सबसे अमीर और प्रभावशाली महानगरपालिका है, वहीं दूसरी ओर यहां के नागरिकों की चुनावी भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही है। व्यस्त जीवनशैली, नौकरी-धंधे का दबाव, लंबी यात्रा, मतदान को लेकर उदासीनता और “मेरे वोट से क्या फर्क पड़ेगा” जैसी मानसिकता इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं।

बीएमसी चुनाव और मतदान प्रतिशत का इतिहास

अगर पिछले तीन दशकों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो यह साफ दिखाई देता है कि मुंबई महानगरपालिका चुनावों में मतदान प्रतिशत लंबे समय तक 50 प्रतिशत से नीचे ही रहा।
बीएमसी चुनावों में मतदान प्रतिशत (1992–2017):
1992: 49.14%
1997: 44.36%
2002: 42.05%
2007: 46.05%
2012: 44.75%
2017: 55.28%

1997 से 2012 तक लगातार चार चुनावों में मतदान 42 से 46 प्रतिशत के बीच सिमटा रहा। यह दौर मुंबई के लिए सबसे कमजोर मतदाता भागीदारी वाला समय माना जाता है। लेकिन वर्ष 2017 में तस्वीर बदली और मतदान प्रतिशत बढ़कर 55.28% तक पहुंच गया, जो अब तक का सर्वाधिक रिकॉर्ड है।

2017 में क्यों टूटा रिकॉर्ड?

2017 का मनपा चुनाव कई मायनों में अलग था। उस समय राजनीतिक माहौल बेहद गर्म था और प्रमुख दलों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला। स्थानीय मुद्दों जैसे खराब सड़कें, जलभराव, कचरा प्रबंधन, भ्रष्टाचार, स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं
इन सभी विषयों पर जोरदार बहस हुई। सोशल मीडिया, नागरिक समूहों और युवाओं की सक्रियता ने भी मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित किया। खासतौर पर पहली बार वोट देने वाले युवा और मध्यम वर्ग बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों तक पहुंचे। यही कारण था कि 25 वर्षों में पहली बार बीएमसी चुनाव में मतदान 55 प्रतिशत के पार गया।

2026 का चुनाव: क्यों है खास?

इस बार का मनपा का चुनाव कई कारणों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लगभग तीन वर्षों के अंतराल के बाद जनता को अपने स्थानीय प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिला है। अब तक नगर निगम प्रशासकीय व्यवस्था के तहत चल रहा था। नागरिकों में स्थानीय समस्याओं को लेकर असंतोष और अपेक्षाएं दोनों बढ़ी हैं।
राज्य चुनाव आयोग और प्रशासन ने भी इस बार मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए हैं। हाउसिंग सोसायटी में मतदान केंद्र, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए सुविधाएं, मतदाता जागरूकता अभियान और डिजिटल माध्यमों का उपयोग—ये सभी कदम इसी दिशा में उठाए गए हैं। चुनाव आयोग का स्पष्ट संदेश है कि मुंबई में इस बार 60 से 70 प्रतिशत मतदान का लक्ष्य रखा गया है।

लोकतंत्र की असली कसौटी: नागरिक सहभागिता

मुंबई महानगरपालिका केवल एक मनपा नहीं है, बल्कि यह देश की सबसे समृद्ध और प्रभावशाली स्थानीय स्वशासन संस्था है। शहर की सड़कें, अस्पताल, स्कूल, पानी की आपूर्ति, सफाई व्यवस्था और आपदा प्रबंधन सीधे इसी संस्था से जुड़े हैं। ऐसे में नगरसेवकों का चुनाव केवल राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मुंबई के भविष्य का फैसला है। कम मतदान का अर्थ है कि कुछ सीमित लोग पूरे शहर के लिए निर्णय करें। अधिक मतदान का अर्थ है कि जनता की मजबूत भागीदारी और जवाबदेह शासन।


