Saturday, 18 July 2026

आशीर्वाद संस्था का 57वाँ स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ संपन्न

आशीर्वाद संस्था का 57वाँ स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ संपन्न

मुंबई: सुप्रसिद्ध सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था 'आशीर्वाद' का 57वाँ स्थापना दिवस अत्यंत गरिमामय एवं भव्य वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर साहित्य, कला, संस्कृति, संगीत, फिल्म और पत्रकारिता जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति ने समारोह को यादगार बना दिया।

कार्यक्रम में संस्था की निदेशिका सुश्री नीता बाजपेयी ने आशीर्वाद संस्था की 57 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, उपलब्धियों एवं संस्थापक स्वर्गीय डॉ. उमाकांत बाजपेयी के दूरदर्शी व्यक्तित्व को स्मरण करते हुए उनके सपनों को साकार करने की प्रेरणादायी यात्रा पर प्रकाश डाला।

पद्मश्री अनूप जलोटा ने कहा कि एक समय ऐसा था जब आशीर्वाद पुरस्कार को फिल्म जगत में फिल्मफेयर पुरस्कार से भी अधिक प्रतिष्ठित माना जाता था। इसी अवसर पर कवि दास नारायण अग्रवाल की कृति "कृष्ण पद" का भव्य लोकार्पण भी अनूप जलोटा के करकमलों द्वारा किया गया। कृष्ण भक्ति पर आधारित इस कृति पर प्रो. करूणाशंकर उपाध्याय, वीरेन्द्र याज्ञिक तथा नेशनल एक्सप्रेस के संस्थापक विपिन गुप्ता ने अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में फिल्म अभिनेता अरुण बक्षी ने अपनी माँ पर आधारित भावपूर्ण कविता प्रस्तुत की, जबकि अर्चना जौहरी ने बेटी पर आधारित संवेदनशील काव्य-पाठ से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। डॉ. शैलेश श्रीवास्तव, विनोद दुबे, रवि यादव, कविता सेठ और नवीन चतुर्वेदी ने अपने गीतों से समां बाँध दिया।

शायरी की महफिल में देवमणि पांडेय ने अपने अंदाज़ से श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। उनके साथ उबेद आजम आजमी, रजिया रागिनी, शिव दत्त अक्स और महेश दुबे ने अपनी ग़ज़लों से साहित्य प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन कुमार जैन ने किया।

संस्था के अध्यक्ष बृजमोहन अग्रवाल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया, जबकि राजेश विक्रांत ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। नीता बाजपेयी ने सभी उपस्थित जनों का आत्मीय स्वागत करते हुए संस्था की भावी योजनाओं की जानकारी भी दी।

समारोह में सुलेमान फारुकी, आफ्ताब आलम, अमरीश कुमार, गुलशन मदान, संजीव शुक्ला, दालचंद गुप्ता, ममता सिंह, रीमा राय सिंह, अमर त्रिपाठी, अजय गोविंद, रवि जैन, अशोक त्रिवेदी, श्रेयांश शुक्ला, नरोत्तम शर्मा, विवेक अग्रवाल, वीरेन्द्र मिश्रा, शुभकीर्ति माहेश्वरी, बूबना, निरुपमा श्रीवास्तव, अनिल गलगली, सुनील सिंह, शैलेंद्र श्रीवास्तव, अंकित मिश्रा, कृष्णा गौतम, डॉ. बनमाली चतुर्वेदी, डॉ. जे.पी. बघेल, पूर्व पुलिस अधिकारी सोनटके, रागिनी प्रसाद, मंजुला जगतरामका, कमर हाजीपुरी, अवधेश पांडे, प्रेम प्रकाश दुबे, राकेश दुबे सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, कलाकार, पत्रकार और कला प्रेमी उपस्थित रहे।

डॉ. उमाकांत बाजपेयी की स्मृति को समर्पित इस समारोह में सभागार प्रारंभ से अंत तक खचाखच भरा रहा। उपस्थित जनों की तालियों की गड़गड़ाहट और उत्साह ने इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया तथा सभी ने संस्था की इस गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा की मुक्तकंठ से सराहना की।

