Thursday, 29 January 2026

“नरसिंह के. दुबे ‘बाबूजी’ के सत्रहवें पुण्यस्मरण पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन”

“नरसिंह के. दुबे ‘बाबूजी’ के सत्रहवें पुण्यस्मरण पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन”

श्री नरसिंह के. दुबे चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित नालासोपारा आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में स्वर्गीय नरसिंह के. दुबे ‘बाबूजी’ की 17वीं पुण्यतिथि के अवसर पर विविध सामाजिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया।

इस अवसर पर नि:शुल्क चिकित्सा शिविर, सुदृढ़ बालक प्रतियोगिता, पाचन संस्थान पर आधारित वनौषधियों की प्रदर्शनी, संभाषा प्रतियोगिता, भावपूर्ण श्रद्धांजलि समारोह तथा विशुद्ध भोजपुरी–अवधी कवि सम्मेलन जैसे कार्यक्रम संपन्न हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, भगवान धन्वंतरी पूजन एवं बाबूजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया। आयोजित नि:शुल्क चिकित्सा शिविर में कुल 1127 मरीजों ने विभिन्न चिकित्सा सेवाओं का लाभ उठाया। 

शिविर में चिकित्सकों की सलाह अनुसार रक्त जांच, ईसीजी, एक्स-रे जैसी जांचें नि:शुल्क की गईं। साथ ही किफायती दरों पर चश्मा वितरण भी किया गया। महाविद्यालय के सभागृह में सुदृढ़ बालक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में नालासोपारा की प्रसिद्ध बालरोग विशेषज्ञ डॉ. जयश्री देशपांडे तथा आयुर्वेद बालरोग विशेषज्ञ डॉ. सोनम कर्णावत ने निर्णायक की भूमिका निभाई। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार ₹1501, द्वितीय पुरस्कार ₹1001 एवं तृतीय पुरस्कार ₹751 के साथ प्रमाणपत्र व ट्रॉफी प्रदान की गई।

6 माह से 2 वर्ष आयु वर्ग में प्रथम – शिव योगेश दांडेकर, द्वितीय – आदित्य दिगंबर गवळी, तृतीय – ताशविक वैष्णव, 2 से 3 वर्ष आयु वर्ग में प्रथम – देवांश दीपेश राणे, द्वितीय – गार्गी सचिन चव्हाण, तृतीय – भूमि सिंह, 3 से 5 वर्ष आयु वर्ग में प्रथम – आश्वि सिंह, द्वितीय – शिवाय मिश्रा, तृतीय – नैन्सी तिवारी
को पुरस्कृत किया गया।

इसी दौरान महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन की सूचना मिलने पर, संभाषा प्रतियोगिता के प्रारंभ में ही दो मिनट का मौन रखकर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। संभाषा प्रतियोगिता के प्राथमिक दौर में चयनित 82 प्रतियोगियों में से 15 प्रतिभागियों ने अंतिम चरण में सहभाग लिया। प्रतियोगिता में महाराष्ट्र राज्य के वैद्यकीय, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथी, नर्सिंग, फिजियोथैरेपी एवं अन्य शैक्षणिक क्षेत्रों के विद्यार्थियों ने भाग लिया।

निर्णायक मंडल में निलेश कारखानीस (आर्किटेक्ट, मुंबई), मंदार भानुशे (विभागप्रमुख, साइंस एंड टेक्नोलॉजी,मुंबई विश्वविद्यालय) तथा डॉ. सतीश पांडेय (पूर्व अधिष्ठाता, सोमय्या विद्याविहार, मुंबई विश्वविद्यालय) शामिल रहे। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार – गायत्री प्रभात देसले (येरला आयुर्वेद कॉलेज, खारघर), द्वितीय पुरस्कार – दिव्या दीपक पाटील (नालासोपारा आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज), तृतीय पुरस्कार – कृपाली शंकर वटवकर (नालासोपारा आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज), उत्तेजनार्थ पुरस्कार – शर्वरी पद्मनाभ कारखानीस (ज्ञानदेव यशवंतराव पाटील कॉलेज, नवी मुंबई) को क्रमशः ₹10,000, ₹7,500, ₹5,000 व ₹3,000, ट्रॉफी एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।

संस्था के कोषाध्यक्ष श्यामसुंदर दुबे, अध्यक्ष जयप्रकाश दुबे, डायरेक्टर डॉ. ओमप्रकाश दुबे, विश्वस्त नरेश दुबे एवं सभी निर्णायकों के हस्ते पुरस्कार वितरण संपन्न हुआ।