15 जनवरी को होने वाला मतदान केवल एक तारीख नहीं, बल्कि मुंबईकरों के लिए एक अवसर है कि अपने शहर की दिशा तय करने का, अपने अधिकारों का प्रयोग करने का और लोकतंत्र को मजबूत बनाने का। यदि 2017 की तरह या उससे भी अधिक मतदान होता है, तो यह संकेत होगा कि मुंबई की जनता अब स्थानीय राजनीति को गंभीरता से ले रही है। उम्मीद है कि इस बार मुंबई न सिर्फ आर्थिक राजधानी के रूप में, बल्कि नागरिक जागरूकता के मामले में भी मिसाल पेश करेगी।

अनिल गलगली 
आरटीआई कार्यकर्ता

Voting in Mumbai: Will the Picture of Apathy Change This Time?

Voting in Mumbai: Will the Picture of Apathy Change This Time?

The financial capital of the country, Mumbai, is once again standing at one of the most crucial milestones of democracy. Voting is underway across the city for the Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) elections. The eyes of millions of voters are fixed on one key question will Mumbaikars come out in large numbers to exercise their right to vote this time, or will voter turnout remain limited as in the past?


In a metropolitan city like Mumbai, elections to local self-government bodies have always presented a paradox. On one hand, it is the richest and most influential municipal corporation in the country; on the other, citizens’ participation in elections has traditionally been relatively low. A busy lifestyle, work pressure, long commutes, voter apathy, and the mindset of “my vote won’t make a difference” are often cited as the main reasons.


BMC Elections and the History of Voter Turnout

If we look at the data from the last three decades, it becomes clear that voter turnout in Mumbai Municipal Corporation elections remained below 50 percent for a long time. Voter turnout in BMC elections (1992–2017):
1992: 49.14%
1997: 44.36%
2002: 42.05%
2007: 46.05%
2012: 44.75%
2017: 55.28%
From 1997 to 2012, four consecutive elections saw turnout confined between 42 and 46 percent. This period is considered the weakest phase of voter participation in Mumbai. However, in 2017, the picture changed—voter turnout rose to 55.28 percent, the highest ever recorded.


Why Did 2017 Break the Record?

The 2017 municipal election was different in many ways. The political atmosphere was extremely charged, with a direct and intense contest among major political parties. Local issues such as poor roads, waterlogging, waste management, corruption, and health and education services dominated public debate. Social media campaigns, citizen groups, and active youth participation played a major role in motivating voters. First-time voters and the urban middle class, in particular, turned up in large numbers at polling stations. As a result, for the first time in 25 years, BMC election turnout crossed the 55 percent mark.


The 2026 Election: Why Is It Special?

This time, the municipal election is considered extremely significant for several reasons. After a gap of nearly three years, citizens are getting the opportunity to elect their local representatives again. Until now, the municipal corporation was being run under an administrative setup. Public dissatisfaction and expectations regarding local civic issues have both increased. The State Election Commission and the administration have also made special efforts this time to boost voter turnout. Polling booths in housing societies, special facilities for senior citizens and persons with disabilities, voter awareness campaigns, and the use of digital platforms are all steps taken in this direction. The Election Commission has clearly stated its aim of achieving a 60 to 70 percent voter turnout in Mumbai.


The Real Test of Democracy: Citizen Participation

The Brihanmumbai Municipal Corporation is not just another civic body, it is the country’s most affluent and powerful local self-government institution. Roads, hospitals, schools, water supply, sanitation, and disaster management in the city are directly linked to it. In this context, electing corporators is not merely a political process; it is a decision that shapes Mumbai’s future. Low voter turnout means a small section of society decides the fate of the entire city. Higher turnout signifies strong public participation and accountable governance.

Voting on January 15 is not just a date, it is an opportunity for Mumbaikars to decide the direction of their city, exercise their rights, and strengthen democracy. If voter turnout matches or exceeds that of 2017, it will signal that Mumbai’s citizens are now taking local politics seriously. Hopefully, this time Mumbai will set an example not only as the financial capital of India, but also as a model of civic awareness.