मुंबई महानगरपालिका के सभागार की बैठक व्यवस्था को लेकर एक भी शिकायत नहीं मिली

मुंबई महानगरपालिका के सभागार की बैठक व्यवस्था को लेकर एक भी शिकायत नहीं मिली

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के मुख्य सभागार की बैठक व्यवस्था को लेकर पिछले तीन वर्षों में नागरिकों अथवा सदस्यों की ओर से एक भी शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। साथ ही, पिछले पाँच वर्षों में सभागार की बैठक व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह जानकारी सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त जानकारी से सामने आई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि नगरसेवकों द्वारा सदन में बैठने की व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी को लेकर शासन स्तर पर कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने महानगरपालिका के सभागार की बैठक व्यवस्था से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में कार्यकारी अभियंता (मुख्यालय) कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी में यह खुलासा हुआ है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुंबई महानगरपालिका के सभागार में वर्तमान में कुल 237 सीटें उपलब्ध हैं। इनमें 227 निर्वाचित नगरसेवकों तथा 10 स्वीकृत (नामित) नगरसेवकों के लिए बैठक व्यवस्था की गई है। महानगरपालिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि पिछले पाँच वर्षों के दौरान इस बैठक व्यवस्था में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है।

अनिल गलगली ने अपने आवेदन में यह भी जानकारी मांगी थी कि सभागार में नगरसेवकों, अधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों, दर्शकों एवं अन्य व्यक्तियों के लिए बैठक व्यवस्था का वर्गीकरण क्या है, वर्तमान व्यवस्था कब से लागू है तथा पिछले पाँच वर्षों में यदि कोई परिवर्तन किया गया हो तो उसका विवरण उपलब्ध कराया जाए। हालांकि, महानगरपालिका ने उत्तर में कहा कि ये विषय संबंधित विभाग के कार्यक्षेत्र में नहीं आते, इसलिए इस संबंध में जानकारी उपलब्ध नहीं है।

इसके अतिरिक्त, सभागार की बैठक व्यवस्था को लेकर नागरिकों अथवा सदस्यों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों का विवरण भी मांगा गया था। इस पर महानगरपालिका ने स्पष्ट किया कि पिछले तीन वर्षों में बैठक व्यवस्था के संबंध में एक भी शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने कहा कि मुंबई महानगरपालिका का सभागार शहर की सर्वोच्च लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया का केंद्र है। ऐसे में इसकी बैठक व्यवस्था, क्षमता और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होना पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम के माध्यम से नागरिकों को प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त हो रही हैं, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों को बढ़ावा मिलता है।

मुंबई पालिकेच्या सभागृहातील आसनव्यवस्थेबाबत एकही तक्रार प्राप्त नाही

मुंबई पालिकेच्या सभागृहातील आसनव्यवस्थेबाबत एकही तक्रार प्राप्त नाही

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) मुख्य सभागृहातील आसनव्यवस्थेबाबत गेल्या तीन वर्षांत नागरिक अथवा सदस्यांकडून एकही तक्रार प्राप्त झालेली नसल्याची माहिती उघडकीस आली आहे. तसेच, गेल्या पाच वर्षांत सभागृहातील आसनव्यवस्थेत कोणताही बदल करण्यात आलेला नसल्याची माहितीही समोर आली आहे. यामुळे आसनव्यवस्था कमतरता बाबत नगरसेवकांच्या तक्रारी शासन दरबारी नसल्याची बाब स्पष्ट झाली आहे. 

माहिती अधिकार कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी माहिती अधिकार अधिनियम, 2005 अंतर्गत महापालिकेकडे सभागृहातील आसनव्यवस्थेबाबत विविध मुद्द्यांवर माहिती मागविली होती. त्यास कार्यकारी अभियंता (मुख्यालय) कार्यालयाने दिलेल्या उत्तरातून ही माहिती उपलब्ध झाली आहे.