तत्पश्चात भोजपुरी–अवधी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध कवियों ने अपनी सशक्त रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवियों में जगदीश पंथी, सिपाही पांडे ‘मनमौजी’, निडर ‘जौनपुरी’, रसबिहारी पांडे, एड. राजीव मिश्र, सुभाष यादव, जवाहरलाल ‘निर्झर’, राम सिंह, अरुण दुबे तथा डॉ. श्रीमती मृदुल तिवारी ‘महक’ शामिल थे।

कवियों ने हास्य-व्यंग्य, करुण, श्रृंगार एवं वीर रस की कविताओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता सुभाष यादव ने की, जबकि संचालन निडर ‘जौनपुरी’ ने किया। मुंबई, ठाणे, पालघर, नवी मुंबई, वापी, सिलवासा एवं दमन क्षेत्र के भोजपुरी–अवधी भाषी नागरिकों ने कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया।

Tuesday, 27 January 2026

गायिका अंजली भारती के आपत्तिजनक बयान के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग

गायिका अंजली भारती के आपत्तिजनक बयान के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग


गायिका अंजली भारती द्वारा बलात्कार जैसे अत्यंत संवेदनशील और गंभीर विषय पर सार्वजनिक रूप से की गई आपत्तिजनक, अपमानजनक एवं अवमानकारक टिप्पणी को लेकर सहार पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है।


शिकायतकर्ता हरप्रीत सरबजीत सिंह संधू ने सहार पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक को दिए गए अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि गायिका अंजली भारती ने सार्वजनिक मंच/माध्यम के माध्यम से बलात्कार जैसे जघन्य अपराध विषय पर टिप्पणी करते हुए माननीय मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस की धर्मपत्नी मा. अमृता फडणवीस के संबंध में अत्यंत अशोभनीय, आपत्तिजनक एवं अपमानजनक वक्तव्य दिया है।

शिकायत में कहा गया है कि इस प्रकार का बयान न केवल एक महिला की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुँचाने वाला है, बल्कि समस्त महिला समाज की गरिमा पर आघात करता है। ऐसे गैर-जिम्मेदाराना और असंवेदनशील वक्तव्य समाज में गलत संदेश फैलाने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था की स्थिति को भी प्रभावित कर सकते हैं।


शिकायतकर्ता ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध प्रचलित कानूनों के अंतर्गत तत्काल संज्ञान लेकर कठोर एवं विधिसम्मत कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार के घृणास्पद और समाजविरोधी बयान देने का साहस न कर सके। पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष, त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा जताई गई है।

Saturday, 24 January 2026

चांदिवली–साकीनाका में श्रद्धा-भक्ति से संपन्न हुआ माता की चौकी का भव्य आयोजन

चांदिवली–साकीनाका में श्रद्धा-भक्ति से संपन्न हुआ माता की चौकी का भव्य आयोजन

चांदिवली के साकीनाका क्षेत्र में आयोजित माता की चौकी का भव्य कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और उल्लासपूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। माता रानी के भजनों की मधुर एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियों से संपूर्ण परिसर भक्तिमय हो उठा, वहीं श्रद्धालु माता के जयकारों में लीन नजर आए। इस पावन अवसर पर अपना संघ के संस्थापक अध्यक्ष एड दीनानाथ पाण्डेय, कार्याध्यक्ष मुकेश मिश्र तथा कोषाध्यक्ष सुरेंद्र यादव के कुशल संयोजन में कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से कांग्रेस नेता व पूर्व विधायक नसीम खान, आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली, भाजपा नेता पंकज मिश्र, डॉ. नितेश सिंह, अवधेश शुक्ला, राकेश कुमार पांडे, देवेंद्र तिवारी, राकेश मिश्रा, पूर्व नगरसेवक सीताराम तिवारी, एड अरविंद तिवारी, ठाकुर संतोष सिंह, हमारा महानगर के संपादक आदित्य दुबे, नगरसेवक हरीश भ्रादिगे, एड वीरेंद्र दुबे, राजा मिश्रा, रामस्वारथ यादव, माताप्रसाद यादव, मनोज यादव, सुरेश यादव, पंकज राय, पवन राय, चंद्रेश दुबे, रामबिलास पाठक, निवासानंद महाराज, राजेश सिंह हरीश पांडे, ओमप्रकाश प्रजापति सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