Anil Galgali
RTI Activist

स्वानंद बाबा आश्रम में मकर संक्रांति का भव्य एवं सेवाभावी आयोजन

स्वानंद बाबा आश्रम में मकर संक्रांति का भव्य एवं सेवाभावी आयोजन

प. पू. स्वानंद बाबा सेवा न्यास की ओर से ठाणे के येऊर हिल्स स्थित प. पू. स्वानंद बाबा आश्रम में मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर भव्य धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सेवाभावी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आश्रम परिसर श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक सेवा के भाव से सराबोर नजर आया।कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके पश्चात भजन-कीर्तन की भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई, जिसमें भक्तों ने श्रद्धा के साथ सहभागिता की। भजनों की मधुर स्वर-लहरियों से पूरा वातावरण भक्तिमय बन गया।

इस अवसर पर सामाजिक सेवा के अंतर्गत महिलाओं को साड़ी का वितरण किया गया, वहीं जरूरतमंदों को ठंड से बचाव हेतु कंबलों का वितरण भी किया गया। सेवा न्यास की इस पहल की उपस्थित श्रद्धालुओं एवं अतिथियों ने सराहना करते हुए इसे मानवीय संवेदनाओं और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का प्रतीक बताया।

कार्यक्रम में पं. दुर्गाप्रसाद पाठक, प्रेम शुक्ल, शांति शुक्ल, मुद्रा शुक्ला, अनिल गलगली, उदय प्रताप सिंह, पंकज मिश्रा, शैलेंद्र श्रीवास्तव, राकेश पांडेय, संजय मिश्रा, राज पाण्डेय, विजय पाण्डेय, राम सजीवन तिवारी, अमित गुप्ता, आर. पी. सिंह, शिवसागर मिश्र सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। मुंबई के अलावा ठाणे, नालासोपारा, मीरा-भाईंदर और कल्याण से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आश्रम पहुंचे और उन्होंने कार्यक्रम का लाभ लिया।

Sunday, 4 January 2026

पूनम महाजन का कमबैक

पूनम महाजन का कमबैक

भाजपा वसई–विरार की मुख्य चुनाव प्रमुख नियुक्त


महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर पूनम महाजन का प्रभावशाली कमबैक देखने को मिला है। भारतीय जनता पार्टी ने आगामी वसई–विरार महानगरपालिका चुनाव के मद्देनज़र उन्हें भाजपा वसई–विरार की मुख्य चुनाव प्रमुख नियुक्त किया है। यह नियुक्ति मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की संस्तुति पर भाजपा महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण द्वारा की गई है। यह फैसला केवल एक संगठनात्मक नियुक्ति नहीं, बल्कि भाजपा की चुनावी रणनीति और राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।


पार्टी नेतृत्व का भरोसा और रणनीतिक निर्णय

पूनम महाजन भाजपा की उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने पार्टी को शहरी क्षेत्रों में मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई है। वे मुंबई उत्तर मध्य लोकसभा क्षेत्र से सांसद रह चुकी हैं और संगठनात्मक, प्रशासनिक व चुनावी अनुभव का लंबा रिकॉर्ड रखती हैं।
वसई–विरार जैसे तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्र में स्थानीय मुद्दों की गहरी समझ, कार्यकर्ताओं के साथ सीधा संवाद, चुनावी प्रबंधन का अनुभव को देखते हुए भाजपा ने पूनम महाजन को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।

मुख्यमंत्री की संस्तुति का महत्व

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की संस्तुति पर हुई यह नियुक्ति इस बात का संकेत है कि पार्टी नेतृत्व वसई–विरार चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रहा है। संगठन और सरकार के बीच समन्वय के साथ चुनावी लड़ाई लड़ी जाएगी। अनुभवी नेतृत्व को आगे लाकर पार्टी को निर्णायक बढ़त दिलाने की कोशिश है। प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण द्वारा की गई यह नियुक्ति संगठनात्मक संतुलन और चुनावी तैयारी का स्पष्ट संकेत देती है।