महापालिकेने दिलेल्या माहितीनुसार, मुंबई महापालिकेच्या सभागृहात सध्या एकूण 237 आसने उपलब्ध असून त्यापैकी 227 आसने नगरसेवकांसाठी तर 10 आसने स्वीकृत नगरसेवकांसाठी राखीव आहेत. सभागृहाची विद्यमान आसनरचना अनेक वर्षांपासून कायम असून, मागील पाच वर्षांत त्यामध्ये कोणताही बदल करण्यात आलेला नाही.

अनिल गलगली यांनी आसनव्यवस्थेचे वर्गीकरण, नगरसेवक, अधिकारी, प्रसारमाध्यम प्रतिनिधी, प्रेक्षक व इतरांसाठी स्वतंत्र आसनव्यवस्था असल्यास त्याचा तपशील, विद्यमान व्यवस्था कोणत्या तारखेपासून लागू आहे, तसेच मागील पाच वर्षांत त्यात बदल झाले असल्यास त्याची माहितीही मागितली होती. मात्र, या प्रश्नांपैकी काही बाबी संबंधित विभागाच्या कार्यकक्षेत येत नसल्याने ती माहिती उपलब्ध नसल्याचे महापालिकेने उत्तरात नमूद केले आहे.

याशिवाय, सभागृहातील आसनव्यवस्थेबाबत नागरिक किंवा सदस्यांकडून कोणत्याही प्रकारच्या तक्रारी प्राप्त झाल्या आहेत का, अशीही विचारणा करण्यात आली होती. त्यावर महापालिकेने स्पष्ट केले की, गेल्या तीन वर्षांच्या कालावधीत एकही तक्रार प्राप्त झालेली नाही.

माहिती अधिकार कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी सांगितले की, महापालिका सभागृह हे शहरातील सर्वोच्च लोकशाही निर्णयप्रक्रियेचे केंद्र आहे. त्यामुळे सभागृहाची क्षमता, आसनव्यवस्था आणि त्यासंदर्भातील प्रशासनाकडे उपलब्ध असलेली माहिती नागरिकांसाठी खुली असणे आवश्यक आहे. माहिती अधिकाराच्या माध्यमातून अशा महत्त्वाच्या बाबींमध्ये पारदर्शकता वाढण्यास मदत होत असल्याचे त्यांनी सांगितले.

Tuesday, 14 July 2026

मुंबई में बारिश, आलोचना के साथ सराहना भी जरूरी

अग्निशिला जुलाई 2026

संपादकीय: मुंबई में बारिश, आलोचना के साथ सराहना भी जरूरी

मुंबई का मानसून केवल एक मौसम नहीं, बल्कि महानगर की क्षमता, प्रशासनिक तैयारी और नागरिक अनुशासन की सबसे बड़ी परीक्षा है। हर वर्ष भारी वर्षा के दौरान जलभराव, यातायात अव्यवस्था, लोकल ट्रेन सेवाओं में व्यवधान, पेड़ों के गिरने और अन्य घटनाओं के कारण जनजीवन प्रभावित होता है। ऐसे समय में प्रशासन पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है, लेकिन निष्पक्ष दृष्टिकोण यह भी मांगता है कि जहाँ कमियाँ हों वहाँ आलोचना हो और जहाँ सुधार दिखाई दे, वहाँ उसकी सराहना भी की जाए।

इस वर्ष कई अवसरों पर मुंबई में अत्यधिक वर्षा हुई। कम समय में बड़ी मात्रा में वर्षा होने से अनेक स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनी। यह समझना होगा कि जब कुछ ही घंटों में सामान्य क्षमता से कहीं अधिक वर्षा होती है, तब दुनिया के किसी भी बड़े महानगर की जलनिकासी व्यवस्था पर असाधारण दबाव पड़ता है। ऐसे में कुछ समय के लिए पानी का जमा होना पूरी तरह टाला नहीं जा सकता। असली कसौटी यह है कि पानी कितनी तेजी से निकलता है और जनजीवन कितनी शीघ्र सामान्य होता है।