इसके अतिरिक्त एड काशीनाथ तिवारी, अखिलेश तिवारी, महेंद्र तिवारी, प्रकाश तिवारी, रामजी पांडे, निवासानंद तिवारी (विद्रोही महाराज), धर्मेंद्र उपाध्याय, रामानंद पांडे, राजेश राठौड़, मंगला शुक्ला, बंसीधर दुबे, प्रहलाद पांडे, इंद्रमणि शुक्ला, प्रभाशंकर मिश्रा, भगवान दुबे, नरेंद्र उपाध्याय, राम मंदिर (जोगेश्वरी) के अध्यक्ष मधुसूदन द्विवेदी, मनोज दुबे, सुभाष विश्वकर्मा, मुन्ना यादव, रामपति विश्वकर्मा, शिवमणि दुबे एवं पंकज मिश्रा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के समापन पर माता रानी से क्षेत्र में सुख-समृद्धि, शांति, सौहार्द और खुशहाली की कामना की गई।

Tuesday, 20 January 2026

आधुनिक भारत के स्वप्नदृष्टा थे नेताजी सुभाष चंद्र बोस- -प्रो.संजय द्विवेदी

जयंती प्रसंग (23 जनवरी)
आधुनिक भारत के स्वप्नदृष्टा थे नेताजी सुभाष चंद्र बोस
आजादी के लिए अपनी चिठ्ठी में पूछा-“मां, हम कब तक सोते रहेंगे?”
-प्रो.संजय द्विवेदी

     ये 1912 का साल था, उन्होंने अपनी मां को जो चिठ्ठी लिखी थी, वो चिट्ठी इस बात की गवाह है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के मन में गुलाम भारत की स्थिति को लेकर कितनी वेदना थी। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 15 साल थी। सैंकड़ों वर्षों की गुलामी ने देश का जो हाल कर दिया था, उसकी पीड़ा उन्‍होंने अपनी मां से पत्र के द्वारा साझा की थी। उन्‍होंने अपनी मां से पत्र में सवाल पूछा था कि, “मां, क्‍या हमारा देश दिनों-दिन और अधिक पतन में गिरता जाएगा? क्‍या ये दुखिया भारत माता का कोई एक भी पुत्र ऐसा नहीं है, जो पूरी तरह अपने स्‍वार्थ को तिलांजलि देकर, अपना संपूर्ण जीवन भारत मां की सेवा में समर्पित कर दे? बोलो मां, हम कब तक सोते रहेंगे?” इस पत्र में उन्‍होंने अपनी मां से पूछे गए सवालों का उत्तर भी दिया था। उन्‍होंने अपनी मां को स्‍पष्‍ट कर दिया था कि अब और प्रतीक्षा नहीं की जा सकती, अब और सोने का समय नहीं है, हमको अपनी जड़ता से जागना ही होगा, आलस्‍य त्‍यागना ही होगा और कर्म में जुट जाना होगा। अपने भीतर की इस तीव्र उत्‍कंठा ने उस किशोर सुभाष चंद्र को नेताजी सुभाष चंद्र बोस बनाया।

     सफल जीवन के चार सूत्र कहे जाते हैं - जिज्ञासा, धैर्य, नेतृत्व की क्षमता और एकाग्रता। जिज्ञासा का मतलब है जानने की इच्छा। धैर्य का मतलब विषम परिस्थितियों में खुद को संभाले रखना। नेतृत्व की क्षमता यानी जनसमूह को अपने कार्यों से आकर्षित करना। और एकाग्रता का अर्थ है एक ही चीज पर ध्यान केंद्रित करना। अगर भारत के संदर्भ में हम देखें, तो किसी व्यक्ति के जीवन में ये चारों सूत्र चरितार्थ होते हैं, तो वो सिर्फ नेताजी सुभाष चंद्र बोस हैं। नेताजी ने एक ऐसी सरकार के विरुद्ध लोगों को एकजुट किया, जिसका सूरज कभी अस्‍त नहीं होता था। दुनिया के एक बड़े हिस्‍से में जिसका शासन था। अगर नेताजी की खुद की लेखनी पढ़ें, तो हमें पता चलता है कि वीरता के शीर्ष पर पहुंचने की नींव कैसे उनके बचपन में ही पड़ गई‍ थी।