वसई–विरार चुनाव : भाजपा के लिए क्यों अहम


वसई–विरार महानगरपालिका क्षेत्र में बड़ी जनसंख्या, विविध सामाजिक और आर्थिक वर्ग के साथ बुनियादी सुविधाओं, ट्रैफिक, पानी, कचरा प्रबंधन और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों के कारण हमेशा से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। यहां भाजपा लंबे समय से संगठन विस्तार और सत्ता में मजबूत उपस्थिति के लिए प्रयासरत है। पूनम महाजन की नियुक्ति से पार्टी को सशक्त चुनावी नेतृत्व, बेहतर माइक्रो-मैनेजमेंट, वार्ड स्तर पर प्रभावी रणनीति मिलने की उम्मीद है। 

मुख्य चुनाव प्रमुख के रूप में भूमिका

मुख्य चुनाव प्रमुख के तौर पर पूनम महाजन की जिम्मेदारियां व्यापक होंगी, जिनमें चुनावी रणनीति और रोडमैप तैयार करना, वार्ड स्तर पर संगठन को सक्रिय करना, उम्मीदवार चयन और प्रचार की दिशा तय करना, कार्यकर्ताओं में समन्वय और उत्साह बनाए रखना और स्थानीय मुद्दों को चुनावी एजेंडे में प्रमुखता देना शामिल हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, वे जमीनी स्तर पर लगातार संपर्क और डेटा आधारित चुनाव प्रबंधन पर विशेष ध्यान देंगी।

राजनीतिक संदेश और संभावनाएं

पूनम महाजन के कमबैक से भाजपा ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पार्टी अनुभव और प्रदर्शन को प्राथमिकता दे रही है। स्थानीय निकाय चुनावों में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। मजबूत नेतृत्व के साथ मैदान में उतरकर सत्ता परिवर्तन का लक्ष्य रखा गया है।
यह नियुक्ति न केवल वसई–विरार, बल्कि पूरे महाराष्ट्र में भाजपा की चुनावी रणनीति को नई धार देने वाली मानी जा रही है।


पूनम महाजन का भाजपा वसई–विरार की मुख्य चुनाव प्रमुख बनना उनके राजनीतिक अनुभव और पार्टी नेतृत्व के भरोसे का प्रतीक है। उनके नेतृत्व में भाजपा को वसई–विरार महानगरपालिका चुनाव में संगठनात्मक मजबूती, रणनीतिक स्पष्टता और निर्णायक बढ़त मिलने की पूरी संभावना है। यह कमबैक आने वाले चुनावी मुकाबले को और भी दिलचस्प और निर्णायक बनाने वाला माना जा रहा है।

Monday, 29 December 2025

पत्रकारों की सतर्कता से समाज सुरक्षित रहता है : समीर वानखेड़े

पत्रकारों की सतर्कता से समाज सुरक्षित रहता है : समीर वानखेड़े

पीवीएस मीडिया अवॉर्ड्स–2025 में पत्रकारों का हुआ भव्य सम्मान

मुंबई। भारतीय राजस्व सेवा के वरिष्ठ एवं चर्चित अधिकारी समीर वानखेड़े ने कहा कि पत्रकारों की सतर्क और निष्पक्ष निगाह के कारण ही प्रशासन भी अधिक जिम्मेदारी और पारदर्शिता से कार्य करता है। पत्रकार और प्रशासन जब समन्वय के साथ काम करते हैं, तब समाज और लोकतंत्र दोनों सुरक्षित रहते हैं।


श्री वानखेड़े शनिवार को मुंबई के मालाड पश्चिम स्थित साई पैलेस सभागृह में आयोजित पत्रकार विकास संघ (पीवीएस) के 17वें वार्षिकोत्सव एवं पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। इस अवसर पर पीवीएस के अध्यक्ष आनंद मिश्र, महासचिव अजय सिंह एवं प्रमुख सलाहकार सुनील सिंह ने उन्हें शाल, श्रीफल एवं स्मृति-चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में जोन-11 के डीसीपी संदीप जाधव विशेष रूप से उपस्थित रहे।