इसी दृष्टि से देखें तो मुंबई में पिछले कुछ वर्षों के दौरान जलनिकासी व्यवस्था में सुधार दिखाई देता है। अनेक स्थानों पर पहले जहाँ कई घंटों तक पानी भरा रहता था, वहीं अब अपेक्षाकृत कम समय में जल निकासी हो जाती है। इसका सीधा लाभ नागरिकों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और यातायात व्यवस्था को मिलता है। यद्यपि कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में अब भी स्थायी समाधान की आवश्यकता है, फिर भी समग्र रूप से सुधार को स्वीकार करना चाहिए।

बृहन्मुंबई महानगरपालिका की आयुक्त अश्विनी भिडे के नेतृत्व में पूरी प्रशासनिक टीम मानसून प्रबंधन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्री-मानसून तैयारियाँ, नालों की सफाई, पंपिंग स्टेशनों की निगरानी, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र तथा तकनीक के उपयोग से व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है। किसी भी प्रशासनिक व्यवस्था में पूर्णता संभव नहीं होती, लेकिन सतत सुधार ही सफलता का मापदंड होता है।

हालांकि अभी भी कई चुनौतियाँ बाकी हैं। शहर का तीव्र शहरीकरण, प्राकृतिक जल निकासी मार्गों पर अतिक्रमण, प्लास्टिक एवं ठोस कचरे से नालों का अवरुद्ध होना, पुराने सीवर नेटवर्क तथा जलवायु परिवर्तन के कारण कम समय में होने वाली अत्यधिक वर्षा भविष्य में और गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकती हैं। इसलिए केवल वर्तमान व्यवस्था पर निर्भर रहने के बजाय दीर्घकालिक एवं वैज्ञानिक समाधान आवश्यक हैं।

नागरिकों की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। यदि नालों में कचरा डाला जाएगा, अवैध निर्माण प्राकृतिक जल प्रवाह को रोकेंगे और सार्वजनिक संपत्तियों की उपेक्षा होगी, तो प्रशासनिक प्रयास भी सीमित हो जाएंगे। इसलिए स्वच्छता, जागरूकता और प्रशासन के साथ सहयोग प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

एक लोकतांत्रिक समाज में प्रशासन की जवाबदेही तय करना आवश्यक है, लेकिन सकारात्मक कार्यों को स्वीकार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आलोचना का उद्देश्य व्यवस्था को बेहतर बनाना होना चाहिए, न कि केवल दोषारोपण करना। मुंबई ने बार-बार यह सिद्ध किया है कि प्रशासन और नागरिक यदि मिलकर कार्य करें, तो बड़ी से बड़ी चुनौती का भी प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है।

आने वाले वर्षों में आवश्यकता इस बात की है कि मानसून पूर्व तैयारियों को और मजबूत किया जाए, जलनिकासी परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा नागरिक सहभागिता को और बढ़ाया जाए। तभी मुंबई न केवल आर्थिक राजधानी के रूप में, बल्कि आपदा प्रबंधन और शहरी प्रशासन के उत्कृष्ट मॉडल के रूप में भी देश के सामने उदाहरण प्रस्तुत कर सकेगी।

अनिल गलगली

Wednesday, 8 July 2026

जन्मदिन नहीं मनाकर आचार्य शैलेश पांडे ने भरत भूषण तिवारी को दी श्रद्धांजलि

जन्मदिन नहीं मनाकर आचार्य शैलेश पांडे ने भरत भूषण तिवारी को दी श्रद्धांजलि

भायंदर। बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में हाल ही में पुलिस एनकाउंटर के दौरान भरत भूषण तिवारी की हुई मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हुए संकल्प राष्ट्र सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास, अयोध्या धाम के राष्ट्रीय प्रवक्ता आचार्य शैलेश पांडे ने अपना जन्मदिन सादगी से मनाने के बजाय श्रद्धांजलि सभा आयोजित की।

भायंदर पूर्व स्थित भारत माता मंदिर सेवाश्रम के जनसंपर्क कार्यालय में आयोजित इस शोक सभा में उपस्थित लोगों ने भरत भूषण तिवारी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। इस अवसर पर आचार्य शैलेश पांडे ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का शासन सर्वोपरि होना चाहिए और प्रत्येक नागरिक को न्याय मिलने का अधिकार है।