     नेताजी कहा करते थे कि, “सफलता हमेशा असफलता के स्तंभ पर खड़ी होती है। इसलिए किसी को असफलता से घबराना नहीं चाहिए।” इस छोटी सी पंक्ति के माध्यम से नेताजी ने असफल और निराश लोगों के लिए सफलता के नए द्वारा खोल दिए। यही सरलता और सहजता ही उनकी संचार कला का अभिन्न अंग थी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने स्वाधीनता संग्राम में भाग लेने के साथ-साथ पत्रकारिता भी की थी और उसके माध्यम से पूर्ण स्वराज के अपने स्वप्न और विचारों को शब्दबद्ध किया था। नेताजी ने 5 अगस्त, 1939 को अंग्रेजी में राजनीतिक साप्ताहिक समाचार पत्र ‘फॉरवर्ड ब्लॉक’ निकाला और 1 जून, 1940 तक उसका संपादन किया। इस अखबार के एक अंक की कीमत थी, एक आना। नेताजी ने अपनी पत्रकारिता का उद्देश्य पूर्ण स्वाधीनता के लक्ष्य से जोड़ रखा था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पत्रकारिता में यह विवेक था कि सही बात का अभिनंदन और गलत का विरोध करना चाहिए। नेताजी अंग्रेजी शासन के धुर विरोधी थे, लेकिन ब्रिटेन के जिन अखबारों ने भारतीय स्वाधीनता संग्राम का समर्थन किया, उसकी प्रशंसा करते हुए उन अखबारों के मत को नेताजी ने अपने अखबार में पुनर्प्रस्तुत किया। नेताजी ने स्वाधीनता की लक्ष्यपूर्ति के लिए अखबार निकाला, तो रेडियो के माध्यम का भी उपयोग किया। 1941 में ‘रेडियो जर्मनी’ से नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भारतीयों के नाम संदेश में कहा था, “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।” उसके बाद 1942 में ‘आजाद हिंद रेडियो’ की स्थापना हुई, जो पहले जर्मनी से और फिर सिंगापुर और रंगून से भारतीयों के लिए समाचार प्रसारित करता रहा। 6 जुलाई, 1944 को ‘आजाद हिंद रेडियो’ से नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने पहली बार महात्मा गांधी के लिए ‘राष्ट्रपिता’ संबोधन का प्रयोग किया था।

      आजाद हिंद सरकार की स्थापना के समय नेताजी ने शपथ लेते हुए एक ऐसा भारत बनाने का वादा किया था, जहां सभी के पास समान अधिकार हों, सभी के पास समान अवसर हों। आज स्‍वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भारत अनेक कदम आगे बढ़ा है, लेकिन अभी नई ऊंचाइयों पर पहुंचना बाकी है। इसी लक्ष्‍य को पाने के लिए आज भारत के सवा सौ करोड़ लोग नए भारत के संकल्‍प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। एक ऐसा नया भारत, जिसकी कल्‍पना नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने की थी। समाज के प्रत्‍येक स्‍तर पर देश का संतुलित विकास, प्रत्‍येक व्‍यक्ति को राष्‍ट्र निर्माण का अवसर और राष्ट्र की प्रगति में उसकी भूमिका, नेताजी के विजन का एक अहम हिस्‍सा था। नेताजी ने कहा था, “हथियारों की ताकत और खून की कीमत से तुम्‍हें आजादी प्राप्‍त करनी है। फिर जब भारत आजाद होगा, तो देश के लिए तुम्‍हें स्‍थाई सेना बनानी होगी, जिसका काम होगा हमारी आजादी को हमेशा बनाए रखना।” आज भारत एक ऐसी सेना के निर्माण की तरफ बढ़ रहा है, जिसका सपना नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने देखा था। जोश, जुनून और जज्‍बा, हमारी सैन्‍य परम्‍परा का हिस्‍सा रहा है। अब तकनीक और आधुनिक हथियारी शक्ति भी उसके साथ जोड़ी जा रही है। सशस्‍त्र सेना में महिलाओं की बराबर की भागीदारी हो, इसकी नींव नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने ही रखी थी। देश की पहली सशस्‍त्र महिला रेजिमेंट, जिसे रानी झांसी रेजिमेंट के नाम से जाना जाता है, भारत की समृद्ध परम्‍पराओं के प्रति सुभाष बाबू के आगाध विश्‍वास का परिणाम था।