पीवीएस पिछले 17 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पत्रकारों को सम्मानित करता आ रहा है। इस वर्ष भी प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया से जुड़े पत्रकारों, संपादकों और मीडिया कर्मियों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

प्रमुख पुरस्कार इस प्रकार रहे—
🔹 श्रेष्ठ संपादक पीवीएस ज्यूरी अवॉर्ड–2025 : संजय सावंत (आपलं महानगर)
🔹 पीवीएस ज्यूरी रजत जयंती अवॉर्ड–2025 : ओमप्रकाश तिवारी (दैनिक जागरण)
🔹 पीवीएस जीवन गौरव (पत्रकारिता) अवॉर्ड–2025 : शेषनाथ सिंह (दोपहर का सामना)
🔹 पीवीएस जीवन गौरव (फोटोग्राफी) : प्रदीप धीवर
अन्य प्रमुख सम्मान—
▪️ बेस्ट पॉलिटिकल रिपोर्टर : दीपक कैतके (दैनिक महासागर)
▪️ बेस्ट रिपोर्टर – जनरल कैटेगरी : भानु प्रकाश मिश्र (दैनिक भास्कर)
▪️ बेस्ट क्राइम रिपोर्टर : डॉ. अखिलेश तिवारी (एनबीटी)
▪️ पीवीएस बेस्ट यंग जर्नलिस्ट : नम्रता अरविंद दुबे
▪️ बेस्ट डिजिटल जर्नलिस्ट : प्रवीण नलावडे
▪️ बेस्ट टीवी रिपोर्टर : कृष्णा सोनारवाडकर
▪️ बेस्ट फोटोग्राफर : शैलेश जाधव
▪️ बेस्ट वीडियो जर्नलिस्ट : राजेंद्र दशरथ धयालकर
▪️ पीवीएस ज्यूरी अवॉर्ड (स्व. शिवा देवनाथ स्मृति) : अनिल शुक्ला (एनबीटी)
▪️ पीवीएस ज्यूरी अवॉर्ड (संपादकीय) : विक्रम जादव

इसके अलावा पत्रकारों के सहयोग एवं सामाजिक योगदान के लिए मुंबई भाजपा के प्रवक्ता उदय प्रताप सिंह, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अजय गुप्ता, गायक प्रेम प्रकाश दुबे, सुनील काबरा एवं अभिषेक जाजू को पीवीएस पत्रकार मित्र सम्मान–2025 से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार अभय मिश्र एवं सुनील सिंह ने किया। सुप्रसिद्ध गायक विनोद दुबे ने गीतों से तथा हास्य कवि महेश दुबे एवं मुकेश गौतम ने काव्य-पाठ से समारोह को मनोरंजक व गरिमामय बनाया।

समारोह में बड़ी संख्या में सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक व मीडिया जगत की विशिष्ट हस्तियां उपस्थित रहीं, जिनमें विधायक संजय उपाध्याय, विधायक असलम शेख, भाजपा नेता आचार्य पवन त्रिपाठी, आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल गलगली, पूर्व राज्यमंत्री अमरजीत मिश्र, कन्हैयालाल जी. सराफ, डॉ. राधेश्याम तिवारी, विनोद मिश्र, डॉ. एन.एन. पांडेय, गंगाराम जमनानी, दिलीप सपाटे, राजा अदाटे सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।


Sunday, 28 December 2025

मुलुंड में ‘नारी शक्ति नवयुग जननी’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन

मुलुंड में ‘नारी शक्ति नवयुग जननी’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन

अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा आयोजित “नारी शक्ति नवयुग जननी” कार्यक्रम का भव्य आयोजन मुंबई के मुलुंड स्थित कालिदास ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ। इस अवसर पर देशभर की सशक्त नारियों को नारी जागरण एवं सशक्तिकरण विषय पर विचार-विमर्श हेतु आमंत्रित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी द्वारा किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने अखंड दीप प्रज्वलन एवं परम वंदनीया माताजी भगवती देवी शर्मा के जन्म-शताब्दी वर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि माताजी ने भारतवर्ष में नारी जागरण की जो अलख जगाई, वह आज एक सशक्त आंदोलन का रूप ले चुकी है।