श्रद्धांजलि सभा में शिक्षण समिति सभापति स्नेहा शैलेश पांडे, परिवहन समिति सभापति एड. राजकुमार मिश्रा, भाजपा जिला महामंत्री बृजेश तिवारी, पतंजलि योग समिति ठाणे जिला प्रमुख योग गुरु संतोष खटावकर, जिला सचिव मुकेश जांगिड़, फूलकुमार झा, समाजसेवक एल. आर. पांडे, समाजसेवी मैना पांडे, जितेंद्र प्रताप सिंह, मंडल उपाध्यक्ष विश्वनाथ तिवारी, जिला सचिव बी. एस. पाठक, संदीप दुबे, संजय दुबे, देवेंद्र सिंह, संजय गुप्ता, संदीप शर्मा, नितीन ओझा, विशाल रजक सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

मनीलाइफ फाउंडेशन की स्टडी में मुंबई मेट्रो लाइन-3 की एक्सेसिबिलिटी में कमियों का खुलासा, व्यावहारिक सुधारों की सिफारिश

मनीलाइफ फाउंडेशन की स्टडी में मुंबई मेट्रो लाइन-3 की एक्सेसिबिलिटी में कमियों का खुलासा, व्यावहारिक सुधारों की सिफारिश

मनीलाइफ फाउंडेशन द्वारा किए गए एक स्वतंत्र अध्ययन में मुंबई मेट्रो एक्वा लाइन (लाइन-3) पर यात्रियों की पहुंच (Accessibility) और उपयोगकर्ता-अनुकूल सुविधाओं में मौजूद कई व्यावहारिक कमियों की पहचान की गई है। आधुनिक अवसंरचना और उत्कृष्ट इंजीनियरिंग के बावजूद, अध्ययन में पाया गया कि दैनिक यात्रियों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, छोटे बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों तथा सामान लेकर चलने वाले यात्रियों को कई स्तरों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

'मुंबई मेट्रो एक्वा लाइन (लाइन-3) की एक्सेसिबिलिटी और यूज़र-फ्रेंडलीनेस पर अध्ययन' शीर्षक से यह रिपोर्ट 8 जुलाई 2026 को जारी की गई। इसकी प्रतियां केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA), मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (MMRC), महा मुंबई मेट्रो ऑपरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MMMOCL), मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA), महाराष्ट्र सरकार, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) सहित विभिन्न मेट्रो एजेंसियों और शोध संस्थानों को भेजी गई हैं।

अध्ययन के तहत मेट्रो लाइन-3 के सभी 27 स्टेशनों का विस्तृत निरीक्षण, यात्रियों का सर्वेक्षण तथा एक्सेसिबिलिटी, ट्रांसपोर्ट प्लानिंग और अर्बन मोबिलिटी विशेषज्ञों से परामर्श किया गया।

रिपोर्ट में प्रमुख रूप से पाया गया कि अधिकांश स्टेशनों पर नीचे उतरने वाले एस्केलेटर उपलब्ध नहीं हैं। यात्रियों को बाहर निकलते समय लंबी सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं, जिससे वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और भारी सामान लेकर यात्रा करने वालों को अनावश्यक कठिनाई होती है।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि कई स्टेशनों पर अत्यधिक सीढ़ियां चढ़नी-उतरनी पड़ती हैं। यद्यपि लिफ्ट उपलब्ध हैं, लेकिन सभी यात्री उनका उपयोग नहीं कर पाते, जिससे सीढ़ियों पर निर्भरता बढ़ जाती है।

रिपोर्ट में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को भी एक बड़ी चुनौती बताया गया है। यात्रियों ने बस, ऑटो-रिक्शा और टैक्सी तक पहुंचने में कठिनाई तथा आसपास के परिवहन नेटवर्क के साथ पर्याप्त समन्वय न होने की शिकायत की। अध्ययन के अनुसार, स्टेशन के बाहर बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और कनेक्टिविटी विकसित करना आवश्यक है।