     नेताजी जैसे महान व्यक्तित्वों के जीवन से हम सबको और खासकर युवाओं को बहुत कुछ सीखने को मिलता है। लेकिन एक और बात जो सबसे ज्यादा प्रभावित करती है, वो है अपने लक्ष्य के लिए अनवरत प्रयास। अपने संकल्पों को सिद्धि तक ले जाने की उनकी क्षमता अद्वितीय थी। अगर वो किसी काम के लिए एक बार आश्वस्त हो जाते थे, तो उसे पूरा करने के लिए किसी भी सीमा तक प्रयास करते थे। उन्होंने हमें ये बात सिखाई कि, अगर कोई विचार बहुत सरल नहीं है, साधारण नहीं है, अगर इसमें कठिनाइयां भी हैं, तो भी कुछ नया करने से डरना नहीं चाहिए। अगर हमें नेताजी को याद रखना है, तो संपूर्ण दुनिया में अपने प्रत्येक विचार, सिद्धांत, व्यवहार को किसी जन समूह के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने वाले संचारक के रूप में याद रखना चाहिए। आज भारत में जनसंचार के विभिन्न माध्यम हैं। आजादी के पूर्व सीमित संचार के साधनों के बाद भी नेताजी लोकप्रिय हुए। वे तब लोकप्रिय हुए, जब जन संचार की कोई अधोसंरचना उपलब्ध नहीं थी। भारत जैसी विविधता वाले देश में एक राष्ट्र की अवधारणा को बढ़ावा देने का कार्य एक कुशल संचारक ही कर सकता था और यह कार्य नेताजी ने किया। नेताजी ने अपने व्यक्तित्व के प्रयास से स्त्री, पुरुष, शिक्षित, अशिक्षित, किसान, मजदूर, पूंजीपति, सभी को प्रभावित किया और देश की स्वतंत्रता के लिए सबको एक साथ पिरोने का कार्य किया।

     आज जिस मॉर्डन इंडिया को हम देख पा रहे हैं, उसका सपना नेताजी ने बहुत पहले देखा था। भारत के लिए उनका जो विजन था, वो अपने समय से बहुत आगे का था। नेताजी कहा करते थे कि अगर हमें वाकई में भारत को सशक्त बनाना है, तो हमें सही दृष्टिकोण अपनाने की जरुरत है और इस कार्य में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। एकता, अखंडता और आत्‍मविश्‍वास की हमारी ये यात्रा नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आशीर्वाद से निरंतर आगे बढ़ रही है।

(लेखक भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी), नई दिल्ली के पूर्व महानिदेशक हैं और संप्रति माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में जनसंचार विभाग के अध्यक्ष हैं।)

Monday, 19 January 2026

भारतीय सदविचार मंच ने किया विजय सिंह कौशिक और डॉ. पारसनाथ त्रिपाठी को पुरस्कृत

भारतीय सदविचार मंच ने किया विजय सिंह कौशिक और डॉ. पारसनाथ त्रिपाठी को पुरस्कृत

महानगर की सुप्रसिद्ध और चर्चित सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक संस्था भारतीय सदविचार मंच द्वारा दहिसर (पूर्व ) स्थित संस्था सभागार में संस्था संस्थापक एवं प्रमुख मार्गदर्शक डॉ राधेश्याम तिवारी की अध्यक्षता और कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि बोरीवली के विधायक संजय उपाध्याय, उत्तर भारतीय संघ के अध्यक्ष संतोष आर एन सिंह और शिक्षाविद् डॉ हृदय नारायण मिश्रा के सानिध्य में संपन्न इस भव्य पुरस्कार समारोह में वरिष्ठ पत्रकार, दैनिक भास्कर के स्थानीय संपादक विजय सिंह कौशिक को 8 वां ठाकुर हरदत्त सिंह आदर्श पत्रकारिता पुरस्कार -2025 और वरिष्ठ समाजसेवी डॉ.पारसनाथ तिवारी को बाबू आर.एन.सिंह आदर्श समाजसेवी पुरस्कार -2025 द्वारा सम्मानित किया गया।

पूर्व विधायक रमेश सिंह ठाकुर को 25 वां डॉ राममनोहर त्रिपाठी पुरस्कार-2025 घोषित किया गया। समारोह में विजय सिंह कौशिक द्वारा लिखित यात्रा संस्मरण पुस्तक कुछ रंग इधर के ,कुछ रंग उधर के (एक पत्रकार का सफरनामा) का अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया।

इस समारोह में नवभारत के संपादक ब्रजमोहन पाण्डेय, शिवसेना (उ.बा.ठा)के राष्ट्रीय प्रवक्ता आनंद दुबे, समरस फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. किशोर सिंह, मुंबई भाजपा के प्रवक्ता उदयप्रताप सिंह,हमारा महानगर के संपादक राघवेन्द्र द्विवेदी, वरिष्ठ पत्रकार अनुराग त्रिपाठी, यश भारत के सहायक संपादक अभय मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार अनिल गलगली, प्रारम्भ उत्तर दर्शन के सम्पादक विनोद हरदत्त सिंह, संस्था के सह संस्थापक दिनेशचंद्र उपाध्याय और राघवेन्द्र सेवा मंच के अध्यक्ष सुरेंद्र मिश्रा सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