उन्होंने बताया कि नारी जागरण कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षा, आत्मविश्वास, समान अधिकार और सामाजिक चेतना के विकास पर विशेष बल दिया गया। यह वह प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से महिलाएँ अपने अधिकारों, कर्तव्यों और क्षमताओं को पहचानकर समाज की मुख्यधारा में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब उसकी आधी आबादी—नारी—सशक्त और जागरूक हो।

श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने अपने निजी अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे स्वयं पिछले 40 वर्षों से गायत्री परिवार से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा, “सशक्त नारी शोर नहीं करती, वह परिवार में संस्कारों का संचार कर एक सशक्त समाज का निर्माण करती है।”
उन्होंने मोदी सरकार द्वारा नारी सशक्तिकरण हेतु संचालित योजनाओं—बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, सुकन्या समृद्धि योजना तथा लाड़ली बहना योजना का भी उल्लेख किया।

कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए न्यूक्लियर साइंटिस्ट श्रीमती दीप्ति भचावत ने विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विज्ञान बाहरी जगत की खोज है, जबकि अध्यात्म आंतरिक जगत की। एक नारी जब परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए कार्य करती है, तो वह समाज के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करती है।

इसके अतिरिक्त डॉ. संध्या शेनॉय, पूर्णिमा शिरीशकर, भाग्यलक्ष्मी गोहोकर, शायना एनसी एवं मंजुश्री पाटील ने भी अपने विचार व्यक्त किए। ‘वंडर वुमन ऑफ इंडिया’ के नाम से विख्यात श्रीमती सीमा राव, जो भारतीय विशेष रक्षा बलों को प्रशिक्षण देती हैं, ने वैश्विक स्तर पर भारतीय नारी के बढ़ते वर्चस्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के समापन सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार के प्रति-कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि प्राचीन भारतीय समाज में नारी को अत्यंत सम्मानपूर्ण स्थान प्राप्त था। गार्गी, मैत्रेयी और इला जैसी विदुषियों ने ज्ञान के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन और कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने न्याय, धर्म और जनकल्याण के सिद्धांतों पर आधारित आदर्श शासन दिया तथा काशी विश्वनाथ मंदिर सहित देशभर में अनेक धार्मिक और सामाजिक संरचनाओं का निर्माण कराया।

डॉ. पंड्या ने कहा कि आधुनिक युग में शिक्षा, संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक आंदोलनों के कारण नारी जागरण को नई दिशा मिली है। आज महिलाएँ शिक्षा, विज्ञान, राजनीति, खेल, प्रशासन और व्यापार जैसे क्षेत्रों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। पंचायत से लेकर संसद तक उनकी भागीदारी सशक्तिकरण का सशक्त प्रमाण है।

अंत में उन्होंने कहा कि नारी जागरण केवल महिलाओं का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। जब नारी सशक्त होगी, तभी परिवार सुदृढ़ होगा और राष्ट्र प्रगति करेगा। अखिल विश्व गायत्री परिवार नारी जागरण की पताका लेकर विश्वभर में ऐसा संदेश दे रहा है, जिसे वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया जा रहा है। इन्हीं शब्दों के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

इस अवसर पर अखिल विश्व गायत्री परिवार के हजारों कार्यकर्ताओं के साथ-साथ भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री प्रेम शुक्ल, श्रीमती शांति प्रेम शुक्ल, वरिष्ठ पत्रकार श्री अनिल गलगली, अमित नारायण, विनीता नारायण, मीनल मित्तल, उपेंद्र चौबे, डॉ. वरुण मानेक, इंद्रभूषण गोखले एवं प्रह्लाद पांचाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।