इसके अलावा, मार्गदर्शन (Wayfinding) और एक्सेसिबिलिटी संबंधी संकेतकों को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता बताई गई है, ताकि पहली बार यात्रा करने वाले यात्रियों और दिव्यांगजनों को आसानी से मार्ग मिल सके।

एयरपोर्ट स्टेशनों पर लंबी पैदल दूरी, ट्रॉली की सीमित उपलब्धता तथा एयरपोर्ट टर्मिनल और मेट्रो स्टेशन के बीच सुगम संपर्क की कमी को भी महत्वपूर्ण समस्या के रूप में चिन्हित किया गया है।

मनीलाइफ फाउंडेशन ने अपनी सिफारिशों में जहां संभव हो वहां डाउन एस्केलेटर की स्थापना, बेहतर संकेतक, बस एवं अन्य सार्वजनिक परिवहन से प्रभावी एकीकरण, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी में सुधार तथा भविष्य की मेट्रो परियोजनाओं में यूनिवर्सल एक्सेसिबिलिटी को अनिवार्य रूप से शामिल करने का सुझाव दिया है।

फाउंडेशन की सुचेता दलाल का मानना है कि यह अध्ययन मुंबई मेट्रो लाइन-3 में व्यावहारिक सुधारों का आधार बनेगा तथा भविष्य की शहरी परिवहन परियोजनाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज सिद्ध होगा।

यह अध्ययन मनीलाइफ फाउंडेशन द्वारा सार्वजनिक नीति, सुशासन और उपभोक्ता अधिकारों पर अपने निरंतर कार्य के अंतर्गत किया गया। इस परियोजना के फील्ड रिसर्च का कार्य फाउंडेशन के मार्गदर्शन में अशोका विश्वविद्यालय की इंटर्न अगम्या जैन और मिहिका ओमसीमा ने किया।

Saturday, 4 July 2026

एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई के चुनाव में 'एशियाटिक टुमॉरो' पैनल की ऐतिहासिक जीत

एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई के चुनाव में 'एशियाटिक टुमॉरो' पैनल की ऐतिहासिक जीत, कुमार केतकर पैनल पर मिली निर्णायक विजय

एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई के बहुप्रतीक्षित चुनाव में डॉ. विनय सहस्रबुद्धे के नेतृत्व वाले 'एशियाटिक टुमॉरो' पैनल ने शानदार और एकतरफा जीत दर्ज करते हुए वरिष्ठ पत्रकार कुमार केतकर के नेतृत्व वाले पैनल को निर्णायक रूप से पराजित कर दिया। कई महीनों तक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बाद संपन्न हुए इस चुनाव में कुल 517 सदस्यों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

अध्यक्ष पद पर डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने 352 मत प्राप्त कर विजय हासिल की, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी वरिष्ठ पत्रकार कुमार केतकर को 147 मत मिले। उपाध्यक्ष पद की चारों सीटों पर रमेश पतंगे (329), नितीश भारद्वाज (328), चंद्रप्रकाश द्विवेदी (327) और संजय देशमुख (323) विजयी रहे। सचिव पद पर विवेक गणपुले ने 352 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की। मैनेजिंग कमेटी के लिए प्राची मोघे (341), माधव भंडारी (339), मल्हार कुलकर्णी (333), प्रमोद बापट (329), वी. एम. चक्रवर्ती (324) तथा राजेश बेहरे (321) निर्वाचित हुए। स्क्रूटिनाइजिंग कमेटी में स्नेह नगरकर (370), अभिजीत मुले (362), माधवी नरसाले (362), उमंग काले (358), अमोल जाधव (349), मल्हार गोखले (348) तथा दत्तात्रय पंचवाघ (344) ने जीत दर्ज की।

इस परिणाम के साथ 'एशियाटिक टुमॉरो' पैनल ने सभी प्रमुख पदों और समितियों में विजय प्राप्त कर एशियाटिक सोसायटी के चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल किया। यह परिणाम संस्था के प्रशासन, संरक्षण और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए सदस्यों के स्पष्ट जनादेश के रूप में देखा जा रहा है।