संस्था अध्यक्ष डॉ.शिवश्याम तिवारी के मुख्य संयोजन और महामंत्री नागेन्द्र मिश्रा के संचालन में समाजसेवी श्रीनिवास तिवारी विद्रोही , संस्था के मार्गदर्शक मंडल के सदस्य श्रीकांत पाण्डेय, हरिशंकर तिवारी, संस्था शिक्षक प्रकोष्ठ के संयोजक हरिप्रसाद पाण्डेय, समाजसेवी रामसेवक पाण्डेय, समाजसेवी आशुतोष उपाध्याय, समाजसेवी डॉ.अजय एल. दुबे, हमारा महानगर के स्थानीय संपादक आदित्य दुबे, समाजसेवी अनिरुद्ध पाण्डेय, पूर्व नगर सेवक रामनारायण दुबे, वरिष्ठ पत्रकार सुनील मेहरोत्रा, वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सिंह, वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पाण्डेय, शिक्षाविद् चिंतामणि पाण्डेय और समाजसेवी प्रमोद श्यामाचरण पाण्डेय प सहित सैकड़ों गणमान्य उपस्थित थे।

संस्था पदाधिकारी पं.कमलाशंकर मिश्रा, बैजनाथ मिश्रा,  गणेश प्रसाद पाण्डेय, राजकुमार सिंह, मनोज चतुर्वेदी, बी.एम.गुप्ता, सुभाषचन्द्र दुबे,एड.शिशिर पाण्डेय, रत्नेश दुबे और रामप्रकाश तिवारी नेआये हुए अतिथियों का स्वागत किया। कार्यसमिति सदस्य कमलाकांत त्रिपाठी, उमेश सिंह, अमित तिवारी और संस्था की अंधेरी शाखा के अध्यक्ष प्रेमचंद (बाबा) तिवारी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना भरपूर सहयोग प्रदान किया। संस्था के मंत्री राजीव मिश्रा द्वारा आभार व्यक्त किया गया।

अंत में संस्था की कार्यसमिति के सदस्य सूर्यप्रकाश (संतोष ) मिश्र की धर्मपत्नी और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री राज के.राजपुरोहित के दुखद निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।

Sunday, 18 January 2026

डॉ. विजय नारायण पंडित के कहानी संग्रह ‘बड़े भाग मानुष तन पावा’ का लोकार्पण सम्पन्न

डॉ. विजय नारायण पंडित के कहानी संग्रह ‘बड़े भाग मानुष तन पावा’ का लोकार्पण सम्पन्न

कल्याण (पश्चिम) स्थित के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय के हिन्दी विभाग के तत्वावधान में 16–17 जनवरी 2026 को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी अत्यंत गरिमामय वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से पधारे प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, साहित्यकारों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

संगोष्ठी का उद्घाटन सत्र महाविद्यालय के अध्यक्ष एवं प्रख्यात साहित्यकार डॉ. विजय नारायण पंडित के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. शीतला प्रसाद दुबे ने की। बीज वक्तव्य प्रो. मनोज सिंह (प्रोफेसर, हिन्दी विभाग, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय) ने प्रस्तुत किया, जिसमें हिन्दी साहित्य के समकालीन विमर्श, सामाजिक सरोकारों तथा वैचारिक प्रवृत्तियों पर गहन एवं विचारोत्तेजक दृष्टि डाली गई। मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती रेनू पृथियानी (अंचल निदेशक, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, मुंबई) की गरिमामयी उपस्थिति रही।

स्वागताध्यक्ष ओम प्रकाश (मुन्ना) पाण्डेय (सचिव, के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय) ने सभी अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। प्रस्ताविकी डॉ. अनिता मन्ना (प्राचार्या, के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय) द्वारा प्रस्तुत की गई, जिसमें संगोष्ठी के उद्देश्यों, वैचारिक पृष्ठभूमि एवं अकादमिक महत्व को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय प्रबंधन समिति के कांतिलाल जैन, डॉ. सुजीत सिंह एवं विजय तिवारी की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।

उद्घाटन सत्र का विशेष आकर्षण चार महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण रहा। इनमें अमरकांत पर केन्द्रित आलेख-संग्रह, मध्य एशिया में हिन्दी से जुड़े लेखों का संकलन, पंडित विद्यानिवास मिश्र पर केन्द्रित समीचीन पत्रिका का विशेष अंक तथा डॉ. विजय नारायण पंडित का नवीनतम कहानी संग्रह ‘बड़े भाग मानुष तन पावा’ शामिल रहा। इस कथा-संग्रह पर उपस्थित विद्वानों ने इसे मानवीय संवेदना, जीवन-दृष्टि और सामाजिक यथार्थ से सम्पन्न सशक्त रचना बताते हुए मुक्त कंठ से सराहना की।

संगोष्ठी के अंतर्गत दो दिनों में कुल पाँच अकादमिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें हिन्दी साहित्य, आलोचना, संस्कृति, समकालीन विमर्श तथा शोध की नवीन प्रवृत्तियों पर गंभीर और सार्थक चर्चा हुई। देशभर से आए विद्वानों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए, जबकि अनुभवी शिक्षाविदों की अध्यक्षता एवं सत्र-संचालन ने संगोष्ठी के अकादमिक स्तर को अत्यंत समृद्ध बनाया।
द्वितीय दिवस के समापन सत्र में प्रतिभागियों ने संगोष्ठी को शोधोन्मुखी, संवादपरक एवं अत्यंत उपयोगी बताया। समापन सत्र की अध्यक्षता डॉ. अनिता मन्ना ने की। प्रो. ईश्वर पवार तथा प्रो. पुरुषोत्तम कुंदे विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए।

पूरे आयोजन का कुशल संचालन एवं प्रभावी आभार प्रदर्शन डॉ. मनीष कुमार मिश्रा (हिन्दी विभाग, के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय) द्वारा किया गया। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी की सफलता ने के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय को राष्ट्रीय अकादमिक मानचित्र पर एक सशक्त एवं प्रतिष्ठित पहचान प्रदान की।

Saturday, 17 January 2026

मुंबई मनपा निवडणूक २०२५–२६ : आकडेवारीतून उमटलेले राजकीय चित्र

मुंबई मनपा निवडणूक २०२५–२६ : आकडेवारीतून उमटलेले राजकीय चित्र


बृहन्मुंबई महानगरपालिकेच्या (BMC) २०२५–२६ या सार्वत्रिक निवडणुकीचे निकाल जाहीर झाले असून, या निवडणुकीत मुंबईच्या राजकारणाचे स्पष्ट चित्र आकडेवारीतून समोर आले आहे. एकूण २२७ जागांसाठी झालेल्या या निवडणुकीत विविध राष्ट्रीय व प्रादेशिक पक्षांनी आपली ताकद आजमावली.

या निवडणुकीत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सर्वाधिक प्रभावी ठरली. भाजपाने ८९ जागांवर विजय मिळवत एकूण ११,७९,२७३ मते प्राप्त केली. एकूण मतदानाच्या तुलनेत भाजपाचा मतांचा वाटा २१.५८ टक्के असून, विजयी उमेदवारांना मिळालेल्या एकूण मतांपैकी तब्बल ४५.२२ टक्के मते भाजपाकडे गेली आहेत.

दुसऱ्या क्रमांकावर शिवसेना (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे गट) राहिली. या गटाने ६५ जागांवर विजय मिळवून ७,१७,७३६ मते मिळवली. एकूण मतदानात त्यांचा वाटा १३.१३ टक्के असून, विजयी मतांपैकी २७.५२ टक्के मते या पक्षाला मिळाली.
तर पारंपरिक शिवसेना पक्षाने २९ जागा जिंकत २,७३,३२६ मते मिळवली. त्यांचा एकूण मतदानातील वाटा ५ टक्के असून, विजयी मतांमध्ये १०.४८ टक्के हिस्सा आहे.

इंडियन नॅशनल काँग्रेस पक्षाने २४ जागांवर यश मिळवत २,४२,६४६ मते मिळवली. काँग्रेसचा एकूण मतदानातील वाटा ४.४४ टक्के असून, विजयी मतांमध्ये ९.३१ टक्के हिस्सा आहे.
याशिवाय ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) यास ८ जागा आणि ६८,०७२ मते, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) यास ६ जागा आणि ७४,९४६ मते, नॅशनलिस्ट काँग्रेस पार्टी यास ३ जागा आणि २४,६९१ मते, समाजवादी पार्टी यास २ जागा आणि १५,१६२ मते, राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गट) यास १ जागा आणि ११,७६० मते प्राप्त झाली आहे. 

एकूण २२७ विजयी उमेदवारांना २६,०७,६१२ मते मिळाली असून, हे प्रमाण एकूण मतदानाच्या ४७.७२ टक्के इतके आहे. महत्त्वाची बाब म्हणजे संपूर्ण मुंबईत एकूण मतदान ५४,६४,४१२ इतके झाले, तर ११,६७७ मते बाद (रद्द) ठरली.

या आकडेवारीवरून स्पष्ट होते की, मुंबई पालिकेत बहुपक्षीय राजकारण कायम असले तरी भाजपाचा प्रभाव लक्षणीय वाढलेला आहे. शिवसेनेच्या दोन्ही गटांची एकत्रित ताकद अजूनही महत्त्वाची असून, काँग्रेस व इतर पक्षांची भूमिका संख्येने मर्यादित असली तरी राजकीय समतोल राखण्यात ती निर्णायक ठरू शकते. मुंबईकरांनी दिलेला हा कौल पुढील काळात मनपातील सत्ता-समीकरणे, विकास धोरणे आणि प्रशासकीय दिशा ठरवणारा ठरणार आहे.


अनिल गलगली 
माहिती अधिकार कार्यकर्तेमुंबई मनपा निवडणूक २०२५–२६ : आकडेवारीतून उमटलेले राजकीय चित्र


बृहन्मुंबई महानगरपालिकेच्या (BMC) २०२५–२६ या सार्वत्रिक निवडणुकीचे निकाल जाहीर झाले असून, या निवडणुकीत मुंबईच्या राजकारणाचे स्पष्ट चित्र आकडेवारीतून समोर आले आहे. एकूण २२७ जागांसाठी झालेल्या या निवडणुकीत विविध राष्ट्रीय व प्रादेशिक पक्षांनी आपली ताकद आजमावली.

या निवडणुकीत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सर्वाधिक प्रभावी ठरली. भाजपाने ८९ जागांवर विजय मिळवत एकूण ११,७९,२७३ मते प्राप्त केली. एकूण मतदानाच्या तुलनेत भाजपाचा मतांचा वाटा २१.५८ टक्के असून, विजयी उमेदवारांना मिळालेल्या एकूण मतांपैकी तब्बल ४५.२२ टक्के मते भाजपाकडे गेली आहेत.

दुसऱ्या क्रमांकावर शिवसेना (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे गट) राहिली. या गटाने ६५ जागांवर विजय मिळवून ७,१७,७३६ मते मिळवली. एकूण मतदानात त्यांचा वाटा १३.१३ टक्के असून, विजयी मतांपैकी २७.५२ टक्के मते या पक्षाला मिळाली.
तर पारंपरिक शिवसेना पक्षाने २९ जागा जिंकत २,७३,३२६ मते मिळवली. त्यांचा एकूण मतदानातील वाटा ५ टक्के असून, विजयी मतांमध्ये १०.४८ टक्के हिस्सा आहे.

इंडियन नॅशनल काँग्रेस पक्षाने २४ जागांवर यश मिळवत २,४२,६४६ मते मिळवली. काँग्रेसचा एकूण मतदानातील वाटा ४.४४ टक्के असून, विजयी मतांमध्ये ९.३१ टक्के हिस्सा आहे.
याशिवाय ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) यास ८ जागा आणि ६८,०७२ मते, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) यास ६ जागा आणि ७४,९४६ मते, नॅशनलिस्ट काँग्रेस पार्टी यास ३ जागा आणि २४,६९१ मते, समाजवादी पार्टी यास २ जागा आणि १५,१६२ मते, राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गट) यास १ जागा आणि ११,७६० मते प्राप्त झाली आहे. 

एकूण २२७ विजयी उमेदवारांना २६,०७,६१२ मते मिळाली असून, हे प्रमाण एकूण मतदानाच्या ४७.७२ टक्के इतके आहे. महत्त्वाची बाब म्हणजे संपूर्ण मुंबईत एकूण मतदान ५४,६४,४१२ इतके झाले, तर ११,६७७ मते बाद (रद्द) ठरली.

या आकडेवारीवरून स्पष्ट होते की, मुंबई पालिकेत बहुपक्षीय राजकारण कायम असले तरी भाजपाचा प्रभाव लक्षणीय वाढलेला आहे. शिवसेनेच्या दोन्ही गटांची एकत्रित ताकद अजूनही महत्त्वाची असून, काँग्रेस व इतर पक्षांची भूमिका संख्येने मर्यादित असली तरी राजकीय समतोल राखण्यात ती निर्णायक ठरू शकते. मुंबईकरांनी दिलेला हा कौल पुढील काळात मनपातील सत्ता-समीकरणे, विकास धोरणे आणि प्रशासकीय दिशा ठरवणारा ठरणार आहे.


अनिल गलगली 
माहिती अधिकार कार्यकर्ते